नई दिल्ली- हिमाचल प्रदेश में कम उत्पादन होने के कारण अगस्त के बाद भी सेब की कीमतों में नरमी आने की संभावना नहीं है। आमतौर पर हिमाचल प्रदेश से आवक शुरू होने के कारण अगस्त के बाद से सेब की कीमतों में गिरावट आनी शुरू हो जाती है। ट्रेडरों का कहना है कि इस बार कीमतों में अक्टूबर तक तेजी बने रहने की आशंका है। अक्टूबर से कश्मीर से सेबों की आवक शुरू होती है। देव भूमि कोल्ड चेन के डायरेक्टर अनिल द्विवेदी का कहना है, 'पिछले साल के 5.94 लाख टन के मुकाबले इस बार सेबों के उत्पादन में 2.5 लाख टन की गिरावट आने की आशंका है।' जुलाई के आखिरी सप्ताह में हिमाचल प्रदेश से आवक शुरू होने के बाद आजादपुर होलसेल मार्केट में नए सेब की कीमत 70-90 रुपए प्रति किलो पर चल रही है। ट्रेडरों का कहना है कि आमतौर पर सीजन की शुरुआत में कीमतें अधिक रहती हैं। आजादपुर मंडी में 5,000 टन कोल्ड स्टोरेज क्षमता रखने वाली देव भूमि भंडारण के बजाय त्वरित बिक्री के लिए सेब खरीद रही है।
द्विवेदी का कहना है, 'हम नई फसल बेच रहे हैं क्योंकि यह भंडारण के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा कीमतें भी ऊंची है।' उनका कहना है कि हो सकता है कि 15 अगस्त के बाद कीमतों में गिरावट शुरू हो जाए क्योंकि उस समय हिमाचल प्रदेश के दूसरे भागों से भी सेबों की आवक शुरू हो जाएगी। कॉनकोर की सब्सिडियरी फ्रेश एंड हेल्दी एंटरप्राइजेज के सीईओ एन के जावा का कहना है कि कश्मीर से सेबों की आवक शुरू होने के बाद सेबों की कीमत में गिरावट आएगी। 12,000 टन भंडारण क्षमता रखने वाली फ्रेश एंड हेल्दी एंटरप्राइजेज ने कीमत अधिक होने के कारण भंडारण का काम शुरू नहीं किया है। (ET Hindi)
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