कुल पेज दृश्य

03 दिसंबर 2022

स्टॉकिस्टों की सक्रियता से अरहर और उड़द तेज, चना एवं मसूर मंदी

 नई दिल्ली। बर्मा में लेमन अरहर के साथ ही उड़द की कीमतों में आई तेजी से स्टॉकिस्टों ने घरेलू बाजार में शुक्रवार को अरहर एवं उड़द के दाम तेज कर दिए, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों में शाम के सत्र में मिलों की खरीद कमजोर हो गई। चना एवं मसूर की कीमतें में नरमी दर्ज की गई, जबकि मूंग के दाम लगभग स्थिर बने रहे।


बर्मा में स्थानीय व्यापारियों की नीचे दाम पर बिकवाली कमजोर होने से लेमन अरहर के साथ ही उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार बर्मा में उड़द एसक्यू और एफएक्यू की कीमतों में 10 से 15 डॉलर की तेजी आकर भाव क्रमश: 895 डॉलर और 805 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए। इस दौरान लेमन अरहर की कीमतों में 10 डॉलर की तेजी आकर भाव 850 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए।

गुजरात की राजकोट मंडी में आज 200 बोरी नई अरहर की आवक हुई तथा इसका व्यापार 7,000 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी अनुसार हुआ। जानकारों के अनुसार नई अरहर में मिलों की खरीद कम देखी गई, वैसे भी नए मालों में नमी मात्रा आ रही है। माना जा रहा है कि चालू महीने तक गुजरात के साथ ही कर्नाटक एवं महाराष्ट्र की मंडियों में नई अरहर की आवक बढ़ेगी, साथ ही सूखे मालों की आवक ज्यादा होगा।

चालू सीजन में अरहर का उत्पादन अनुमान कम है, इसलिए स्टॉकिस्ट नई फसल की आवक के समय दाम तेज करना चाहते हैं, लेकिन एक तो अरहर दाल में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर है। दूसरा हाजिर बाजार में नकदी की किल्लत है। साथ ही अफ्रीकी देशें से लगातार अरहर का आयात हो रहा है तथा इन देशों से आयातित अरहर की क्वालिटी हल्की है। इसलिए अरहर में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।  

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2022-23 में देश के दस राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा और महाराष्ट्र से 4 लाख टन मूंग की खरीद की मंजूरी दी हुई है, जिसमें से अभी तक केवल 24,000 टन मूंग की एमएसपी पर खरीद हो पाई है।

इसके अलावा सरकार ने चालू खरीफ सीजन में 2.94 लाख टन उड़द की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी की उड़द के दाम एमएसपी से ज्यादा होने के कारण अभी तक खरीद शुरू नहीं हो पाई।

बर्मा में उड़द के दाम तेज होने से घरेलू बाजार में सुबह के सत्र में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी आई, लेकिन शाम को चेन्नई में भाव कमजोर हो गए, जबकि दिल्ली और मुंबई में भी बढ़े दाम पर मिलों की खरीद कमजोर देखी गई। व्यापारियों के अनुसार उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जबकि उत्पादक राज्यों की मंडियों में देसी उड़द हल्के, भारी मालों की आवक भी बराबर बनी हुई है।

दिल्ली में सुबह के सत्र में मध्य प्रदेश की मसूर के दाम तेज हुए थे, लेकिन बढ़े भाव में मिलों की खरीद कमजोर हो गई, साथ ही स्टॉकिस्टों की बिकवाली बढ़ने से शाम के सत्र मेें भाव नरम हो गए। वैसे भी आगामी दिनों में कनाडा के साथ ही ऑस्ट्रेलिया से आयातित मसूर ज्यादा मात्रा में आएगी, जबकि मसूर दाल में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है। इसलिए इसकी कीमतों में हल्की नरमी और भी आ सकती है। हालांकि देसी मसूर की आवक उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कम जरूर हुई है, लेकिन मिलर्स की मांग भी कमजोर है।

मूंग की कीमतों में दिल्ली में स्थिर हो गई हैं, व्यापारियों के अनुसार मूंग में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, क्योंकि मूंग दाल में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में खरीफ मूंग की आवक अभी बराबर बन रहेगी। इसलिए मूंग की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।  

