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31 जुलाई 2021

मुंबई में दाल मिलों की कमजोर मांग से अरहर, उड़द, चना और काबूली चना मंदा

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण शनिवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर, उड़द के साथ ही चना और काबूली चना की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

विदेश से लगातार अरहर और उड़द के कंटेनर और वैसल, आने के साथ ही खरीफ की बुआई में हुए सुधार से कीमतों पर दबाव है। साथ ही सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी भी दालों की खरीद सीमित मात्रा में ही कर रहे हैं।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,375 रुपये और 6,275 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। वहीं, अरुषा अरहर के साथ ही मोजाम्बिक लाईन की गजरी किस्म की अरहर के भाव भी 50-50 रुपये घटकर क्रमश: 6,200 रुपये और 6,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। साथ ही सूडान लाईन की गजरी किस्म की अरहर के भाव भी 50 रुपये घटकर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी में 75-75 रुपये का मंदा आकर भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 6,650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उड़द में बढ़े दाम पर मिलों की मांग में कमी आई, जबकि विदेश के साथ ही समर उड़द की आवक घरेलू मंडियों में बराबर बनी हुई है।

कनाडा लाईन की मसूर के साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव मुंबई और अन्य बाजारों में स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से रुस और सूडान लाईन के काबुली चना में 100-100 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 5,100 रुपये और 5,250-5,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि 40 फीसदी आयात शुल्क होने के कारण काबूली चना में आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

इसी तरह, से तंजानिया चना के भाव भी 50 रुपये घटकर भाव 4,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। विभिन्न राज्यों में नेफेड खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।

30 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर और उड़द की कीमतों में नरमी, मसूर के दाम स्थिर

नई दिल्ली। बढ़ी हुई कीमतों पर दाल मिलों की हाजिर मांग घटने के कारण शुक्रवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर और उड़द की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि मसूर के दाम स्थिर बने रहे।

दालों में थोक साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर देखी गई। इसके अलावा, सरकारी नीतियों के कारण बढ़ी हुई कीमतों पर दालों ​में मिलों की मांग हुई।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से बर्मा की लेमन अरहर पुरानी और नई के भाव में 25 से 50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,450 से 6,475 रुपये और 6,650 प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई के कमजोर संकेत के साथ ही चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के साथ ही समर उड़द की घरेलू आवक होने से उड़द में ग्राहकी कमजोर हुई। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 25-50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आकर भाव 6,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उड़द एसक्यू पुरानी और नई के भाव क्रमश: 7,900 रुपये एवं 7,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मिलों की हाजिर मांग बनी रहने से मध्य प्रदेश और कनाडा की मसूर के भाव क्रमश: 6,850 रुपये और 6,650 प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। केंद्र सरकार ने मसूर के आयात शुल्क और कृषि सेस में कटौती की है।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 53 रुपये की गिरावट आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 45 रुपये का मंदा आया।

मुंबई में आयातित मसूर और तंजानिया चना के भाव तेज, अरहर और उड़द स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण शुक्रवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित मसूर के साथ ही तंजानियां के चना की कीमतों में तेजी आई जबकि अरहर के साथ ही उड़द के दाम स्थिर बने रहे।

कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह के साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव में मुंबई में 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। केंद्र सरकार द्वारा मसूर के आयात शुल्क में कटौती के साथ ही विदेश से आवक बराबर बनी रहने के बावजूद मिलों की मांग में सुधार आया।

इसी तरह, से तंजानिया चना के भाव भी 50 रुपये बढ़कर 4,850 से 4,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि विभिन्न राज्यों में नेफेड खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है, लेकिन नीचे दाम पर मिलों की मांग में सुधार आया।

विदेश से आयात बना रहने एवं बुआई में हुई 5.37 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी के क्रमश: 6,450 रुपये और 6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। वहीं, अरुषा अरहर के भाव भी 6,250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मोजाम्बिक लाईन की गजरी किस्म की अरहर के भाव भी 6,150 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,800 रुपये और 6,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। उड़द की आवक विदेश से बराबर बनी हुई है, साथ ही समर की देसी उड़द भी आ रही है। चालू खरीफ में बुआई में आई 23 फीसदी की गिरावट आई है।

दाल मिलों की हाजिर मांग से सूडान लाईन के काबुली चना के भाव 5,350-5,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। इस दौरान रूस लाईन के काबुली चना के भाव 5,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। 40 फीसदी आयात शुल्क होने के कारण काबूली चना के आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी दालों की खरीद कम कर रहे हैं।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 35 रुपये की गिरावट आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसके भाव में 32 रुपये का मंदा आया।

29 जुलाई 2021

अगस्त के लिए 21 लाख टन का कोटा जारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अगस्त के लिए 21 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है, जोकि पिछले महीने की तुलना में एक लाख टन कम है।

त्यौहारी सीजन होने के कारण अगस्त में चीनी की खपत बढ़ने का अनुमान है, इसलिए चीनी के भाव में हल्का सुधार बनने की उम्मीद है।

दिल्ली में अरहर, उड़द और मसूर लगातार दूसरे दिन तेज, चना नरम

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द के साथ ही मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से बर्मा की लेमन अरहर नई और पुरानी के भाव में 50 से 100 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,700 रुपये और 6,500 प्रति क्विंटल हो गए जबकि मध्य प्रदेश के चना की कीमतों में 25 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी आई।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के साथ ही समर उड़द की घरेलू आवक होने के बावजूद भी चालू खरीफ में बुआई में 23 फीसदी की कमी आने से उड़द में मिलों की मांग अच्छी देखी गई। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 50-1700 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई।

नीचे दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि कनाडा की मसूर के भाव 6,650 प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। केंद्र सरकार ने मसूर के आयात शुल्क और कृषि सेस में कटौती की है।

दिल्ली के लारेंस रोड़ पर राजस्थानी चना के भाव 5,225 ससे 5,250 रुपये प्रति क्विंटल रहे, जबकि मध्य प्रदेश के चना में 25 रुपये की नरमी आकर भाव 5,100 से 5,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

केंद्र सरकार दालों पर स्टॉक लिमिट के मसले पर व्यापारियों के साथ विडियों कांफ्रेंस करेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार सरकार दलहन पर स्टॉक लिमिट के मामले पर आयातकों के साथ ही होलसेलर से विडियों कांफ्रेंस करेगी।

अखिल भारतीय दाल मिल संघ के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया कि सरकार दालों पर लगाए गई स्टॉक लिमिट के मुद्दे पर आयातकों, मिल मालिकों और थोक विक्रेताओं सहित सभी हितधारकों के साथ ऑनलाइन संवाद करेगी।

उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात करेंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुक्रवार को सुबह 10.15 बजे आयातकों और 11.15 बजे थोक व्यापारियों से चर्चा की जायेगी।

केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को आयातकों को स्टॉक लिमिट से पूरी छूट दी थी, साथ ही थोक कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट को बढ़ाकर 500 टन, इसमें किसी एक वैरायटी की दाल की लिमिट 200 टन की गई थी। उधर खुदरा विक्रेताओं के लिए स्टॉक लिमिट 5 टन की थी। इससे पहले केंद्र सरकार ने थोक विक्रेताओं के लिए अधिकतम 200 टन स्टॉक रखने की लिमिट तय की थी, जिसमें एक दाल की मात्रा अधिकतम 100 टन तक सीमित थी।

मुंबई में दाल मिलों की मांग से अरहर और मसूर तेज, उड़द चना और काबूली चना स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण गुरूवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी आई जबकि उड़द, चना और का​बूली चना के भाव स्थिर बने रहे।

विदेश से आयात बना रहने एवं बुआई में हुई 5.37 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,400 रुपये और 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। वहीं, अरुषा अरहर के भाव भी 25 रुपये तेज होकर 6,150 से 6,175 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मोजाम्बिक लाईन की गजरी किस्म की अरहर के भाव भी 25 रुपये बढ़कर 6,050 से 6,075 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

केंद्र सरकार द्वारा मसूर के आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने, के बावजूद भी नीचे दाम पर मिलों की मांग बढ़ गई। कनाडा लाईन की मसूर के साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव भी 50-50 रुपये बढ़कर भाव क्रमश: 6,500 रुपये और 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।  के आयात पर कृषि सेस को भी केंद्र सरकार ने 20 से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा, विदेशों से आवक होने के कारण भी कीमतों पर दबाव देखा गया।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 6,650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। उड़द की आवक विदेश से बराबर बनी हुई है, साथ ही समर की देसी उड़द भी आ रही है लेकिन चालू खरीफ में बुआई में आई 23 फीसदी की गिरावट आई है।

