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28 जून 2022

धान के साथ ही अन्य फसलों के मंडियों के भाव 28 जून 2022 के

धान के साथ ही अन्य फसलों के मंडियों के भाव 28 जून 2022 के

 गेहू-1881-1925/-

चना-4280-4437/

ग्वार-4480-4661/-09-कि.

मूंग-4400/-

सरसों-5825-6251/-200-कि.

खल बिनोला-3750/- 0.98kg

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Paday 1509
3200 to 3832
Moti Ram DhanParkash A/7
Gangoh Mandi UP

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Sarso hanumangarh town 5900-6425
Barley 2550-2600

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Gango Mandi New 1509 arrivel
10000 Bags
 Rate 3525 to 3861

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Aligarh Mandi
Arrival -400 bags
1509-3450 to 3850

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Bulandshahr Mandi
New 1509-3001-3931
Aarival -3000 bags
Moustcher-15-28

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Karnal 1509 3731

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सिरसा मंडी ग्रुप
दिनांक 28-06-2022

नरमा = 8000-10400/-
कनक = 1950-2000/-

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गढ़मुक्तेश्वर मंडी यूपी
न्यू 1509 कंपाइन
3501@3881
5000bags
Ek dheri
3901
28.06.2022

 

चालू खरीफ में दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाज एवं धान की रोपाई पिछड़ी

नई दिल्ली। देश के कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में जून में मानसून के साथ ही प्री मानसून की बारिश कम होने के कारण खरीफ फसलों की शुरूआती बुआई 23.81 फीसदी पिछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 24 जून तक देशभर में खरीफ फसलों की बुआई केवल 140.52 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 184.44 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी

मंत्रालय के अनुसार खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में अभी तक केवल 19.59 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 36.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दलहन की बुआई चालू खरीफ में घटकर 8.70 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 13.62 लाख हेक्टेयर में इनकी बुआई हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई 2.35 लाख हेक्टेयर में, उड़द की बुआई 0.93 लाख हेक्टेयर में और मूंग की बुआई 3.38 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 5.21 लाख हेक्टेयर में, 1.94 लाख हेक्टेयर में और 5.13 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 11.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 18.06 लाख हेक्टेयर में इनकी बुआई हो चुकी थी। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में अभी तक 60 हजार हेक्टेयर में, बाजरा 1.27 लाख हेक्टेयर में और मक्का की 8.13 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 1.01 लाख हेक्टेयर में, 3.99 लाख हेक्टेयर में और 11.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

इसी तरह से चालू खरीफ सीजन में तिलहन फसलों की बुआई 11.78 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 22.41 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई मात्र 2.78 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 12.50 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। इसी तरह से मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 7.62 लाख हेक्टयेर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 8.72 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

कपास की बुआई चालू खरीफ में घटकर 31.83 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 37.34 लाख हेक्टेयर से कम है।

हालांकि गन्ने की बुआई जरुर चालू खरीफ में बढ़कर 50.74 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 50.16 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

विदेश में आई तेजी से उड़द एवं अरहर के भाव बढ़े, चना एवं मूंग में नरमी

नई दिल्ली। बर्मा के स्थानीय बाजार में उड़द के साथ ही अरहर की कीमतों में आई तेजी से घरेलू बाजार में इनकी कीमतें बढ़ गई। देसी मसूर में भी मिलों की मांग से सुधार आया, जबकि चना एवं मूंग की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मानसूनी बारिश की कमी के साथ ही आयात पड़ते महंगे से अरहर और उड़द के दाम और भी बढ़ने की उम्मीद है।

बर्मा में आज उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतोें में 20-20 डॉलर की तेजी आकर भाव क्रमश: 940 डॉलर और 1,040 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए। इस दौरान लेमन अरहर की कीमतों में भी बर्मा में 20 डॉलर की तेजी आकर भाव 840 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए।सूत्रों के अनुसार भारतीय आयतकों ने उड़द एफएक्यू और एसक्यू के लगभग 50-60 कंटेनरों का जुलाई डिलीवरी के लिए व्यापार 870 डॉलर और 970 डॉलर प्रति टन, एफओबी के आधार पर किया। लेकिन लेमन अरहर में भारतीय आयातकों ने कोई व्यापार नहीं किया।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार मानसून अब आगे बढ़ना शुरू करेगा तथा कई राज्यों में भारी बारिश होने का अनुमान है। गुजरात, दक्षिणी राजस्थान और दक्षिण पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में मूसलाधार बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव होने की आशंका है।

आईएमडी के अनुसार पहली जून से 27 जून तक देशभर में सामान्य की तुलना में 10 फीसदी कम बारिश हुई है, तथा खरीफ दलहन के प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश सामान्य की तुलना में कम होने से अरहर और उड़द की बुआई प्रभावित होने का डर है। जानकारों के अनुसार दलहन उत्पादक राज्यों में 10 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो फिर अरहर और उड़द की कीमतों में बड़ी तेजी बन सकती है। वैसे भी केंद्रीय पूल में अरहर के साथ ही उड़द का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है, जबकि विदेश में दाम तेज होने से आयात पड़ते महंगे हैं।

चना दाल और बेसन में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, लेकिन देशभर में मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद इनकी मांग में सुधार आयेगा। मूंग की एमएसपी पर खरीद सीमित मात्रा में ही हो रही है, जबकि समर में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव में 100-150 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 7,550 रुपये और 8,275 से 8,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

आंध्रप्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 200 रुपये तेज होकर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में एवक्यू हाजिर डिलीवरी के दाम 125 रुपये तेज होकर भाव 8,225 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 7,175 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि इस दौरान कनाडा की मसूर के दाम 7,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

कनाडा की मसूर के भाव मुंबई और मुंद्रा बदंरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई मसूर की कीमतें स्थिर बने रही। ऑस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में जहां 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, वहीं कनाडा की मसूर के भाव इस दौरान 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर टिके रहे

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 100 रुपये तेज होकर 6,700 रुपये प्रति क्विंटल पर हो गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर 6,550 से 6,750 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए गए।

इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 100 रुपये तेज होकर 6,350 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में चना की कीमतों में 25-25 रुपये का मंदा राजस्थानी चना के दाम 4,800 रुपये एवं मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,725 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

इंदौर मंडी में बढ़िया क्वालिटी मूंग के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 5,900 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि पुरानी मूंग के भाव 5,100 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

रोक के बावजूद 18 लाख टन गेहूं का निर्यात, सरकारी खरीद 187.45 लाख टन पर सिमटी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा 13 मई को निर्यात पर रोक लगाने के बावजूद भी 22 जून तक देश से 18 लाख टन गेहूं का निर्यात हो चुका है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव सुधांशु पांडे ने बताया कि हम जरुरतमंद देशों को गेहूं का निर्यात जारी रखेंगे। चालू रबी विपणन सीजन 2022-23 के दौरान गेेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 187.45 लाख टन पर ही सिमट गई है।

सुधांशु पांडे ने बर्लिन, जर्मनी में "वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एकता" पर एक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में बताया कि निर्यात पर रोक लगाने के बावजूद भी भारत ने 13 मई ससे 22 जून के दौरान वियतनाम और यमन सहित अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, इज़राइल, इंडोनेशिया, मलेशिया, नेपाल, ओमान, फिलीपींस, कतर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, सूडान, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड और यूएई आदि देशों को गेहूं का निर्यात किया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर लगी रोक के बावजूद भी हमने कई देशों को खाद्य पदार्थों की आपूर्ति करना जारी रखा है। हमने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता की कई खेप (शिपमेंट) भेजी है। महामारी के दौरान, हमने अफगानिस्तान, कोमोरोस, जिबूती, इरिट्रिया, लेबनान, मेडागास्कर, मलावी, मालदीव, म्यांमार, सिएरा लियोन, सूडान, दक्षिण सूडान, सीरिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और अन्य, अपनी खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहित दुनिया भर के कई देशों को हजारों टन गेहूं, चावल और दाल के रूप में खाद्य सहायता प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा हाल ही में गेहूं निर्यात पर रोक लगाने का निर्णय अनिवार्य रूप से घरेलू उपलब्धता के साथ-साथ कमजोर देशों की उपलब्धता की रक्षा के लिए लिया गया था, जिनकी आपूर्ति बाजार की ताकतों द्वारा सुनिश्चित नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत ने जीटूजी के माध्यम से पड़ोसी देशों और जररुरमंद देशों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने और पहले से की गई आपूर्ति प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता जारी रखी है। पिछले साल, भारत ने रिकॉर्ड 70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था, जबकि आम तौर पर, हम लगभग 20 लाख टन निर्यात करते हैं जो वैश्विक गेहूं व्यापार का लगभग 1 फीसदी है।

भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई के अनुसार चालू रबी में पंजाब से 96.10 लाख टन, मध्य प्रदेश से 46 लाख टन, हरियाणा से 41.85 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 3.33 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने गेहूं की खरीद का लक्ष्य 444 लाख टन का तय किया था।

24 जून 2022

विदेश में उड़द मंदी, घरेलू बाजार में मिलाजुला रुख, चना की कीमतों में सुधार

नई दिल्ली। बढ़ी हुई कीमतों में भारतीय आयातकों के साथ ही स्थानीय मांग कमजोर होने के कारण गुरूवार को बर्मा में उड़द की कीमतों में गिरावट आई, जबकि लेमन अरहर के दाम स्थिर बने रहे। चना के साथ ही देसी मसूर के भाव घरेलू मंडियों में बढ़ गए, लेकिन कनाडा की मसूर नरम हो गई। दाल मिलों की सीमित मांग से अरहर और उड़द में मिलाजुला रुख रहा।

लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद बढ़ी हुई कीमतों में स्थानीय एवं भारतीय आयातकों की मांग कमजोर होने से बर्मा के स्थानीय बाजार में उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में 20-20 डॉलर की गिरावट आकर भाव क्रमश: 920 डॉलर और 1,020 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ के स्तर पर आ गए। लेमन अरहर की कीमतें 820 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ के पूर्वस्तर पर स्थिर बनी रही। जानकारों के अनुसार मानसून की प्रगति को देखते हुए भारतीय आयातक मौजूदा भाव पर खरीद नहीं कर रहे हैं। वैसे भी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात महंगा पड़ रहा है।

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर आज 78.30 के स्तर पर आ गया, जिससे अरहर, उड़द एवं मसूर के आयात पड़ते और महंगे हो गए।

अरहर और उड़द दाल में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर है, तथा अभी इनकी मांग सामान्य की तुलना में कम ही रहेगी। इसलिए इनके भाव में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि आयात पड़ते महंगे होने के साथ ही स्टॉकिस्ट चालू खरीफ सीजन में इनकी बुआई में कमी आने की आशंका मानकर भाव तेज करना चाहते हैं। जानकारों के अनुसार अरहर के साथ ही उड़द की बुआई की तस्वीर जुलाई मध्य तक साफ हो जायेगी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 23 जून तक देशभर में मानसूनी  सामान्य की तुलना में 2 फीसदी ही कम हुई है, लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के दलहन उत्पादक क्षेत्रों में अभी बारिश सामान्य की तुलना में काफी कम हुई है, जोकि चितंजनक है।

चना की कीमतों में सुधार आया है, व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर जहां बिकवाली कम आ रही है, वहीं जुलाई में बेसन की मांग में सुधार आने के आसार है। वैसे भी चना के दाम एमएसपी से काफी नीचे बने हुए हैं। इसलिए इसकी कीमतों में हल्का सुधार और भी बन सकता है। मसूर की कीमतों में अगले महीने से भाव में सुधार आ सकता है, लेकिन मूंग का उत्पादन अनुमान चालू समर सीजन में ज्यादा है। उत्पादक मंडियों में मूंग का बकाया स्टॉक भी अच्छा है इसलिए मूंग की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।

मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर का बकाया स्टॉक कम होने के बावजूद भी मिलों की मांग कमजोर होने से भाव में 25 रुपये की गिरावट आकर दाम 6,150 से 6,175 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दूसरी और अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के दाम स्थिर ही बने रहे। तंजानिया की अरुषा अरहर के साथ ही मटवाना अरहर के दाम क्रमश: 5,450-5,500 रुपये और 5,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। इस दौरान मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 5,350 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर रही। मलावी अरहर के दाम 4,950 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 6,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर के भाव 6,400 से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर बने रहे।

इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,150 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में बर्मा उड़द एसक्यू के भाव के भाव में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 8,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, इस दौरान उड़द एफएक्यू के भाव 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

आंध्रप्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 7,800 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर पर हुआ।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतों में 100 रुपये की गिरावट आकर दाम 7,150 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 7,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि इस दौरान कनाडा की मसूर के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 7,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कनाडा की मसूर के भाव मुंबई और मुंद्रा बदंरगाह के साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर की कीमतें स्थिर बने रही। आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में जहां 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, वहीं कनाडा की मसूर के भाव इस दौरान 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर टिके रहे।

दिल्ली में चना की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर राजस्थानी चना के भाव 4,875 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के दाम 4,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश लाईन की मूंग के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 6,350 से 6,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, इस दौरान बिहार लाईन की मोटी मूंग के भाव 50 रुपये घटकर 6,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

ग्वार सीड और ग्वार गम में तेजी, मंदी मानसून पर करेगी निर्भर, अप्रैल में निर्यात बढ़ा

नई दिल्ली। ग्राहकी कमजोर होने से हाल ही में ग्वार सीड और गम की कीमतों में मंदा आया है। राजस्थान के ग्वार सीड उत्पादक क्षेत्रों में बारिश अच्छी हुई है, लेकिन हरियाणा और गुजरात के उत्पादक क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई। ऐसे में ग्वार सीड की कीमतों में आगामी दिनों में तेजी, मंदी उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश कैसी होती है, इस पर भी निर्भर करेगी। चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले महीने अप्रैल में देश से ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 7.20 फीसदी बढ़कर 29,134 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 27,176 टन का ही हुआ था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 362 करोड़ रुपये का हुआ है, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 213 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान देश से ग्वार गम 37.17 फीसदी बढ़कर 3.21 लाख टन का हुआ है जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2020-21 के 2.34 लाख टन से ज्यादा है। मूल्य के हिसाब से वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 3,335 करोड़ रुपये का हुआ है, जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 1,949 करोड़ रुपये की तुलना में ज्यादा है।

प्लांटों की मांग कमजोर होने से ग्वार सीड की कीमतों में गुरूवार को 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज की गई। हरियाणा की ऐलनाबाद मंडी में ग्वार सीड के भाव 4,400 से 5,050 रुपये और सिरसा में 4,600 से 5,081 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार रहे। व्यापारियों के अनुसार ग्वार सीड के प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में हाल ही अच्छी बारिश हुई है, लेकिन गुजरात और हरियाणा के ग्वार सीड उत्पादक क्षेत्रों में अभी तक बारिश सामान्य की तुलना में काफी कम हुई है, जिससे इन राज्यों में ग्वार सीड की बुआई तेजी नहीं पकड़ पाई है। ऐसे में आगामी दिनों में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश कैसी होती है। इस पर भी निर्भर करेगी।

राजस्थान के कृषि निदेशालय के अनुसार शुरूआती चरण में राज्य में 20 जून तक 35 हजार हेक्टेयर में ही ग्वार सीड की बुआई हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 84 हजार हेक्टेयर की तुलना में कम है। गुजरात और हरियाणा में ग्वार सीड की बुआई अभी शुरू ही हुई है।

चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में बासमती के साथ ही गैर बासमती चावल का निर्यात घटा

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में कीमतें तेज होने के कारण चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले महीने अप्रैल में बासमती के साथ ही गैर बासमती चावल के निर्यात में क्रमश: 11.17 और 19.69 फीसदी की कमी आई है।

घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतें तेज बनी हुई है, हालांकि उत्पादक मंडियों मेें इस समय साठी धान की आवक हो रही है, लेकिन प्रमुख फसल आने में अभी समय है। व्यापारियों के अनुसार खाड़ी देशों की आयात मांग बराबर बनी हुई है, इसलिए पूसा 1,509 के साथ ही 1,121 किस्म के बासमती चावल सेला और स्टीम के दाम अभी तेज ही बने रहने की उम्मीद है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल में बासमती चावल का निर्यात 11.17 फीसदी घटकर केवल 3.18 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3.58 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से चालू वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में गैर बासमती चावल का निर्यात 19.69 फीसदी घटकर केवल 13.54 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल अप्रैल में इसका निर्यात 16.86 लाख टन का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार हालांकि मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 2,457 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल के दौरान 2,225 करोड़ रुपये मूल्य का ही निर्यात हुआ था। हालांकि चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में गैर बासमती चावल का निर्यात मूल्य के हिसाब से घटकर 3,687 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 4,445 करोड़ रुपये का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान देश से बासमती चावल का कुल निर्यात 39.47 लाख टन का ही हुआ था, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2021-22 के 46.30 लाख टन से 14.75 फीसदी कम है। मूल्य के हिसाब से भी वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान देश से बासमती चावल का निर्यात 26,415 करोड़ रुपये का ही हुआ था, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष के 29,848 करोड़ रुपये कम है।

गैर बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान बढ़कर 172.60 लाख टन का हुआ था, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 202-22 के दौरान केवल 131.49 लाख टन से ज्यादा है। मूल्य के हिसाब से भी वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान देश से गैर बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 45,650 करोड़ रुपये का हुआ, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष के 35,557 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

कॉटन के उत्पादन अनुमान में फिर कटौती, 315.32 लाख गांठ के होने का अनुमान - उद्योग

नई दिल्ली। बेमौसम बारिश और कई राज्यों में पिंक बावलर्म से हुए नुकसान के कारण चालू सीजन में कॉटन के उत्पादन अनुमान में भारी कमी आई है। अत: उद्योग ने एक बार कॉटन के उत्पादन अनुमान में 8.31 लाख गांठ, एक गांठ -170 किलो की कटौती कर दी। अत: चालू सीजन 2020-21 में देश में 315.32 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि इससे पहले अनुमान में 323.63 लाख गांठ का अनुमान जारी किया था।

कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया, सीएआई के अनुसार पहले के उत्पादन अनुमान में लोवर राजस्थान में एक लाख गांठ, गुजरात में 4.24 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 2.46 लाख गांठ, तेलंगाना में 2.51 लाख गांठ तथा कर्नाटक में 80 हजार गांठ की कमी आने का अनुमान है। हालांकि ऊपरी राजस्थान में एक लाख गांठ, मध्य प्रदेश में एक लाख गांठ के साथ ही आंधप्रदेश में 70 हजार गांठ का उत्पादन इससे पहले के अनुमान से ज्यादा होने के आसार है।

चालू फसल सीजन में कॉटन का आयात बढ़कर 15 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 10 लाख गांठ से ज्यादा है। एसईए के अनुसार मई अंत तक 7.44 लाख गांठ कॉटन के आयात की शिपमेंट भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुकी है।

कॉटन का निर्यात चालू सीजन में 40 लाख गांठ होने का अनुमान है, तथा मई अंत तक 38 लाख गांठ कॉटन के निर्यात की शिपमेंट हो चुकी है।

पहली अक्टूबर 2021 से मई 2022 के अंत तक देशभर की मंडियों में कॉटन की आवक 288.38 लाख गांठ की हो चुकी है, जोकि कुल उत्पादन अनुमान का 91 फीसदी है। मिलों के पास मई अंत में करीब 70 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, जोकि करीब 81 दिनों की खपत के बराबर है।

मई अंत में कॉटन कारर्पोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई एवं महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी, जिनर्स, ट्रेडर्स और एमसीएक्स के पास मई अंत में करीब 34.22 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है। उद्योग के अनुसार चालू सीजन के अंत में 30 सितंबर 2022 को कॉटन का बकाया स्टॉक 47.16 लाख गांठ बचने का अनुमान है।

व्यापारियों के अनुसार बढ़ी हुई कीमतों में मिलों की मांग कम होने से घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें रुक गई है, क्योंकि यार्न के भाव, कॉटन की तुलना में नीचे बने हुए हैं। ऐसे में कॉटन की मौजूदा भाव पर खरीद करने पर मिलों को डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी ही बनी रहने का अनुमान है। गुजरात की मंडियों में शनिवार को ए ग्रेड कॉटन के दाम 98,500 से 1,00,000 रुपये, बी ग्रेड किस्म की कॉटन के भाव 98,000 से 98,500 रुपये और एवरेज ग्रेड की कॉटन के भाव 96,500 से 98,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो क्वालिटीनुसार बोले गए।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई पिछड़ी, प्री मानसून की बारिश से सुधार की उम्मीद

नई दिल्ली। राजस्थान में चालू सीजन में खरीफ फसलों की बुआई अभी पिछे चल रही है, लेकिन पिछले दो तीन दिनों से जिस तरह से राज्य के अधिकांश भागों में प्री मानसून की बारिश हुई है, उसे देखते हुए आगामी दिनों में बुआई में तेजी आने का अनुमान है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 20 जुलाई तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई केवल 9.05 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 13.83 लाख हेक्टेयर से कम है। खरीफ सीजन में राज्य में औसतन 160.99 लाख हेक्टेयर में बुआई होती है, अत: राज्य में अभी तक कुल 5.52 फीसदी क्षेत्र में ही बुआई हो पाई है।

कपास की बुआई जरुर चालू सीजन में बढ़कर 5.16 लाख हेक्टयेर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 4.96 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 1.84 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.41 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। ग्वार सीड की बुआई 35 हजार हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 84 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में 96 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। दालों की बुआई 1.06 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 4.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से तिलहनी फसलों की बुआई 1.84 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.42 लाख हेक्टेयर से कम है।

16 जून 2022

धान, नरमा, ग्वार सीड और मूंग के भाव 16 जून के

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Narma Boli 12205

बरवाला नरमा 10501

 गढ़मुक्तेश्वर मंडी यूपी
न्यू 1509 कंपाइन
3101@3421
1509✋
No
2000bags
धान सरबती
1900@2050
200 Bags
16.06.2022


MANDI- BULANDSHAHER UP

Aarival- 4'00. Bags.

New 1509.
Rate- 3301 se 3726.


MANDI- NARELA. DELHI

1121. HAND.
Rate- 4591.

1509. HAND.
Rate- 4100. SIRSA


Narma 🌤️ 12170
Wheat 🌾 1950--2020
 

 Narela Mandi mung 5150-5200-6252
 

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Guwar Boli 5400

रामगंजमंडी 16 जून 2022 धनिया आवक 1500 market same

 धनिया बदामी-10100/10600
घनिया- ईगल- 10700/11200
स्कुटर धनिया- 11300/11800 रगंदारक्वालिटी-11700/13500


सोयाबीन  6400/6650
सरसों- 6200/6550
चना - 4300/4550
कलौजी- 11500/12300
ईसबगोल -11500/13300
 गेहू -1900/2050
  मेथी -4500/5350
अलसी -6000/6250
मसूर -6000/6250
अश्वगंधा 9000/29000

कमजोर मांग से सोयाबीन और डीओसी में मंदा, मानसून अनुकूल रहा तो और घटेंगे भाव

नई दिल्ली। विदेश में आई गिरावट के साथ ही सोया डीओसी में निर्यात मांग कमजोर बनी रहने से सोमवार को घरेलू मंडियों में जहां सोयाबीन की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई, वहीं डीओसी कीमतों में 500 से 1,000 रुपये प्रति टन का मंदा आया। व्यापारियों के अनुसार मौसम अनुकूल रहा तो आगे इनकी कीमतों में और भी गिरावट आयेगी।

मध्य प्रदेश में सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी दाम घटकर 6,700 से 6,850 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार रह गए, जबकि सोया डीओसी की कीमतें कमजोर होकर 50,000 से 52,500 रुपये प्रति टन रह गई।