चना की कीमतें नरम हुई है। व्यापारियों के अनुसार चना में जहां नीचे दाम पर स्टॉकिस्टों की बिकवाली कमजोर है, वहीं मिलर्स भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं। वैसे भी चना की कीमतों में तेजी, मंदी नेफेड की बिकवाली पर निर्भर करेगी। चना की बुआई चालू रबी में बढ़कर 79.82 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 75.80 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी।

दलहन की बुआई चालू रबी में बढ़कर 112.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 108.57 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

अन्य दालों में मसूर की बुआई चालू रबी में 13.38 लाख हेक्टेयर में, एवं मटर की 7.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले रबी सीजन में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 13.27 और 7.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई चालू रबी में 3.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 3.23 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 150 रुपये की तेजी आकर दाम 7200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इस दौरान चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 150 बढ़कर 6900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

नीचे दाम पर दाल मिलों की मांग बढ़ने के कारण मुंबई में लेमन अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर 6900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें 50 से 150 रुपये तेज हो गई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 50 रुपये तेज होकर भाव 7150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। तंजानिया की अरुषा अरहर के दाम 50 रुपये बढ़कर 5700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मटवारा की अरहर के दाम 100 रुपये बढ़कर 5550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 100 रुपये तेज होकर 5650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मलावी से आयातित अरहर के दाम 150 रुपये तेज होकर 4950 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

नीचे दाम पर दाल मिलों की मांग बढ़ने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव में 150 से 200 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 7050 रुपये और 7750 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उड़द एफएक्यू की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 6750 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई मेें सुबह के सत्र में उड़द के दाम तेज हुए थे, लेकिन शाम के सत्र में उड़द एसक्यू के दाम कमजोर हो गए। उड़द एफएक्यू के दाम हाजिर डिलीवरी के 50 रुपये तेज होकर 6,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान उड़द एसक्यू के दाम दिसंबर और जनवरी डिलीवरी के 25-25 रुपये कम होकर होकर भाव क्रमश: 7,325 रुपये और 7,350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की कमजोर मांग से दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की गिरावट आकर भाव 6,750 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान कनाडा की मसूर के दाम 6400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 6,150 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 50 रुपये घटकर 6100 से 6150 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें वैसल में 50 रुपये नरम होकर 6,250 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,350 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रही। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर हो गई।

दाल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से दिल्ली में राजस्थानी चना के दाम 25 रुपये कमजोर हो भाव 5100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन के चना के भाव 5025 से 5050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

राजस्थान लाईन की मूंग के दाम दिल्ली में 7150 से 7200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। 

चालू पेराई सीजन में नवंबर अंत तक 47.9 लाख टन चीनी का उत्पादन

नई दिल्ली।  पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2022-23 के पहले दो महीनों अक्टूबर 2022 से नवंबर 2022 अंत तक 47.9 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 47.2 लाख टन से थोड़ा ज्यादा है।


इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार देशभर में 434 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 416 चीन मिलों में ही पेराई आरंभ हो पाई थी।

प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में नवंबर 22 अंत तक चीनी का उत्पादन 20 लाख टन का हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 23.3 लाख टन से कम है। इस दौरान उत्तर प्रदेश में 11.2 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 10.4 लाख टन से ज्यादा है।

अन्य राज्यों गुजरात में नवंबर 2022 अंत तक चीनी का उत्पादन 1.50 लाख टन, तमिलनाडु में 1.1 लाख टन और अन्य राज्यों में दो लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमश: 1.6 लाख टन, 50 हजार टन और 1.6 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। 

चालू रबी में गेहूं एवं दलहन के साथ तिलहन की बुआई 6.39 फीसदी आगे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई में तेजी आई है। देशभर के राज्यों मेंं दो दिसंबर 2022 तक फसलों की कुल बुआई 6.39 फीसदी बढ़कर 450.61 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 423.52 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। गेहूं एवं दलहन के साथ ही तिलहनी फसलों की बुआई में आगे चल रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 2 दिसंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 211.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 200.85 लाख हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

