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30 अगस्त 2023

बाजरे में अगले डेढ़ माह के अंतराल 100/150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी

 बाजरा


 आगरा, मथुरा, हाथरस लाइन में बाजरे की दबाव बनने से साठी माल के भाव 1800/1825 रुपए प्रति क्विंटल मंडियों में रह गया है, लेकिन इन भावों में चौतरफा स्टॉकिस्ट लिवाली में आ गए हैं, इसे देखते हुए अब और मंदा नहीं लग रहा है। चावल किनकी एवं मक्की के भाव ऊंचे हो गए हैं तथा नई फसल आने में अभी लंबा बाकी है, उसकी बिजाई हाल ही में हुई है तथा कुछ क्षेत्रों में पिछले दिनों की आई बाढ़ से नुकसान हुआ है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान भाव के बाजरे में अगले डेढ़ माह के अंतराल 100/150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ सकती है।

बारिश में और देरी हुई तो सोयाबीन की उत्पादकता में कमी की आशंका - सोपा

नई दिल्ली। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान अन्य राज्यों में अभी तक फसल की स्थिति है, तथा समय अगेती फसल में दाने भरने शुरू हो गए हैं। इस समय फसल को बारिश की सख्त जरूरत है, अगर बारिश में और देरी हुई तो इसका असर नई फसल की उत्पादकता पर पड़ेगा।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार मध्य प्रदेश में सोयाबीन की बुआई को 45 से 60 दिन हो चुके हैं, तथा समय फली बनने से लेकर फलियों में दारे भरने की अवस्था है। हालांकि अभी तक तक कुल मिलाकर फसल की स्थिति सामान्य है और एक पखवाड़े भर के दौरान बारिश हुई तो फसल को फायदा होगा। पूरे राज्य में, विशेषकर पश्चिमी क्षेत्र में तत्काल बारिश की आवश्यकता है। अगर बारिश में और देरी हुई तो फिर पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार मध्य प्रदेश में पहली जून से 29 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 13 फीसदी कम हुई है। अगस्त के दौरान राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

सोपा के अनुसार महाराष्ट्र में फसल 45 से 60 दिन पुरानी है, और फली बनने से लेकर फली में दाने भरने की अवस्था में है। अभी तक फसल की कुल स्थिति सामान्य है लेकिन तत्काल बारिश की आवश्यकता है। बारिश में देरी की स्थिति में, फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे पैदावार कम हो जाएगी। खासकर के मराठवाड़ा में, जहां सोयाबीन की बुवाई ज्यादा हुई है।

आईएमडी के अनुसार महाराष्ट्र में पहली जून से 29 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 10 फीसदी कम हुई है। अगस्त के दौरान राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

सोपा के अनुसार राजस्थान के साथ ही अन्य राज्यों में भी फसल 45 से 60 दिन पुरानी है, और फली बनने से लेकर फली में दाने भरने की अवस्था में है। अभी तक फसल की कुल स्थिति सामान्य है लेकिन तत्काल सभी राज्यों में फसल को बारिश की आवश्यकता है। बारिश में देरी और देरी हुई तो, फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे पैदावार में कमी आशंका है।

आईएमडी के अनुसार राजस्थान में पहली जून से 29 अगस्त तक बारिश सामान्य की तुलना में 14 फीसदी अधिक हुई है। हालांकि राज्य में अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देशभर के राज्यों में 124.71 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने सिंगापुर को चावल के निर्यात की अनुमति दी

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मंगलवार को नई दिल्ली में कहा कि भारत ने सिंगापुर की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चावल के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि भारत से सिंगापुर को चावल के निर्यात की अनुमति देने की अधिसूचना जल्द ही जारी की जायेगी।


सिंगापुर ने नई दिल्ली से अनुरोध किया था कि वह अनाज के निर्यात पर प्रतिबंध में ढील देते हुए उसे भारत से कम से कम 110,000 टन चावल आयात करने की अनुमति दे।

20 जुलाई को सरकार ने भारत से गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।

सरकार ने सितंबर 2023 के लिए 25 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 के लिए घरेलू बाजार में बिक्री हेतु 25 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है, जबकि अगस्त के लिए सरकार ने 25.50 लाख टन का कोटा जारी किया था।

29 अगस्त 2023

ग्राहकी बनी रहने से अरहर एवं मसूर के साथ चना तथा मूंग में तेजी, उड़द के दाम कमजोर

नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग बनी रहने से घरेलू बाजार में सोमवार को अरहर एवं मसूर के साथ ही चना और मूंग की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उड़द के दाम कमजोर हुए।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 28 अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश हुई है। इस दौरान देशभर की 36 सबडिवीजनों में से 7 में बारिश सामान्य से कम हुई है। खरीफ दलहन के प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य भारत के साथ ही दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश सामान्य से कम हुई है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।  

चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर के दाम स्थिर बने रहे, जबकि उड़द एफएक्यू और एसक्यू के दाम कमजोर हुए। लेमन अरहर के दाम अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के दाम 1,300 डॉलर प्रति टन सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। इस दौरान उड़द एसक्यू और एफएक्यू के भाव अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के पांच से दस डॉलर कमजोर होकर भाव 1,030 डॉलर और 940 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए।

बर्मा से चेन्नई पहुंच उड़द की कीमतें कमजोर होने से घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में मंदा आया, हालांकि व्यापारी अभी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। त्योहारी सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग अभी बनी रहेगी जबकि बर्मा में पुरानी उड़द का बकाया स्टॉक पहले की तुलना में कम हुआ है। घरेलू बाजार में नई उड़द की आवक बनने में समय है। उड़द के उत्पादक राज्यों में अगस्त में औसत से कम बारिश हुई है, जिस कारण उत्पादन अनुमान में कमी आशंका है। जानकारों के अनुसार उड़द की कीमतों में गिरावट बर्मा में नई उड़द की आवक बढ़ने बनने के बाद ही आयेगी।

घरेलू बाजार में लेमन अरहर की कीमतों में तेजी जारी है, साथ ही अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के भाव भी तेज हो गए। जानकारों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण अरहर दाल में मांग बराबर बनी हुई है, तथा देसी अरहर का बकाया स्टॉक उत्पादक राज्यों में कम है। स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण दाल मिलों के पास तय मात्रा में ही अरहर का स्टॉक है जबकि घरेलू मंडियों में देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हो गई है, साथ ही चालू खरीफ में इसकी बुआई भी पिछले साल की तुलना में कम हुई। इसलिए अरहर की कीमतों में तेजी बनी रहने का अनुमान है। अरहर के उत्पादक राज्यों कर्नाटक और महाराष्ट्र में अगस्त में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है, जिसका असर उत्पादकता पर पड़ने का डर है।

