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22 मार्च 2022

धान की कीमतों में तेजी जारी

नई दिल्ली। राइस मिलों की मांग बनी रहने से उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में मंगलवार को भी धान की कीमतों में तेजी जारी रही। व्यापारियों के अनुसार बाससती चावल में निर्यातकों की मांग अच्छी है, जबकि बासमती धान का उत्पादन अनुमान कम है। इसीलिए मंडियों में धान की दैनिक आवक पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। ईरान के साथ ही अन्य खाड़ी देशों की आयात मांग अभी बासमती चावल में बनी रहेगी, इस​लिए इनके भाव में और भी सुधार बन सकता है। 

 

 MANDI- KOTA. RAJSTHAN

Arrival- 4'000.Bags.

1121.
Rate- 4050 se 4231.

1718.
Rate- 4000 se 4271.

1509.
Rate- 3850 se 3965.

Suganda.
Rate- 3450 se 3571.

DP PUSA.
Rate- 3400 se 3591.

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Bundi 1718
4100 to 4300
1509
3750 to 4000
Suganda 3350 to 3700
Awake 5000 bag

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Mandi- KOTKAPURA. (PUNJAB)

Aarival- 800 Bags Combain)

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1121. New.
Rate- 3800--4270.

1401. New.
Rate- 3875--3900

1718. New.
Rate- 3900--4250

New 1509
Rate- 0000.

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Tarn Taran mandi 1121 1718
Hath 🤚🏻 1121 rs 4156
Combine 1121 rs 4065
P7 rs 3800 par biki nhi 

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MANDI- NARELA. DELHI

1121. HAND.
Rate- 4415.

1718. HAND.
Rate- 4221.

1509. HAND.
Rate- 3872.

Sarbati HAND.
Rate- 2611.

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MANDI- NAJAFGARH. DELHI

1121. HAND.
Rate- 4391. 

अरहर एवं उड़द की कीमतों में गिरावट, मसूर तेज

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से सोमवार को घरेलू बाजार में अरहर एवं उड़द के भाव में गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्टॉकिस्टों की सक्रियता से मसूर के भाव तेज हो गए।

व्यापारियों के अनुसार आयातित अरहर के साथ ही उड़द की आवक ज्यादा हो रही है, जबकि दालों में थोक साथ ही खुदरा में मांग कमजोर है। इसलिए इनके भाव में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि उत्पादक मंडियों में अब देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हो रही है। उधर आंध्रप्रदेश की मंडियों में नई उड़द की आवक हो रही है, तथा चालू सीजन में प्रतिकूल मौसम की मार फसल पर पड़ी है, जिससे प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कम बैठ रही है।

उत्पादक मंडियों में चना की आवक आज बढ़ी है, तथा आगामी दिनों दैनिक आवकों का दबाव बनेगा। कुल आवकों के मुकाबले सरकारी खरीद कम होगी, जिस कारण उत्पादक मंडियों में चना की कीमतों पर दबाव है। राजस्थान की किशनगढ़ मंडी में आज चना की दैनिक आवक 25,000 कट्टों की हुई, तथा भाव 4,460 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। उधर महाराष्ट्र की मंंडिरूों में आज चना की दैनिक आवक ज्यादा होने से मंडियों में भाव लूज में नीचे में 4,300 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मसूर की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में बढ़ी है, लेकिन आयातक भाव तेज कर रहे हैं इसलिए आज देसी के साथ ही आयातित मसूर के दाम तेज हो गए, लेकिन टिक नहीं पायेगी। वैसे भी मसूर दाल में ग्राहकी कमजोर है, तथा चालू रबी में उत्पादन अनुमान ज्यादा है।

मध्य प्रदेश की बीना मंडी में नई मसूर की आवक 2,000 बोरियों की हुई तथा भाव 5,800 से 6,100 रुपये क्वालिटीनुसार रहे। यहां नई मसूर में कटनी डिलीवरी के लिए व्यापार 6,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। दिल्ली डिलीवरी के लिए 6,725 रुपये, बरेली एवं कानपुर डिलीवरी के लिए 6,600 रुपये और गंज बसोदा डिलीवरी के लिए 6,100 रुपये पर कारोबार हुआ है।

बर्मा की लेमन अरहर 2021 और 2022 की फसल की कीमतों में दिल्ली में 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,700 रुपये और 6,600-6,625 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में, बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश 6,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर नई के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अफ्रीकी देशों से आ रही सस्ती अरहर से इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

दूसरी और मुंबई में तंजानिया की अरुषा और मटवारा अरहर के दाम 50-50 रुपये घटकर क्रमश: 5,450 से 5,550 रुपये और 5,400 से 5,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इसी तरह मलावी अरहर के दाम भी 50 रुपये घटकर 4,850-4,950 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 50 रुपये कम होकर 5,400-5,450 रुपये और सूडान की अरहर के दाम 50 घटकर 6,450 से 6,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव में 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,700 रुपये और 7,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतों में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमशः 6,550 रुपये और 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की मांग सुधरने के कारण दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर के भाव 125 रुपये बढ़कर 6,725 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कनाडा की मसूर के भाव 6,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मिलर्स आयातक के बजाए देसी मसूर की खरीद को प्राथमिकता दे रहे है।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से कनाडा की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा और हजिरा बंदरगाह पर तथा आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर और वैसल में 50-50 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो गए।

दिल्ली में राजस्थान के नए चना के दाम 4,975 से 5,000 रुपये और पुराने के भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। मध्य प्रदेश के चना के भाव 5,050 से 5,075 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