दाल मिलों की हाजिर मांग से सूडान लाईन के काबुली चना के भाव 5,300-5,500 रुपये और रूस के काबुली चना के भाव 5,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। 40 फीसदी आयात शुल्क होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

इसी तरह, से तंजानिया के चना के भाव भी 4,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। विभिन्न राज्यों में नेफेड खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 11 रुपये की गिरावट आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसके भाव में 18 रुपये का मंदा आया।

28 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में तेजी

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण बुघवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से बर्मा की लेमन अरहर पुरानी और नई के भाव में 50 से 100 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,400 रुपये और 6,650 प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के साथ ही समर उड़द की घरेलू आवक होने के बावजूद भी चालू खरीफ में बुआई में 23 फीसदी की कमी आने से उड़द में मिलों की मांग अच्छी देखी गई। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 125-175 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई।

बर्मा उड़द एफएक्यू पुरानी और नई के भाव बढ़कर क्रमश: 6,825 और 6,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उड़द एसक्यू पुरानी और नई के भाव भी इस दौरान बढ़कर क्रमश: 7,800 रुपये और 7,900 रुपये प्रति​ क्विंटल हो गए।

नीचे दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से मध्य प्रदेश और कनाडा की मसूर की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,800 रुपये और 6,650 प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि इन भाव में कोई खास व्यापार नहीं हुआ, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर देने से मिलों की मांग भी कमजोर बनी हुई है।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 98 रुपये की तेजी आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 93 रुपये का सुधार आया।

मुंबई में अरहर, उड़द, चना और काबूली चना में तेजी, मसूर में नरमी

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण बुधवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर, उड़द के साथ ही चना और ​काबूली चना की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क में कटौती करने से मसूर में नरमी आई।

बर्मा से 21,000 टन अरहर और उड़द लाने वाला वेसल M V VTC PLANET के 3 अगस्त, 2021 को मुंबई बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। पहले इस जहाज के 28 जुलाई को आने की उम्मीद थी।

विदेश से आयात बना रहने एवं बुआई में हुई 5.37 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,325 से 6,350 रुपये और 6,225 से 6,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। वहीं, अरुषा अरहर के भाव 6,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मोजाम्बिक लाईन की गजरी किस्म अरहर के भाव भी 6,050 रुपये पर स्थिर रहे।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी में 50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,700 रुपये और 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि उड़द की आवक विदेश से बराबर बनी हुई है, साथ ही समर की देसी उड़द भी आ रही है लेकिन चालू खरीफ में बुआई में आई 23 फीसदी की गिरावट के कारण मिलों की हाजिर मांग में सुधार देखा गया।

केंद्र सरकार द्वारा मसूर के आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने, से मसूर की कीमतों पर दबाव देखा गया। कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पर तथा ऑस्ट्रेलियाई मसूर भाव मुंबई में क्रमशः 50-150 रुपये प्रति क्विंटल घट गए। मसूर के आयात पर कृषि सेस को भी केंद्र सरकार ने 20 से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा, विदेशों से आवक होने के कारण भी कीमतों पर दबाव देखा गया।

वायदा कीमतों मेें आई तेजी के साथ ही दाल मिलों की हाजिर मांग से सूडान लाईन के काबुली चना में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 5,200-5,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान रूस लाईन के काबुली चना के भाव 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। 40 फीसदी आयात शुल्क होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

इसी तरह, से तंजानिया चना के भाव भी 25 रुपये बढ़कर 4,625 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि विभिन्न राज्यों में नेफेड खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है, लेकिन नीचे दाम पर मिलों की मांग में सुधार आया।

इस बीच दालों में खुदरा के साथ ही थोक में मांग कमजोर ही बनी रही, लेकिन खपत का सीजन शुरू होने के कारण आगे दालों की मांग में सुधार आने की उम्मीद है।

सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी दालों की खरीद कम कर रहे हैं।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 79 रुपये की तेजी आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसके भाव में 67 रुपये का सुधार आया।

27 जुलाई 2021

दिल्ली में बर्मा उड़द की कीमतों में तेजी, मसूर में नरमी और अरहर स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण मंगलवार को दिल्ली के नया बाजार में बर्मा उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई जबकि मसूर की कीमतों में नरमी आई।

केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मसूर के आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया है, इसके अलावा मसूर के आयात पर कृषि सेस को भी 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के साथ ही समर उड़द की घरेलू आवक होने के बावजूद भी चालू खरीफ में बुआई में 23 फीसदी की कमी आने से उड़द की कीमतों में सुधार आया। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 25-50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई।

बर्मा उड़द एफएक्यू के भाव दिल्ली में नई और पुरानी के बढ़कर क्रमश: 6,725 और 6,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उड़द एसक्यू नई और पुरानी के भाव भी बढ़कर क्रमश: 7,700 से 7,725 रुपये और 7,625 से 7,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से मध्य प्रदेश और कनाडा की मसूर की कीमतों में 50 से 100 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 6,600 प्रति क्विंटल रह गए। केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क में कटौती करने से मिलों की मांग कमजोर बनी रही।

विदेश से लगातार आवक बनी रहने से दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर देखी गई, जिससे बर्मा की लेमन अरहर नई और पुरानी के भाव 6,550 रुपये और 6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मुंबई में दाल मिलों की मांग से आयातित उड़द तेज, मसूर में नरमी और अरहर स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण मंगलवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क में कटौती से मसूर में नरमी आई।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी में 50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,600-6,650 रुपये और 6,500-6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि उड़द की आवक विदेश से बराबर बनी हुई है, साथ ही समर की देसी उड़द भी आ रही है लेकिन चालू खरीफ में बुआई में आई 23 फीसदी की गिरावट के कारण मिलों की हाजिर मांग में सुधार देखा गया।

केंद्र सरकार द्वारा मसूर के आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने, से मसूर की कीमतों पर दबाव देखा गया। कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पर तथा ऑस्ट्रेलियाई मसूर भाव मुंबई में क्रमशः 50-100 रुपये प्रति क्विंटल घट गए। मसूर के आयात पर कृषि सेस को भी केंद्र सरकार ने 20 से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा, विदेशों से आवक होने के कारण भी कीमतों पर दबाव देखा गया।
 
बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी के भाव क्रमश: 6,250 रुपये और 6,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। वहीं, अरुषा अरहर के भाव 6,050-6,100 रुपये पर पर स्थिर बने रहे।

इस बीच दालों में खुदरा के साथ ही थोक में मांग कमजोर ही बनी रही, लेकिन खपत का सीजन शुरू होने के कारण आगे दालों की मांग में सुधार आने की उम्मीद है।

सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी दालों की खरीद कम कर रहे हैं।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 7 रुपये की तेजी आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसके भाव में 6 रुपये का सुधार आया।

26 जुलाई 2021

दिल्ली में बर्मा उड़द तेज, कनाडा की मसूर में नरम तथा अरहर ​के भाव स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण सोमवार को दिल्ली के नया बाजार में बर्मा की उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई जबकि कनाडा लाईन की मसूर की कीमतों में नरमी आई। इस दौरान अरहर के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मसूर के आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया है, इसके अलावा मसूर के आयात पर कृषि सेस को भी 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के साथ ही समर उड़द की घरेलू आवक होने के बावजूद भी चालू खरीफ में बुआई में 23 फीसदी की कमी आने से उड़द की कीमतों में सुधार आया। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 50-100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई।

दिल्ली में उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,700 रुपये और 6,675 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि उड़द एसक्यू नई और पुरानी की कीमतें क्रमश: 7,650 और 7,600 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से कनाडा की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि मध्य प्रदेश लाईन की मसूर के दाम 6,800 प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क में कटौती करने से मिलों की मांग कमजोर देखी गई।

विदेश से लगातार आवक बनी रहने से दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर देखी गई, जिससे बर्मा की लेमन अरहर नई के भाव 6,550 रुपये और पुरानी के भाव 6,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 30 रुपये की गिरावट आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 38 रुपये का मंदा आया।

24 जुलाई 2021

दिल्ली में बर्मा की उड़द के साथ ही मसूर के दाम तेज, अरहर में नरमी

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से शनिवार को दिल्ली के नया बाजार में बर्मा की उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि अरहर की कीमतों में नरमी आई।