दाल मिलों की खरीद बनी रहने से देसी के साथ ही आयातित मसूर के दाम तेज बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार मसूर दाल में खपत राज्यों खासकर के बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बनी हुई, इसलिए व्यापारी मसूर में ज्यादा मंदे में नहीं है। वैसे भी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवकों में काफी कमी आई है। हालांकि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आयातित मसूर की आवक बराबर बनी रहने का अनुमान है। ऐसे में इसके भाव में हल्की तेजी और भी बन सकती है लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार अभी कम है।

दाल मिलों की खरीद बनी रहने से दिल्ली में चना के दाम लगातार चौथे कार्यदिवस में तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार चना में बढ़े पर मुनाफावसूली से हल्की गिरावट तो आ सकती है लेकिन अभी ज्यादा मंदे की उम्मीद कम है। उधर नेफेड चना की बिक्री लगातार दाम बढ़ाकर कर रही है, जबकि उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में काफी कम है। चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। त्योहारी सीजन के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी।

दाल मिलों की मांग सुधरने से मूंग के दाम तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार राजस्थान के साथ ही महाराष्ट्र की मंडियों में नई मूंग की आवक तो शुरू हो गई है, लेकिन अन्य दालों के दाम तेज होने के कारण बिकवाली कम आ रही है। हालांकि मौसम अनुकूल रहा तो सितंबर में आवक बढ़ेगी। ऐसे में इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल की मांग अभी बनी रहेगी।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के भाव हाजिर डिलीवरी के 25 रुपये कमजोर होकर भाव 8,650 से 8675 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि उड़द एफएक्यू के दाम हाजिर डिलीवरी के भाव 8,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में उड़द एसक्यू के भाव हाजिर डिलीवरी के 25 रुपये कमजोर होकर भाव 9,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि उड़द एफएक्यू के दाम हाजिर डिलीवरी के 50 रुपये घटकर 8,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव 50 रुपये कमजोर होकर दाम 8300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर दाम 10,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर भाव 10,950 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर भाव 10,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें तेज हुई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर भाव 11,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मोजाम्बिक की सफेद अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर दाम 9550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 50 रुपये बढ़कर 9450 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। इस दौरान मलावी से आयातित अरहर के भाव 8950 रुपये प्रति क्विंटल स्थिर हो गए।

दाल मिलों की मांग बढ़ने से मध्य प्रदेश की मसूर के दाम दिल्ली में 50 रुपये तेज होकर 6750 से 6725 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 25 रुपये बढ़कर 6225 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 25 रुपये तेज होकर 6300 से 6325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 50 रुपये तेज होकर दाम 6550 से 6600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कनाडा की मसूर की कीमतें वैसल में 6200 से 6350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 50  रुपये तेज होकर 6550 से 6600 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में राजस्थान के चना के भाव 175 रुपये तेज होकर दाम 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना के भाव 175 रुपये बढ़कर 6,300 से 6,325 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

राजस्थान लाईन की मूंग की कीमतें दिल्ली में 150 रुपये तेज होकर दाम 8400 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। इंदौर में मूंग के बिल्टी भाव बढ़कर 8600 से 8800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जयपुर में मूंग के बिल्टी भाव 6800 से 8300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

गुजरात में खरीफ फसलों की बुआई सामान्य क्षेत्रफल के 97 फीसदी से ज्यादा

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में गुजरात में खरीफ फसलों की सामान्य क्षेत्रफल के 97.25 फीसदी हो चुकी है। इस दौरान राज्य में कपास के साथ ही सोयाबीन, धान एवं बाजरा की बुआई सामान्य क्षेत्रफल से ज्यादा हुई है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 28 अगस्त तक राज्य में खरीफ फसलों की कुल बुआई बढ़कर 83.60 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि सामान्य क्षेत्रफल 85.97 लाख हेक्टेयर का करीब 97.25 फीसदी है। पिछले साल राज्य में इस समय तक 82 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई हुई थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार राज्य में पहली जून से 28 अगस्त के दौरान सामान्य से 18 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि राज्य में अगस्त में बारिश सामान्य से कम हुई है। पहली जून से 28 अगस्त तक राज्य में 673.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जोकि सामान्य 569.2 मिलीमीटर से ज्यादा है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 26.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 25.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। सामान्यत: राज्य में कपास की बुआई 23.60 लाख हेक्टेयर में होती है।

सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 2.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.21 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। इस दौरान कैस्टर सीड की बुआई 6.26 लाख हेक्टेयर में, शीशम की 57,890 हेक्टेयर में, ग्वार सीड की 1,02,944 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 5.40 लाख हेक्टेयर में, 71,583 हेक्टेयर में और 1,02,158 हेक्टेयर में हुई थी।

मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 16.35 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के इसकी बुआई 17.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में मूंगफली की बुआई करीब 18.94 लाख हेक्टेयर में होती है।

मोटे अनाजों में बाजरा की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 1.96 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 2.82 लाख हेक्टेयर में और धान की रोपाई 8.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 1.83 लाख हेक्टेयर में, 2.87 लाख हेक्टेयर में और 8.63 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

दलहनी फसलों में अरहर की बुआई चालू खरीफ सीजन में 2.04 लाख हेक्टेयर में, मूंग की 62,885 हेक्टेयर में और उड़द की 79,256 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.17 लाख हेक्टेयर में 79,063 हेक्टेयर में और 95,772 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

28 अगस्त 2023

सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर निर्धारित किया

बासमती चावल पर 1200 डॉलर का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगाने के सरकार के फैसले ने, सुगंधित बासमती के रूप में छिपी अन्य चावल की किस्मों के निर्यात को रोकने के उद्देश्य से, उद्योग में चर्चा और जिज्ञासा जगा दी है। हालांकि यह कदम गैर-बासमती सफेद चावल पर पिछले प्रतिबंध और उबले चावल पर शुल्क लगाने के बाद उठाया गया है, $1200 के विशिष्ट एमईपी मूल्य ने सवाल उठाए हैं। यह आंकड़ा कैसे निर्धारित किया गया और यह वर्तमान और भविष्य के निर्यात बाजार के साथ कैसे संरेखित होता है।

हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन वर्षों में औसत निर्यात मूल्य 975 डॉलर से कम रहा है, और बासमती सेला का वर्तमान निर्यात मूल्य 1100 डॉलर से नीचे बना हुआ है। 1200 डॉलर पर एमईपी की शुरूआत बाजार स्थितियों के लिए इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाती है।

इसके अलावा, 2023-24 की खरीफ फसल 1509 बासमती चावल की आवक शुरू हो गई है। अनुमानित निर्यात मूल्य 1000 डॉलर से नीचे रहने की उम्मीद है। 90-दिवसीय चक्र वाली इस प्रारंभिक किस्म की बड़ी फसल का आकार, पिछले वर्ष की उपज से अधिक है। निर्यात की अच्छी मांग के बावजूद, एमईपी ने इसकी निर्यात संभावनाओं पर अनिश्चितता जताई है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार के फैसले के कई कारण हैं। सबसे पहले, यह खुदरा मूल्य मुद्रास्फीति का मुकाबला करने का एक प्रयास हो सकता है। सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध के बाद, बासमती के रूप में गैर-बासमती चावल का निर्यात करने के प्रयासों की खबरें आई हैं। एमईपी का इरादा घरेलू कीमतों और आपूर्ति की सुरक्षा करते हुए ऐसी प्रथाओं पर अंकुश लगाना है।

इसके अतिरिक्त, सरकार का लक्ष्य वास्तविक बासमती चावल की किस्मों का मूल्य बढ़ाना हो सकता है। जबकि एमईपी बासमती जैसी दिखने वाली मोटी किस्मों जैसे सुगंधा, आरएस10, ताज, शरबती आदि को प्रभावित कर सकता है, इससे 1121, 1718, 1401 और बासमती 370 जैसी वास्तविक बासमती किस्मों को सकारात्मक रूप से लाभ हो सकता है। इससे प्रामाणिक बासमती के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। बासमती चावल।

भारत और पाकिस्तान 50 लाख टन चावल निर्यात बाजार साझा करते हैं, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 84% है। एमईपी के कार्यान्वयन का उद्देश्य बासमती चावल की कीमतों में संभावित वृद्धि करना है, जिससे निर्यात पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।

हालाँकि, इस फैसले को भारत की व्यापक रणनीति के तहत समझा जाना चाहिए। टूटे हुए चावल पर प्रतिबंध, गैर-बासमती सफेद चावल पर प्रतिबंध और अब गैर-बासमती उबले चावल पर शुल्क सहित कार्रवाइयों का क्रम, निर्यात की निगरानी करते हुए घरेलू कीमतों को प्रबंधित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर तय करने के पीछे मंशा बासमती चावल की आड़ में प्रतिबंधित गैर-बासमती चावल के निर्यात को रोकना है। 15 अक्टूबर, 2023 के बाद नीति की समीक्षा की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और वैश्विक बाजार में वास्तविक बासमती चावल की प्रामाणिकता और मूल्य को संरक्षित करना है। जैसे ही नीति प्रभावी होगी, निर्यात परिदृश्य और समग्र बाजार की गतिशीलता पर इसके प्रभाव को हितधारकों और विशेषज्ञों द्वारा समान रूप से देखा जाएगा। जबकि गैर-बासमती चावल पर प्रतिबंध लगा हुआ है और उबले हुए चावल पर शुल्क जारी है, व्यवहार्यता और व्यावहारिकता पर विचार करते हुए संभावित समायोजन के साथ MEP यथावत रहेगा।

अच्छी मांग से दिल्ली भाव में बढ़ोतरी

> अच्छी डिमांड के चलते आज चने के साथ मूंग और मोठ के भाव में भी अच्छी मजबूती है 

> राज चना/MP चना 6200-6325 रु प्रति क्विंटल की पोजीशन 

> मूंग एवं मोठ का भाव भी 150 रु बढ़कर क्रमश 8400~8500 प्रति क्विंटल एवं 7500 रु प्रति क्विंटल रहा।

कीमतों को काबू करने के लिए केंद्र ने गैर बासमती सेला चावल पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगाया

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों के साथ ही देश के कई राज्यों में अगस्त में मानसूनी बारिश कम होने से उत्पादन में कमी आने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने गैर बासमती सेला चावल, पारबॉयल्ड राइस के निर्यात पर 20 फीसदी शुल्क लगा दिया है।


केंद्र सरकार द्वारा 25 अगस्त 2023 को जारी अधिसूचना के अनुसार पारबाइल्ड चावल के निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क 16 अक्टूबर 2023 से प्रभावी होगा। अत: ऑर्डर जिनकी लेटर ऑफ क्रेडिट, बैंक, कंसाइनमेंट क्लीयरेंस, कस्टम 25 अगस्त से पहले हो चुके हैं, उसका निर्यात हो सकेगा।

केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2023 को गैर बासमती सफेद चावल, व्हाइट राइस के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके पहले दिसंबर 2022 में केंद्र सरकार ने ब्रोकन राइस के निर्यात पर रोक लगाई थी, तथा इसके साथ ही गैर बासमती चावल पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगा दिया था। हालांकि यह शुल्क गैर बासमती सेला चावल पर नहीं लगाया गया था। अत: केंद्र सरकार ने 25 अगस्त को जारी अधिसूचना के अनुसार अब गैर बासमती सेला चावल के निर्यात पर भी 20 फीसदी का निर्यात शुल्क लगा दिया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान गैर बासमती चावल का निर्यात घटकर 40.57 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 43.48 लाख टन का हुआ था। बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही के दौरान 11.72 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 11.25 लाख टन का हुआ था।

वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान देश से गैर बासमती चावल का निर्यात 177.86 लाख टन का मूल्य के हिसाब से 51,088.72 करोड़ रुपये का हुआ था।

केंद्र सरकार गैर बासमती व्हाइट राइस के निर्यात पर रोक लगा देने से विश्व बाजार में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं तथा केंद्र सरकार के इस कदम से कीमतें और तेज होने का अनुमान है।

चालू खरीफ सीजन में धान के बुआई रकबे में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अगस्त में देश के कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। ऐसे में इन राज्यों में धान की प्रति हेक्टेयर पैदावार में कमी आने की आशंका है।

चालू खरीफ में धान की रोपाई 4.40 फीसदी बढ़कर 384.05 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 367.83 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

सितंबर में उत्पादक मंडियों में नए धान की आवक शुरू हो जायेगी, तथा अक्टूबर में आवकों का दबाव बनने की उम्मीद है। 