फरवरी में डीओसी का निर्यात 53 फीसदी घटा - उद्योग

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में कीमतें ज्यादा होने के कारण फरवरी में डीओसी के निर्यात में 53 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 187,320 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनका निर्यात 397,517 टन का हुआ था।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान डीओसी के निर्यात में 37 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 2,131,360 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 3,366,633 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2021-22 के, पहले 11 महीनों (अप्रैल-21 से फरवरी-22) के दौरान सबसे ज्यादा कमी सोया डीओसी के निर्यात में आई है। घरेलू बाजार में कीमतें सोयाबीन के दाम ज्यादा थे, जिस कारण डीओसी की कीमतें विश्व बाजार में भारत की तुलना में कम थी। चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में सोया डीओसी का निर्यात घटकर 348,868 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,418,454 टन का हुआ था। इसी तरह से सरसों डीओसी का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में घटकर 772,423 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,028,745 टन का हुआ था।

जनवरी के मुकाबले फरवरी में भारतीय बंदरगाह पर जहां सोया और केस्टर डीओसी की कीमतों में तेजी आई है, वहीं सरसों डीओसी के दाम कम हुए हैं। भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी के भाव जनवरी में 760 डॉलर प्रति टन थे, जोकि फरवरी में बढ़कर 776 डॉलर प्रति टन हो गए। इसी तरह से केस्टर डीओसी के भाव जनवरी के 159 डॉलर से बढ़कर फरवरी में 170 डॉलर प्रति टन हो गए। सरसों डीओसी के दाम फरवरी में बंदरगाह पर घटकर 314 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि जनवरी में इसके भाव 337 डॉलर प्रति टन थे।

चालू पेराई सीजन में 15 मार्च तक चीनी का उत्पादन 9.21 फीसदी बढ़ा

नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2021-22 के पहले साढ़े पांच महीनों पहली अक्टूबर 2021 से 15 मार्च 2022 तक चीनी का उत्पादन 9.21 फीसदी बढ़कर 283.26 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस दौरान केवल 259.37 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में महाराष्ट्र में 15 मार्च 2022 तक 108.95 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 94.05 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।

उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में मिलों में देर सेे गन्ने की पेराई आरंभ हुई थी। 15 मार्च 22 तक राज्य की 120 चीनी मिलों में से 16 में पेराई बंद हो गई। राज्य में 15 मार्च 22 तक 78.33 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 84.25 लाख टन से कम है।

कर्नाटक में 15 मार्च 22 तक 54.65 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 41.95 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में चालू पेराई सीजन में 72 मिलों में गन्ने की पेराई चल रही थी, जिनमें से 24 मिलों में पेराई बंद हो गई है।

गुजरात में चालू पेराई सीजन में 15 मार्च 22 तक 15 चीनी मिलों ने 9.15 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य की मिलों ने 8.49 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।

तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 15 मार्च 22 तक राज्य की मिलों ने 5.75 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 4.16 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

देश के अन्य राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा की चीनी मिलों ने 15 मार्च 22 तक 26.43 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।

इस्मा के अनुसार चालू पेरारई सीजन में 64-65 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके है, जबकि फरवरी अंत तक 47 लाख टन चीनी की शिपमेंट भी हो चुकी है। अत: चालू सीजन में करीब 75 लाख टन चीनी का निर्यात होने का अनुमान है। चालू पेराई सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 333 लाख टन होने का अनुमान है।

पहली अक्टूबर 2021 को चीनी का बकाया स्टॉक 82 लाख टन का बचा हुआ था, जबकि चालू पेराई सीजन में देश में चीनी की घरेलू खपत 272 लाख टन होने का अनुमान है। चालू पेराई सीजन में चीनी का कुल निर्यात बढ़कर 75 लाख टन होेने की उम्मीद है, ऐसे में 30 सितंबर 2022 को चीनी का बकाया स्टॉक 68 लाख टन ही बचने का अनुमान है।

15 मार्च 2022

उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में 15 मार्च को धान के भाव

उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में 15 मार्च को धान के भाव

 

MANDI- SIRSA. HARYANA

1401. HAND.
Rate- 3949.

PB.1. HAND.
Rate- 3746.

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MANDI- TOHANA. HARYANA

1121. HAND.
Rate- 4125.

1401. Com.
Rate- 3900.

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MANDI- DABRA. MP

Aarival- 12'00. Bags. Combine.

1121.
Rate- 4001.

1718.
Rate- 3980.

1509.
Rate- 3000. Low Quality

------

Bundi 1121
3950 to 4040
1718
3900 to 4050
1509
3500 to 3700
Suganda 3000 to 3440
Dp 3350 to 3420
Awake 5000

--------

Mandi- Kotkapura. (Punjab)

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Aarival- 7'00 Bags Combain)

-------------------------------------

1121. New.
Rate- 3800 se 4150.

1718. New.
Rate- 3990 

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MANDI- NARELA. DEHLI

1121. HAND.
Rate- 4265.

1509. HAND.
Rate- 3740

आयातित के साथ देसी दलहन में गिरावट, रबी फसल की आवक बढ़ने से कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली। रबी दलहन की आवक उत्पादक मंडियों में बढ़ने से अधिकांशों दालों की कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से दालों की खरीद कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण आयातकों की बिकवाली भी बराबर बनी हुई है। होली के त्यौहार के कारण चालू सप्ताह में दालों की आवक कम रहेगी, लेकिन मिलों की मांग भी सीमित रहने से इनके भाव में तेजी के आसार नहीं है।

जानकारों के अनुसार मसूर की कीमतों में ऊपर से 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आ चुका है, जबकि चना में भी 250 से 350 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आया है तथा मौजूदा भाव में भी ग्राहकी कमजोर ही बनी हुई है। इसलिए इनके भाव में अभी तेजी के आसार नहीं है। मौसम फसल के अनुकूल है इसलिए उत्पादक राज्यों में रबी दलहन की प्रमुख फसल चना, मसूर, मटर, मूंग और उड़द की आवक होली के बाद और बढ़ेगी।