विदेश से लगातार आवक बनने एवं चालू खरीफ में बुआई 5.37 फीसदी बढ़ने के कारण दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर देखी गई, जिससे बर्मा की लेमन अरहर पुरानी के भाव में 50 रुपये का मंदा आकर भाव 6,300 से 6,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दूसरे और बर्मा लाईन की नई लेमन अरहर के दाम मुंबई से दिल्ली के लिए हाजिर डिलवरी के भाव 6,525 से 6,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति के बावजूद भी चालू खरीफ में बुआई में आई 23 फीसदी की कमी और चेन्नई-मुंबई में भाव सुधरने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 25-75 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है। घरेलू मंडियों में समर उड़द की आवक भी बराबर बनी हुई है।

दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने से कनाडा की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 6,725 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि मध्य प्रदेश की मसूर के भाव 6,800 प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मुंबई में आयातित अरहर और उड़द तेज, चना और काबूली चना में मंदा

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण शनिवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर और उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि चना के साथ ही काबूली चना के भाव में मंदा आया।

दालों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर है, लेकिन आगे खपत का सीजन शुरू होने के बाद इनकी मांग में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी दालों की खरीद कम कर रहे हैं।

विदेश से आवक होने एवं चालू खरीफ में बुआई 5.37 फीसदी बढ़ने के बावजूद भी मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,225 रुपये और 6,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। वहीं, अरुषा अरहर के भाव 6,050-6,100 रुपये पर पर स्थिर बने रहे।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुराने दोनों में दाल मिलों की मांग बढ़ने से भाव 50-50 रुपये बढ़कर क्रमशः 6,450 रुपये और 6,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि विदेश से उड़द की लगातार आवक बनी हुई है, साथ ही घरेलू मंडियों में समर की फसल आ रही है, लेकिन चालू खरीफ में उड़द की बुआई 23 फीसदी पिछे चल रही है।

रूस और सूडान लाईन के काबुली चना में हाजिर मांग कमजोर होने से 50-50 रुपये का मंदा आकर भाव क्रमश: 5,100 रुपये और 5,100 से 5,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि काबूली चना पर 40 फीसदी आयात शुल्क है, जिस कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

इसी तरह से तंजानिया के चना के भाव 25 रुपये घटकर 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे हुए चना की लगातार बिकवाली कर रही है, जिससे कीमतों पर दबाव है।

चालू खरीफ में फसलों की बुआई 9 फीसदी पिछड़ी, मानसूनी बारिश 2 फीसदी कम

नई दिल्ली। मानसूनी सीजन के करीब दो महीने बीतने को है, लेकिन देशभर में सामान्य की तुलना में 2 फीसदी कम बारिश हुई है, जिसका असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ रहा है। देशभर में पहली जून से 23 जुलाई 2021 तक बारिश सामान्य की तुलना में 2 फीसदी कम हुई है, जिस कारण खरीफ फसलों की बुआई 8.91 फीसदी पिछे चल रही है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 23 जुलाई तक देशभर में 367.6 मिलीमीटर बारिश ही हुई है, जबकि सामान्यत: इस दौरान 375.3 मिलीमीटर बारिश होती है। देश के 36 सबडिवीजनों में से 10 यानि की करीब 27 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 23 जुलाई 2021 को जारी आंकड़ों के अनुसार फसलों की बुआई 8.91 फीसदी पिछड़कर केवल 721.36 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 791.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में गन्ने और अरहर की बुआई तो बढ़ी है, लेकिन अन्य दलहन के साथ ही, धान तिलहन एवं मोटे अनाज और कपास की बुआई पिछड़ी है। गुजरात, राजस्थान और ओडिशा में चालू मानसूनी सीजन में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

कपास की बुआई चालू खरीफ में घटकर 108.93 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई 118.03 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी।

धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 207.65 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 222.88 लाख हेक्टेयर से कम है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 87.30 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 97.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में थोड़ी बढ़कर 38.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई 36.48 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों में उड़द की बुआई घटकर 22.13 और मूंग की 20.90 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 28.62 और 25.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 110.85 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 131.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में बाजरा की बुआई चालू खरीफ में 31.83 लाख हेक्टेयर में, ज्वार की 8.17 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 44.93 और 10.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मक्का की बुआई चालू खरीफ में 66.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 69.40 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में 145.81 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 162.68 लाख हेक्टेयर के मुकाबले कम है। तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बुआई 102.52 लाख हेक्टेयर में और मूंगफली की 36.10 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 112.34 और 41.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य तिलहन में शीसम की बुआई 5.72 लाख हेक्टेयर में और केस्टर की 0.31 लाख हेक्टेययर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 7.23 और 0.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 53.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई केवल 52.94 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

खरीफ में दलहनी फसलों की बुआई 10.18 फीसदी पिछे

नई दिल्ली। दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में 23 जुलाई 2021 तक 10.18 फीसदी घटकर 87.30 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 97.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में थोड़ी बढ़कर 38.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई 36.48 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों में उड़द की बुआई घटकर 22.13 और मूंग की 20.90 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 28.62 और 25.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

23 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में नरमी

नई दिल्ली। बढ़ी हुई कीमतों में दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण शुक्रवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

विदेश से लगातार आवक बनी रहने से दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर देखी गई, जिससे बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 75 रुपये घटकर 6,500 से 6,525 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के साथ ही समर उड़द की घरेलू आवक बढ़ने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 25-25 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से कनाडा के साथ ही मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,700 रुपये और 6,800 प्रति क्विंटल रह गए।

बढ़े भाव में दाल मिलों की मांग घटने से मुंंबई में बर्मा की अरहर और उड़द नरम

नई दिल्ली। बढ़े भाव में दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण शुक्रवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर और उड़द की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, हाल ही में प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण खरीफ दलहन की बुवाई में तेजी आई है, साथ ही विदेश से लगातार आपूर्ति बनी रहने के कारण इनकी कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीदे नहीं है। सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी दालों की खरीद कम कर रहे हैं।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,250 रुपये और 6,150 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। वहीं, अरुषा अरहर के भाव 6,050-6,100 रुपये पर पर स्थिर बने रहे।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुराने दोनों में दाल मिलों की खरीद घटने के कारण भाव 25-25 रुपये घटकर क्रमशः 6,400 रुपये और 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 27 रुपये की गिरावट आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसके भाव में 26 रुपये का मंदा आया।

22 जुलाई 2021

मुंबई में दाल मिलों की मांग बढ़ने से आयातित दालों के भाव बढ़े

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग अच्छी बनी रही रहने से गुरूवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर, उड़द, मसूर और काबुली चना की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

दालों में थोक के साथ ही खुदरा में मांग कमजोर ही बनी रही, जबकि आगे नीचे भाव में मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे इनके भाव में और सुधार आयेगा।

माना जा रहा है कि हाल ही में प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण खरीफ दलहन की बुवाई में तेजी आई है, साथ ही विदेश से लगातार आपूर्ति बनी रहने के कारण इनकी कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीदे नहीं है। वैसे भी सरकार की नीतियों को देखते हुए व्यापारी अभी दालों की खरीद कम कर रहे हैं।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,250 रुपये और 6,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। वहीं, अरुषा अरहर के भाव 6,050-6,100 रुपये पर पर स्थिर बने रहे। सूडान की नई अरहर के दाम भी 6,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुराने दोनों में दाल मिलों की खरीद बनी रहने के कारण भाव 25-25 रुपये बढ़कर क्रमशः 6,425 रुपये और 6,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

कनाडा की क्रिमसन किस्म के मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह पर तथा ऑस्ट्रेलिया मसूर के भाव मुंबई में 100 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो गए। आयातित मसूर का हाजिर स्टॉक कम होने से, एवं वर्तमान में बढ़े भाव का आयात होने के कारण ​कीमतों में सुधार आया।

रूस का काबुली चना 50 रुपये बढ़कर 5,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। जबकि सूडान के काबुली चना नए और पुराने के भाव क्रमश: क्रमश: 5,450 रुपये और 5,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। काबूली चना पर आयात शुल्क 40 फीसदी होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

वायदा कीमतों में आई तेजी से तंजानिया लाईन के चना में 100 रुपये की तेजी आकर भाव 4,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में अरहर, उड़द, मसूर के साथ ही काबूली चना और राजमा के भाव तेज

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बराबर बनी रहने से गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द, मसूर के साथ ही काबुली चना और राजमा की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