26 अगस्त 2023

चालू खरीफ में कपास की बुआई दो फीसदी पीछे, अगस्त में बारिश सामान्य से कम हुई

नई दिल्ली। अगस्त में देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम हुई है, जिस कारण कपास की बुआई चालू खरीफ में पिछले साल की तुलना में 1.81 फीसदी पीछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 25 अगस्त तक कपास की बुआई 122.55 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 124.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 25 अगस्त तक देशभर में सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश हुई है।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई 16.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.51 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

गुजरात में चालू खरीफ में कपास की बुआई 26.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 25.38 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 6.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

महाराष्ट्र में चालू खरीफ में कपास की बुआई 41.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 41.99 लाख हेक्टेयर से कम है।

आंध्रप्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 3.69 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.72 लाख हेक्टेयर से कम है। तेलंगाना में चालू खरीफ में कपास की बुआई 18.22 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान 19.56 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी।

कर्नाटक में चालू खरीफ में कपास की बुआई 6.56 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.80 लाख हेक्टेयर से कम है।

ओडिशा में चालू खरीफ में कपास की बुआई 2.33 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.15 लाख हेक्टेयर से अधिक है।

खरीफ में फसलों की कुल बुआई बढ़ी, दलहन के साथ ही तिलहन की घटी

नई दिल्ली। अगस्त में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन में जहां धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है, वहीं दलहन के साथ ही तिलहनी फसलों की बुआई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 25 अगस्त तक कुल फसलों की बुआई बढ़कर 1053.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1049.96 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 25 अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश हुई है, जबकि जुलाई अंत तक बारिश सामान्य से ज्यादा हुई थी।

चालू खरीफ में धान की रोपाई 4.40 फीसदी बढ़कर 384.05 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 367.83 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 8.30 फीसदी पिछड़कर 117.44 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 128.07 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 42.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 44.38 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई घटकर चालू सीजन में 31.10 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 36.08 लाख हेक्टेयर से कम है।

इस दौरान मूंग की बुआई घटकर 30.64 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 33.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 13.34 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई इस समय तक 14.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 178.33 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 176.31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में 13.84 लाख हेक्टेयर में, बाजरा की 70 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 82.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 14.99 लाख हेक्टेयर में, तथा 69.32 लाख हेक्टेयर में एवं 79.99 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

रागी की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 7.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.46 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 188.58 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 190.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 43.27 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 124.71 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 11.80 लाख हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 7.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 44.75 लाख हेक्टेयर में, 123.60 लाख हेक्टेयर में, 12.73 लाख हेक्टेयर में और 6.51 लाख हेक्टेयर में हुई थी।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 25 अगस्त तक कपास की बुआई 122.56 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 124.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 56.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.59 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

25 अगस्त 2023

गेहूं 2450/2550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चलता रहेगा

 सरकार द्वारा पिछले टेंडर में गेहूं के भाव घटाने के बावजूद भी बाजार बढ़कर ऊपर में 2560 रुपये बिक गया था, लेकिन गेहूं की आवक आज बढ़ते ही बाजार टूटकर 2490/2500 रुपए प्रति कुंतल रह गया। कल भी टेंडर में गेहूं काफी बिका है इसको नियंत्रित करने के लिए पिछले दिनों सरकार द्वारा 50 लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं की बिक्री के लिए घोषणा पुन: कर दी गई। इस वजह से बाजार ऊपर के भाव से नीचे रह गए हैं तथा नई फसल आने तक ऐसा आभास हो रहा है कि सरकार लंबी तेजी आने नहीं देगी तथा गेहूं 2450/2550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चलता रहेगा।

Narela mandi paddy rate 25 August

 Narela mandi 

25.8.2023

1718@4701

1509@3871

1509@3701 new Comin

New 1509...hand 3731

दिनांक 25 अगस्त 2023 दिन शुक्रवार

बाजार बंद (MARKET CLOSE) 


दिल्ली (DELHI) 

चना (CHANA) एमपी नया(MP NEW)-6050/75+25

राजस्थान नया(RAJ.NEW)-6050/75+25

मसूर (MASUR) (2/50 kG)-6650/75+25

मूंग(MUNG) नया एमपी(NEW MP)

1 KG-8200-50

3 KG-8100-50

5 KG-7850-200

यूपी(UP) कानपुर (KAN.) लाइन (LINE)-7850/75-125

राजस्थान (RAJ.) लाइन (LINE)-8300-100

मोठ(MOTH) (राजस्थान RAJ.) नया (NEW)-7300+50

मोठ(MOTH) (राजस्थान RAJ.) ओल्ड(OLD)-7200+100

गेंहू(WHEAT) एमपी&यूपी&राज. (MP&UP& RAJ.)-2500+0

तुवर (TUAR) लेमन (LEMON)-10850+50

महाराष्ट्र (MAH)-10950+50

उड़द (URAD) एफएक्यू (FAQ)-8550-50

एसक्यू (SQ)-9025/50+0

गुजरात में कपास का उत्पादन बढ़ने का अनुमान, मूंगफली में कमी आने की आशंका

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में गुजरात में जहां कपास के उत्पादन में बढ़ोतरी होने का अनुमान है, वहीं मूंगफली एवं कैस्टर सीड के उत्पादन में कमी आने की आशंका है। इसके साथ ही दलहनी फसलों में अरहर एवं उड़द का उत्पादन भी पिछले साल की तुलना में कम होने का अनुमान है।


राज्य के कृषि निदेशालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन बढ़कर 100.94 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल राज्य में 100 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।

राज्य में खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली का उत्पादन घटकर 39.92 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल राज्य में 44.07 टन मूंगफली का उत्पादन हुआ था। हालांकि इस बार सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर राज्य में 4.43 लाख टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 3.72 लाख टन से ज्यादा है।

खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 2.70 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 2.83 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से मूंग का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 37,870 टन और उड़द का 53,080 टन ही होने का अनुमान है। पिछले साल इनका उत्पादन क्रमश: 46,460 टन एवं 59,130 टन का हुआ था। मोठ का उत्पादन बढ़कर चालू खरीफ में 8,550 टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन केवल 7,260 टन का ही हुआ था।

कैस्टर सीड का उत्पादन चालू खरीफ सीजन में राज्य में घटकर 13.64 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 16.03 लाख टन का हुआ था। ग्वार सीड का उत्पादन राज्य में चालू खरीफ में घटकर 66,910 टन और तिल का 27,480 टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इनका उत्पादन क्रमश: 74,130 टन और 36,590 टन का हुआ था।