व्यापारियों के अनुसार डीओसी के निर्यात में आई भारी गिरावट के कारण घरेलू बाजार में सोयाबीन का बकाया स्टॉक ज्यादा बचा हुआ है, जबकि मानसूनी बारिश उत्पादक राज्यों में अच्छी हुई तो फिर सोयाबीन की बुआई बढ़ने का ही अनुमान है। सोया डीओसी का निर्यात बीते वर्ष में मंई अंत तक 17.05 लाख टन का हुआ था, जबकि चालू सीजन में मई अंत तक इसका निर्यात केवल 5.62 लाख टन का ही हुआ है। माना जा रहा कि चालू सीजन के अंत तक इसका निर्यात केवल 7 लाख टन ही होने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार मई में सोया डीओसी के निर्यात में भारी कमी आई थी, जबकि इस समय भी निर्यात मांग काफी कमजोर है।  

विश्व बाजार में सोया डीओसी के दाम नीचे होने के साथ ही केंद्र सरकार द्वारा सोया डीओसी के आयात को मंजूरी दिए जाने से भारतीय सोया डीओसी में निर्यात के साथ ही घरेलू मांग कमजोर हो गई। अत: सोयाबीन का उत्पादन बढ़ने से घरेलू बाजार में सोयाबीन की पेराई पिछले साल की तुलना में कम रही है। जिस कारण उत्पादक मंडियों में सोयाबीन का बकाया स्टॉक चालू सीजन में अंत में ज्यादा बचेगा, जबकि पिछले साल सीजन के अंत में बकाया स्टॉक नहीं के बराबर बचा हुआ था।

मई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 15 फीसदी घटा - साल्वेंट

नई दिल्ली। मई में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 15 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 1,061,416 टन का ही हुआ, जबकि इसके पिछले साल मई में इनका आयाात 1,249,648 का हुआ था।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार मई में जहां खाद्य तेलों का आयात 1,005,547 टन का हुआ, वहीं इस दौरान अखाद्य तेलों का आयात 55,869 टन का हुआ।

चालू तेल वर्ष के पहले सात महीनों नवंबर-21 से मई-22 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में एक फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 7,768,990 टन का हुआ, जबकि इसके पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 7,677,998 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार पॉम तेल की कीमतों में हाल ही में गिरावट आई है, क्योंकि इंडोनेशिया ने पॉम तेल के निर्यात पर लगी रोक को हटा लिया है, साथ ही निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार निर्यात परमिट जारी कर रही है। इंडोनेशिया सरकार ने पाम तेल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लेवी को 575 डॉलर से घटाकर 488 डॉलर कर दिया गया है। इससे इंडोनेशिया से निर्यात बढ़ेगा जिससे विश्व बाजार में इसकी कीमतों पर असर पड़ेगा, तथा मौजूदा कीमतों में और मंदा आने का अनुमान है।

भारतीय बंदरगाह पर मई में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में अप्रैल की तुलना में मिलाजुला रुख बना रहा। मई में आरबीडी पॉमोलीन के भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,769 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि अप्रैल में इसके औसतन भाव 1,748 डॉलर प्रति टन थे। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल के भाव अप्रैल के 1,791 डॉलर प्रति टन से बढ़कर मई में 1,811 डॉलर प्रति टन हो गए। हालांकि इस दौरान क्रुड सोयाबीन तेल और क्रुड सनफ्लावर तेल की कीमतों में गिरावट आई। क्रुड सोयाबीन तेल के भाव जून में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 1,889 और क्रुड सनफ्लावर तेल के भाव 2,134 डॉलर प्रति टन रह गए। अप्रैल में इनके भाव क्रमश: 1,909 डॉलर और 2,155 डॉलर प्रति टन थे।

अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में सुधार, दलहन आयात में हुई बढ़ोतरी

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण बुधवार को आयातित के साथ ही देसी अरहर, उड़द, चना के साथ ही मसूर की कीमतों में सुधार आया। जानकारों के अनुसार बढ़ी हुई कीमतों में दालों में ग्राहकी कमजोर है, इसलिए इनके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार तो नहीं है, लेकिन आयात पड़ते महंगे होने के कारण हल्की तेजी जरुर बन सकती है। वैसे आगामी दिनों में दालों की तेजी, मंदी काफी हद तक मानसूनी की चाल पर भी निर्भर करेगी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात राज्य के कुछ और हिस्सों, दक्षिण मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों, पूरे मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्से, विदर्भ और तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के कुछ और हिस्से, पश्चिम मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, ओडिशा के कुछ और हिस्से, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, पूरे उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ और हिस्से में मानसून सक्रिय होगा।

जून महीने के पहले दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन देशभर में अभी भी सामान्य के मुकाबले 32 फीसदी कम बारिश हुई है। खरीफ दलहन के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान एवं कर्नाटक के साथ ही गुजरात में बारिश सामान्य की तुलना में कम दर्ज की गई। इस दौरान देशभर के 36 सब डिवीजनों में से जहां 16 में सामान्य से कम हुई वहीं 14 में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है।

वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान दलहन के आयात में 9.44 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 26.99 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में 24.66 लाख टन दालों का आयात हुआ था। चालू वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान जहां अरहर और उड़द का आयात लगभग दोगुने के करीब हुआ है, जबकि मसूर के आयात में कमी आई है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान अरहर का आयात बढ़कर 8.40 लाख टन का और उड़द का 6.11 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान इनका आयात क्रमश: 4.42 लाख टन और 3.44 लाख टन का ही हुआ था। मसूर का आयात वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान घटकर 6.67 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में इसका आयात 11.16 लाख टन का हुआ था। मूंग का आयात वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 1.95 लाख टन का, चना का 1.40 लाख टन का और काबुली चना का 61 हजार टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष के दौरान इनका आयात क्रमश: 81 हजार टन, 1.40 लाख टन और 1.53 लाख टन का हुआ था।

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 78.11 के स्तर पर आ गया, इससे अरहर, उड़द और मसूर के आयात पड़ते और महंगे हुए हैं।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 25 रुपये तेज होकर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की पुराने और नई अरहर के भाव में 50-50 रुपये की तेजी आकर दाम क्रमशः 6,325 रुपये और 6,425 से 6,525 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में, बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की मांग सुधरने से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 50 रुपये बढ़कर 6,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इस दौरान मुंबई में अफ्रीकी लाईन की अरहर के भाव स्थिर बने रहे। तंजानिया की अरुषा और मटवाना अरहर के भाव क्रमश: 5,450 से 5,500 रुपये और 5,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 5,350 से 5,400 रुपये  और मलावी अरहर के भाव 4,950 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बनी रही।

आंध्र प्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 100 रुपये बढ़कर 7,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ।

चेन्नई में दाम तेज होने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव 75 से 100 रुपये तेज होकर क्रमश: 7,300 रुपये और 7,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।  

उत्पादक मंडियों ममें समर उड़द की आवक बनी रहने के बावजूद भी मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतों में 100 रुपये की तेजी आकर भाव 7,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में उड़द एफएक्यू के भाव 7,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, जबकि एसक्यू की कीमतों में शाम के सत्र में 50 रुपये का मंदा आकर भाव 7,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग सुधरने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश की मसूर के भाव में 25-25 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 7,075 और 7,025 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

कनाडा एवं आस्ट्रलियाई मसूर के भाव कंटेनर में स्थिर बने रहे। कनाडा की मसूर के भाव कंटेनर में 7,250 रुपये और आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में चना की कीमतों में 75-75 रुपये की तेजी आकर राजस्थानी चना के दाम 4,950 रुपये एवं मध्य प्रदेश के चना की कीमतें 4,875 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

तंजानिया के चना के भाव में मुंबई में 50 रुपये की तेजी आकर दाम 4,350 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में उत्तर प्रदेश लाईन की मूंग के दाम 50 रुपये कमजोर होकर भाव 6,200 से 6,300 रुपये एवं मध्य प्रदेश लाईन की मूंग के भाव 25 रुपये घटकर 6,375 से 6,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

ग्वार सीड और ग्वार गम के भाव में हल्की नरमी के आसार, पिछले वित्त वर्ष में निर्यात बढ़ा