विदेश से लगातार आवक बनने के बावजूद भी अन्य बाजारों में दाम तेज होने से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 75 रुपये बढ़कर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। आगे के व्यापार में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 50 रुपये बढ़कर 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के बावजूद भी चेन्नई और मुंबई से मिले तेजी के संकेतों से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 50-125 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण कनाडा के साथ ही मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 50-100 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 6,800 प्रति क्विंटल हो गए।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और इंदौर लाईन के काबुली चना में हाजिर मिलों की मांग में हुई बढ़ोतरी के कारण भाव 100 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो गए। काबुली चना के आयात पर 40 फीसदी शुल्क होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

चीन के साथ ही मद्रास की चित्रा किस्म की राजमा में स्थानीय मांग बढ़ने से 200-500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 20 रुपये की तेजी आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 37 रुपये का सुधार आया।

21 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतें लगातार दूसरे दिन तेज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा दालों की स्टॉक लिमिट में छूट दिए जाने से दाल मिलों की हाजिर मांग बराबर बनी रही, जिससे बुधवार को भी दिल्ली के नया बाजार में लगातार दूसरे दिन अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

हालांकि दालों में खुदरा के साथ ही थोक में मांग कमजोर बनी हुई है, लेकिन नीचे दाम पर आगे दालों की खरीद बढ़ने का अनुमान है।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 150 रुपये बढ़कर 6,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 150 रुपये बढ़कर 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति बनी रहने के बावजूदभी चेन्नई और मुंबई से मिले तेजी के संकेतों से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों की कीमतों में 75-100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है। बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव दिल्ली में बढ़कर 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि एसक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 7,425 और 7,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण मध्य प्रदेश के साथ ही कनाडा लाईन की मसूर की कीमतों में 100—150 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 6,700 प्रति क्विंटल हो गए।

20 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा दालों की स्टॉक लिमिट में छूट दिए जाने से दाल मिलों की हाजिर मांग में सुधार आया, जिससे मंगलवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

हालांकि दालों में खुदरा के साथ ही थोक में मांग कमजोर बनी हुई है, लेकिन नीचे दाम पर आगे दालों की खरीद बढ़ने का अनुमान है। इसलिए मौजूदा भाव में और भी सुधार सकता है।

दाल मिलों की मांग में आये सुधार से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 150 रुपये तेज होकर 6,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 200 रुपये बढ़कर 6,400 से 6,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई और मुंबई से मिलें सुधार संकेतों से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों में 150-300 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। बर्मा उड़द एफएक्यू के भाव बढ़कर नई और पुरानी के 6,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। एसक्यू उड़द नई और पुरानी के दाम भी 250 से 300 रुपये तेज होकर भाव 7,300 से 7,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से कनाडा के साथ ही मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 150-150 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,650 रुपये और 6,550 प्रति क्विंटल हो गए।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 171 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 136 रुपये का सुधार आया।

19 जुलाई 2021

मुंबई में आयातित चना के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट, अन्य दालें स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण सोमवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित चना के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा दालों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद दलहन की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों से स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने को भी कहा गया है।

तंजानिया लाईन के चना के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 4,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, क्योंकि नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा और कांडला बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलिया लाईन के मसूर के दाम मुंबई में 50 से 75 रुपये प्रति क्विंटल घट गए। हालांकि, वर्तमान में आयात हुई मसूर के दाम तेज हैं, जबकि पहले से आयातित मसूर के दाम नीचे हैं। ऐसे में नीचे दाम पर मसूर की कीमतों में सुधार बन सकता है।

व्यापारियों को आयात होने वाली उड़द और अरहर को लेकर डर है, क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और अरहर, बर्मा से भारत के बीच रास्ते में है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बर्मा लाईन की लेमन अरहर, नई के साथ ही पुरानी की कीमतें क्रमशः 5,900 रुपये और 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। अरुषा अरहर के भाव भी 5,800 से 5,850 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमशः 6,100 रुपये और 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

रूस और सूडान लाईन के काबुली चना के भाव क्रमश: 4,850 रुपये और 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि काबूली चना के आयात पर 40 फीसदी आयात शुल्क है, जिस कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 5 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसके भाव में 7 रुपये का सुधार आया।

17 जुलाई 2021

दिल्ली में बर्मा की अरहर, उड़द में गिरावट, अन्य दालें स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने के कारण शनिवार को दिल्ली के नया बाजार में बर्मा की  अरहर के साथ उड़द की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

आयातक अपने आगामी माल के लिए दहशत में हैं क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और बर्मा से भारत के रास्ते में है। हाजिर बाजार में स्टॉकिस्टों की लगातार बिकवाली से कीमतों पर दबाव है।

दाल मिलों की मांग में आई कमी से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 100 रुपये घटकर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगे आयातित अरहर आयेगी, इसलिए मिलें सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही हैं जबकि बिकवाल बने हुए हैं। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 100 रुपये घटकर 6,200 से 6,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई और मुंबई से मिले कमजोर संकेतों के साथ ही चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति और समर की उड़द की आवक बराबर बनी रहने के कारण दाल मिलों की मांग कमजोर रही। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों में 25-50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।

दिल्ली में उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के दाम घटकर 6,300 से 6,325 रुपये और एसक्यू के भाव क्रमश: 7,100 और 7,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव 6,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। दालों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी रही। मध्य प्रदेश लाईन की मसूर के भाव 6,550 रुपये पर स्थिर बने रहे।

मानसून की बारिश कम होने से खरीफ फसलों की बुआई 11 फीसदी से ज्यादा पिछड़ी

नई दिल्ली। मानसूनी सीजन का डेढ़ महीना बीतने के बावजूद भी देशभर में सामान्य की तुलना में 7 फीसदी कम बारिश हुई है, जिसका असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ रहा है। देशभर में पहली जून से 16 जुलाई 2021 तक बारिश सामान्य की तुलना में 7 फीसदी कम हुई है, जिस कारण खरीफ फसलों की बुआई 11.56 फीसदी पिछे चल रही है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 16 जुलाई तक देशभर में 287.7 मिलीमीटर बारिश ही हुई है, जबकि सामान्य इस दौरान 308.4 मिलीमीटर बारिश होती है। देश के 36 सबडिवीजनों में से 14 यानि की करीब 41 फीसदी हिस्से में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है। कई राज्यों में हालात यह है कि किसानों को दोबारा से फसलों की बुआई करनी पड़ रही है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 16 जुलाई 2021 को जारी आंकड़ों के अनुसार फसलों की बुआई 11.56 फीसदी पिछड़कर केवल 611.89 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 691.93 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में गन्ने और अरहर की बुआई तो बढ़ी है, लेकिन अन्य दलहन के साथ ही तिलहन एवं मोटे अनाज और कपास की बुआई में पिछड़ रही है।

कपास की बुआई चालू खरीफ में घटकर 98.38 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुआई 113.01 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी।

धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 161.97 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 174.44 लाख हेक्टेयर से कम है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 70.64 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 80.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में थोड़ी बढ़कर 32.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई 32.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों में उड़द की बुआई घटकर 17.87 और मूंग की 16.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 23.29 और 20.66 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 91.34 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 115.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में बाजरा की बुआई चालू खरीफ में 22.02 लाख हेक्टेयर में, ज्वार की 6.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 36.60 और 9.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मक्का की बुआई चालू खरीफ में 58.86 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 63.80 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में 128.91 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 149.35 लाख हेक्टेयर के मुकाबले कम है। तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बुआई 93.23 लाख हेक्टेयर में और मूंगफली की 30.34 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 105.84 और 37.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य तिलहन में शीसम की बुआई 4.15 लाख हेक्टेयर में और केस्टर की 0.16 लाख हेक्टेययर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 5.01 और 0.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 53.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई केवल 52.82 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मुंबई : आयातित अरहर, उड़द के साथ ही मसूर मंदी, चना और काबूली चना स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण शनिवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि चना के साथ ही काबूली चना के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा दालों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद दलहन की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। केन्द्र सरकार ने राज्यों के साथ यह जानकारी भी साझा की है कि क्या उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा विकसित पोर्टल पर स्टॉकिस्टों द्वारा घोषित स्टॉक तथा दलहन स्टॉक बैंक से लिए गए ऋण या फिर आयातकों द्वारा आयातित मात्रा के बीच मेल खा रही है या नहीं। राज्य सरकारों से स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने को भी कहा गया है।

