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26 मार्च 2024

तेल मिलों की खरीद कमजोर होने से सरसों के भाव नरम, दैनिक आवकों में कमी

नई दिल्ली। तेल मिलों की खरीद कमजोर होने के कारण घरेलू बाजार में शनिवार को सरसों के भाव नरम हो गए। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव 25 रुपये कमजोर होकर दाम 5,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान सरसों की दैनिक आवक घटकर 11 लाख बोरियों की ही हुई।

विश्व बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों की कीमतों में मंदा आया था। व्यापारियों के अनुसार प्रमुख पाम तेल उत्पादक देशों मलेशिया और इंडोनेशिया में आगामी दिनों में उत्पादन में बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिस कारण विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार कम है। ग्राहकी कमजोर होने से घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जबकि इस दौरान सरसों खल के भाव भी नरम हुए।

ब्रांडेड तेल मिलों ने सरसों की खरीद कीमतों में 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की।

उत्पादक मंडियों में शनिवार को सरसों की दैनिक आवकों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के त्योहारी सीजन के साथ ही मार्च क्लोजिंग के कारण जहां सरसों की दैनिक आवक प्रभावित हुई है, वहीं मिलें भी केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है।

मौसम अनुकूल रहा तो सरसों की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में अभी बराबर बनी रहने का अनुमान है। वैसे भी चालू रबी में सरसों का उत्पादन अनुमान ज्यादा है तथा किसान माल नहीं रोक रहे हैं। दैनिक आवकों का देखते हुए तेल मिलें भी केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण सरसों तेल में मांग अभी बनी रहेगी, लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक आयातित खाद्वय तेलों के दाम पर ही निर्भर करेगी।

विश्व बाजार में सप्ताहांत में जहां मलेशियाई एक्सचेंज में पाम तेल के दाम कमजोर हुए थे, वहीं इस दौरान शिकागो में भी सोया तेल की कीमतों में मंदा आया था। डालियान में सोया के साथ ही पाम तेल के दाम के दाम कमजोर हुए थे।

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में शनिवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। कच्ची घानी सरसों तेल के भाव 14 रुपये कमजोर होकर दाम 1,026 रुपये प्रति 10 किलो रह गए, जबकि सरसों एक्सपेलर तेल के दाम भी 14 घटकर भाव 1,016 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। जयपुर में शनिवार को सरसों खल की कीमतें पांच रुपये कमजोर होकर दाम 2,480 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक घटकर 11 लाख बोरियों की ही हुई, जबकि पिछले कारोबारी दिवस में आवक 14.25 बोरियों की हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में नई सरसों की 6.25 लाख बोरी, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में 1.25 लाख बोरी, उत्तर प्रदेश की मंडियों में एक लाख बोरी, पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में 75 हजार बोरी तथा गुजरात में 40 हजार बोरी, एवं अन्य राज्यों की मंडियों में 1.35 लाख बोरियों की आवक हुई।

चालू समर सीजन में धान के साथ ही दलहन एवं तिलहन के बुआई में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। चालू समर सीजन में धान के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है। देशभर में पहली से 21 मार्च के दौरान में बारिश सामान्य की तुलना में 3 फीसदी अधिक हुई है


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू समर सीजन में 22 मार्च 24 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई 10.16 फीसदी बढ़कर 27.97 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 25.39 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू समर में बढ़कर 6.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि  पिछले साल की समान अवधि के 5.03 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान मूंग की बुआई 4.33 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 1.92 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 3.38 लाख हेक्टेयर और 1.51 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 10.36 फीसदी बढ़कर 6.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 6.08 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 3.41 लाख हेक्टेयर में, शीशम की 2.82 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 27,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 3.16 लाख हेक्टेयर, 2.48 लाख हेक्टेयर तथा 23,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू समर सीजन में 1-21 मार्च के दौरान देशभर में बारिश सामान्य की तुलना में 3 फीसदी अधिक हुई है, जबकि उत्तर पश्चिमी भारत में इस दौरान सामान्य से 5 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।

22 मार्च 2024

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से गुजरात साथ ही उत्तर भारत में कॉटन मंदी

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण बुधवार को गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 300 रुपये कमजोर होकर दाम 60,600 से 61,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 6000 से 6050 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 50 रुपये घटकर 5950 से 6050 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 100 रुपये घटकर 5500 से 6150 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम 200 रुपये घटकर 59,700 से 59,800 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 82,800 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में शाम को गिरावट का रुख रहा। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन के दाम शाम के सत्र में गिरावट दर्ज की गई।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार विश्व बाजार में कॉटन की कीमतों में लगातार दूसरे दिन मंदा आया है, जिस कारण घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों की मांग घट गई। उद्योग के कॉटन के उत्पादन अनुमान में भी बढ़ोतरी की है।

मार्च क्लोजिंग के साथ ही त्योहारी सीजन होने के कारण चालू महीने में मिलों की खरीद सीमित बनी रहने की उम्मीद है लेकिन अप्रैल में मिलों को कॉटन की खरीद करनी होगी। उधर कपास की दैनिक आवकों में आगामी दिनों में और कमी आयगी। देशभर की छोटी स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक भी कम है। ऐसे में अप्रैल में कॉटन के दाम तेज ही होने की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में 11 मार्च 2024 तक देशभर की मंडियों में 230.53 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो कपास की आवक हो चुकी है।  

पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 (अक्टूबर-सितंबर) में 7 मार्च तक कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने 32.81 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की है, जिसमें से 1.91 लाख गांठ की बिक्री कर दी है। अत: निगम के पास 7 मार्च को फसल सीजन 2023-24 का 30.91 लाख गांठ का स्टॉक है।