चालू रबी में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 83.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 75.55 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 76.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 69.32 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई चालू रबी में घटकर 2.67 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसी बुआई 2.73 हेक्टेयर में ही हुई थी। सफ्लावर, सनफ्लावर और असली की बुआई क्रमशः 52 हजार, 48 हजार एवं 2.32 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहन की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 112.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 108.57 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 79.82 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 75.80 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। अन्य दालों में मसूर की 13.38 लाख हेक्टेयर में, एवं मटर की 7.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले रबी सीजन में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 13.27 और 7.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई चालू रबी में 3.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 3.23 लाख हेक्टेयर में हुई थी। मूंग की बुआई चालू रबी में 69 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 32.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 29.02 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। रबी में मक्का की बुआई 8.98 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 17.87 लाख हेक्टेयर में तथा रागी की 36 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले रबी सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 5.93 लाख हेक्टेयर में 18.11 लाख हेक्टेयर में और 28 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुआई चालू रबी में 5.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 4.57 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान की रोपाई चालू रबी में 10.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.53 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू खरीफ में समर्थन मूल्य पर 326 लाख टन की हो चुकी है धान की खरीद

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2022-22 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 326.31 लाख टन की हो चुकी है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार 30 नवंबर 2022 तक 27.45 लाख धान किसानों को 67,219.88 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।


चालू खरीफ विपणन सीजन में पंजाब से 179.61 लाख टन धान की खरीद एमएसपी पर चुकी है, इसके अलावा हरियाणा से इस दौरान 58.82 लाख टन धान सरकारी एजेंसियों ने खरीदा है। छत्तीसगढ़ से चालू खरीफ में 23.28 लाख टन, तेलंगाना से 24.11 लाख टन एवं उत्तर प्रदेश से 12.40 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है।

चालू खरीफ विपणन सीजन 2022-23 में एमएसपी पर 771 लाख टन धान की खरीद होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल खरीफ में हुई कुल खरीद 759 लाख टन से ज्यादा है।

अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश से 1.48 लाख टन, बिहार से 58,185 टन, गुजरात से 57,360 टन, हिमाचल प्रदेश से 11,863 टन, जम्मू-कश्मीर से 27,675 टन, पश्चिम बंगाल से 2,642 टन, केरल से 83,718 टन तथा तमिलनाडु से 7.96 लाख टन धान की एमएसपी पर खरीद हो चुकी है।

चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के दौरान बासमती एवं गैर बासमती चावल का निर्यात बढ़ा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान बासमती चावल के साथ ही गैर बासमती चावल के निर्यात में क्रमश: 11.41 और 6.03 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।


सूत्रों के अनुसार अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2022 के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 24.10 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 21.63 लाख टन का ही हुआ था। अक्टूबर में बासमती चावल का निर्यात 2.53 लाख टन का हुआ है।

गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2022 के दौरान 102.11 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 96.30 लाख टन का हुआ था। गैर बासमती चावल का निर्यात अक्टूबर में 12.55 लाख टन का हुआ है।

उत्पादक मंडियों में बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतें तेज बनी हुई है। जानकारों के अनुसार बासमती चावल में निर्यात मांग अच्छी है, जबकि उत्पादक मंडियों में पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक पहले की तुलना में कम हुई है। हालांकि पूसा 1,121 एवं 1718 तथा 1,404 के साथ ही ट्रेडिशनल बासमती धान की आवक बराबर बनी हुई है। व्यापारियों के अनुसार  निर्यातकों की मांग को देखते हुए अभी धान एवं चावल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं है।

पंजाब की मुक्तसर मंडी में बुधवार को धान की आवक 80,000 बोरियों की हुई तथा मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के भाव 4125 रुपये, 1,401 किस्म के धान के भाव 4095 रुपये और 1718 किस्म के धान के भाव 3900 रुपये तथा पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव 3700 रुपये प्रति क्विंटल रहे। हरियाणा की कैथल मंडी में ट्रेडिशनल बासमती धान के भाव 6275 रुपये, पूसा 1,121 किस्म के धान के भाव 4225 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