व्यापारियों को आयात होने वाली उड़द और अरहर को लेकर डर है, क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और अरहर, बर्मा से भारत के बीच रास्ते में है। केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक लिमिट लगाने के बाद से स्टॉकिस्ट, कॉरपोरेट्स और बड़ी कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बर्मा लाईन की लेमन अरहर, नई के साथ ही पुरानी की कीमतों में भी 100—100 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमशः 5,900 रुपये और 5,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अरुषा अरहर के भाव भी 100 रुपये घटकर 5,800 से 5,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतों में 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमशः 6,100 रुपये और 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा और कांडला बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलिया लाईन के मसूर के दाम मुंबई में 50 रुपये प्रति क्विंटल घट गए।

रूस और सूडान लाईन के काबुली चना के भाव क्रमश: 4,850 रुपये और 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। काबूली चना के आयात पर 40 फीसदी आयात शुल्क है, जिस कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

इसी तरह, तंजानिया लाईन के चना के भाव 4,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।

15 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द और मसूर के साथ ही काबूली चना में गिरावट

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने के कारण गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द और मसूर के साथ ही काबूली चना की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

दाल मिलों की मांग में आई कमी से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 50 रुपये घटकर 6,150 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगे आयातित अरहर आयेगी, इसलिए मिलें सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही हैं जबकि बिकवाल बने हुए हैं। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमतें 6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 50 रुपये घटकर 6,4350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई और मुंबई से मिले कमजोर संकेतों के साथ ही चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति और समर की उड़द की आवक बराबर बनी रहने के कारण दाल मिलों की मांग कमजोर रही। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों में 50-100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। दिल्ली में उड़द एफएक्यू के भाव नई और पुरानी के क्रमश: 6,400 और 6,375 रुपये प्रति क्विंटल रहे। एसक्यू के भाव नई और पुरानी के क्रमश: 7,150 और 7,100 रुपये प्रति​ क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण मध्य प्रदेश और कनाडा लाईन की मसूर की कीमतों में 25-75 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,550 रुपये और 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। दालों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी रही।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और इंदौर लाईन के काबुली चना में हाजिर मिलों की खरीद कमजोर होने से 100 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आया। काबुली चना में आयात शुल्क 40 फीसदी होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

मुंबई में आयातित मसूर की कीमतों में गिरावट, अन्य दालों के दाम स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बुधवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा दालों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद दलहन की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। केन्द्र सरकार ने राज्यों के साथ यह जानकारी भी साझा की है कि क्या उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा विकसित पोर्टल पर स्टॉकिस्टों द्वारा घोषित स्टॉक तथा दलहन स्टॉक के लिए बैंक से लिए गए ऋण या फिर आयातकों द्वारा आयातित मात्रा के बीच मेल खा रही है या नहीं। राज्य सरकारों से स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने को भी कहा गया है।

व्यापारियों को आयात होने वाली उड़द और अरहर को लेकर डर है, क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और अरहर, बर्मा से भारत के बीच रास्ते में है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलिया लाईन के मसूर के दाम मुंबई में 50 रुपये प्रति क्विंटल घट गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बर्मा लाईन की लेमन अरहर, नई के साथ ही पुरानी की कीमतें क्रमशः 6,050 रुपये और 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। इसी तरह से अरुषा अरहर के भाव भी 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतें क्रमशः 6,150 रुपये और 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रही।

रूस और सूडान लाईन के काबुली चना के भाव क्रमश: 4,850 रुपये और 5,000 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। हालांकि काबूली चना के आयात पर 40 फीसदी आयात शुल्क है, जिस कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

इसी तरह, तंजानिया लाईन के चना के भाव 4,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है, जिस कारण चना की कीमतों पर दबाव है।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 37 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसके भाव में 5 रुपये का सुधार आया।

14 जुलाई 2021

पहली अक्टूबर 21 से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन में 310 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान - इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2021 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान देश में 310 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है, जोकि चालू पेराई सीजन के बराबर ही है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने सेटेलाइट एमेंज से प्राप्त गन्ना क्षेत्र के आधार पर चीनी का पहला उत्पादन अनुमान जारी किया है। देशभर में गन्ने की बुआई लगभग 54.55 लाख हेक्टेयर में होने का अनुमान है, जोकि इसके पिछले साल के 52.88 लाख हेक्टेयर की तुलना में 3 फीसदी अधिक है।

प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की बुआई बढ़कर 23.12 लाख हेक्टेयर में होने का अनुमान है, जोकि इसके पिछले साल के 23.07 लाख हेक्टेयर से कम है। राज्य में गन्ने में रिकवरी बढ़ने का अनुमान है, लेकिन एथेनॉल के उत्पादन में गन्ने की खपत को हटाने के बाद राज्य में चीनी का उत्पादन 119.27 लाख टन होने का अनुमान है।

महाराष्ट्र में गन्ने की बुआई चालू सीजन में 11 फीसदी बढ़कर 12.75 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल राज्य में 11.48 लाख हेक्टेयर में बुआई हो पाई थी। चालू वर्ष के दौरान प्री-मानसून बारिश बहुत अच्छी हुई है, साथ ही मानसूनी बारिश भी अच्छी हो रही है। ऐसे में राज्य में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ेगी। अत: पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में चीनी का उत्पादन 121.28 लाख टन होने का अनुमान है।

कर्नाटक में गन्ने की बुआई पिछले साल के 5.01 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.22 लाख हेक्टेयर में हुई है। अत: राज्य में आगामी पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 48.74 लाख टन होने का अनुमान है। अन्य राज्यों में पहली अक्टूबर 2021 से शुरू होने वाले पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 54.60 लाख टन होने का अनुमान है।

चालू पेराई सीजन 2020-21 में देश में चीनी का उत्पादन 307 लाख टन का हो चुका है, जबकि दो लाख टन चीनी का उत्पादन विशेष सीजन में तमिलनाडु और कर्नाटक में होने का अनुमान है। अत: चालू पेराई सीजन में चीनी का कुल 309 लाख टन का उत्पादन होने की उम्मीद है।

दिल्ली में अरहर की कीमतों में नरमी, अन्य दालों के दाम स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण बुधवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक लिमिट लगाएं जाने से व्यापारी स्टॉक को कम कर रहे हैं। सरकार की नीतियों में लगातार बदलाव के कारण दलहन उद्योग पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, कोरोनावायरस को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन जैसे उपायों के कारण दालों की खपत पर भी असर पड़ा है।

दाल मिलों की मांग में आई कमी से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 100 रुपये घटकर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगे आयातित अरहर आयेगी, इसलिए मिलें सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही हैं। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमत 50 रुपये घटकर 6,100 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 100 रुपये घटकर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई और मुंबई से मिले कमजोर संकेतों के साथ ही चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति और समर की उड़द की आवक बराबर बनी रहने के कारण दाल मिलों की मांग कमजोर रही। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव 6,475 से 6,500 रुपये और एसक्यू नई और पुरानी की कीमतें 7,100 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतें क्रमश: 6,575 और 6,575 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रही।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 3 रुपये का सुधार, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 14 रुपये का मंदा आया।

13 जुलाई 2021

जून में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 17 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। जून महीने में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 17 फीसदी की गिरावट आकर कुल आयात 996,014 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जून में इनका आयात 1,198,339 टन का हुआ था।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मई के मुकाबले जून में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 20 फीसदी की कमी आई है, क्योंकि घरेलू बाजार में कुल उपलब्धता ज्यादा थी।

चालू तेल वर्ष के पहले आठ महीनों नवंबर-20 से जून-21 के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में पांच फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात  8,674,012 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 8,260,088 टन का हुआ था।

केंद्र सरकार ने 29 जून, 2021 को अधिसूचना जारी कर क्रूड पाम ऑयल और आरबीडी पामोलिन, आरबीडी पाम ऑयल और अन्य पर आयात शुल्क में कमी, जिससे सीपीओ पर प्रभावी शुल्क 5.50 फीसदी कम हो गया, जबकि आरबीडी पामोलिन पर शुल्क 8.25 फीसदी और आरबीडी पाम ऑयल 18.15 फीसदी 30 सितंबर 2021 तक कम हो गया।