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में तो बढ़ोतरी हुई है, लेकिन प्लांटों के पास बकाया स्टॉक ज्यादा होने के साथ ही मानसून सामान्य रहने की संभावना से ग्वार सीड की कीमतों में हल्की गिरावट आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार आगामी दिनों में इसके भाव में 150 से 200 प्रति क्विंटल की और गिरावट आयेगी।

उत्पादक मंडियों में बुधवार को ग्वार सीड के भाव 5,000 से 5,400 रुपये और ग्वार गम के भाव 10,400 से 10,800 रुपये प्रति क्विंटल रहे। ग्वार कोरमा के भाव 4,100 से 4,225 रुपये और ग्वार चूरी के दाम 2,600 से 2,700 रुपये प्रति क्विंटल रहे। देशभर की मंडियों में ग्वार सीड की दैनिक आवक छह से सात हजार बोरियों की हो रही है, जबकि ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हर महीने 25 से 26 हजार टन का हो रहा है।

जानकारों के अनुसार आगामी दिनों में ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करेगी। ग्वार सीड के प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में मानसून सक्रिय हो गया है जबकि अन्य कई हिस्सों में चालू सप्ताह के अंत तक मानसून पहुंचने का अनुमान है। हरियाणा के कई हिस्सों में चालू सप्ताह के अंत तक प्री मानसून की बारिश होने के आसार है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 3.21 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 2.34 लाख टन का ही हुआ था। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान देश से 3.63 लाख टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था। मार्च महीने में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 26 हजार टन का हुआ।

मूल्य के हिसाब से वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 3,334 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष के दौरान के 1,949 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था। जानकारों के अनुसार कोरोना के कारण पिछले वित्त वर्ष के दौरान निर्यात में कमी आई थी।

11 जून 2022

मिलों की कमजोर मांग से दालों में गिरावट, मानसून के आगे बढ़ने की स्थितियां अनुकूल

नई दिल्ली। मानसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल होने के कारण दलहन में मिलों की खरीद दूसरे दिन भी कमजोर बनी रही, जिससे घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी दालों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार हाजिर बाजार में नकदी की किल्लत होने के कारण दालों में थोक के साथ ही खुदरा में मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जिस कारण इनकी कीमतोें में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार हर सप्ताह दालों की कीमतों की समीक्षा कर रही है, जिस कारण मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद करे रहे हैं। वैसे भी पिछले दिनों दालों की कीमतों में आई गिरावट से आयातकों को भी नुकसान उठाना पड़ा था। यही कारण है कि इस समय आयातक नए आयात सौदे भी सीमित मात्रा में ही कर रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, जिससे अरहर और उड़द के साथ ही मसूर के आयात पड़ते महंगे हो रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 77.82 के स्तर पर आ गया।

हाल ही में साबुत दालों की कीमतें तो तेज हुई थी, लेकिन इसके मुकाबले प्रसंस्कृत दालों के दारम नहीं बढ़ पाये। सरकारी नीतियों के कारण पिछले कई सालों से स्टॉकिस्टों एवं दाल मिलों को नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए भी मिलर्स दालों की खरीद में सावधानी बरत रहे हैं।

व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी अरहर और उड़द का बकाया स्टॉक अच्छा है, जबकि अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के दाम अभी नीचे बने हुए हैं, तथा आगे इन देशों से आयात भी बढ़ेगा। हालांकि बर्मा से आयात महंगा है, इसलिए इनके भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है लेकिन अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

भारतयी मौसम विभाग के अनुसार पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन पहले ही बन चुका है तथा यह मॉनसून को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। मॉनसून फेज में चलता है। कभी गति धीमी होती है तो कभी यह बहुत तेजी से आगे बढ़ता है। यदि मॉनसून धीमी गति से आगे बढ़ रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह कमजोर हो गया। अगले दो दिनों के दौरान महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल है।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की पुराने और नई अरहर के भाव में 100-100 रुपये की गिरावट आकर दाम क्रमशः 6,300 रुपये और 6,400 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में, बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 75 रुपये की गिरावट आकर दाम 6,100 से 6,125 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मिलों की सीमित मांग से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

इस दौरान मुंबई में अफ्रीकी लाईन की अरहर के भाव नरम हो गए। तंजानिया की अरुषा अरहर और मलावी अरहर के भाव में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 5,500 रुपये और 5,000 से 5,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हालांकि इस दौरान मटवारा अरहर के दाम 5,400 रुपये और मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 5,450 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बनी रही।

चेन्नई में दाम कमजोर होने से दिल्ली में बर्मा उड़द एसक्यू और एफएक्यू के भाव में 75-75 रुपये की गिरावट आकर दाम क्रमश: 7,800 से 7,825 रुपये और 7,200 से 7,225 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।  

आंध्र प्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 7,300 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर पर हुआ।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतों में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश की मसूर के भाव में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव 7,075-7,075 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कनाडा एवं आस्ट्रलियाई मसूर के भाव कंटेनर में स्थिर बने रहे। कनाडा की मसूर के भाव कंटेनर में 7,250 रुपये और आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

इंदौर में मसूर के बिल्टी भाव में 25 रुपये की नरमी आकर दाम 6,800 से 6,825 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मूंग के भाव इंदौर मंडी में बिल्टी के 200 रुपये घटकर 6,300 से 6,400 रुपये और एवरेज मालों के भाव 200 रुपये कम होकर 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गए।

दिल्ली में राजस्थान चना की कीमतों में 75 रुपये का मंदा आकर भाव 4,850 से 4,875 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों के एमएसपी में 92 से 523 रुपये की बढ़ोतरी की

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी में 92 रुपये से 523 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी ने चालू खरीफ सीजन में सामान्य मानसून की भविष्यवाणी की हुई है, लेकिन पिछले तीन, चार दिनों से मानसून की चाल धीमी हो गई है, जोकि किसानों के लिए चिंताजनक जरुर है।  

केंद्र सरकार ने खरीफ की प्रमुख फसल धान के एमएसपी में 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। अत: खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए सामान्य किस्म के धान के एमएसपी में 100 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 2,040 रुपये और ए ग्रेड धान के एमएसपी में भी 100 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 2,060 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

मक्का के एमएसपी में सबसे कम बढ़ोतरी 92 रुपये प्रति क्विंटल की गई है। अत: खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए मक्का का एमएसपी 1,962 रुपये प्रति क्विंटल है। बाजरा के एमएसपी में 100 रुपये और रागी के एमएसपी में 201 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव क्रमश: 2,350 रुपये और 3,578 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। ज्वार हाईब्रिड और मालदंडी के एमएसपी में 232-232 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव क्रमश: 2,970 रुपये और 2,990 रुपये प्रति क्विंटल तय किए है।

खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए दलहन की प्रमुख फसल अरहर और उड़द के एमएसपी में 300-300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाव क्रमश: 6,600 रुपये और 6,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किए है। इसके अलावा मूंग के एमएसपी में 480 रुपये की बढ़ोतरी भाव 7,755 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

खरीफ सीजन में तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन पीला के एमएसपी में 350 रुपये और सनफ्लावर सीड के एमएसपी में 385 रुपये, मूंगफली के एमएसपी में 300 रुपये और शीशम सीड के एमएसपी में सबसे ज्यादा 523 रुपये तथा नाईजर सीड के एमएसपी में 357 रुपये की बढ़ोतरी कर खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए भाव क्रमश: 4,300 रुपये, 6,400 रुपये, 5,850 रुपये, 7,830 रुपये और 7,287 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

मीडियम स्टेपल कपास के एमएसपी में 354 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,080 रुपये और लॉग स्टेपल कपास के एमएसपी में 355 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 6,380 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 352 लाख टन के पार, 95 लाख टन के हुए निर्यात सौदे -इस्मा

नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2021-22 के पहले आठ महीनों पहली अक्टूबर 2021 से 6 जून 2022 तक चीनी का उत्पादन 14.62 फीसदी बढ़कर 352.37 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस दौरान केवल 307.41 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। चालू पेराई सीजन में 94 से 95 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके हैं तथा कुल निर्यात 100 लाख टन होने का अनुमान है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़कर 360 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले पेराई सीजन में 311.92 लाख टन का हुआ था।