उत्पादक मंडियों में नए चना एवं मसूर की आवक आवक बढ़ने से जहां उत्पादक मंडियों में देसी चना के दाम 50 से 75 रुपये प्रति क्विंटल कमजोर हो गए, वहीं देसी मसूर के दाम भी 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल घट गए। महाराष्ट्र की अमरावती मंडी में नए चना की आवक बढ़कर 16 से 17 हजार क्विंटल की हुई जबकि भाव 4,450 से 4,700 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार रहे।  

उत्तर प्रदेश में नई सफेद मटर की कुल आवक बढ़कर 17,000-18,000 क्विंटल की हो गई है, तथा नए मालों में नमी की मात्रा 14 से 15 फीसदी तक आ रही है। नई सफेद मटर के भाव में आज 100 से 200 रुपये की गिरावट आकर उत्तर प्रदेश लाईन के मालों के भाव 4,750 से 5,100 रुपये क्विंटल रह गए, जबकि मध्य प्रदेश के मालों के भाव 4,650-5,000 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। अनुकूल मौसम से क्वालिटी तो अच्छी है ही, साथ ही उत्पादकता भी ज्यादा बैठ रही है। होली के त्योहार के बाद आवक बढ़ने की संभावना है।

बर्मा की लेमन अरहर 2021 की कीमतों में दिल्ली में 25 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,775 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव इस दौरान 50 रुपये कमजोर होकर भाव 6,650-6,675 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की मांग कमजोर होने से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर नई के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,350-6,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दूसरी और मुंबई में तंजानिया की अरुषा और मटवारा अरहर के दाम क्रमश: 5,500 से 5,600 रुपये और 5,450 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। मलावी अरहर के दाम भी 4,900-5,000 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 5,450-5,500 रुपये और सूडान की अरहर के दाम 6,500 से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश:  6,700 रुपये और 7,300 से 7,325 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू नई के भाव 6,550 से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, लेकिन इन भाव में ग्राहकी कमजोर रही।

चेन्नई में एसक्यू उड़द हाजिर डिलीवरी के भाव 6,900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, लेकिन एसक्यू 2022 की फसल के भाव में 75 रुपये का मंदा आकर भाव 6,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।  

दाल मिलों की मांग कमजोर होने के कारण दिल्ली में मध्य प्रदेश की कीमतों में 150 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,500 रुपये एवं प्रति क्विंटल रह गए। कनाडा की मसूर का बकाया स्टॉक नहीं होने के कारण कोई व्यापार नहीं हुआ।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से कनाडा की मसूर के हजिरा बदरगाह पर साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर के दाम कंटेनर और वैसल में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल नरम हो गए।

हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम घटकर 6,575 से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में घटकर 6,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। कनाडा की मसूर के भाव कंटेनर में 6,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में चना के भाव में 75 से 100 रुपये का मंदा आकर राजस्थानी चना के दाम 5,075 से 5,100 रुपये ओर मध्य प्रदेश के चना के भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

सरसों की दैनिक आवक बढ़ने से कीमतों पर दबाव, विदेशी बाजार में भी भाव कमजोर

नई दिल्ली। पिछले सप्ताह लगातार भाव तेज रहने के बाद चालू सप्ताह के पहले दिन सोमवार को सरसों की गिरावट दर्ज की गई। ब्रांडेड कंपनियोें ने भी आज सरसों के खरीद भाव में 50 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की। उत्पादक मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़कर इस दौरान 14 लाख बोरियों की हुई।

जयपुर में कंडीशन की सरसों के दाम नरम होकर 7,325 से 7,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। बीपी आयल मिल, आगरा ने जहां सरसों के खरीद भाव में 150 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की, वहीं सलोनी शमशाबाद ने भी खरीद भाव 50 रुपये प्रति क्विंटल तक घटा दिए।

उद्योग ने चालू रबी में सरसों के उत्पादन का अनुमान 111 लाख टन, तोड़िया सहित जारी किया है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 87.44 लाख टन से ज्यादा है। जानकारों के अनुसार उत्पादन अनुमान इससे ज्यादा है, तथा होली के बाद दैनिक आवकों का दबाव और बनेगा। ऐसे मेंं कंडीशन की सरसों के दाम घटकर उत्पादक मंडियों 6,000 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तक बनने की उम्मीद है। इन भाव में स्टॉकिस्टों की खरीद बनने के आसार हैं। हालांकि इसके भाव में तेजी, मंदी यूक्रेन में चल रहा संकट कितना लंबा चलेगा, इस पर भी निर्भर करेगी।

विदेशी बाजार में सोमवार को खाद्य तेल एवं तिलहन की कीमतों में गिरावट आई। मलेशिया में पॉम तेल के मई महीने के वायदा अनुबंध में दाम 367 रिगिंट यानि 5,47 फीसदी घटकर 6,340 रिगिंट प्रति टन रह गए। दुनिया भर में क्रूड ऑयल और खाद्य तेलों में नरमी आने के कारण लगातार तीसरे दिन पाम तेल में गिरावट जारी रही। रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध होने से सनफ्लावर की सप्लाई बाधित होने के बाद पाम तेल की मांग बढ़ने और इंडोनेशिया में निर्यात पर पाबंदियां लगाए जाने से पिछले तीन हफ्तों में पाम तेल 20 फीसदी महंगा हो गया था। इंडोनेशिया ने निर्यातकों के लिए 30 फीसदी पाम तेल घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया है। इससे ग्लोबल मार्केट में सप्लाई सीमित हो गई।