उद्योग ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में कॉटन के उत्पादन अनुमान में 15.60 लाख गांठ की बढ़ोतरी कर कुल 309.70 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान जारी किया है। इससे पहले के अनुमान में 294.10 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 में देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

निर्यातकों की मांग बढ़ने से बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में सुधार

नई दिल्ली। निर्यातकों की मांग बढ़ने से बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में सुधार आया है। उत्तर भारत के राज्यों में बासमती चावल के भाव गुरुवार को 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तथा धान की कीमतें 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुई।


हरियाणा लाइन से पूसा 1,121 सेला चावल अच्छी क्वालिटी के दाम तेज होकर 8,000 से 8,200 रुपये तथा गोल्डन सेला को दाम बढ़कर 8,400 से 8,500 रुपये तथा इसके स्टीम चावल के दाम तेज होकर 8,700 से 8,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इस दौरान पूसा 1,509 किस्म के सेला चावल के दाम बढ़कर 6,700 से 6,800 रुपये और गोल्डन सेला के 7,000 से 7,100 रुपये तथा इसके स्टीम चावल के भाव 7,500 से 7,650 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी अनुसार हो गए। बासमती चावल के सेला का भाव 10,000 रुपये और बासमती रॉ का दाम बढ़कर 11,500 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

हरियाणा की जुलाना मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम तेज होकर गुरुवार को 4,600 रुपये और 1,718 किस्म के 4,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सिरसा मंडी में 1,401 किस्म के धान के दाम 4,318 रुपये तथा टोहाना मंडी में 1,718 किस्म के धान के भाव 4,270 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मध्य प्रदेश की डबरा मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम 4,200 रुपये और 1,718 किस्म के 3,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

जानकारों के अनुसार बासमती चावल की निर्यात शिपमेंट पहले की तुलना में बढ़ी है, तथा राइस मिलों के पास उंचे दाम का धान का स्टॉक है। अत: मौजूदा कीमतों में मिलों को पड़ते नहीं लग रहे है, जिस कारण बिकवाली कमजोर है। ऐसे में बासमती चावल के साथ ही धान की मौजूदा कीमतों में और भी सुधार आने का अनुमान है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात 12.31 फीसदी बढ़कर 41.05 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात केवल 36.55 लाख टन का हुआ था।

गैर बासमती चावल के निर्यात में चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान 37.34 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 91.26 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 145.65 लाख टन का हुआ था।

जनवरी 2024 में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 5.62 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी 2023 में इसका निर्यात केवल 4.57 लाख टन का ही हुआ था। गैर बासमती चावल का निर्यात जनवरी 2024 में घटकर केवल 7.84 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी 2023 में इसका निर्यात 31.90 लाख टन का हुआ था। 

19 मार्च 2024

तेल मिलों की खरीद कमजोर बनी रहने से सरसों मंदी, दैनिक आवकों में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। तेल मिलों की खरीद कमजोर बनी रहने से घरेलू बाजार में सोमवार को लगातार दूसरे कार्यदिवस में सरसों मंदी हो गई। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव में 100 रुपये की गिरावट आकर दाम 5,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 15.50 लाख बोरियों की हुई।


विश्व बाजार में आज खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा। मलेशियाई पाम तेल की कीमतों में शाम के सत्र में सुधार आया, लेकिन शिकागो में सोया तेल के भाव कमजोर हो गए।   जानकारों के अनुसार मलेशियाई में उम्मीद के उल्ट पाम उत्पादों के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही अनुमान से कम निर्यात हुआ है, जिस कारण इसकी कीमतों में नरमी आ सकती है। घरेलू बाजार में ग्राहकी कमजोर होने से सरसों तेल की कीमतों में लगातार दूसरे कार्यदिवस में गिरावट आई है। इस दौरान सरसों खल के भाव भी कमजोर हुए।

उत्पादक मंडियों में सोमवार को भी सरसों की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वैसे भी उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है, इसलिए सरसों की दैनिक आवकों का दबाव अभी बना रहेगा। चालू रबी में सरसों का उत्पादन अनुमान ज्यादा है तथा किसान माल नहीं रोक रहे हैं। दैनिक आवकों का देखते हुए तेल मिलें भी केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण सरसों तेल में मांग अभी बनी रहेगी, लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक आयातित खाद्वय तेलों के दाम पर ही निर्भर करेगी।

मलेशियाई पाम तेल वायदा सोमवार को बढ़कर बंद हुआ, हालांकि विश्व बाजार में इस दौरान खाद्वय तेलों में मिलाजुला रुख रहा। उम्मीद से कम निर्यात के साथ ही कुछ क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने से इसके भाव में सीमित तेजी आई।

बर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स (बीएमडी) एक्सचेंज पर जून डिलीवरी पाम तेल वायदा अनुबंध में 0.47 फीसदी की बढ़ोतरी होकर भाव 4,240 रिंगिट प्रति टन हो गए। डालियान के पाम तेल वायदा अनुबंध में 0.22 फीसदी की गिरावट आई। इसका सबसे सक्रिय सोया तेल वायदा अनुबंध 0.49 फीसदी बढ़ गया। शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड पर सोया तेल की कीमतें लगभग तीन महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद 0.24 फीसदी तक कमजोर हो गई।

जानकारों के अनुसार शिकागो में सोया तेल और डालियान के पाम तेल अनुबंध में सुबह के सत्र में तेजी आई थी, लेकिन दक्षिणी प्रायद्वीपीय पाम ऑयल मिलर्स एसोसिएशन (एसपीपीओएमए) के उच्च उत्पादन आंकड़े के बाद भाव कमजोर हो गए।