केंद्र सरकार द्वारा 30 जून, 2021 को जारी अधिसूचना के अनुसार 31 दिसंबर, 2021 तक आरबीडी पामोलिन और पाम ऑयल के freely आयात की अनुमति देने का निर्णय लिया। इन दोनों अधिसूचनाओं का भारत में पाम उत्पादों के आयात पर असर पड़ेगा, जो घरेलू रिफाइनर और तिलहन उत्पादकों के हित के लिए हानिकारक होगा। यह शून्य शुल्क पर साफ्टा समझौते के तहत नेपाल और बांग्लादेश से परिष्कृत तेलों के आयात के द्वार भी खोलेगा, जो पूर्वी और उत्तरी भारत में रिफाइनरी उद्योग को प्रभावित करेगा।

दिल्ली में उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में नरमी

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण मंगलवार को दिल्ली के नया बाजार में उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

दालों में थोक साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर बनी रही। सरकार की नीतियों में लगातार बदलाव के कारण दलहन उद्योग पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, कोरोनावायरस को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन जैसे उपायों के कारण दालों की खपत पर भी असर पड़ा है।

चेन्नई और मुंबई से मिले कमजोर संकेतों के साथ ही चेन्नई बंदरगाह पर नियमित विदेशी आपूर्ति और समर की उड़द की आवक बराबर बनी रहने के कारण दाल मिलों की मांग कमजोर रही। दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी दोनों में 25-50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू के भाव नई और पुरानी के 6,500 से 6,475 रुपये और एसक्यू उड़द के 7,100 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,575 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। दालों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी रही।

दाल मिलों की सीमित मांग के कारण लेमन अरहर के भाव 6,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

इसी तरह से, चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमत 6,150 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 26 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 26 रुपये का सुधार आया।

12 जुलाई 2021

दिल्ली में मसूर और चना की कीमतों में नरमी, अन्य दालों के दाम स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में मसूर और चना की कीमतों में नरमी आई, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

सरकार की नीतियों में लगातार बदलाव के कारण दलहन उद्योग पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, कोरोनावायरस को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन जैसे उपायों के कारण दालों की खपत पर भी असर पड़ा है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 25-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। दालों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी रही।

चेन्नई और मुंबई में कीमतों में आई नरमी के कारण दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू दोनों नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,500 से 6,550 रुपये और 7,150 से 7,225 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की मांग कमजोर होने से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमत 6,150 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 85 रुपये की गिरावट आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 106 रुपये का मंदा आया।

मुंबई में चना के साथ ही काबूली चना के भाव घटे, अरहर के बढ़े, मसूर और उड़द स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण सोमवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में चना के साथ ही काबूली चना की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि अरहर के भाव में सुधार आया। मसूर और उड़द के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा दालों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद व्यापार सीमित मात्रा में ही हो रहा है। व्यापारियों को आयात होने वाले मालों को लेकर डर है, क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और अरहर, बर्मा से भारत के बीच रास्ते में है।

नीचे दाम पर दाल मिलों में मांग में आए सुधार से बर्मा लाईन की लेमन अरहर, नई के साथ ही पुरानी की कीमतों में भी 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमशः 6,200 रुपये और 6,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।   जबकि, अरुषा अरहर के भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। सूडान लाईन की अरहर पुरानी और नई के भाव क्रमशः 6,350 रुपये और 6,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलिया लाईन के मसूर के दाम मुंबई में स्थिर बने रहे।

रूस और सूडान लाईन के काबुली चना में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 4,900-4,950 रुपये और 5,050-5,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

इसी तरह, तंजानिया लाईन के चना के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 4,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, क्योंकि नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।

विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतें क्रमशः 6,250 रुपये और 6,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 86 रुपये की गिरावट आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसके भाव में 106 रुपये का मंदा आया।

10 जुलाई 2021

मुंबई में अरहर, मसूर और चना के साथ ही काबूली चना के भाव घटे, उड़द के स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण शनिवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में अरहर, मसूर के साथ ही चना और काबूली चना की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि उड़द के दाम स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा दालों पर स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बाद व्यापार सीमित मात्रा में ही हो रहा है। व्यापारियों को आयात होने वाले मालों को लेकर डर है, क्योंकि बड़ी मात्रा में उड़द और अरहर, बर्मा से भारत के बीच रास्ते में है।

मिलों की कमजोर मांग से बर्मा लाईन की लेमन, नई के साथ ही पुरानी की कीमतों में भी 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमशः 6,175-6,200 रुपये और 6,050-6,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अरुषा अरहर के दाम मंंबई में 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के दाम मुंबई में क्रमश: 6,250 से 6,275 रुपये और 6,200 से 6,225 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलिया लाईन के मसूर के दाम मुंबई में 25-75 रुपये प्रति क्विंटल घर गए।

रूस और सूडान लाईन के काबुली चना में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 4,950-5,000 रुपये और 5,100-5,150 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि काबूली चना आयात शुल्क 40 फीसदी होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे।

इसी तरह, तंजानिया लाईन के चना के भाव में 75 रुपये की गिरावट आकर भाव 4,525-4,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, क्योंकि नेफेड विभिन्न राज्यों में खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।

09 जुलाई 2021

चालू खरीफ में दलहन की बुआई 1.61 फीसदी पिछड़ी

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने का असर चालू खरीफ में दलहन की फसलों की बुआई पर पड़ा है। कृषि मंत्रालय द्वारा 9 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार देशभर में दालों की बुआई 1.61 फीसदी घटकर 52.49 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई 53.35 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दिल्ली में उड़द की कीमतों में नरमी, अन्य दालों के दाम स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में उड़द की कीमतों में नरमी आई, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

चेन्नई और मुंबई में कीमतों में आई नरमी के कारण दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू दोनों नई और पुरानी में 25-50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई। बर्मा से नियमित उड़द की आवक बनी हुई है साथ ही, मध्य प्रदेश और गुजरात में समर उड़द की आवक भी बढ़ रही है। बर्मा उड़द एफएक्यू के भाव नई और पुरानी के दिल्ली में 6,500 रुपये और एसक्यू के भाव नई और पुरानी के क्रमश: 7,200 और 7,100 रुपये प्रति क्विंटल पर रह गए।

बर्मा में उड़द एफएक्यू की कीमतों में 20 डॉलर की नरमी आकर भाव 830 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि एसक्यू के भाव 940 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बने रहे।

दालों में थोक साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर ही बनी हुई है, लेकिन आगे मांग में सुधार आने का अनुमान है।

दाल मिलों की मांग बनी रहने से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमत 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 6,550 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

लेमन अरहर नई के भाव बर्मा में 850 डॉलर और पुरानी के 800 डॉलर प्रति टन पर स्थिर रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर के भाव क्रमश: 6,650 और 6,650 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

राजस्थानी चना के भाव दिल्ली में 5,000 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

08 जुलाई 2021

उड़द एसक्यू और काबूली चना की कीमतें मुंबई में तेज, दिल्ली में चना और मसूर नरम

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से गुरूवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित उड़द के साथ ही काबूली चना की कीमतों में तेजी दर्ज की गई जबकि अरहर और उड़द एफएक्यू की कीमतों में नरमी आई।

दिल्ली में चना और मसूर की कीमतों में नरमी आई, जबकि अन्य दालों के भाव लगभग स्थिर बने रहे।

केंद्र सरकार द्वारा दालों की कीमतों को काबू करने के लिए दालों पर स्टॉक सीमा लगाने के विरोध में कई राज्यों में व्यापारियों द्वारा विरोध के कारण व्यापार सीमित मात्रा में ही हो रहा है। उधर आयातकों में दहशत है क्योंकि आयातित उड़द और अरहर की बड़ी खेप बर्मा और भारत के रास्ते में है। दालों में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है, लेकिन व्यापारियों का मानना है कि भाव नीचे होने के कारण आगे दालों की मांग में सुधार आने का अनुमान है।

दाल मिलों की हाजिर मांग सीमित होने के कारण लेमन अरहर नई और पुरानी के दाम 50 रुपये घटकर 6,150 रुपये और अरुषा अरहर के भाव मुंबई में 5,925 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनी रहने के बावजूद भी मिलों की अच्छी मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतों में 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमशः 6,325 रुपये और 6,275 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उड़द एफएक्यू के भाव मुंबई में 50 रुपये घटकर 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से कनाडा की मसूर के भाव मुंद्रा बंदरगाह पर 6,350 रुपये, कांडला बंदरगाह पर 6,325 रुपयेू और हजीरा बंदरगाह पर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। आस्ट्रेलिया मसूर के दाम मुंबई में 6,625 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