पूसा 1,121 बासमती चावल गोल्डन सेला का भाव 8300 रुपये और सेला चावल का बढ़कर 8000 से 8100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस दौरान 1718 किस्म के स्टीम चावल का दाम 7800 से 8000 रुपये एवं इसके गोल्डन सेला चावल का 7,400 से 7600 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। पूसा 1,509 किस्म के सेला चावल का दाम 6900 से 7100 रुपये और इसके स्टीम चावल के दाम बढ़कर 7800 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

29 नवंबर 2022

मिलों की खरीद कमजोर होने से कॉटन मंदी, अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ रही है कपास की आवक

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की खरीद कमजोर के कारण से सोमवार को कॉटन की कीमतों में गिरावट आई। गुजरात की अहमदाबाद मंडी में सोमवार को शंकर-6 किस्म की कॉटन के दाम 700 रुपये कमजोर होकर 67,300 से 67,600 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।


उत्तर भारत के राज्यों पंजाब में कॉटन के भाव 100 रुपये घटकर 6650 से 6700 रुपये प्रति मन रह गए, जबकि हरियाणा में इसके दाम 100 रुपये नरम होकर 6500 से 6600 रुपये प्रति मन के स्तर पर आ गए। इस दौरान अपर राजस्थान में कॉटन की कीमतें 75 रुपये कमजोर होकर 6725 से 6800 रुपये प्रति मन रह गई।

व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियां में कपास की आवक बढ़ने के बजाए कम हो गई, जिस कारण देशभर की 45 से 50 फीसदी जिनिंग मिलें पूरी उत्पादन क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रही है। रुई में भी स्थानीय एवं निर्यात मांग कमजोर है, जिस स्पिनिंग मिलों को भी पड़ते नहीं लग रहे हैं। अत: स्पिनिंग मिलें भी केवल जरुरत के हिसाब से कॉटन की खरीद कर रही हैं।  

जानकारों के अनुसार कॉटन के बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चालू सीजन में उद्योग का अनुमान है कि कपास का उत्पादन बढ़कर 344 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो होने का अनुमान है। हालांकि उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी के बावजूद भी देशभर की मंडियों में कपास की दैनिक आवक उम्मीद के अनुसार बढ़ नहीं पा रही है। पिछले दिनों उत्पादक राज्यों में कपास की दैनिक आवक बढ़कर करीब सवा लाख गांठ, की हो गई थी, लेकिन सोमवार को इसकी आवक घटकर एक लाख बोरियों से भी कम हुई। व्यापारियों के अनुसार पिछले साल किसानों ने कपास का ऊंचा भाव देखा था, जिस कारण नीचे दाम पर बिकवाली नहीं कर रहे हैं। ऐसे में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में सोमवार कॉटन के दाम कमजोर हुए। दिसंबर महीने के वायदा अनुबंध में इसके भाव 48 प्वाइंट घटकर 80.86 सेंट रह गए, जबकि मार्च-23 वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 191 प्वाइंट की गिरावट आकर दाम 78.27 सेंट रह गए। घरेलू वायदा बाजार में एमसीएक्स पर नवंबर महीने के वायदा अनुबंध में कॉटन की कीमतों में 260 रुपये की गिरावट आकर भाव 32,400 रुपये प्रति गांठ रह गए। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल-23 महीने के वायदा अनुबंध में कॉटन के दाम 2.63 फीसदी कमजोर हुए। 

चालू रबी में गेहूं के साथ ही तिलहनी फसलों की बुआई ज्यादा, कुल बुआई 7.21 फीसदी आगे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई जोरो पर चल रही है, तथा अभी तक कुल बुआई 7.21 फीसदी बढ़कर 358.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 334.46 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। गेहूं के साथ ही तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 25 नवंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 152.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 138.35 लाख हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