एसपीपीओएमए के अनुमान के अनुसार 1-15 मार्च में अनुमानित उत्पादन पिछले महीने की समान अवधि की तुलना में 38.8 फीसदी बढ़ गया।

उधर एस्पेक एग्री मलेशिया के अनुसार 1-15 मार्च के दौरान मलेशियाई पाम तेल उत्पादों का निर्यात पिछले महीने की समान अवधि की तुलना में 8.4 फीसदी बढ़ गया, जबकि कार्गो सर्वेक्षक इंटरटेक टेस्टिंग सर्विसेज ने इसी अवधि में 3.3 फीसदी की वृद्धि का अनुमान जारी किया था। व्यापारियों के अनुसार निर्यात का अनुमान उम्मीद की तुलना में कम है।

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में सोमवार को लगातार दूसरे कार्यदिवस में कमजोर हुई। कच्ची घानी सरसों तेल के भाव 17 रुपये कमजोर होकर दाम 1,045 रुपये प्रति 10 किलो रह गए, जबकि सरसों एक्सपेलर तेल के दाम भी 17 घटकर भाव 1,035 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। जयपुर में सोमवार को सरसों खल की कीमतें 25 रुपये कमजोर होकर दाम 2,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 15.50 लाख बोरियों की हुई, जबकि पिछले कारोबारी दिवस में आवक 14.50 लाख बोरियों की ही हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में नई सरसों की आठ लाख बोरी, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में दो लाख बोरी, उत्तर प्रदेश की मंडियों में दो लाख बोरी, पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में 90 हजार बोरी तथा गुजरात में 65 हजार बोरी, एवं अन्य राज्यों की मंडियों में 1.95 लाख बोरियों की आवक हुई।

गुजरात में चालू समर में फसलों की कुल बुआई पांच फीसदी पिछड़ी

नई दिल्ली। गुजरात में चालू समर सीजन में फसलों की बुआई कुल 4.95 फीसदी पिछड़कर 18 मार्च 2024 तक केवल 6.59 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 6.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में धान की रोपाई समर सीजन में 18 मार्च तक 87,870 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 76,697 हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है।

राज्य में बाजरा की बुआई घटकर चालू समर में अभी तक केवल 1.40 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.47 लाख हेक्टेयर में इसकी बुआई हो चुकी थी। मक्का की बुआई राज्य में केवल 5,394 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5,594 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

दलहनी फसलों में मूंग की बुआई चालू समर सीजन में 28,587 हेक्टेयर में एवं उड़द की 15,183 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 32,981 हेक्टेयर और 17,423 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राज्य में तिलहन फसलों में मूंगफली की बुआई 34,573 हेक्टेयर में तथा शीशम की 76,334 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले समर सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 31,148 हेक्टेयर और 77,964 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

ग्वार सीड की बुआई राज्य में 879 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1,691 हेक्टेयर में हो चुकी थी। 

चालू समर सीजन में धान एवं तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी

नई दिल्ली। चालू समर सीजन में धान एवं तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है। दलहनी फसलों की बुआई पिछले साल के लगभग बराबर ही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू समर सीजन में 15 मार्च 24 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई 8 फीसदी बढ़कर 27.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि मोटे अनाजों की बुवाई 9.1 फीसदी बढ़कर 4.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 7.3 फीसदी बढ़कर 4.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 2.7 लाख हेक्टेयर में, शीशम की 1.85 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 19,000 हेक्टेयर में हुई है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू समर सीजन में 0.5 फीसदी बढ़कर 3.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

मंत्रालय के अनुसार चालू समर सीजन में फसलों की कुल बुआई 7.3 फीसदी बढ़कर 39.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

जीरा के साथ ही धनिया की कीमतों में मंदा, जनवरी में निर्यात में हुई भारी बढ़ोतरी

नई दिल्ली। जनवरी में जीरा के साथ ही धनिया के निर्यात में भारी बढ़ोतरी हुई है, हालांकि घरेलू बाजार में मांग कमजोर बनी रहने से शुक्रवार को इनकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।


सूत्रों के अनुसार जनवरी 2024 में जीरा का निर्यात 64 फीसदी बढ़कर 13,231.19 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल की समानवधि में केवल 8,049.71 टन का ही निर्यात हुआ था। इसी तरह से धनिया का निर्यात जनवरी 2024 में 57 फीसदी बढ़कर 6,225.32 टन का हुआ है, जबकि पिछले जनवरी में इसका निर्यात केवल 3,548.63 टन का ही हुआ था।

गुजरात की मंडियों में शुक्रवार को जीरे की आवक 55,000-60,000 बोरियों, एक बोरी-55 किलो) की हुई, जबकि मंडियों में बगैर बोली हुआ पिछले दिन का करीब 20,000 से 22,000 बोरी जीरा बचा हुआ था। घरेलू बाजार में मांग कमजोर होने से जीरा के दाम शुक्रवार को 50 रुपये प्रति 20 किलो तक कमजोर हुए।

व्यापारी के अनुसार उंजा मंडी में नये जीरे की आवक 40,000 बोरियों की हुई, तथा बेस्ट क्वालिटी के जीरा का भाव घटकर 4,900 से 5,150 रुपये, तथा मीडियम जीरा का दाम 4,300 से 4,350 रुपये प्रति 20 किलो रह गया।

धनिया की आवक उत्पादक मंडियों में करीब 50,000 से 55,000 बोरी, एक बोरी-40 किलो के करीब हुई तथा मांग कमजोर होने से इसकी कीमतों में 20 से 30 रुपये प्रति 20 किलो की गिरावट दर्ज की गई। उत्पादक मंडियों में धनिया के औसत दाम कमजोर होकर 1375-1875 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। 