सप्ताह के पहले दिन क्रूड ऑयल 4 डॉलर प्रति बैरल गिर गया। रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज होने से पिछले सप्ताह भी भारी गिरावट आई थी। शिकागों में आज इलेक्ट्रानिक ट्रेडिंग में जहां सोयाबीन और सोया तेल में मंदा आया, जबकि मील के भाव में तेजी दर्ज की गई।

भारतीय रुपये में कांडला बंदरगाह पर क्रूड पाम तेल के भाव 1,558 रुपये और सोया तेल डिगम के भाव 1,550 रुपये प्रति दस किलो के स्तर पर आ गए, जबकि बीते शुक्रवार को बंदरगाह पर क्रूड पाम तेल के भाव 1,568 रुपये और सोया तेल डिगम के भाव 1,570 रुपये प्रति दस किलो थे। कांडला बंदरगाह पर मार्च डिलीवरी क्रूड पाम तेल के भाव 1,860 डॉलर से बढ़कर 1,900 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि सोया तेल डिगम मार्च डिलीवरी के भाव इस दौरान 1,865 डॉलर से घटकर 1,825 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आ गए।

फरवरी में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 22 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। फरवरी में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 22 फीसदी बढ़कर 1,019,997 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनका आयात 838,607 टन का हुआ था।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर-21 से अक्टूबर-22 के पहले चार महीनों नवंबर-21 से फरवरी-22 के दौरान देश में खाद्य तेलों का आयात 7 फीसदी बढ़कर 4,691,158 टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 4,394,760 टन का ही हुआ था। चालू तेल वर्ष के पहले चार महीनोे में जहां खाद्य तेलों का आयात 4,591,220 टन का हुआ है, वहीं 99,938 टन अखाद्य तेलों का आयात हुआ है।

एसईए के अनुसार भारत आमतौर पर प्रति माह लगभग 175,000/200,000 टन सूरजमुखी तेल का आयात करता है। रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष ने सूरजमुखी तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। फरवरी '22 में, लगभग 152,000 टन सूरजमुखी तेल भारत में आया था, जबकि मार्च ’22 में भी इतना ही आयात होने का अनुमान है। क्योंकि युद्ध से पहले भारत के लिए रवाना हो चुके जहाज चालू महीने के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे। यदि युद्ध जारी रहता है, तो बाद के महीनों में सूरजमुखी तेल के शिपमेंट में गिरावट आ सकती है, हालांकि, सोयाबीन और सरसों के तेल की घरेलू उपलब्धता ज्यादा है, जिस कारण सूरजमुखी तेल की उपलब्धता में कमी को पूरा किया जा सकता है।

उधर, 9 मार्च को इंडोनेशियाई सरकार द्वारा घरेलू बिक्री की सीमा को 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फसीदी करने की घोषणा से इंडोनेशियाई निर्यात की मात्रा और कम हो जाएगी और वैश्विक निर्यात आपूर्ति में कमी आएगी। इन दो कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ दिनों में खाद्य तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है।

विश्व बाजार में दाम तेज होने के कारण घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में जनवरी के मुकाबले फरवरी में तेजी आई है। फरवरी में आरबीडी पॉमोलीन के दाम बढ़कर भारतीय बंदरगाह पर 1,581 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि जनवरी में इसका भाव 1,490 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव जनवरी के 1,510 डॉलर से बढ़कर फरवरी में भाव 1,594 डॉलर प्रति टन हो गया। क्रुड सोयाबीन तेल का भाव इस दौरान 1,506 डॉलर से बढ़कर 1,595 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया।

11 मार्च 2022

विदेशी बाजार में चीनी तेज, खपत का सीजन होने के कारण घरेलू मांग भी बढ़ने के आसार

नई दिल्ली। देश के अधिकतर बाजारों में सीमित मांग के कारण बुधवार को चीनी के थोक एवं खुदरा भाव पूर्वस्तर पर स्थिर बने रहे लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी से विदेश में भाव मजबूत हो गए। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण आगे घरेलू बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेजी आने के आसार हैं।

दिल्ली में एम ग्रेड चीनी के दाम बुधवार को 3,750 से 3,940 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, जबकि उत्तर प्रदेश की बरेली मंडी में इसके भाव 3,730 से 3,930 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कोलहापुर में चीनी के दाम 3,200 से 3,270 रुपये और हैदराबाद में इसके भाव 3,240 से 3,280 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

बीते कारोबारी सत्र में आईसीई वायदा में रॉ शुगर के दाम क्रूड ऑयल की कीमतों आई तेजी से मजबूत हो गए। मार्च वायदा अनुबंध में रॉ शुगर के भाव 0.16 सेंट यानी 0.8 फीसदी बढ़कर 19.43 सेंट प्रति पाउंड के स्तर पर पहुंच गए। उधर लंदन मई वायदा अनुबंध में इस दौरान व्हाइट शुगर की कीमतों में 3 डॉलर यानी 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी होकर भाव 536.30 डॉलर प्रति टन हो गए। जानकारों के अनुसार विदेशी बाजार में चीनी के भाव में आये लगातार सुधार से चालू महीने में ही करीब 4-5 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हुए हैं।

जानकारों के अनुसार आगे जैसे, जैसे गर्मी बढ़ेगी, चीनी की थोक एवं खुदरा मांग में भी सुधार आयेगा। इसलिए घरेलू बाजार में आगे चीनी की मौजूदा कीमतों में सुधार ही आने का अनुमान है।

चालू फसल सीजन के पहले पांच महीनों में सोया डीओसी का निर्यात 68.78 फीसदी घटा

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन में पहली अक्टूबर 2021 से फरवरी 2022 अंत तक देश से सोया डीओसी के निर्यात में 68.78 फीसदी की भारी कमी आकर कुल निर्यात 4.23 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि में इसका निर्यात 13.55 लाख टन का हुआ था।