चालू पेराई सीजन में 94 से 95 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके हैं, जिनमें से 86 लाख टन की शिपमेंट मई अंत तक हो चुकी है। केंद्र सरकार ने 100 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी हुई है।

इस्मा के अनुसार पहली अक्टूबर 2021 को चीनी का बकाया स्टॉक 82 लाख टन का बचा हुआ था, जबकि देश में चीनी की सालाना खपत 275 लाख टन होने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने 100 लाख टन चीनी के निर्यात की मात्रा तय की हुई है, अत: 30 सितंबर 2022 को चीनी का बकाया 67 लाख टन का स्टॉक बचेगा, जोकि अगले तीन महीने की घरेलू खपत के लिए पर्याप्त होगा।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की मंडियों में साठी धान की आवक बढ़ी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड की मंडियों में साठी धान की आवक बढ़ने लगी है, हालांकि अभी नए मालों में नमी की मात्रा 20 से 24 फीसदी तक आ रही है। व्यापारियों के अनुसार आगामी दिनों में साठी धान की दैनिक आवकों में और भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है, लेकिन राइस मिलों के पास बासमती चावल का बकाया स्टॉक कम है, जबकि निर्यातकों की मांग बराबर बनी हुई है। इसलिए बासमती चावल के साथ ही धान की मौजूदा कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

उत्तर प्रदेश की बिलासपुर मंडी में साठी धान की आवक बढ़कर 5,000 से 6,000 बोरियों की हुई तथा मंडी में पूसा 1,509 किस्म के साठी धान कंबाईन से कटे हुए का भाव 3,600 से 3,750 रुपये प्रति क्विंटल रहा। नए मालों में नमी की मात्रा 20 से 22 फीसदी की आ रही है। इसी तरह से मंडी में शरबती साठी धान 2,150 से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका। नए मालों में नमी 20 से 24 फीसदी की आ रही है।

गढ़मुक्तेश्वर मंडी में आज 600 बोरी नए साठी धान की आवक हुई, तथा पूसा 1,509 कंबाईन के माल 3,401 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिके। हाथ की कटाई के माल मंडी में 3,650 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिके।

उत्तराखंड की गदरपुर मंडी में आज पूसा 1,509 किस्म का साठी धान का भाव 3,400 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार रहा। मंडी में नूरी किस्म के धान का भाव 2,000 से 2,190 रुपये और पीआर 26 किस्म के साठी धान का भाव 1,575 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

हरियाणा की तरावड़ी मंडी में सरबती साठी धान की आवक 300 बोरियों की हुई, तथा इसका व्यापार 2,350  से 2,400 रुपये प्रति क्विटल की दर से हुआ।

07 जून 2022

दाल मिलों की मांग से मूूंग, चना अरहर और उड़द के साथ ही देसी मसूर के भाव तेज

नई दिल्ली। नीचे दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से सोमवार को मूंग, चना, अरहर और उड़द के साथ ही देसी मसूर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार मानसून की चाल धीमी हुई है, तथा कई राज्यों में इसके देर से पहुंचने की आशंका से दालों की कीमतों में सुधार आया है। विदेश में दालों के भाव तेज हैं, जिस कारण आयात पड़ते भी महंगे हैं इसलिए दालों की कीमतों में हल्का सुधार और भी बन सकता है लेकिन अभी बड़ी तेजी के आसार कम है।

सूत्रों के अनुसार केरल में मानसून का आगमन तो समय से पहले हो गया था, लेकिन पिछले दो दिनों से इसकी चाल धीमी हुई है। माना जा रहा है कि चालू सीजन में मध्य और दक्षिण भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश देर से शुरू होने की आशंका है, जिसका असर दलहन की बुआई पर पड़ने का डर है। इसीलिए दालों में स्टॉकिस्टों की बिकवाली पहले की तुलना में कम हो गई है।

मध्य प्रदेश में राज्य सरकार समर मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 2.25 लाख टन की खरीद करेगी, जबकि चालू समर सीजन में राज्य में पांच लाख टन मूंग के उत्पादन का अनुमान है। अत: केंद्र सरकार से राज्य सरकार को एमएसपी 7,275 रुपये प्रति क्विंटल की दर खरीद की मंजूरी मिलने से इसमें जहां बिकवाली कम हुई है, वहीं स्टॉकिस्टों की खरीद से 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी देखी गई। राज्य सरकार जल्द ही मूंग की खरीद के लिए किसानों से पंजीकरण करायेगी। अत: मूंग की कीमतों में हल्का सुधार और भी बन सकता है लेकिन अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए, क्योंकि चालू समर सीजन में जहां उत्पादन अनुमान ज्यादा है, वहीं आगामी दिनों में इसकी दैनिक आवकों में बढ़ोतरी होगी।

केंद्र सरकार जल्द ही खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी तय करेंगी। जानकारों के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए सरकार दालों के एमएसपी में चार से पांच फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। जिससे अरहर, उड़द और मूंग की कीमतों को समर्थन मिला है। अरहर और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीफ विपणन सीजन 2021-22 के लिए क्रमश: 6,300-6,300 प्रति क्विंटल है, अत: अगर इसमें सरकार पांच फीसदी की बढ़ोतरी करेगी, तो खरीफ विपणन सीजन 2022-23 के लिए एमएसपी क्रमश: 6,600-6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो जायेगा। इसी तरह से अगर मूंग के एमएसपी 7,275 रुपये में पांच फीसदी की बढ़ोतरी होती है तो इसका एमएसपी करीब 7,600 रुपये प्रति क्विंटल हो जायेगा।

इस समय उत्पादक मंडियों में अरहर, उड़द और मूंग के दाम एमएसपी से नीचे बने हुए हैं। अत: एमएसपी में बढ़ोतरी की संभावना से भाव में आगे हल्का सुधार और भी बन सकता है। वैसे भी अरहर और उड़द के आयात पड़ते महंगे हैं। हालांकि घरेलू बाजार में दालों में खुदरा के साथ ही थोक में उठाव कमजोर है, तथा चालू महीने में मांग कमजोर ही रहेगी। साथ ही हाजिर बाजार में नकदी की किल्लत है। इसलिए दालों की कीमतों में बड़ी तेजी तभी बन सकती है अगर मानसून कमजोर पड़े।

मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 200 रुपये तेज होकर 6,200 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि एवरेज क्वालिटी के मालों में 100 रुपये की तेजी आकर दाम 5,200 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।  

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की पुराने और नई अरहर के भाव में 50-50 रुपये की तेजी आकर दाम क्रमशः 6,150 रुपये और 6,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में, बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 50 रुपये की तेजी आकर दाम 6,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मिलों की मांग सुधरने से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर 6,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इस दौरान मुंबई में अफ्रीकी लाईन की अरहर के भाव स्थिर बने रहे। तंजानिया की अरुषा अरहर और मटवारा अरहर के भाव में क्रमश: 5,400-5,450 रुपये और 5,250 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मलावी अरहर के दाम भी 4,800-4,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें भी 5,300 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गई।

चेन्नई में दाम तेज होने से से दिल्ली में बर्मा उड़द एसक्यू और एफएक्यू के भाव में 50-50 रुपये की तेजी आकर दाम क्रमश: 7,700 रुपये और 7,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।  

आंध्र प्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 50 रुपये की तेजी के साथ 7,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव में 100 रुपये की तेजी आकर दाम 6,775 से 6,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में उड़द एफएक्यू के भाव 25 रुपये बढ़कर 6,775 से 6,800 रुपये और उड़द एसक्यू की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 7,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर के भाव में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6,950 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान कनाडा की मसूर की कीमतें 7,050 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर बनी रही।

कनाडा की मसूर के भाव मुंबई और मुंद्रा बदंरगाह के साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर की कीमतें स्थिर हो गई। कनाडा की मसूर के भाव मुंद्रा बंदरगाह पर 6,675 से 6,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। इस दौरान कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 7,200 रुपये एवं आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटनेर में 7,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में चना की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर राजस्थानी चना के दाम 4,800 से 4,825 रुपये एवं मध्य प्रदेश के चना की कीमतें 4,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम होने से गेहूं स्थिर, 15 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति संभव