14 मार्च 2024

फरवरी में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 13 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। फरवरी में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 13 फीसदी घटकर 974,852 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल फरवरी में इनका आयात 1,114,481 टन का हुआ था। फरवरी 2024 के दौरान खाद्वय तेलों का आयात 967,852 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 7,000 टन का हुआ है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2023-24 के पहले चार महीनों नवंबर 23 से फरवरी 24 के दौरान देश में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 21 फीसदी घटकर 4,647,963 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 5,887,900 टन का हुआ था।

जानकारों के अनुसार फरवरी 2024 में भी देश में खाद्वय तेल के आयात में गिरावट आई है। खाद्य तेल की आवश्यकताओं के लिए पाम तेल की उपलब्धता में कमी आई है क्योंकि प्रमुख उत्पादक देश मलेशिया और इंडोनेशिया इसे बायोडीजल में ज्यादा उपयोग कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस वर्ष कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

इंडोनेशिया और मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन, जोकि विश्व में कुल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है। इन देशों में वर्ष 2024 में इसके उत्पादन में या तो मामूली रूप से बढ़ोतरी होने की संभावना है या फिर पिछले साल के स्तर से कम होने की आशंका है, क्योंकि वहां वृक्षारोपण से उत्पादन में कमी आई है। फरवरी 2024 में अर्जेंटीना से सोया तेल का आयात तेजी से बढ़ा है, जबकि घरेलू जैव ईंधन उद्योग की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण ब्राजील से इसके आयात में गिरावट आई है।

एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष के पहले चार महीनों में आरबीडी पामोलिन का आयात 792,808 टन का ही हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 819,636 टन की तुलना में 3 फीसदी कम है। इस दौरान क्रूड पाम तेल का आयात 24 फीसदी घटकर केवल 3,822,743 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 5,025,129 टन का हुआ था। अत: रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलीन) की हिस्सेदारी 14 फीसदी से बढ़कर 17 फीसदी की हो गई है, जबकि क्रूड तेल की हिस्सेदारी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 86 फीसदी से घटकर 83 फीसदी की रह गई।

जनवरी के मुकाबले फरवरी में आयातित खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा। फरवरी में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलिन का भाव बढ़कर 903 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि जनवरी में इसका दाम 885 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का दाम बढ़कर फरवरी में 933 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि जनवरी में इसका भाव 911 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोयाबीन तेल का भाव फरवरी में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 924 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि जनवरी में इसका भाव 939 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सनफ्लावर तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर जनवरी के 933 डॉलर से घटकर फरवरी में 920 डॉलर प्रति टन रह गया।

11 मार्च 2024

अक्टूबर से फरवरी के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 4.92 फीसदी बढ़ा - सोपा

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2023-24 के पहले पांच महीनों अक्टूबर से फरवरी के दौरान सोया डीओसी के निर्यात में 4.92 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 8.94 लाख टन का हुआ है जबकि इसके पिछले फसल सीजन की समान अवधि में इसका निर्यात 8.52 लाख टन का ही हुआ था।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन 2023-24 के पहले पांच महीनों अक्टूबर से फरवरी के दौरान 41.43 लाख टन सोया डीओसी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि के 44.30 लाख टन की तुलना में कम है। नए सीजन के आरंभ में 1.17 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, जबकि 0.07 लाख टन का आयात हुआ है। इस दौरान 3.75 लाख टन सोया डीओसी की खपत फूड में एवं 29 लाख टन की फीड हुई है। अत: मिलों के पास पहली मार्च 2024 को 0.98 लाख टन सोया डीओसी का स्टॉक बचा हुआ था, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.22 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन 2023-24 के पहले पांच महीनों अक्टूबर से फरवरी के दौरान देशभर की मंडियों में 70 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जोकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि के 71 लाख टन से कम है। इस दौरान 52.50 लाख टन सोयाबीन की क्रॉसिंग हो चुकी है जबकि दो लाख टन की सीधी खपत एवं 0.03 लाख टन का निर्यात हुआ है। अत: प्लांटों, स्टॉकिस्टों तथा किसानों के पास पहली मार्च 2024 को 76.36 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक बचा हुआ था, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 79.41 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन 2023-24 के दौरान देश में 118.74 लाख टन सोयाबीन के उत्पादन का अनुमान है, जबकि नई फसल की आवकों के समय 24.07 लाख टन का बकाया स्टॉक था। अत: चालू फसल सीजन में सोयाबीन की कुल उपलब्धता 142.81 लाख टन की बैठेगी, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 149.26 लाख टन की तुलना में कम है।

सख्ती के बावजूद अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात 12 फीसदी से ज्यादा बढ़ा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की सख्ती के बावजूद भी चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 12.31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इस दौरान गैर बासमती चावल के निर्यात में 37.34 फीसदी की भारी गिरावट आई है।


केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान बासमती चावल का निर्यात 12.31 फीसदी बढ़कर 41.05 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात केवल 36.55 लाख टन का हुआ था।

गैर बासमती चावल के निर्यात में चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान 37.34 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 91.26 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 145.65 लाख टन का हुआ था।

जनवरी 2024 में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 5.62 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी 2023 में इसका निर्यात केवल 4.57 लाख टन का ही हुआ था। गैर बासमती चावल का निर्यात जनवरी 2024 में घटकर केवल 7.84 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी 2023 में इसका निर्यात 31.90 लाख टन का हुआ था।

केंद्र सरकार ने 25 अगस्त 2023 को आदेश दिया था कि केवल 1,200 डॉलर प्रति टन या उससे अधिक मूल्य वाले बासमती चावल के निर्यात अनुबंधों को ही पंजीकृत किया जायेगा। इसके विरोध में उत्तर भारत के निर्यातकों के साथ ही चावल मिलों ने हड़ताल कर दी थी, साथ ही मंडियों में किसानों से धान की खरीद भी बंद कर दी थी। अत: 28 अक्टूबर 23 को एक्सपोर्ट प्रमोशन संस्था एपिडा को भेजे एक पत्र में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि बासमती चावल के निर्यात के लिए कॉन्ट्रैक्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से संशोधित कर 950 डॉलर प्रति टन करने का निर्णय लिया था।

केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 23 को गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी, इसके अलावा साल सितंबर 2022 में ब्रोकन चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया था। हालांकि गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद कई देशों ने भारत सरकार से इस पर पुनर्विचार करने और निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने की मांग की थी। अत: सरकार ने समय, समय पर कई देशों के अनुरोध को मानते हुए गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात की मंजूरी दी है। इसके बावजूद भी गैर बासमती चावल के निर्यात में कमी आई है।

जानकारों के अनुसार लाल सागर के संकट का असर चावल के निर्यात पर भी पड़ा है तथा इससे घरेलू बाजार से चावल की निर्यात शिपमेंट में आई कमी के कारण घरेलू बाजार में बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में हाल ही में मंदा आया है।

हरियाणा की करनाल मंडी में शुक्रवार को पूसा 1,509 किस्म के बासमती सेला चावल का भाव 6,600 से 6,700 रुपये और इसके स्टीम चावल के भाव 7,400 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। इसी तरह से पूसा 1,121 किस्म के स्टीम चावल का भाव 8,700 से 8,800 रुपये तथा इसके सेला चावल का दाम 7,800 से 7,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली की नजफगढ़ मंडी में शुक्रवार को 1,121 किस्म के धान का भाव 4,200 से 4,511 रुपये, तथा हरियाणा की सिरसा मंडी में 1,401 किस्म के धान के भाव 4,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। पंजाब की कोटकपूरा मंडी में पूसा 1,718 किस्म के धान का भाव 3,665 से 3,870 रुपये, तथा 1,401 किस्म के धान के भाव 3,825 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मिलों की खरीद बढ़ने से गुजरात के साथ उत्तर भारत में दूसरे दिन कॉटन तेज

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 250 रुपये बढ़कर 61,000 से 61,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव 50 रुपये तेज होकर 6050 से 6100 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 75 तेज होकर 5975 से 6075 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 25 बढ़कर 5700 से 6225 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम तेज होकर 59,500 से 59,700 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 88,200 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में शाम को मिलाजुला रुख रहा। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन के दाम शाम के सत्र में तेज हुए।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम दूसरे दिन भी तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार विश्व बाजार में हाल ही में कॉटन की कीमतें तेज हुई है, जिस कारण घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात सौदों में बढ़ोतरी होगी। वैसे भी विश्व बाजार में भारतीय रुई सबसे सस्ती है। खपत का सीजन होने के कारण यार्न की स्थानीय मांग आगामी दिनों में और बढ़ेगी, जबकि देशभर की छोटी स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी आई है, तथा आगामी दिनों में आवक और कम होंगी। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में आगे और भी सुधार आने का अनुमान है।

हालांकि उत्पादक राज्यों में सीसीआई लगातार कॉटन बेच रही है, लेकिन सीसीआई के बिक्री भाव उंचे है, जिस कारण हाजिर बाजार में इसके दाम तेज होंगे।

व्यापारियों के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में अभी तक देशभर की मंडियों में 219.39 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो कपास की आवक हो चुकी है।  

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने फसल सीजन 2023-24 के दौरान अपने कपास उत्पादन अनुमान को 294.10 लाख के पूर्व स्तर पर बरकरार रखा है। मालूम हो कि फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2023-24 के दौरान देश में कपास का उत्पादन 323.11 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है।

महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 20 चीनी मिलों में पेराई बंद, 93.91 लाख टन हुआ उत्पादन

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2023-24 के दौरान महाराष्ट्र में 4 मार्च 2024 तक 20 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 65 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी थी।


महाराष्ट्र के शुगर कमिश्नर कार्यालय के अनुसार राज्य में 4 मार्च तक 93.91 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 98.06 लाख टन की तुलना में कम है।

चालू पेराई सीजन में राज्य में गन्ने में रिकवरी की दर बढ़कर 10.7 फीसदी की आ रही है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 9.93 फीसदी की रिकवरी आ रही थी।

पहली अक्टूबर से शुरू हुए पेराई सीजन में राज्य में 207 चीनी मिलों ने पेराई आरंभ की थी, तथा 4 मार्च तक 932.57 लाख टन गन्ने की पेराई की जा चुकी है, जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 211 चीनी मिलों ने 987.93 लाख टन गन्ने की पेराई की थी।

कोल्हापुर डिवीजन में 2 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी है, जबकि सोलापुर में 7 चीनी मिलों के अलावा, पुणे डिवीजन में 3 चीनी मिलें, अहमदनगर में एक चीनी मिल, छत्रपति संभावजीनगर डिवीजन में 6 चीनी मिलों के अलावा एक चीनी मिल नांदेड़ डिवीजन में पेराई बंद कर चुकी है।

गुजरात में समर सीजन में फसलों की बुआई 19.37 फीसदी पिछड़ी

नई दिल्ली। गुजरात में समर सीजन में फसलों की बुआई 19.37 फीसदी पिछड़कर चार मार्च 2024 तक केवल 2.89 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 3.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में धान की रोपाई समर सीजन में 4 मार्च तक 77,985 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 58,729 हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है।

राज्य में बाजरा की बुआई घटकर चालू समर में अभी तक केवल 46,271 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 65,614 हेक्टेयर में इसकी बुआई हो चुकी थी। मक्का की बुआई राज्य में केवल 3,124 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 3,421 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