सोयाबीन प्रोससर्स एसोसिएशन आफ इंडिया, सोपा के अनुसार नए सीजन के आरंभ में पहली अक्टूबर 21 को 2.41 लाख टन सोया डीओसी का स्टॉक बकाया था, जबकि 4.40 लाख टन का आयात हो चुका है। पहली अक्टूबर से फरवरी अंत तक 27.14 लाख टन सोया डीओसी का उत्पादन हो चुका है। इस दौरान 3.45 लाख टन सोया डीओसी की खपत फूड में और 24 लाख टन की फीड में हुई है। अत: पहली मार्च को 2.27 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल के 2.66 लाख टन से कम है।

सोपा के अनुसार पहली अक्टूबर 2021 को 1.83 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक था, जबकि 118.89 लाख टन का उत्पादन अनुमान है। अत: कुल उपलब्धता 120.72 लाख टन की बैठी, जिसमें से 55 लाख टन की आवक फरवरी के अंत तक मंडियों में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 70 लाख टन कम है। अत: किसानों एवं स्टॉकिस्टों के पास पहली मार्च को 75.80 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 44.98 लाख टन से ज्यादा है। 

07 मार्च 2022

हरियाण में 21 मार्च से होगी सरसों की एमएसपी पर खरीद शुरू

नई दिल्ली। हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस बार सरसों की खरीद 21 मार्च से ही आरंभ कर दी जाए, क्योंकि आवक शुरू हो गई है। पहले यह खरीद 28 मार्च से शुरू होती थी। हालांकि उत्पादक मंडियों में सरसों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 5,050 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा है इसलिए किसान सरकारी खरीद केंद्रों के बजाए मंडियों में निजी व्यापारियों को सरसों बेचेंगे।

उन्होंने गेहूं, चना व जौ की खरीद एक अप्रैल से आरंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने रबी-2022 की फसलों को लेकर की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए देते हुए उन्होंने कहा कि 21 मार्च से सरसों व एक अप्रैल से गेहूं, चना व जौ आदि रबी फसलों की खरीद के लिए व्यापक तैयारियां कर लें ताकि किसानों को अपनी फसल की बिक्री में कोई परेशानी न हो। उन्होंने सभी उपायुक्तों को भी निर्देश दिए कि वे खरीदी गई फसल का समय पर उठान सुनिश्चित करने के लिए 21 मार्च तक ट्रांसपोर्ट का प्रबंध कर रिपोर्ट भेजें।

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर अपलोड किए गए फसलों के ब्यौरा के अनुसार किसानों के बैंक खातों को अपडेट करके फसल की राशि सीधा उनके खाते में भिजवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मंडियों में किसानों के लिए पेयजल व अन्य सुविधाओं को भी अप-टू-डेट करने के निर्देश दिए।

राज्य में सरसों की खरीद 92 मंडियों में की जाएगी, जबकि गेंहू के लिए 397 मंडियां, चना के लिए 11 मंडियां तथा जौ की खरीद के लिए 25 मंडियों से की जायेगी। इन फसलों में सरसों को 5,050 रुपये प्रति क्विंटल, गेंहू को 2,015 रुपये प्रति क्विंटल, चना को 5,230 रुपये प्रति क्विंटल तथा जौ को 1,635 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर विभिन्न खरीद एजेसिंयों द्वारा खरीदा जाएगा। उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हैफेड, हरियाणा राज्य भंडारण निगम व भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, चना की खरीद हैफेड, सरसों की खरीद हैफेड व हरियाणा राज्य भंडारण निगम तथा जौ की खरीद खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हैफेड एवं हरियाणा राज्य भंडारण निगम एजेंसी द्वारा की जाएगी।

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से अरहर, उड़द के भाव बढ़े, चना तीसरे दिन तेज

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन संकट के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार आ रही गिरावट से दालों के आयात पड़ते महंगे हुए हैं। जिससे घरेलू बाजार में अरहर और उड़द की कीमतों में शनिवार को तेजी दर्ज की गई। उत्पादक मंडियों में देसी चना की दैनिक आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन मिलों के साथ ही स्टॉकिस्टों की मांग बनी रहने से लगातार तीसरे दिन चना के भाव में तेजी आई। मसूर में ग्राहकी कमजोर होने से गिरावट देखी गई।

व्यापारियों के अनुसार रूस-यूक्रेन में चल रही जंग के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, जिससे दालों का आयात महंगा होगा। इसलिए हाजिर बाजार में अरहर और उड़द की कीमतों में सुधार आया। जानकारों के अनुसार स्टॉकिस्टों के साथ ही आयातक भी अरहर और उड़द के दाम तेज करना चाहते हैं, इसलिए इनके भाव में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी तो बन सकती है, लेकिन अभी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। आयातकों ने जो पहले से आयात के सौदे किए हुए हैं, उनकी शिपमेंट लगातार आ रही है।

सूत्रों के अनुसार फरवरी में चेन्नई बदंरगाह पर दालों का आयात करीब 65,700 टन के करीब हुआ है, जिसमें सबसे ज्यादा मात्रा उड़द की 29,000 टन, अरहर की 25,500 टन और करीब 11 हजार टन मूंग थी।  

महाराष्ट्र की मंडियों में चना की आवक लगातार बढ़ रही है, साथ ही मिलों की खरीद भी बढ़ी है। व्यापारियों के अनुसार चना के दाम एमएसपी से नीचे होने के कारण स्टॉकिस्टों की खरीद बढ़ने लगी है। इसलिए चना की कीमतों में शनिवार को लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। महाराष्ट्र की मंडियों से मुंबई डिलीवरी चना का व्यापार 4,925 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। महाराष्ट्र की अमरावती मंडी में शनिवार को चना की आवक 7,000 क्विंटल की और लातूर मंडी में 40,000 कट्टों की आवक हुई।