नई दिल्ली। नीचे भाव में बिकवाली कम आने से गुरूवार को दिल्ली में गेहूं की कीमतें लगभग स्थिर बनी रही। व्यापारियों के अनुसार गेहूं उत्पादों में जून के अंत में मांग निकलने की उम्मीद है, जबकि माना जा रहा है कि केंद्र सरकार आगे करीब 15 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दे सकती है। ऐसे में आगामी दिनों में इसकी कीमतों में करीब 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी बन सकती है।

गुरूवार को दिल्ली में यूपी और राजस्थान के गेहूं का भाव 2,275 रुपये, और मध्य प्रदेश के गेहूं का भाव 2,250 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि दैनिक आवक 7,000 बोरियों की हुई। अधिकांश उत्पादक मंडियों में आज गेहूं की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी देखी गई।

गेहूं के निर्यात पर केंद्र सरकार ने 13 मई को रोक लगाई थी, उसके बाद बिकवाली का दबाव बनने से कीमतों में गिरावट आई थी, जबकि मौजूदा भाव में अब स्टॉकिस्ट बिकवाली नहीं कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले आठ, दस दिनों से एक नामी कंपनी द्वारा गेहूं की बराबर खरीद की जा रही है, ऐसे में माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही 15 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे सकती है, इसमें उन कंपनियों को निर्यात की अनुमति होगी, जिनके पास एलसी होगी।

व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में देश में गेहूं का उत्पादन घटकर 990 लाख टन से भी ही होने का अनुमान है, क्योंकि होली के बाद अचानक मौसम में आये बदलाव से गेहूं की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कमी आई। हालांकि कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादन के अनुमान में अभी तक ज्यादा कटौती नहीं की है। पहले 11.13 करोड़ टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान था, जिसे घटाकर 10.6 करोड़ टन किया गया है।

गेहूं की कीमतों में सीजन के आरंभ में तेजी आनी शुरू हो गई थी, इसलिए करीब 35 से 40 फीसदी रोलर फ्लोर ने सालभर की खपत का गेहूं खरीद लिया था, लेकिन 65 से 70 फीसदी मिलों के पास केवल अगले एक से दो महीने की खपत का ही गेहूं है। ऐसे में जुलाई के बाद घरेलू फ्लोर मिलों की मांग भी बढ़ेगी।

उधर केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाए जाने के बावजूद इसकी सरकारी खरीद में अपेक्षित तेजी नहीं आ पाई है। सरकार ने 13 मई को गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था तथा उस दिन तक 179.89 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी। उसके बाद 2 जून तक यह आंकड़ा केवल 186.69 लाख टन तक ही पहुंच पाया है। अत: इस दौरान केवल 6.80 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई, ऐसे में 195 लाख टन खरीद के संशोधित लक्ष्य को हासिल कर पाना मुश्किल है। जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार गेहूं की एमएसपी पर खरीद को अभी बंद नहीं करेगी, इसलिए आगे इसमें हल्की बढ़ोतरी और भी हो सकती है, लेकिन तय लक्ष्य तक पहुंच पाना मुश्किल है।

चालू रबी में पंजाब की मंडियों से अब तक 96.10 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई है। उधर मध्य प्रदेश की मंडियों से 45.85 लाख टन की खरीद हुई है। हरियाणा की मंडियों से 41.71 लाख टन की हुई है जबकि उत्तर प्रदेश की मंडियों में चालू रबी में अभी तक 2.94 लाख टन गेहूं एमएसपी पर खरीदा गया है।

खरीफ फसलों की बुआई 69 लाख हेक्टेयर के पार, शुरूआती चरण में कपास की बुआई पिछड़ी

नई दिल्ली। बढ़ी हुई कीमतों के कारण चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में कपास की बुआई में बढ़ोतरी का अनुमान तो है, लेकिन शुरूआती चरण में प्रमुख उत्पादक राज्यों में इसकी बुआई 17.96 फीसदी घटकर केवल 10.73 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में 13.08 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

उत्तर भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों हरियाणा में कपास की बुआई अभी तक 5.90 लाख हेक्टेयर में, पंजाब में 2.31 लाख हेक्टेयर में और राजस्थान में 1.54 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। जानकारों के अनुसार इन राज्यों में कपास की बुआई का उपयुक्त समय 15 मई तक होता है तथा किसान 20 से 25 मई तक बुआई करते हैं। चालू सीजन में नहरों में पानी समय से नहीं छोड़ा गया, जिस कारण किसान कपास की बुआई नहीं कर पाये। कर्नाटक में चालू खरीफ में कपास की बुआई 0.72 लाख हेक्टेयर में हुइ है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन फसलों की बुआई 3 जून तक देशभर में 69.15 लाख हेक्टयेर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अविध के 70.09 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 1.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 0.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ की प्रमुख दलहन अरहर की बुआई चार हजार हेक्टेयर में, उड़द की 22 हजार हेक्टेयर में और मूंग की 28 हजार हेक्टेयर में तथा अन्य दालों की 54 हजार हेकटेयर में हुई है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में शुरूआती चरण में घटकर 1.70 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में 1.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ मक्का की बुआई 1.53 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.60 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई 37 हजार हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के बराबर ही है।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 46.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई केवल 45.81 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

सोया डीओसी के निर्यात में भारी गिरावट, उत्पादक मंडियों में सोयाबीन का बकाया स्टॉक ज्यादा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन में मई अंत तक जहां सोया डीओसी के निर्यात में भारी गिरावट आई है, वहीं मई अंत में सोयाबीन का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। घरेलू बाजार में कीमतें तेज होने के कारण चालू फसल सीजन के पहले आठ महीनों पहली अक्टूबर 2021 से मई 2022 के अंत तक देश से सोया डीओसी के निर्यात में 69.30 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात केवल 5.50 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि में इसका निर्यात 17.92 लाख टन का हुआ था।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया, सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन के पहले आठ महीनों में उत्पादक मंडियों में 71 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जोकि पिछले सीजन की समान अवधि के 79.75 लाख टन से कम है। इसमें से मई अंत तक 53 लाख टन की क्रेसिंग हुई है, जबकि दो लाख टन की खपत सीधी हुई है। इसके अलावा 51 हजार टन सोयाबीन का निर्यात हुआ है। अत: किसानों, व्यापारियों एवं मिलों के पास सोयाबीन का बकाया स्टॉक मई के अंत में 55.39 लाख टन का बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 19.64 लाख टन से ज्यादा है।

उद्योग के अनुसार चालू सीजन में मई अंत तक करीब 3.18 लाख टन सोयाबीन का आयात हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.79 लाख टन से ज्यादा है।
 
सोपा के अनुसार चालू सीजन में सोयाबीन का उत्पादन 118.89 लाख टन का हुआ था, जबकि नई फसल की आवक के समय पहली अक्टूबर 2021 को मंडियों में 1.83 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 120.72 लाख टन की बैठी थी।

02 जून 2022

मिलों की खरीद कमजोर होने से दालों की कीमतों पर दबाव, अरहर की बुआई में कमी की आशंका

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने से बुधवार को दालों की कीमतों पर दबाव देखा गया। मुंबई में अधिकांश आयातित दालों के दाम जहां स्थिर बने रहे, वहीं दिल्ली में  महाराष्ट्र की अरहर के साथ ही मध्य प्रदेश की मसूर के भाव में नरमी आई, जबकि उड़द एसक्यू के भाव में सुधार देखा गया। उत्पादक मंडियों में चना के साथ ही मूंग के भाव भी कमजोर हुए।

आयातित के मुकाबले देसी अरहर और उड़द की कीमतें घरेलू मंडियों में नीचे हैं, जिस कारण मिलर्स आयातित के बजाए देसी अरहर और उड़द की खरीद ज्यादा मात्रा में कर रहे हैं। ऐसे में आयातकों पर भाव घटाने की मजबूरी है। हालांकि अरहर और उड़द के बर्मा से नए आयात सौदे नहीं हो रहे हैं, लेकिन बर्मा में उत्पादन अनुमान ज्यादा है। जिस कारण बर्मा में भी इनकी कीमतों पर दबाव है।