दलहनी फसलों में मूंग की बुआई चालू समर सीजन में 9,352 हेक्टेयर में एवं उड़द की 2,086 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 15,159 हेक्टेयर और 8,628 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राज्य में तिलहन फसलों में मूंगफली की बुआई 12,830 हेक्टेयर में तथा शीशम की 19,713 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले समर सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 15,337 हेक्टेयर और 30,781 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

ग्वार सीड की बुआई राज्य में 486 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 600 हेक्टेयर में हो चुकी है।

05 मार्च 2024

बढ़े दाम पर तेल मिलों की खरीद कमजोर होने से सरसों कमजोर, दैनिक आवकों में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। बढ़ी हुई कीमतों में तेल मिलों की खरीद कमजोर होने से घरेलू बाजार में सोमवार को लगातार दो कार्यदिवस की तेजी के बाद सरसों में नरमी आई। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव 25 रुपये कमजोर होकर दाम 5,425 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 8.50 लाख बोरियों की हुई।


विश्व बाजार में आज खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा। मलेशियाई पाम तेल के दाम कमजोर हुए, जबकि शिकागो में सोया तेल की कीमतों में हल्का सुधार आया। जानकारों के अनुसार विदेशी बाजार में खाद्य तेलों की मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में लगातार दो कार्यदिवस की तेजी के बाद मंदा आया, साथ ही इस दौरान सरसों खल के भाव भी कमजोर हुए।

उत्पादक मंडियों में सोमवार को सरसों की दैनिक आवक में बढ़ोतरी दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार हाल ही में कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। हालांकि सरसों का उत्पादन अनुमान ज्यादा है, जिस कारण तेल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। खपत का सीजन होने के कारण सरसों तेल में मांग अभी बनी रहेगी, लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक आयातित खाद्य तेलों के दाम पर ही निर्भर करेगी।

बर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (बीएमडी) पर मई डिलीवरी वायदा अनुबंध में पाम तेल की कीमतें 28 रिंगिट कमजोर होकर 3,938 रिंगिट प्रति टन पर बंद हुई। इस दौरान शिकागो में सीबीओटी सोया तेल की कीमतें 0.01 फीसदी तेज हुई।

कांडला बंदरगाह पर सीपीओ की कीमतें 865 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बनी रही, जबकि आरबीडी पामोलीन की कीमतें 5 रुपये बढ़कर 890 रुपये प्रति 10 किलो हो गईं। सोया तेल रिफाइंड की कीमतें 5 रुपये बढ़कर 945 रुपये प्रति 10 किलो बोली गई। डीगम की कीमतें भी 5 रुपये बढ़कर 880 रुपये प्रति 10 किलो हो गई। हालांकि सूरजमुखी रिफाइंड तेल की कीमतें 930 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बनी रही।

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में पिछले दो कार्य दिवसों की तेजी के बाद मंदा आया। कच्ची घानी सरसों तेल के भाव 10 रुपये कमजोर होकर दाम 1,015 रुपये प्रति 10 किलो रह गए, जबकि सरसों एक्सपेलर तेल के दाम भी 10 घटकर भाव 1,005 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। जयपुर में सोमवार को सरसों खल की कीमतें 30 रुपये घटकर दाम 2,495 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 8.50 लाख बोरियों की हुई, जबकि पिछले कारोबारी दिवस में आवक 7.25 लाख बोरियों की ही हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में नई सरसों की 3.60 लाख बोरी, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में 1.35 लाख बोरी, उत्तर प्रदेश की मंडियों में 1.25 लाख बोरी, पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में 20 हजार बोरी तथा गुजरात में 65 हजार बोरी, एवं अन्य राज्यों की मंडियों में 1.45 लाख बोरियों की आवक हुई।

गुजरात में जीरा एवं सौंफ के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी, धनिया के साथ मेथी का कम - एफआईएसएस

नई  दिल्ली। चालू फसल सीजन 2024 में जहां जीरे के साथ ही सौंफ का उत्पादन गुजरात में ज्यादा होने का अनुमान है, वहीं इस दौरान धनिया के साथ ही मेथी के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।


फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स (एफआईएसएस) के अनुसार फसल सीजन 2024 में गुजरात में जीरा का उत्पादन 98 फीसदी बढ़कर 2.54 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन केवल 1.28 लाख टन का ही हुआ था। इस दौरान सौंफ का उत्पादन 119 फीसदी बढ़कर 1.30 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2023 में इसका उत्पादन केवल 59,830 टन का ही हुआ था।

एफआईएसएस के अनुसार फसल सीजन 2024 में धनिया का उत्पादन गुजरात मे 43.80 फीसदी घटकर केवल 1,58,350 टन का ही होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2023 के दौरान इसका उत्पादन 2,81,520 टन का हुआ था। मैथी का उत्पादन भी चालू फसल सीजन में 28 फीसदी घटकर 24,620 टन ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले सीजन में 33,990 टन का उत्पादन हुआ था।

गुजरात में मसाला कारोबारियों की जीरा के किसानों एवं फसल पर कड़ी नजर है। किसानों ने शनिवार को राज्य के कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश के कारण फसल को नुकसान होने की आशंका व्यक्त की थी। हालांकि प्रतिकूल मौसम के बावजूद, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष बुआई में हुई बढ़ोतरी से जीरा का उत्पादन बढ़ेगा। माना जा रहा है कि गुजरात के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रमुख जीरा उत्पादक राज्यों में भी उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

उद्योग के अनुसार राजस्थान में जीरे का उत्पादन 53 फीसदी की भारी बढ़ोतरी के साथ 3.12 लाख टन तक होने की उम्मीद है। इसी तरह से राज्य में सौंफ का उत्पादन भी 81 फीसदी बढ़कर 67,120 टन होने का अनुमान है। हालांकि राज्य में धनिया का उत्पादन 26 फीसदी घटकर कुल 64,000 टन ही होने का अनुमान है।