रुस और सुडान के काबूली चना में मिलों की मांग से कीमतों में 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। काबूली चना पर 40 फीसदी सीमा शुल्क लगने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

दिल्ली में चना की कीमतों में 50 रुपये का मंदा आकर राजस्थानी चना के भाव 4,975 से 5,000 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मसूर के भाव दिल्ली में 50 रुपये घटकर 6,600 से 6,625 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

07 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में तेजी, राजस्थानी चना नरम

नई दिल्ली। नीचे दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग में आये सुधार से बुधवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई जबकि राजस्थानी चना की कीमतों में 25 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज की गई।

दाल मिलों की मांग में आये सुधार से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 100 रुपये बढ़कर 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि इन भाव में कोई बड़ा व्यापार नहीं हुआ। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमत 200 रुपये बढ़कर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 150 रुपये बढ़कर 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उधर बर्मा में लेमन अरहर पुरानी की कीमतों में 50 डॉलर का मंदा आकर भाव 770 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि लेमन अरहर नई के भाव 850 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में लगातार आयातित आवक बनने के साथ ही मध्य प्रदेश और गुजरात में समर उड़द की आवक बनने के बावजूद भी दाल मिलों की नीचे दाम में मांग बढ़ने से दिल्ली में उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी के भाव में 50 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।

बर्मा में उड़द एसक्यू की कीमतों में 30 डॉलर की गिरावट आकर भाव 920 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि एफएक्यू उड़द के भाव 850 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर में 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,650 और 6,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में राजस्थानी चना के भाव में 25 रुपये का मंदा आकर भाव 5,000 से 5,025 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,900 से 4,925 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 29 रुपये की गिरावट आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 33 रुपये का मंदा आया।

नीचे भाव में मिलों की मांग बढ़ने से मुंबई में अधिकांश दालों के दाम तेज

नई दिल्ली। नीचे दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से बुधवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर, उड़द, मसूर के साथ ही काबूली चना की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

केंद्र सरकार द्वारा दालों की कीमतों को काबू करने के लिए दलहन पर स्टॉक सीमा लगाने के विरोध में कई राज्यों की मंडियां लगभग बंद होने के कारण व्यापार सीमित मात्रा में हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार ने इस आदेश को वापस नहीं लिया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

आयातकों में दहशत है क्योंकि आयातित उड़द और अरहर की बड़ी खेप बर्मा और भारत के रास्ते में है। दालों में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है, लेकिन व्यापारियों का मानना है कि भाव नीचे होने के कारण आगे दालों की मांग में सुधार आने का अनुमान है।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से लेमन अरहर नई और पुरानी की कीमतों में 50-100 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,200 रुपये और 6,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। अरुषा अरहर के दाम भी 50 रुपये तेज होकर भाव 5,900-5,950 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सूडान की नई और पुरानी अरहर के दाम क्रमश: 6,500 और 6,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

विदेश से चेन्नई में लगातार आवक बनी रहने के बावजूद भी मिलों की अच्छी मांग से बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी की कीमतों में 75-125 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमशः 6,300 रुपये और 6,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। घरेलू मंडियां बंद होने के कारण समर उड़द की आवक सीमित मात्रा में ही हुई।

दाल मिलों की हाजिर मांग सुधरने से कनाडा की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह के साथ ही आस्ट्रेलिया मसूर के दाम मुंबई में 25 से 75 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो गए। हालांकि पहले से आयातित मसूर और हाजिर में हो रही आयातित मसूर की कीमतों के बीच अंतर है, जिससे भाव में और सुधार आने का अनुमान है, वैसे भी अभी तक सरकार ने मसूर के आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है।

इसी तरह, रुस और सुडान के काबूली चना में मिलों की मांग से कीमतों में 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। काबूली चना पर 40 फीसदी सीमा शुल्क लगने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 28 रुपये की गिरावट आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसके भाव में 33 रुपये का मंदा आया।

06 जुलाई 2021

दिल्ली में अरहर, उड़द, चना और मसूर की कीमतों में तेजी

नई दिल्ली। नीचे दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग में आये सुधार से मंगलवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द, चना के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

केंद्र सरकार द्वारा दालों की कीमतों को काबू करने के लिए दालों पर स्टॉक सीमा के विरोध में कई राज्यों की मंडियां लगभग बंद होने के कारण व्यापार सीमित मात्रा में हो रहा है। दालों में थोक साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर ही बनी हुई है।

उड़द और अरहर के आयातकों में दहशत है क्योंकि आयातित उड़द और अरहर की बड़ी खेप बर्मा और भारत के रास्ते में है। केंद्र सरकार के आदेश में कहा गया है कि 15 मई के बाद आयातित दलहन, थोक विक्रेताओं पर स्टॉक लिमिट निकासी की तारीख से 45 दिनों के बाद से लागू होगी।

दाल मिलों की मांग में आये सुधार से बर्मा की लेमन अरहर के भाव 50 रुपये बढ़कर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि इन भाव में कोई बड़ा व्यापार नहीं हुआ। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमत 50 रुपये बढ़कर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 50 रुपये बढ़कर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में लगातार आयातित आवक बनने के साथ ही मध्य प्रदेश और गुजरात में समर उड़द की आवक बनने के बावजूद भी दाल मिलों की नीचे दाम में मांग बढ़ने से दिल्ली में उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी के भाव में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आकर भाव क्रमश: 5,450 से 6,500 रुपये और 7,000 से 7,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर में 50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,625 और 6,625 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कनाडा से कुल 61,500 टन मसूर की ताजा आवक काकीनाडा और मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंची है जोकि सारा माल आयातकों ने गोदामों में रखा हुआ है।

राजस्थानी चना के भाव 75 रुपये बढ़कर दिल्ली में 5,025 से 5,050 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 50 रुपये बढ़कर 4,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 42 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 70 रुपये का सुधार आया।

05 जुलाई 2021

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के शेष हिस्सों में शनिवार तक मानसून पहुंचने का अनुमान — आईएमडी

नई दिल्ली।  भारत मौसम विज्ञान विभाग, आईएमडी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के शेष हिस्सों के साथ शनिवार के आसपास पहुंचने की संभावना है।

उत्तर भारत के राज्यों में पारा सामान्य से ऊपर चल रहा है तथा मानसून की बेरुखी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं, क्योंकि देश के कई राज्यों में जहां खरीफ की फसलों की बुआई पिछड़ रही है, वहीं बुआई हो चुकी फसलें भी सूखने के कगार पर है। उत्तर भारत के राज्यों के अलावा मध्य भारत के भी कई राज्यों में पिछले दस, बारह दिनों से बारिश नहीं हो रही है। माना जा रहा कि अगर अगले आठ-दस दिन और बारिश नहीं हुई तो फिर फसलें सूखने लगेंगे। खरीफ में धान और गन्ने को छोड़ अन्य फसलों का उत्पादन काफी हद तक मानूसनी बारिश पर निर्भर करता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान सस्थान, आईएआरआई के डा. जेपी एस ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट) ने बताया कि उत्तर भारत के राज्यों में कपास की बुआई सबसे पहले होती है, तथा इसका उत्पादन काफी हद तक बारिश पर ही निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि बारिश नहीं होने से कपास के साथ ही अन्य फसलों की बुआई तो प्रभावित हो ही रही है, साथ ही अगर मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो फिर इसका असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर भी पड़ेगा।

पिछले करीब दो हफ्ते से मानसूनी बादलों के आगे बढ़ने पर ब्रेक लग चुका है। इसके पीछे पश्चिमी विक्षोभ को वजह माना जा रहा है। इस वजह से पश्चिम की ओर से तेज और गर्म हवाएं चल रही हैं। ये हवाएं पूर्व की ओर से आने वाली मानसूनी हवाओं को ब्लॉक कर आगे बढ़ने से रोक रही हैं इसी वजह से मानसूनी हवाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। आईएमडी के अनुसार उत्तर भारत के शेष राज्यों में शनिवार तक मानसून पहुंचने का अनुमान है।

मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार एक ट्रफ रेखा उत्तर प्रदेश की तलहटी से बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और असम होते हुए नागालैंड तक फैली हुई है। पश्चिमी विक्षोभ को पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के उत्तरी हिस्सों पर एक चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। पंजाब और इससे सटे पाकिस्तान के हिस्सों पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। एक उत्तर दक्षिण ट्रफ रेखा पूर्वोत्तर बिहार से झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल में दक्षिण ओडिशा तट तक फैली हुई है। एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र श्रीलंका और आसपास बना हुआ है।