मोटे अनाजों में बाजरा का उत्पादन बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 3.41 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में इसका उत्पादन 3.26 लाख टन का हुआ था। ज्वार का उत्पादन 27,660 टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 25,130 टन से ज्यादा है। 

24 अगस्त 2023

खरीफ की फसलों में सूखे की मार

भारत के पुर्वोत्तर राज्यो को छोड़ शेष भारत में कम बारिश के चलते खरीफ की अधिकतर फसले दम तोड़ने लगी है उत्पादक क्षेत्रों से जो खबरें आ रही है उसके अनुसार कम बारिश के चलते ज्यादातर फसलों में अब वर्षा की बेरुखी के कारण 10 से 12% का नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है और बारिश की हालत आगे भी ऐसी ही रही तो स्थिति और बिगड़ सकती है मौसम विभाग के अनुसार अलनीनो के प्रभाव अब भारतीय मानसून पर पड़ने लगा है ।

NAFED Approve चना Quantity R23

Maharashtra 1378.2 MT Quantity 

R-23@5850 Above approve


Hyderabad 1036.8 MT Quantity R-23@6201 Above Approve


AP 84.2 MT Quantity Approve.  6150 Above Approve R-23


Total R23 Quantity 2499.2MT


Rajsthan and Gujrat R23 NO Sale

सौराष्ट्र में नई मूंगफली की आवक शुरू, कीमतों में गिरावट का रुख

नई दिल्ली। सौराष्ट्र के गोंडल सहित कई मंडियों में नई मूंगफली की आवक शुरू हो गई है, तथा बुधवार को पूरे सौराष्ट्र में नई मूंगफली की आवक करीब 500 से 700 बोरियों की हुई।


व्यापारियों के अनुसार नई मूंगफली की आवक बनने के साथ ही मूंगफली तेल में मांग कमजोर होने के कारण बुधवार को इसकी कीमतों में 20-30 रुपये प्रति 20 किलो की गिरावट दर्ज की गई। गुजरात की मंडियों में बुधवार को पुरानी मूंगफली की आवक 5,000-6,000 बोरी (1 बोरी-35 किलो) की आवक हुई।

बुधवार को गोंडल मंडी में एवरेज क्वालिटी की मूंगफली की आवक 263 क्विंटल की और भाव घटकर 1,300-1,376 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। इस दौरान बेस्ट क्वालिटी की आवक 525 क्विंटल की हुई तथा इसके भाव घटकर 1,321-1,546 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। इस दौरान नई मूंगफली की आवक 137 क्विंटल की हुई तथा इसके भाव 1,231-1,300 रुपये प्रति 20 किलो रह गए।

व्यापारियों के अनुसार राजकोट मंडी में अभी नई मूंगफली की आवक शुरू नहीं हुई है। राजकोट मंडी में पुरानी एवरेज क्वालिटी की मूंगफली की आवक 250 क्विंटल की हुई तथा इसके भाव घटकर 1200-1480 रुपये प्रति 20 किलोग्राम रह गए। बेस्ट क्वालिटी की आवक 520 क्विंटल की हुई तथा इसके भाव घटकर 1250-1545 रुपये प्रति 20 किलो रह गए।

गुजरात में मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 16.33 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के इसकी बुआई 17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में मूंगफली की बुआई सामान्यत: 18.94 लाख हेक्टेयर में होती है।

चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में मूंगफली की बुआई 42.77 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 44.49 लाख हेक्टेयर से कम है। 

23 अगस्त 2023

राजस्थानी चना - खपत के अनुरूप मिलों में माल नहीं

देसी चने का उत्पादक व वितरक मंडियों में स्टॉक एवं आपूर्ति दोनों ही घट गई है। दूसरी ओर सरकार की दहशत से जो मिल वाले एवं स्टॉकिस्ट देसी चने का स्टॉक किए थे, वह पहले ही काट चुके हैं, क्योंकि सरकार द्वारा मंदे भाव में देसी चना बेचने की घोषणा की गई थी, लेकिन सरकारी गोदाम में भी ज्यादा माल नहीं होने से पिछले दिनों लगातार नेफेड के होने वाले टेंडर ऊंचे गए, जिसके चलते लॉरेंस रोड पर भी खड़ी मोटर में राजस्थानी चना 6000 रुपए प्रति कुंतल पर हो गया है  क्योंकि खपत के अनुरूप मिलों में माल नहीं है।


गेहूं - खुले बाजार में बिक्री करने के बावजूद भी अपेक्षित मंदा नहीं

गेहूं का उत्पादन कम होने से उत्पादक मंडियों में इस बार माल अधिक नहीं है तथा जो माल स्टॉक में है, वह बड़ी कंपनियों के हाथ में है, जिससे मंदे भाव में बिकना मुश्किल लग रहा है। केंद्रीय पूल में सरकार द्वारा गत वर्ष की तुलना में ज्यादा खरीद जरूर किया गया है, लेकिन लक्ष्य से कम ही खरीद हो पाई है तथा विभिन्न योजनाओं में वह माल खपना है। यही कारण है कि खुले बाजार में बिक्री करने के बावजूद भी अपेक्षित मंदा नहीं आ पा रहा है।

बाजरा, अब लंबी तेजी नहीं

 इस बार गर्मी वाला साठी बाजरा हाथरस, मथुरा, जलेसर रोड, छर्रा, कासगंज आदि उत्पादक क्षेत्रों में बहुत अधिक आया था, जिससे पिछले दो महीने से लगातार मंडियों में प्रेशर बना हुआ है तथा यही बाजरा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान पहुंच में पड़ते में जा रहा है, जिसके चलते बाजरे के भाव टिके हुए हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों में 40-50 रुपए प्रति क्विंटल की मजबूती रैक पॉइंट पर आई है, लेकिन धीरे-धीरे मुख्य फसल आने का भी समय थोड़ा बचा है, जिससे अब लंबी तेजी नहीं लग रही है । अब तेजी, नई फसल पर ही, उसकी उत्पादकता की स्थिति को देखकर आएगी।

ब्रांड बालों की अच्छी मांग के चलते हैफेड 1121 धान की नीलामी बढ़ कर हुई

 ब्रांड बालों की अच्छी मांग के चलते हैफेड 1121 धान की नीलामी RS.100/ और अधिक बढ़ कर हुई है।