एफआईएसएस के अध्यक्ष अश्विन नायक के अनुसार गुजरात में जीरा के उत्पादन में बढ़ोतरी का श्रेय पिछले साल कीमतें ज्यादा होने के कारण किसानों द्वारा बुआई क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को जाता है। नायक ने कहा कि बुआई में बढ़ोतरी के कारण, इस साल बंपर उत्पादन अनुमान के कारण जीरे की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना नहीं है। हालांकि इस समय जीरा की निर्यात मांग मजबूत है तथा जून तक निर्यात मांग बराबर बनी रहने की उम्मीद है। 

04 मार्च 2024

समर में धान के साथ ही दलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी, तिलहन की पिछले साल के बराबर

नई दिल्ली। चालू समर सीजन में धान के साथ ही दलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि इस दौरान तिलहन की बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू समर सीजन में 1 मार्च 24 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 23.96 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 22.06 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मंत्रालय के अनुसार चालू समर सीजन में फसलों की कुल बुआई बढ़कर 30.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 28.46 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 1.77 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.68 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान उड़द की बुआई 51 हजार हेक्टेयर में तथा मूंग की 1.20 लाख हेक्टेयर के अलावा अन्य फसलों की बुआई 6 हजार हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 53 हजार हेक्टेयर, 1.10 लाख हेक्टेयर और पांच हजार हेक्टेयर हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में बढ़कर 2.13 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.94 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। मोटे अनाजों में मक्का की बुआई 1.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.36 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान बाजरा की बुआई 34 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 46 हजार हेक्टेयर की तुलना में कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू समर सीजन में 2.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के बराबर है। इस दौरान मूंगफली की बुआई चालू सीजन में 1.75 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इसकी बुआई 1.77 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। अन्य तिलहनी फसलों में सनफ्लावर की 17 हजार हेक्टेयर में और शीशम की 75 हजार हेक्टेयर में हुई है। 

चालू पेराई सीजन में फरवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 1.67 फीसदी घटा - उद्योग

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में फरवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 1.67 फीसदी कम होकर 254.70 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका उत्पादन 259.05 लाख टन का हो चुका था।


नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के अनुसार 29 फरवरी, 2024 तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 90.90 लाख टन एवं उत्तर प्रदेश में 78.95 लाख टन का हुआ है।

चालू पेराई सीजन में कर्नाटक में चीनी का उत्पादन 45.70 लाख टन का ही हुआ है, जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 51.20 लाख टन से कम है

एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में इस समय 462 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, तथा मिलों ने इस दौरान 2559.64 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

चालू पेराई सीजन में देश भर में कुल 533 चीनी मिलों ने पेराई सत्र में भाग लिया था, जिनमें से 71 मिलें बंद हो चुकी। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के दौरान 534 चीनी मिलों ने पेराई की थी।

देश में चीनी की रिकवरी दर पिछले सीजन की तुलना में अधिक है। 29 फरवरी 2024 तक औसत चीनी में रिकवरी की दर 9.95 फीसदी की आई है, जबकि पिछले सीजन में औसत रिकवरी की दर 9.76 फीसदी की थी।

01 मार्च 2024

दाल मिलों की मांग बनी रहने से चना तेज, अरहर एवं उड़द के साथ ही मसूर में मिलाजुला रुख

नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग बनी रहने से घरेलू बाजार में गुरुवार को चना की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान अरहर एवं उड़द तथा मसूर की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा। मूंग के दाम स्थिर बने रहे।


चेन्नई में बर्मा की उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव तेज हो गए। इस दौरान लेमन अरहर की कीमतें भी पूर्व स्तर पर स्थिर बनी रही। उड़द एफएक्यू के भाव मार्च शिपमेंट के 10 डॉलर तेज होकर 1,020 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव 10 डॉलर बढ़कर 1,090 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए। चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 1,245 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।

चेन्नई में उड़द की कीमतों में डॉलर में तेज आई, जबकि घरेलू बाजार में इसके भाव में मिलाजुला रुख रहा। व्यापारियों के अनुसार सरकार की सख्ती को देखते हुए दाल मिलें उड़द की खरीद केवल जरुरत के हिसाब से ही कर रही हैं, क्योंकि उड़द दाल में बढ़ी हुई कीमतों में खुदरा एवं थोक मांग भी नहीं बढ़ पा रही। उधर कृष्णा जिले में नई उड़द की आवक पहले की तुलना में बढ़ी है, साथ ही उड़ीसा की में भी नई उड़द की आवक बढ़ रही है। उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग भी सामान्य की तुलना में कमजोर है। इसलिए इसकी कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि उड़द के आयात पड़ते अभी भी महंगे हैं, इसलिए आयातक जरूर दाम तेज करना चाहते हैं, अत: भाव तेज होने पर मुनाफावसूली करते रहना चाहिए।

घरेलू बाजार में अरहर की कीमतों में दूसरे दिन भी मिलाजुला रुख रहा। उधर चेन्नई में लेमन के दाम डॉलर में स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार अरहर में बढ़े दाम पर दाल मिलों की मांग का समर्थन नहीं मिल पा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की लगातार समीक्षा कर रही है, जबकि घरेलू मंडियों में जहां देसी अरहर की आवक अभी बनी रहेगी, वहीं म्यांमार से लेमन अरहर का आयात भी आगामी दिनों में बढ़ेगा। ऐसे में इसके भाव में अभी बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में अरहर के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है, साथ ही आयात पड़ते भी महंगे हैं, इसलिए मौजूदा कीमतों में अभी तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