कर्नाटक से मुंबई के लिए चना का व्यापार 5,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

मसूर की नई फसल आवक बढ़ने से मध्य प्रदेश की मंडियों में इसके भाव में आज क्वालिटीनुसार 100-150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई। मध्य प्रदेश की बीना, गंजबासोदा मंडियों में देसी मसूर की आवक बढ़ने लगी है। इंदौर मंडी में मसूर के भाव घटकर बिल्टी के 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

उत्तर प्रदेश की ललितपुर मंडी में सफेद मटर की आवक 15,000 बोरियों की हुई, तथा इसका व्यापार 4,200 से 5,100 रुपये प्रति क्विंंटल क्वालिटीनुसार हुआ।

बर्मा की लेमन अरहर 2021 की कीमतों में दिल्ली में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6,725 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव में भी 25 रुपये की तेजी आकर दाम 6,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर 6,250 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दूसरी और मुंबई में तंजानिया की अरुषा अरहर के दाम 5,450 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मलावी अरहर के दाम 4,900-4,950 रुपये और मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 5,400-5,450 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर टिकी रही। सूडान की अरहर के दाम 6,450 से 6,500 रुपये तथा मटवारा की अरहर के भाव 5,400 से 5,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में दाम मजबूत होने के साथ ही दाल मिलों की हाजिर सुधरने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू में 50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,575-6,600 रुपये और 7,150-7,175 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 25 रुपये बढ़कर भाव 6,400  से 6,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।  

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश की कीमतों में 75-75 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,675-6,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कनाडा की मसूर के भाव मुंद्रा और हजिरा बंदरगाह पर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, जबकि आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव मुंबई में कंटेनर में 6,650 रुपये और कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।


रूस-यूक्रेन संकट से धागे का निर्यात घटा, फिर भी कॉटन में बड़ी गिरावट के आसार नहीं

नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के कारण यूरोपीय देशों को धागे का निर्यात कम हो गया है, जिस कारण घरेलू बाजार में धागे की कीमतों में 35 से 40 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है, जबकि इस दौरान कॉटन की कीमतों में केवल 1,000 से 1,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो का मंदा आया है। ऐसे में स्पिनिंग मिलों को मौजूदा भाव पर कॉटन की खरीद करने पर नुकसाना उठाना पड़ रहा है। इसलिए मिलें इस समय केवल जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही हैं।

व्यापारियों के अनुसार अगर यूं कहें की धागा बिक नहीं रहा है, और कॉटन मिल नहीं रही है, तो उचित होगा। क्योंकि इस समय धागे में निर्यातकों के साथ ही स्थानीय मांग भी कमजोर बनी हुई है, जबकि जिनिंग मिलें भाव घटाकर गांठों की बिकवाली नहीं कर रही हैं। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।

आईसीई कॉटन वायदा की कीमतों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। आईसीई कॉटन के मई वायदा अनुबंध में 338 प्वाइंट की गिरावट आकर भाव 116.42 सेंट पर बंद हुए। जुलाई वायदा अनुबंध में 275 प्वांइट की गिरावट आकर भाव 113.11 सेंट रह गए, जबकि दिसंबर वायदा अनुबंध में दाम 93 प्वांइट नरम होकर भाव 100.65 सेंट रह गए। जानकारों के अनुसार डॉलर मजबूत से कॉटन की कीमतों में नरमी आई थी।

विदेशी बाजार में आई बड़ी गिरावट के बावजूद भी घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में हल्की नरमी आई। गुजरात की मंडियों में कॉटन की कीमतों में 150 से 200 रुपये की गिरावट आकर ए ग्रेड कॉटन के दाम 76,500 से 77,500 रुपये, बी ग्रेड किस्म की कॉटन के भाव 75,000 से 75,500 रुपये और एवरेज ग्रेड की कॉटन के भाव 73,500 से 74,500 रुपये प्रति कैंडी क्वालिटीनुसार बोले गए।

चालू सीजन में देश में कपास का उत्पादन उद्योग के दूसरे अनुमान 348.13 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो से भी कम होने की आशंका है, यही कारण है कि उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आई है, तथा होली के बाद दैनिक आवकों में और कमी आयेगी। देशभर की मंडियों में कुल आवक घटकर 60 से 65 हजार गांठ की ही रह गई है। जानकारों के अनसुार जिस तरह से देशभर में कोरोना के मामलों में कमी आई है, उसे देखते हुए चालू सीजन में कॉटन की कुल खपत पिछले साल की तुलना में बढ़ेगी, ऐसे में कॉटन के आयात में बढ़ोतरी का अनुमान है। विदेश में भी कॉटन के दाम तेज हैं, इसलिए आयात भी महंगा होगा। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

पिछले साल कॉटन कारर्पोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई एवं महाराष्ट्र फैडरेशन के साथ ही अन्य कंपनियों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक अच्छा था, जबकि चालू सीजन में दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी से तेज बने रहे। इसलिए इन कंपनियों को एमएसपी पर खरीद नहीं करनी पड़ी। इसीलिए इनके पास कॉटन का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही है। उधर स्पिनिंग मिलों के पास भी डेढ़ से दो महीने की खपत की कॉटन का स्टॉक है, ऐसे में मिलों की मांग भी बनी रहने की उम्मीद है।

चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 252 लाख टन के पार, 60 लाख टन के हुए निर्यात सौदे

नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2021-22 के पहले पांच महीनों पहली अक्टूबर 2021 से 28 फरवरी 2022 तक चीनी का उत्पादन 7.68 फीसदी बढ़कर 252.87 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस दौरान केवल 234.83 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। चालू पेराई सीजन में 516 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई चल रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 503 मिलों में ही पेराई चल रही थी।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में महाराष्ट्र में 28 फरवरी 2022 तक 97.15 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 84.85 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।

उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में मिलों में देर सेे गन्ने की पेराई आरंभ हुई थी। 28 फरवरी 22 तक राज्य की 120 चीनी मिलों में से 13 में पेराई बंद हो गई। राज्य में 28 फरवरी 22 तक 68.64 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 74.20 लाख टन से कम है।

कर्नाटक में 28 फरवरी 22 तक 50.84 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 40.83 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में चालू पेराई सीजन में 72 मिलों में गन्ने की पेराई चल रही थी, जिनमें से 7 मिलों में पेराई बंद हो गई है।

गुजरात में चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी 22 तक 15 चीनी मिलों ने 7.93 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य की मिलों ने 7.49 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।

तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 28 फरवरी 22 तक राज्य की मिलों ने 4.53 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 3.22 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

देश के अन्य राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा की चीनी मिलों ने 28 फरवरी 22 तक 23.78 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।

इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 333 लाख टन होने का अनुमान है। चालू सीजन में 60 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके है, जबकि फरवरी अंत तक 42 लाख टन चीनी की शिपमेंट भी हो चुकी है। मार्च में करीब 12 से 13 लाख टन चीनी की और शिपमेंट होने का अनुमान है, अत: मार्च के आखिर तक करीब 54 से 55 लाख टन चीनी की शिपमेंट हो जायेंगी।

पहली अक्टूबर 2021 को चीनी का बकाया स्टॉक 82 लाख टन का बचा हुआ था, जबकि चालू पेराई सीजन में देश में चीनी की घरेलू खपत 272 लाख टन होने का अनुमान है। चालू पेराई सीजन में चीनी का कुल निर्यात बढ़कर 75 लाख टन होेने की उम्मीद है, ऐसे में 30 सितंबर 2022 को चीनी का बकाया स्टॉक 68 लाख टन ही बचने का अनुमान है।

03 मार्च 2022

उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में 3 मार्च 22 को धान के भाव इस प्रकार रहे


उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में 3 मार्च 22 को धान के भाव इस प्रकार रहे

MANDI- KOTA. RAJASTHAN

Arrival- 7'000. Bags .

1121.
Rate- 3650 se 3851.

1718.
Rate- 3650 se 3941.

1509.
Rate- 3400 se 3561.

Suganda. HAND.
Rate- 3150 se 3281.

DP.
Rate-  3100 se 3365.

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haryana fatehabad mandi - 1121-4075 1718-4000 1509-3600

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Kaithal  1718   h  4050

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Samalkha
Bm-3431
Arrival 3-400 bags

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1718 narela mandi 4030

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Bundi 1121
3650 to 3970
1509
3460 to 3641
Suganda 3000 to 3400
Dp 3250 to 3341
Awake 5000

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Fazilka Punjab
1121@3943 comb

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नरवाना
1121 हाथ  4121
1125 हाथ  4050

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Jahangeerabad mandi up
1509 Rate 3701
1718 Rate 3925
Sugandha Rate 3281
Sarwati Rate 2571
Arrival 2000 Bags

विदेश में भाव बढ़ने से घरेलू बाजार में गेहूं तेज, होली के बाद बढ़ेगी नई फसल की आवक

नई दिल्ली। विदेशी बाजार में गेहूं के भाव में चल ही रही तेजी से घरेलू बाजार में इसके भाव लगातार तेज हो रहे हैं। कांडला बंदरगाह पर बुधवार को गेहूं के भाव 20 रुपये बढ़कर 2,220 रुपये और गांधीधाम में फॉरवर्ड में भाव 40 रुपये तेज होकर व्यापार 2,290 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

यूक्रेन संकट के चलते शिकागों में गेहूं के भाव 10.11 डॉलर प्रति बुशेल यानी 2,810 रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। इसलिए भारत से गेहूं निर्यात के अच्छे पड़ते लग रहे हैं। ब्लैक सी के जरिए किसी भी तरह का निर्यात नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बाजार में लगातार में गेहूं की कीमतें बढ़ने लगी है। व्यापारियों के अनुसार युद्ध यदि जारी रहा तो गेहूं की मौजूदा कीमतों में और भी तेजी बन सकती है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी महायुद्ध का असर अब दुनिया में महंगाई के तौर पर भी दिखने लगा है। जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में इसके चलते खाद्यान्न की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है। शिकागो में गेहूं का दाम 14 साल के शीर्ष पर पहुंच गए हैं, जोकि 2008 के बाद गेहूं यह सबसे ऊंचा रेट है। महीने भर से ही गेहूं के दाम में तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद इसकी कीमतों में भारी तेजी आई है।

रूस और यूक्रेन में बड़े पैमाने पर गेहूं का उत्पादन होता है तथा इन देशों में युद्ध शुरू होने के बाद से इसकी सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। एक तरफ रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं तो वहीं यूक्रेन अब निर्यात की स्थिति में नहीं है। इसी के चलते गेहूं की कीमतें विश्व बाजार में महीनेभर में ही 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। मालूम हो कि रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया का एक चौथाई खाद्यान्न निर्यात करते हैं। लेकिन युद्ध ने दोनों ही देशों के कारोबारों को प्रभावित किया है। रूस के हमले के बाद से कार्गो शिप जहां के तहां खड़े हैं तथा दोनों देशों का कारोबार थम गया है।