पिछले सप्ताह की गई हैफेड द्वारा बासमती-1121 धान की बिक्री इस्बार 100/रुपए अधिक बढ़कर हुई है पिछली बार की तुलना में इस बार हैफेड ने तकरीबन 650000/ बोरी की नीलामी की है। जिसके भाव 5300/5400 रुपए रहे जो की पिछली तुलना से 100/रुपए बढ़कर है।

जिससे पता चलता है कि बाजार में धान चावल की अच्छी डिमांड है ब्रांड वाले किसी भी भाव में जीरी लेने को तैयार हैं।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई तय लक्ष्य की 99 फीसदी पूरी

नई दिल्ली। राजस्थान में चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई तय लक्ष्य की 99 फीसदी पूरी हो चुकी है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 21 अगस्त तक राज्य में 163.95 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है, जबकि लक्ष्य 164.68 लाख हेक्टेयर का है।


राज्य में धान के साथ ही बाजरा की बुआई तय लक्ष्य से ज्यादा हो चुकी है। राज्य में धान की रोपाई का लक्ष्य 2.10 लाख हेक्टेयर का था, जबकि चालू खरीफ में इसकी बुआई बढ़कर 2.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। इसी तरह से राज्य में बाजरा की बुआई बढ़कर 45.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि इसकी बुआई हेतु 44 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया था। ज्वार की बुआई राज्य में 6.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 6.20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 35.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 39.96 लाख हेक्टेयर का 88.1 फीसदी है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई राज्य में 22.11 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 24.30 लाख हेक्टेयर का 91 फीसदी है। मोठ की बुवाई चालू खरीफ में 9.26 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 3.18 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 9.50 और 3.17 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में 24.36 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल के 23.55 लाख हेक्टेयर से कम है। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 8.69 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 7.90 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में 11.44 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.51 लाख हेक्टेयर से कम है।

कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 7.90 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 6.52 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

ग्वार सीड की बुआई चालू सीजन में अभी तक 27.64 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 30.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। 

22 अगस्त 2023

एफसीआई 23 अगस्त को खुले बाजार में गेहूं, चावल बेचेगा

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) विजयवाड़ा भारत सरकार ने पूरे देश में गेहूं/आटा और चावल की खुदरा कीमतों को स्थिर करने के लिए अपनी खुली बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत एफसीआई गेहूं को खुले बाजार में जारी करने का निर्णय लिया है।

 एफसीआई अमरावती (कर्नाटक) बुधवार, 23 अगस्त को होने वाली ई-नीलामी के माध्यम से 5,000 मीट्रिक टन गेहूं और 13,200 मीट्रिक टन चावल की पेशकश कर रही है।

 परिणामस्वरूप, पूरे भारत में 25 लाख मीट्रिक टन चावल और 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं खुले बाजार में उतारा जाएगा।

अक्टूबर से जुलाई के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 181 फीसदी ज्यादा - सोपा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 22 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2022-23 के पहले 10 महीनों अक्टूबर 22 से जुलाई 23 के दौरान देश से सोया डीओसी का निर्यात 181 फीसदी बढ़कर 16.72 लाख टन का हो चुका है, जबकि इसके पिछले साल की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 5.95 लाख टन का ही हुआ था।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया, सोपा के अनुसार पहली अक्टूबर 22 से जुलाई 23 के दौरान डीओसी का उत्पादन 74.30 लाख टन का हुआ है, जोकि इसके पिछले साल की समान अवधि के 55.87 लाख टन से ज्यादा है। इस दौरान 7.25 लाख टन सोया डीओसी की घरेलू खपत फूड में और 51.50 लाख टन की फीड में हुई है। इस दौरान 16.72 लाख टन का निर्यात हुआ है, जबकि 0.06 लाख टन का आयात हुआ है। अत: मिलों के पास पहली अगस्त को 1.36 लाख टन सोया डीओसी का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.04 लाख टन से कम है।

सोपा के अनुसार पहली अक्टूबर 22 से शुरू हुए फसल सीजन में जुलाई अंत तक देशभर की मंडियों में 106 लाख टन सोयाबीन की आवक हो चुकी है, जिसमें से 92.50 लाख टन की क्रॉसिंग हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में जहां सोयाबीन की आवक 82 लाख टन की हुई थी, वहीं इस दौरान क्रेसिंग 70 लाख टन की हुई थी। चालू सीजन में जुलाई अंत तक 3.70 लाख टन सोयाबीन की सीधी खपत हो चुकी है, जबकि इस दौरान 0.20 लाख टन का निर्यात हुआ है। अत: पहली अगस्त को किसानों, व्यापारियों एवं मिलर्स के पास 44.90 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 39.20 लाख टन से ज्यादा है।

उद्योग के अनुसार फसल सीजन 2022-23 में देश में सोयाबीन का उत्पादन 124.11 लाख टन का हुआ था, जबकि नई फसल की आवकों के समय 25.15 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: चालू सीजन में सोयाबीन की कुल उपलब्धता 149.26 लाख टन की बैठी थी, जोकि पिछले साल के 120.72 लाख टन से ज्यादा है। 

डिपलोमेटिक आधार पर गेहूं आयात करने की योजना नहीं

 रूस से डिपलोमेटिक आधार पर गेहूं आयात करने की सरकार की कोई योजना नहीं है, केंद्रीय खाद्य सचिव - संजीव चोपड़ा


दुनिया का सबसे बड़े चावल निर्यातक, भारत अनाज कर शिपमेंट पर और अधिक प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है क्योंकि देश बढ़ती खाद्य कीमतों से जूझ रहा है।

अगस्त के लिए 2 लाख टन अतिरिक्त चीनी का कोटा

त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने चालू महीने (अगस्त) के लिए 2 लाख टन अतिरिक्त चीनी का कोटा जारी करने की घोषणा की है।

19 अगस्त 2023

दिनांक 19 अगस्त 2023 दिन शनिवार

दिल्ली 

चना (CHANA) एमपी नया(MP NEW)-6150-25

राजस्थान नया(RAJ.NEW)-6150-25

मसूर (MASUR) (2/50 kG)-6625/125+0

मूंग(MUNG) नया एमपी(NEW MP)

1 KG-8200/25+0

3 KG-8100/25+0

5 KG-8000+0

यूपी कानपुर लाइन-7975/8000+0

गेंहू(WHEAT) एमपी&यूपी&राज. (MP&UP& RAJ.)-2500+20

केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात को प्रतिबंधित की कैटेगरी में डाला

नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात को प्रतिबंधित की कैटेगरी में डाल दिया है। ऐसे में अब गैर बासमती चावल का निर्यात हो सकेगा।


केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार गैर बासमती चावल की निर्यात शर्तों में बदलाव करके इसको प्रतिबंधित की कैटेगरी में डाल दिया है। अत: अब किसी भी प्रकार के गैर बासमती चावल का निर्यात नहीं हो पायेगा।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अधिसूचना में कहा था कि गैर-बासमती सफेद चावल (अर्ध-मिल्ड या पूरी तरह से मिल्ड चावल, चाहे पॉलिश किया हुआ हो या नहीं) को निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया है

केंद्र सरकार ने पिछले बृहस्पतिवार को गैर-बासमती चावल के निर्यात पर शर्तों के साथ रोक लगाई थी।

चालू खरीफ में फसलों की कुल बुआई बढ़ी, दलहन एवं तिलहन की पिछड़ी

नई दिल्ली। अगस्त में देश के राज्यों में बारिश सामान्य से कम होने के कारण चालू खरीफ में दलहन के साथ ही तिलहन की बुआई पिछड़ रही है, जबकि इस दौरान मोटे अनाजों के साथ ही धान की रोपाई बढ़ी है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 18 अगस्त तक कुल फसलों की बुआई बढ़कर 1022.51 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1021.48 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 18 अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई है, जबकि जुलाई अंत तक बारिश सामान्य से ज्यादा हुई थी।

चालू खरीफ में धान की रोपाई बढ़कर 360.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 345.79 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 9.16 फीसदी पिछड़कर 114.93 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 126.52 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 40.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 43.72 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई घटकर चालू सीजन में 30.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 35.62 लाख हेक्टेयर से कम है।

इस दौरान मूंग की बुआई घटकर 30.39 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 33.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 13.18 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई इस समय तक 13.89 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 176.39 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 173.60 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में 13.75 लाख हेक्टेयर में, बाजरा की 69.70 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 81.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 14.83 लाख हेक्टेयर में, तथा 68.94 लाख हेक्टेयर में एवं 79.42 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

रागी की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 7.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.98 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 185.91 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 189.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 42.77 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 124.15 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 11.52 लाख हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 6.48 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 44.49 लाख हेक्टेयर में, 123.39 लाख हेक्टेयर में, 12.56 लाख हेक्टेयर में और 6 लाख हेक्टेयर में हुई थी।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 18 अगस्त तक कपास की बुआई 121.86 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 124.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 56.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.32 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में डीओसी का निर्यात 28 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान डीओसी का निर्यात 28 फीसदी बढ़कर 1,591,348 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 1,239,982 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार जुलाई में डीओसी का निर्यात 70 फीसदी बढ़कर 381,302 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जुलाई में इसका निर्यात केवल 223,951 टन का ही हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई में सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 420,820 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 90,073 टन का हुआ था। इसी तरह से सरसों डीओसी का निर्यात अप्रैल से जुलाई के दौरान बढ़कर 894,117 टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 851,214 टन का हुआ था। राइस डीओसी का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में बढ़कर 116,304 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 105,682 टन का ही हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई में कैस्टर डीओसी का निर्यात 116,304 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात  105,652 टन का हुआ था।

भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी का भाव जुलाई 23 में घटकर औसतन 556 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि जुलाई 2022 में इसका दाम 675 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से सरसों डीओसी का भाव जुलाई 23 में भारतीय बंदरगाह पर 284 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि पिछले साल जुलाई 22 में इसका भाव 295 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से कैस्टर डीओसी का दाम जुलाई 23 में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 119 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि जुलाई 22 में इसका दाम 156 डॉलर प्रति टन था।  

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान दक्षिण कोरिया को डीओसी के निर्यात में 17.70 फीसदी की कमी आई है जबकि इस दौरान वियतनाम, थाईलैंड और बांग्लादेश तथा ताइवान को निर्यात में बढ़ोतरी हुई है।

16 अगस्त 2023

पहली तीन तिमाही में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 23 फीसदी बढ़ा - उद्योग

नई दिल्ली। जुलाई में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 46 फीसदी बढ़कर 1,771,833 टन हो गया है, जबकि पिछले साल जुलाई-22 में इनका आयात 1,214,353 टन का ही हुआ था। जुलाई के दौरान खाद्वय तेलों का आयात 1,755,834 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 15,999 टन का हुआ है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष 2022-23 (नवंबर-22 से अक्टूबर-23) की पहले 9 महीनों नवंबर-22 एवं जुलाई-23 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात इसके पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 23 फीसदी बढ़कर 12,254,953 टन का हुआ है। जबकि पिछले साल नवंबर से जुलाई के दौरान इनका आयात  9,974,993 टन का हुआ था।

चालू तेल वर्ष की पहली तीन तिमाही में खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 121.2 लाख टन को देखते हुए, अक्टूबर 23 में समाप्त होने वाले चालू तेल वर्ष के दौरान इसका कुल आयात बढ़कर 15.0 से 15.5 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इससे पहले देश में खाद्वय तेलों का रिकॉर्ड आयात 2016-17 में 15.1 मिलियन टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में आई गिरावट से क्रूड पाम तेल का आयात जुलाई में बढ़कर 8.41 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले महीने इसका आयात 4.66 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से जुलाई में आरबीडी पामोलीन तेल का आयात पिछले महीने के 2.17 लाख टन से बढ़कर 2.37 लाख टन का हो गया।

जुलाई 2023 के दौरान पाम उत्पादों का कुल आयात बढ़कर 10.86 लाख टन का हुआ है, जबकि जून 2023 में 6.83 लाख टन का हुआ था। हालांकि जुलाई में सोयाबीन तेल का आयात पिछले महीने के 4.37 लाख टन से घटकर 3.42 लाख टन कर रह गया। सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर जुलाई में 3.27 लाख टन हो गया, जबकि इसके पिछले महीने में 1.91 लाख टन का आयात हुआ था। देश में करीब 45 दिनों की जरूरतों के लिए खाद्वय तेलों का भारी स्टॉक है जिस कारण त्योहारी सीजन में आपूर्ति बराबर बनी रहने की उम्मीद है।