दिल्ली में चना की कीमतों में तीसरे दिन भी तेजी दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार मध्य महाराष्ट्र (नासिक क्षेत्र) और दक्षिण पूर्व मध्य प्रदेश में छिटपुट हल्की बारिश हुई है तथा उत्पादक राज्यों में अगले एक, दो दिन मौसम खराब होने की आशंका है, जिसका असर नई फसल की आवक पर पड़ सकता है। इसलिए इसके भाव में हल्की तेजी और भी बन सकती है। जानकारों के अनुसार चना की कीमतों में तेजी, मंदी उत्पादक राज्यों में मौसम कैसा रहता है, इस पर भी निर्भर करेगी। नई फसल को देखते हुए दाल मिलें भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। मौसम अनुकूल रहा तो नए चना की आवक होली के बाद बढ़ेगी। हालांकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है, लेकिन एक बार आवकों का दबाव बनने पर कीमतों में और भी मंदा आयेगा। वैसे भी केंद्र सरकार ने चना का एमएसपी 5,440 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। खपत का सीजन होने के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी, जबकि उत्पादक राज्यों में अच्छी क्वालिटी का पुराना स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है।

मुंबई में कनाडा की पीली मटर के दाम 50 रुपये कमजोर होकर दाम 4,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के दाम 25 रुपये तेज होकर 4,100 से 4,125 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मुंद्रा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के भाव 25 रुपये बढ़कर 4,150 से 4,175 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम तेज हुए हैं, जबकि आयातित के दाम बंदरगाह पर कमजोर हुए। व्यापारियों के अनुसार मौसम अनुकूल रहा तो मार्च में मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई मसूर की आवक आवक बढ़ेगी। चालू रबी में मसूर की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है, जिस कारण उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है। इसलिए इसके भाव में हल्की नरमी और भी आ सकती है। हालांकि आयातकों के पास उंचे भाव का स्टॉक है, इसलिए आयातक दाम घटाना नहीं चाहते। उधर उत्पादक मंडियों में पुरानी देसी मसूर की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

देसी मूंग की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग अभी बनी रहेगी, साथ ही रबी सीजन में इसकी बुआई पिछले साल की तुलना में घटी है। हालांकि उत्पादक राज्यों में मूंग की दैनिक आवक पहले की तुलना में बढ़ी, तथा मार्च में नई आवकों में बढ़ोतरी होगी। इसलिए मौजूदा कीमतों में अब ज्यादा तेजी के आसार नहीं है। उधर नेफेड राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश में लगातार मूंग की बिकवाली कर रही है।

आयातित खाद्वय तेल तेज होने के बावजूद कॉटन वॉश के दाम कमजोर, बिनौला नरम

नई दिल्ली। विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में गुरुवार को तेजी आई, इसके बावजूद भी घरेलू बाजार में कॉटन वॉश के दाम स्थिर बने रहे। इस दौरान जहां तेल मिलों की खरीद कमजोर होने से बिनौला के दाम कमजोर हुए, वहीं कपास खली के दाम स्थिर हो गए।


विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में तेजी का रुख रहा, हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन वॉश की कीमतें कमजोर हो गई। धुले में कॉटन वॉश के दाम 10 रुपये घटकर 865 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। इस दौरान अकोला में कॉटन वॉश के भाव पांच रुपये कमजोर होकर 870 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें पांच रुपये घटकर 870 रुपये प्रति दस किलो के स्तर पर पर आ गई।

विश्व बाजार में शाम के सत्र में खाद्वय तेलों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। मलेशियाई पाम तेल की कीमतों में शाम के सत्र में तेजी आई, साथ ही शिकागो में सोया तेल के दाम भी बढ़ गए। व्यापारियों के अनुसार विदेशी बाजार में खाद्य तेलों की मौजूदा कीमतों में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हाजिर बाजार में ग्राहकी कमजोर होने से कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा आया।

तेल मिलों की मांग घटने से बिनौले के भाव उत्तर भारत के राज्यों में स्थिर से नरम हुए। हरियाणा में बिनौले के भाव 100 रुपये कमजोर होकर दाम 2250 से 2550 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान श्रीगंगानगर लाइन में बिनौला के भाव 2300 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 50 रुपये कमजोर होकर 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

तेल मिलों की मांग घटने से बिनौला की कीमतें उत्तर भारत के राज्यों में कमजोर हुई। हालांकि विश्व बाजार में आज खाद्वय तेलों में शाम के सत्र में तेजी का रुख रहा। मलेशिया से पाम तेल का निर्यात फरवरी में जनवरी के मुकाबले कम हुआ है, ऐसे में विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। घरेलू मंडियों में कपास की दैनिक आवक आगामी दिनों में घटेगी, लेकिन विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कमजोर मांग को देखते हुए तेल मिलें जरुरत के हिसाब से ही बिनौला की खरीद कर रही हैं। अत: इसके भाव में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

तेल मिलों की बिकवाली सीमित होने के कारण कपास खली की कीमतें स्थिर हो गई। सेलु में कपास खली की कीमतें 2,870 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। इस दौरान शाहपुर में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के दाम 2,900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। सूर्यापेट में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के दाम 2,800 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गए।

तेल मिलों की बिकवाली कम आने से कपास खली की कीमतें स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार तेल मिलों को नीचे दाम पर पडते नहीं लग रहे, इसलिए बिकवाली कम आ रही है। हालांकि कपास खली में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है। इसलिए इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है, लेकिन अभी बड़ी तेजी के आसार कम है। हालांकि उत्पादक राज्यों में कपास की दैनिक आवक पहले की तुलना में हुई है, इसलिए मिलें दाम घटाकर बिकवाली नहीं करना चाहती।