जानकारों के अनुसार चालू सीजन में जहां जनवरी और फरवरी में अरहर की आवक उत्पादक मंडियों में कम हुई थी, वहीं मार्च, अप्रैल और मई में इसकी दैनिक आवक महाराष्ट्र के साथ ही कर्नाटक और मध्य प्रदेश की मंडियों में ज्यादा हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार चालू सीजन में मानसूनी बारिश देशभर में सामान्य होने का अनुमान है, लेकिन इसके बावजूद भी अरहर की बुआई पिछले साल की तुलना में कम होने की आशंका है, किसानों को कपास और सोयाबीन के भाव अच्छे मिले थे। अत: बुआई की रिपोर्ट आने के बाद आगे अरहर की कीमतों में सुधार बन सकता है।

समर सीजन की मूंग की आवक चालू महीने में और बढ़ेगी, साथ ही मध्य प्रदेश की जबलपुर लाईन में उड़द की आवक भी बनी रहेगी। ऐसे में मूंग की कीमतों में और मंदा आयेगा, जबकि उड़द की कीमतों में हल्की गिरावट आने का अनुमान है। उड़द के आयात पड़ते मंहगे हैं, लेकिन उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है।

अकोला में अरहर दाल फटका किस्म की कीमतें सालभर में 10.42 फीसदी कमजोर हुई हैं। पहली जून 2022 को इसके भाव घटकर 8,600-8,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि पिछले साल पहली जून को इसके दाम 9,600-9,800 रुपये प्रति क्विंटल थे।

दिल्ली में, महाराष्ट्र महाराष्ट्र लाईन की अरहर के दाम बर्मा की लेमन अरहर से नीचे बने हुए हैं। महाराष्ट्र लाईन की पुरानी और नई अरहर का दिल्ली डिलीवरी के लिए व्यापार आज 100 रुपये कमजोर होकर क्रमश: 6,100 रुपये और 6,200 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ। जबकि बर्मा की लेमन अरहर का भाव 6,450 रुपये प्रति क्विंटल है। अत: देसी अरहर की कीमतें नीचे होने के कारण मिलर्स लेमन अरहर की खरीद नहीं कर रहे है।

चेन्नई में, बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,025 रुपये प्रति क्विंटल हैं।

मिलों की सीमित खरीद से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 6,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

उधर अफ्रीकी देशों से आयातित दालों के दाम मुंबई स्थिर बने रहे। तंजानिया की अरुषा और मटवारा अरहर के दाम क्रमश: 5,425-5,475 रुपये और 5,250 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे। मलावी अरहर के दाम भी 4,800-4,900 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर बने रहे। मोजाम्बिक लाईन की गजरी अरहर की कीमतें 5,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई।

स्थानीय मिलों की मांग सुधरने से दिल्ली में बर्मा उड़द एसक्यू के भाव में 25 रुपये की तेजी आकर दाम 7,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान उड़द एफएक्यू के भाव 7,025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।  

आंध्र प्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 7,000 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर  पर ही हुआ। कीमतों में अंतर होने के कारण मिलर्स आयातित उड़द के बजाए आंध्रप्रदेश लाईन की उड़द और मध्य प्रदेश की जबलपुर की समर उड़द की खरीद ज्यादा मात्रा में कर रहे हैं।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतें 6,650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

उधर चेन्नई में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतें क्रमश: 6,700 रुपये और 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर टिकी रही।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर के भाव में 100 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान कनाडा की मसूर की कीमतें 7,050 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर बनी रही।

दाल मिलों की सीमित मांग से कनाडा की मसूर के भाव मुंद्रा बंदरगाह पर 6,750-6,875 रुपये और आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंंटेनर में 7,200-7,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। इसी तरह से कनाडा की मसूर के दाम मुंबई कंटेनर में 7,150 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्वस्तर पर स्थिर रहे।

इंदौर में चना के बिल्टी भाव एवरेज क्वालिटी के 50 रुपये कमजोर होकर 4,450 से 4,500 रुपये और और विशाल के भाव 25 रुपये घटकर 4,500 से 4,525 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। हरदा मंडी में चना के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 3,850 से 4,150 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कानपूर में चना के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 4,625 से 4,675 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मध्य प्रदेश की हरदा मंडी में मूंग की कीमतों में 100 रुपये का मंदा आकर भाव 4,500 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे, तथा आवक 4,000 क्विंटल की हुई।

विदेशी बाजार में आई गिरावट से कॉटन मंदी, मिलों की कमजोर मांग से और घटेंगे भाव

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से कॉटन की कीमतों में बुधवार को भी गिरावट जारी रही। देशभर की अधिकांश छोटी मिलों ने जहां उत्पादन बंद कर दिया है, वहीं बड़ी मिलें भी उत्पादन में कटौती कर रही हैं, इसलिए आगे मौजूदा कीमतों में और भी मंदा आयेगा। देशभर की उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवक घटकर 11,000 से 12,000 गांठ, एक गांठ-170 किलो की ही रह गई। गुजरात में शंकर 6 किस्म की 29 एमएम कॉटन की कीमतों में 500 रुपये की गिरावट आकर भाव 98,500 से 1,00,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।


उधर विदेशी बाजार में कॉटन की कीमतों में नरमी बनी हुई है। विदेशी बाजार में मंगलवार को कॉटन की कीमतों में लगातार तीसरे कार्यदिवस में गिरावट दर्ज की गई। आईसीई कॉटन के जुलाई वायदा अनुबंध में 44 प्वांइट की गिरावट आकर भाव 138.98 सेंट पर बंद हुए, जबकि दिसंबर वायदा अनुबंध में 50 प्वांइट की गिरावट आकर भाव 122.45 सेंट रह गए। मार्च-2023 वायदा अनुबंध में 56 प्वांइट की नरमी आकर भाव 118.17 सेंट रह गए। बुधवार को आईसीई के इलेक्ट्रानिक ट्रेडिंग में भी कॉटन वायदा की कीमतों में गिरावट देखी गई।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने शून्य शुल्क पर कपास के आयात की अवधि को 31 दिसंबर 2022 तक बढ़ाने का फैसला किया है, इससे नए आयात सौदे होने की संभावना बढ़ गई है। पहले शून्य शुल्क पर कपास के आयात की अवधि 30 सितंबर 2022 तक ही थी, जिस कारण आयातक ज्यादा मात्रा में आयात सौदे नहीं कर रहे थे, क्योंकि आयात सौदें होने के बाद शिपमेंट भारतीय बंदरगाह पर आने में करीब तीन से चार महीने का समय लग जाता है। वैसे भी पिछले दिनों जिस अनुपात में कॉटन की कीमतों में तेजी थी, उसके हिसाब से धागे की कीमतें नहीं बढ़ पाई, जिस कारण मिलों को पड़ते भी नहीं लग रहे हैं। इसलिए मिलों की खरीद अभी कमजोर ही बनी रहने की उम्मीद है।

व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में आगे कॉटन की कीमतों में मंदा तो आयेगा, लेकिन एकदम से बड़ी गिरावट के आसार भी नहीं है। चालू सीजन में देशभर में कपास के उत्पादन अनुमान में आई कमी के कारण जहां स्पिनिंग मिलों के पास औसतन महीने से सवा महीने की खपत की ही कॉटन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, वहीं सीसीआई, महाराष्ट्र फैडरेशन और अन्य एमएनसी कपंनियों के पास भी कॉटन का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही है। कपास की नई फसल की आवक सितंबर, अक्टूबर में बनेगी, लेकिन बकाया स्टॉक नहीं होने के कारण मिलों की मांग भी बढ़ेगी।

देशभर की उत्पादक मंडियों में कॉटन की दैनिक आवक घटकर 11 से 12 हजार गांठ की रह गई है, जबकि जिनर्स भी दाम घटाकर गांठों की बिकवाली नहीं कर रहे हैं। वैसे भी इस समय जो कपास मंडियों में आ रही है, उसकी क्वालिटी भी काफी हल्की है, जिस कारण मिलों को डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है।