जून के मुकाबले जुलाई में आयातित खाद्वय तेलों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। जुलाई में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलिन का भाव बढ़कर 917 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि जून में इसका भाव 849 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव जुलाई में बढ़कर 945 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि जून में इसका भाव 875 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड सोयाबीन तेल का भाव जून के 1,036 डॉलर से बढ़कर जुलाई में भारतीय बंदरगाह पर 1086 डॉलर प्रति टन हो गया। क्रूड सनफ्लावर तेल का भाव जून के 914 डॉलर प्रति टन से बढ़कर जुलाई में 1,000 डॉलर प्रति टन हो गया।

12 अगस्त 2023

ओएमएसएस के तहत 50 लाख टन गेहूं बेचने का फैसला

 ओएमएसएस के तहत 50 लाख टन गेहूं बेचने का व्यावहारिक फैसला_ केन्द्र सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत बेचे जाने वाले गेहूं की मात्रा को एकाएक 15 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन निर्धारित करने का जो निर्णय लिया है उसे कुछ विश्लेषक व्यावहारिक तथा कुछ अन्य समीक्षक जोखिम पूर्ण कदम मान रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि चालू माह के आरंभ में यानी 1 अगस्त 2023 को केन्द्रीय पूल में 280.39 लाख टन का स्टॉक मौजूद था जो 1 जुलाई के स्टॉक 301.45 लाख टन, 1 अगस्त 2021 के स्टॉक 564.80 लाख टन से काफी कम मगर 1 अगस्त 2022 के स्टॉक 266.45 लाख टन से ज्यादा था।


1 अगस्त 2023 को मौजूद 280.39 लाख टन के स्टॉक में से 50 लाख टन गेहूं यदि ओएमएसएस के तहत बेचा गया तो सरकार के पास सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति के लिए इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का सीमित स्टॉक बच जाएगा। मालूम हो कि अब गेहं की नई सरकारी खरीद अप्रैल 2024 में आरंभ होगी जो अभी बहुत दूर है। हालांकि इन योजनाओं में आपूर्ति के लिए गेहूं की कमी नहीं पड़ेगी लेकिन इसकी बकाया अधिशेष स्टॉक अवश्य ही काफी घट जाएगा।


पहले माना जा रहा था कि सरकार विदेशों से स्वयं या प्राइवेट व्यापारियों के जरिए भारी मात्रा में गेहूं मंगवाकर घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास कर सकती है मगर सरकार ने अब दूसरा वैकल्पिक रास्ता अपनाया है। वैसे भी ओएमएसएस के अंतर्गत 50 लाख टन गेहूं को 31 मार्च 2024 तक बेचा जाना है। इसलिए इसमें ज्यादा जोखिम नहीं है। गेहूं का स्टॉक बेशक सीमित है। लेकिन सरकार का प्रयास इसके घरेलू बाजार भाव में आ रही तेजी पर अंकुश लगाने का है।


लेकिन समस्या यह है कि ओएमएसएस के तहत प्रत्येक खरीदार को 10 से 100 टन तक ही गेहूं खरीदने की अनुमति दी गई है। इसकी सीमा बढ़ाए जाने की मांग हो रही है लेकिन सरकार का तर्क कुछ अलग है। इससे एक बात तो लगभग निश्चित है कि भारतीय खाद्य निगम की साप्ताहिक ई-नीलामी की प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रहेगी। मिलर्स गेहूं की खरीद नियमित रूप से करते रहेंगे और मार्केट में माल की उपलब्धता बनी रहेगी।

HAFED invited sale of paddy through NeML on 16th of Aug.2023

 HAFED invited sale of paddy through NeML on 16th of Aug.2023

Total Paddy 1121 Basmati - 55194 MT.

Minimum lot size - 2500 MT.

EMD - 5 %

SD - 10%

* remaining 90% with in 7 bank working days maximum 1 month may extended with ROI 12-18%.

Inc.lot size - 100Mt 

Inc.tick Rs.10

*Timings of auction - 12:00 - 12:45 PM

*Matching round - 1:00 - 1:30 PM

* Bid validity - 3 Working days of Hafed.


अगस्त में बारिश की कमी से चालू खरीफ में कपास की बुआई एक फीसदी से ज्यादा पिछड़ी

नई दिल्ली। अगस्त में देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम हुई है, जिस कारण कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में 1.02 फीसदी पीछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 8 अगस्त तक कपास की बुआई 121.28 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 122.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 8 अगस्त तक देशभर में सामान्य से एक फीसदी कम बारिश हुई है। इस दौरान 536.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जोकि सामान्य 543.9 मिलीमीटर से कम है।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई 16.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.46 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

गुजरात में चालू खरीफ में कपास की बुआई 26.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 25.28 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 6.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

महाराष्ट्र में चालू खरीफ में कपास की बुआई 41.70 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 41.86 लाख हेक्टेयर से कम है।

आंध्रप्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 3.22 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.14 लाख हेक्टेयर से कम है। तेलंगाना में चालू खरीफ में कपास की बुआई 18 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान 19.13 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी।

कर्नाटक में चालू खरीफ में कपास की बुआई 6.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.54 लाख हेक्टेयर से कम है।

ओडिशा में चालू खरीफ में कपास की बुआई 2.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.10 लाख हेक्टेयर से अधिक है।

चालू खरीफ में फसलों की कुल बुआई बढ़ी, दालों के साथ तिलहन की फसलों की घटी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में धान की रोपाई के साथ ही मोटे अनाज की बुआई बढ़ी है, जबकि दलहन एवं तिलहन की बुआई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में कुल फसलों की बुआई बढ़कर 979.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 972.58 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 8 अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य से एक फीसदी कम बारिश हुई है।

चालू खरीफ में धान की रोपाई बढ़कर 328 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 312.80 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 7.90 फीसदी पिछड़कर 113.07 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 122.77 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 40.27 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 42.55 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई घटकर चालू सीजन में 29.55 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 34.15 लाख हेक्टेयर से कम है।

इस दौरान मूंग की बुआई घटकर 30.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 32.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 12.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई इस समय तक 13.51 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 171.36 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 167.73 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में 13.29 लाख हेक्टेयर में, बाजरा की 68.81 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 79.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 14.08 लाख हेक्टेयर में, तथा 68.03 लाख हेक्टेयर में एवं 77.47 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

रागी की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 5.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 4.43 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 183.33 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 184.61 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 42.10 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 123.65 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 11.29 लाख हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 5.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 43.24 लाख हेक्टेयर में, 122.47 लाख हेक्टेयर में, 11.95 लाख हेक्टेयर में और 4.71 लाख हेक्टेयर में हुई थी।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 8 अगस्त तक कपास की बुआई 121.28 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 122.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 56.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।