अगले 24 घंटों के दौरान कहां बारिश होने का अनुमान


अगले 24 घंटों के दौरान, केरल, तटीय कर्नाटक, रायलसीमा के कुछ हिस्सों, छत्तीसगढ़, तेलंगाना के कुछ हिस्सों, पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक और आंध्र प्रदेश का उत्तरी तटके कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। बिहार के कुछ हिस्सों, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा के अलग-अलग हिस्सों, दक्षिण मध्य महाराष्ट्र, कोंकण और गोवा, पश्चिमी हिमालय और दक्षिणपूर्व राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश संभव है। पंजाब के कुछ हिस्सों, हरियाणा के 1-2 हिस्सों, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

पिछले 24 घंटों के दौरान देशभर में कहां-कहां हुई बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, रायलसीमा, तमिलनाडु के अंदरूनी हिस्सों और गोवा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई। शेष पूर्वोत्तर भारत, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, केरल, तटीय कर्नाटक, दक्षिण कोंकण और गोवा, गंगीय पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और मध्य और दक्षिण पूर्व राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश हुई। झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों, आंतरिक कर्नाटक, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश हुई।

दिल्ली में चना नरम, मसूर मजबूत, मुंबई में आयातित दालें घटी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार दलहन पर स्टॉक लिमिट लगाने के फैसले से दालों की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। हालांकि इसके विरोध में देशभर के व्यापारियों में रोष है, तथा इसके विरोध में मंडियों में व्यापार सीमित मात्रा में ही हो रहा है।

दिल्ली में राजस्थानी चना के भाव में 75 रुपये का मंदा आकर भाव 4,950 से 4,975 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मध्य प्रदेश के चना में 50 रुपये का मंदा आकर भाव 4,875 से 4,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

व्यापारियों के अनुसार चना में ज्यादा मंदा मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए, तथा घबराहट में बिकवाली नहीं करनी चाहिए। आगे इसके भाव में फिर सुधार आने की उम्मीद है।

मसूर के भाव मेमं दिल्ली में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मूंग के दाम दिल्ली में 6,250 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मुंबई में तंजानिया चना के भाव 150 रुपये का मंदा आकर भाव 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। सूडान और रुष सके काबूली चना के भाव में 200 से 250 रुपये का मंदा आकर भाव क्रमश: 5,100 रुपये और 4,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे गए।

लेमन अरहर के भाव मुंबई में 50 रुपये घटकर 6,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि अरुषा अरहर के दाम 5,900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 100 रुपये घटकर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

02 जुलाई 2021

दिल्ली : अरहर और मसूर की कीमतों में सुधार, अन्य दालों के भाव स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से शुक्रवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर के साथ ही मसूर की कीमतों में सुधार आया, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की मांग में सुधार आने से लेमन अरहर के भाव 50 रुपये बढ़कर 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। आगे आयातित अरहर की आवक बढ़ेगी, इसके बावजूद भी नीचे भाव में मांग में सुधार आया। चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमतें 100 रुपये बढ़कर 6,125 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 6,450 से 6,475 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

नीचे भाव पर दाल मिलों की मांग सुधरने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर में 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,700 और 6,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में लगातार आयातित आवक बनने के साथ ही मध्य प्रदेश और गुजरात में समर उड़द की आवक बनने से दिल्ली में उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,500 से 6,550 रुपये और 7,000 से 7,125 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 59 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 56 रुपये का सुधार आया।

मुंबई : चना, काबूली चना, मसूर और अरुषा अरहर के भाव तेज, उड़द स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से मुंबई में शुरूआती कारोबार में शुक्रवार को चना, काबूली चना के साथ ही मसूर और अरुषा अरहर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई जबकि उड़द के दाम स्थिर बने रहे।

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 75.15 स्तर पर पहुंच गया है, जिससे दालों का आयात महंगा हो जाएगा। भारतीय, मौसम विभाग, आईएमडी का कहना है कि अगले 7 दिनों में मानसून के आगे बढ़ने की संभावना नहीं है, इससे खरीफ फसल की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

दालों में खुदरा के साथ ही थोक में मांग कमजोर है लेकिन व्यापारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में दालों की खुदरा के साथ ही थोक मांग बढ़ने की उम्मीद है।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से मुंबई में अरुषा अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर भाव 6,000 से 6,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि बर्मा की लेमन अरहर पुरानी और नई के भाव क्रमश: 6,000 रुपये और 6,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग में आये सुधार से कनाडा की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह पर और आस्ट्रेलियाई की मसूर के भाव मुंबई में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो गए। पहले से आयातित मसूर और हाजिर में हो रही आयातित मसूर की कीमतों के बीच अंतर है, जिससे भाव में और भी सुधार आने का अनुमान है, वैसे भी अभी तक सरकार ने मसूर के आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। कनाडा से कुल 61,500 टन मसूर काकीनाडा और मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंची है, और आयातकों ने गोदामों में रख लिया है।

घरेलू मंडियों में चना की कीमतों में आये सुधार से मुंबई में तंजानिया के चना के साथ ही सुडान के काबूली चना के भाव 50—50 रुपये बढ़कर क्रमश: 4,750 और 5,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। रुस के काबूली चना के भाव 5,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मुंबई में बर्मा की उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतें क्रमश: 6,300 रुपये और 6,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 69 की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसके भाव में 68 रुपये का सुधार आया।

01 जुलाई 2021

मुंबई में कनाडा की मसूर के भाव सुधरे, बर्मा की उड़द में नरमी

नई दिल्ली, 1 जुलाई (कमोडिटीज कंट्रोल) दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से मुंबई में शुरूआती कारोबार में गुरूवार को कनाडा की मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि बर्मा की उड़द के भावों में नरमी आई।

विदेशों से चेन्नई बंदरगाह पर नियमित उड़द आने के साथ ही दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतों में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 6,300 रुपये और 6,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगे के व्यापार में, बर्मा की उड़द एफएक्यू की कीमत जून-जुलाई शिपमेंट की 6,250 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।
 
दाल मिलों की हाजिर मांग में आये सुधार से कनाडा की मसूर के भाव मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह पर 25 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार आया। पहले से आयातित मसूर और हाजिर में हो रही आयातित मसूर की कीमतों के बीच अंतर है, जिससे भाव में और सुधार आने का अनुमान है, वैसे भी अभी तक सरकार ने मसूर के आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। कनाडा से कुल 61,500 टन मसूर काकीनाडा और मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंची है, और आयातकों ने गोदामों में रख लिया है।

आगे आयात बढ़ने की संभवना के बीच दाल मिलों की कमजोर मांग से मुंबई में लेमन के साथ अरुषा अरहर के दाम क्रमश: 6,250 रुपये और 5,950 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली : मसूर और चना की कीमतों में सुधार, अन्य दालों के भाव स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग में सुधार आने के कारण गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में मसूर और चना की कीमतों में सुधार आया, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर बने रहे।

नीचे भाव पर दाल मिलों की मांग सुधरने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर में 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,675 और 6,675 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पहले से आयात किए हुए सौदो की मसूर और वर्तमान में आयात हो रही मसूर की कीमतों में अंतर है, इसलिए नीचे भाव में हल्का सुधार और भी आने का अनुमान है। वैसे भी सरकार ने अभी तक मसूर के आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। कनाडा से कुल 61,500 टन मसूर की ताजा आवक काकीनाडा और मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंची है जोकि सारा आयातकों ने गोदामों में रखा है।

चना में दाल मिलों की मांग बढ़ने से 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार आकर राजस्थानी चना के भाव 5,150 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 5,075 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में लगातार आयातित आवक बनने के साथ ही मध्य प्रदेश और गुजरात में समर उड़द की आवक बनने से दिल्ली में उड़द एफएक्यू और एसक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,500 से 6,550 रुपये और 7,000 से 7,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की मांग सीमित होने के कारण लेमन अरहर के भाव 6,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। आगे आयातित अरहर आयेगी, इसलिए इसमें ग्राहकी काफी कमजोर रही।

इसी तरह से, चेन्नई हाजिर बाजार में अरहर की कीमतें 6,000 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जुलाई डिलीवरी के भाव 6,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

स्थानीय मिलों की मांग बढ़ने से चीन की चित्रा किस्म की राजमा 200 रुपये बढ़कर 12,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 57 रुपये की तेजी आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 60 रुपये का सुधार आया।