विदेश में दाम तेज होने से घरेलू मंडियों में भी गेहूं की कीमतों में तेजी बनी हुई है। व्यापारियों के अनुसार होली के बाद उत्पादक मंडियों में नए गेहूं की आवक बढ़ेगी, लेकिन विश्व बाजार में दाम तेज रहे तो फिर निर्यातकों की मांग बनी रहेगी। ऐसे में हाजिर बाजार में भी भाव अभी तेज ही बने रहने की उम्मीद है। दिल्ली में उत्तर प्रदेश लाईन के गेहूं का भाव 2,300 रुपये, मध्य प्रदेश के गेहूं का भाव 2,280 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए तथा दैनिक आवक 4,000 बोरियों की हुई।

चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान गेहूं का निर्यात बढ़कर 50.41 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 10.69 लाख टन का ही हुआ था।

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन में देश में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 11.13 करोड़ टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 10.95 करोड़ टन से ज्यादा है।  

02 मार्च 2022

उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में धान के भाव 2 मार्च 2022 के

उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में धान के भाव 2 मार्च 2022 के

 

 Pillu Khera Mandi arrival 1200 bags 1121 hand --4069 & Basmati hand --3438 Tak biki

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 Tarn Taran mandi arrival 1121 1718 2000 bags
Combine 1121 rs 4000
Hath --1121 rs 4187
Combine 1718 rs 3923
Hath -- 1718 rs  3954 

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Amritsar 1121 4196/

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Mandi- Kotkapura. (Punjab)

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Aarival- 1300 Bags Combain)

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1121. New.
Rate- 3800--4055

1401. New.
Rate- 3650--3800

1718. New.
Rate- 3600--3950

New 1509
Rate- 3620--3870

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haryana fatehabad mandi ---1121-4090 1718-3940 1509-3565 

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Sirsa_Mandi_Bhav
Dt. 02-03-2022
Narma 🌥️ 7000-10197.
Kapas  ☁️  7600-7800.
Paddy PB-1 - 3300-3650.
Paddy 1401- 3400-3903.
#Quality_Rate...

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MANDI- KAITHAL. Haryana

1121. HAND.
Rate- 4030.

1718. HAND.
Rate- 3970.

Basmati. HAND.
Rate- 3460.

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MANDI- DABRA. MP

Arrival- 1'000. Bags. Combine.

1718.
Rate- 3855.

1121.
Rate- 3720.

1509.
Rate- 3350.

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MANDI- ALIGADH. UP

Aarival- 2'000. Bags.

1121. Not Aarival.

1718. HAND.
Rate- 3940.

1509. HAND.
Rate- 3600.

TAJ. HAND.
Rate- 3250.

Suganda. HAND.
Rate- 3201.

Sarbati. HAND.
Rate- 2580.

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Tohana shabnam 3205/- top

चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में उड़द का आयात 63 फीसदी से ज्यादा बढ़ा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले दस महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान उड़द के आयात में 63.54 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 4.89 लाख टन का हो चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की समान अवधि में इसका आयात 2.99 लाख टन का हुआ था।

सूत्रों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान उड़द का कुल आयात 3.34 लाख टन का हुआ था, जबकि चालू वित्त वर्ष के दौरान कुल आयात में भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है, क्योंकि फरवरी और मार्च में आयात और बढ़ने की उम्मीद है। जनवरी में उड़द का आयात 46 हजार से ज्यादा का हुआ तथा मध्य फरवरी तक ही करीब 20 हजार टन से ज्यादा उड़द का आयात हो चुका है।

दक्षिण भारत में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में नई उड़द की आवक शुरू हो गई है, हालांकि इन राज्यों में जनवरी महीने में हुई बेमौसम बारिश से फसल की उत्पादकता पिछले साल की तुलना में कम बैठ रही है, साथ ही क्वालिटी को भी नुकसान हुआ है। हालांकि मार्च और अप्रैल में आयातित उड़द ज्यादा मात्रा में आयेगी, इसलिए आयातक और स्टॉकिस्ट उड़द के दाम तेज करना चाहते हैं। उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग कमजोर है, ऐसे में स्टॉकिस्ट इसके भाव में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी तो कर सकते हैं, लेकिन बड़ी तेजी टिक नहीं पायेगी।

बर्मा में चालू सीजन में उड़द का उत्पादन पिछले साल की तुलना में ज्यादा होने का अनुमान है, लेकिन भारतीय आयातकों की मांग से स्थानीय बाजार में उड़द के दाम दूसरे दिन भी तेज हो गए। जानकारों के अनुसार डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से भी आयात पड़ते महंगे होंगे। बर्मा के स्थानीय बाजार में मंगलवार को उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में पांच से दस डॉलर की तेजी आकर भाव क्रमश: 785 डॉलर और 875 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में उड़द का उत्पादन बढ़कर 8.10 लाख टन होने का अनुमान है, जोकि इसके पिछले साल के 7.50 लाख टन से ज्यादा है। फसल सीजन 2021-22 के दौरान उड़द का कुल उत्पादन 26.6 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2020-21 के दौरान 22.3 लाख टन का उत्पादन हुआ था। हालांकि जानकारों के अनुसार चालू सीजन में प्रतिकूल मौसम की मार उड़द की फसल पर पड़ी है, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन तो कम बैठी ही, साथ ही क्वालिटी को भारी नुकसान हुआ।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2021-22 के लिए उड़द का एमएसपी 6,300 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

मंगलवार को मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 6,300 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। उधर चेन्नई में एफएक्यू उड़द के भाव 6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, जबकि एसक्यू के भाव में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

अकोला मंडी में देसी उड़द के भाव 6,100 से 6,600 रुपये, सोलपुर में 5,500 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। दाहोद मंडी में देसी उड़द के भाव 5,500 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।