चालू रबी में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 75.77 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 66.71 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 70.89 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 61.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई चालू रबी में घटकर 1.80 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसी बुआई 2.10 हेक्टेयर में ही हुई थी। सफ्लावर, सनफ्लावर और असली की बुआई क्रमशः 42 हजार, 38 हजार एवं 2.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहन की बुआई चालू रबी में थोड़ी घटकर 94.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 94.37 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 67.14 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 66.91 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। अन्य दालों में मसूर की 11.23 लाख हेक्टेयर में, एवं मटर की 6.35 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले रबी सीजन में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 10.83 और 7.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई चालू रबी में 2.45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2.56 लाख हेक्टेयर में हुई थी। मूंग की बुआई चालू रबी में 47 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में घटकर 26.54 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 26.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी में मक्का की बुआई 6.45 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 15.12 लाख हेक्टेयर में तथा रागी की 31 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले रबी सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 5 लाख हेक्टेयर में 17.55 लाख हेक्टेयर में और 28 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुआई चालू रबी में 4.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.75 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान की रोपाई चालू रबी में 9.14 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.33 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

क्रूड पाम तेल एवं आरबीडी पामोलीन के आयात शुल्क में अंतर 15 फीसदी करने की मांग - उद्योग

नई दिल्ली। घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के हितों के लिए उद्योग ने केंद्र सरकार से क्रूड पाम तेल, सीपीओ एवं आरबीडी पामोलीन के आयात शुल्क को बढ़ाकर 15 फीसदी करने की मांग की है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में कहा है कि घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के लिए क्रूड पाम तेल और आरबीडी पामोलिन के बीच शुल्क अंतर को बढ़ाकर 15 फीसदी तक करने का अनुरोध किया।

एसईए ने खाद्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि क्रूड पाम तेल और आरबीडी पामोलिन के बीच शुल्क का अंतर इस समय केवल 7.5 फीसदी है, जिससे क्रूड पाम तेल के बजाए, आरबीडी पामोलीन का आयात ज्यादा मात्रा में हो रहा है। इसका सीधा फायदा मलेशिया और इंडोनेशिया की रिफाइनिंग उद्योग को रहा है। आरबीडी पामोलीन के आयात पर इस समय आयात शुल्क 12.5 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 20 फीसदी किया जाए, साथ ही क्रूड पाम तेल के आयात शुल्क को ज्यों का त्यों रखा जाएं।

उद्योग ने लिखा है कि क्रूड पाम तेल और आरबीडी पामोलीन के आयात शुल्क में 15 फीसदी का अंतर करने से आरबीडी पामोलीन के बजाए क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी होगी, जिससे  घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को फायदा होगा।

एसईए के अनुसार तेल वर्ष 2021-22 के नवंबर-21 से अक्टूबर-22 के दौरान देश में क्रूड पाम तेल का आयात 5,994,346 टन का हुआ है, जबकि इस दौरान आरबीडी पामोलीन का आयात 1,840,540 टन का हुआ है। इसके पिछले तेल वर्ष 2020-21 के नवंबर-20 से अक्टूबर-21 के दौरान क्रूड पाम तेल का आयात 7,491,193 टन का हुआ था, जबकि इस दौरान आरबीडी पामोलीन का आयात केवल 686,340 टन का ही हुआ था।

ओएमएसएस के तहत केंद्र सरकार की गेहूं देने की योजना नहीं - खाद्य सचिव

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें भले ही रिकॉर्ड स्तर पर चल रही हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने कहां है कि खुले बाजार बिक्री योजना, ओएमएसएस के तहत गेहूं देने की कोई योजना नहीं है।


केंद्रीय खाद्य सचिव ने बुधवार को कहां कि हम गेहूं की कीमतों पर निगरानी रखे हुए हैं, तथा सरकार की ओएमएसएस के तहत गेहूं देने की अभी कोई योजना नहीं है।

दिल्ली की लारेंस मंडी में आज मध्य प्रदेश के गेहूं के भाव बढ़कर 2860 रुपये और राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के भाव तेज होकर 2880 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि इसकी दैनिक दैनिक आवक करीब 5,500 बोरियों की हुई।

जानकारों के अनुसार हाजिर बाजार में गेहूं का बकाया स्टॉक कम है, जबकि नई फसल की आवक फरवरी, मार्च में शुरू होगी। ऐसे में गेहूं की मौजूदा कीमतों में आगामी दिनों में और भी तेजी आने का अनुमान है।

भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई के अनुसार केंद्रीय पूल में पहली नवंबर 2022 को गेहूं का बकाया स्टॉक 210.46 लाख टन का बचा हुआ है, जबकि इसके पिछले साल की समान अवधि में बकाया स्टॉक 419.81 लाख टन था। तय मानकों के अनुसार पहली अक्टूबर को गेहूं का बफर स्टॉक 175.20 लाख टन तथा 30 लाख टन के रिजर्व को मिलाकर गेहूं का कुल स्टॉक 205.2 लाख टन का होना चाहिए।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 18 नवंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 101.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 88.46 लाख हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

राजस्थान में चालू खरीफ में 105.83 लाख टन खाद्यान्न के उत्पादन का अनुमान

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन 2022-23 में राजस्थान में 105.83 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन होने का अनुमान है। राज्य के कृषि निदेशालय द्वारा जारी पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में बाजरा का उत्पादन 51.53 लाख टन होने का अनुमान है।

अन्य फसलों में चावल का उत्पादन चालू खरीफ में 6.61 लाख टन, ज्वार का 6.13 लाख टन एवं मक्का का उत्पादन 21.41 लाख टन होने का अनुमान है।

खरीफ दलहन की प्रमुख फसल मूंग का उत्पादन राज्य में 13.21 लाख टन, मोठ का 3.73 लाख टन, उड़द का 2.55 लाख टन एवं छौला का उत्पादन 53,082 टन होने का अनुमान है।

तिलहनी फसलों में मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में राज्य में 19.91 लाख टन, कैस्टर सीड का 2.58 लाख टन, शीशम 1.10 लाख टन और सोयाबीन का उत्पादन 16.81 लाख टन होने का अनुमान है।

अन्य फसलों में चालू खरीफ में राज्य में कपास का उत्पादन 28.97 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो का उत्पादन होने का अनुमान है। इसी तरह से राज्य में ग्वार सीड का उत्पादन 14.27 लाख टन होने का अनुमान है। 

19 नवंबर 2022

मंडियों में जीरी की आवक घटी

गौरतलब है मंडियों में धान की आवक और क्वालिटी दोनों घटने लगी है जिस कारण कल भी जीरी में 100 से 200 की तेज़ी देखी गई।पहले ही धान कम है और बाहर ऑर्डर अधिक होते दिखाई दे रहे हैं और चावल के दाम और बढ़ा कर मांग रहे हैं।

जिस कारण 1509 जीरी 3800 व्हाइट सेला 6800 गोल्डन 7400 रंग वाला गोल्डन 7100 स्टीम 7700 तक बिक रही है।वहीं सुगंधा जीरी 3100 ताज जीरी 3000 तक उत्तरप्रदेश की मंडियों में ही बिक गई।और चावल 6000 सेला में भी इनका बिकवाल फिलहाल नहीं है।वहीं rh 10 सेला 5100 और गोल्डन 5400 तक बिक गया।

बासमती जीरी 5800 तक हरियाणा की मंडियों में बिक गई 1401 4000 से 4100 और पीबी1 3900 तक मंडियों में बिकने लगी।अभी बाहर और तेज़ी की उम्मीद है क्योंकि भारत और अन्य देशों में माल की कमी बनी हुई है।

व्हाइट गोल्ड @ 9000 पार; किसानों के पास कपास है लेकिन कहां?

क्षेत्र में कपास और सोयाबीन नकदी फसलें हैं। किसान मुख्य रूप से इन्हीं फसलों पर निर्भर हैं। फसलों के बढ़ते मौसम के दौरान क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर अगस्त और सितंबर में भारी बारिश हुई थी। इसके अलावा, बादल छाए रहेंगे, धूप की कमी, खेतों में पानी भर गया, फसलों की वृद्धि रुक ​​गई। कपास पीली पड़ गई। कीट व रोग के प्रकोप के कारण उत्पादन में कमी आई है।



किशोर मोकलकर लोकमत न्यूज नेटवर्क अस्सेगाँव पूर्णा : इस समय शिवरा में कपास की तुड़ाई का काम चल रहा है। हालांकि किसानों को राहत मिली है क्योंकि यह सफेद सोना वर्तमान में गांव की खरीद में नौ हजार दो सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा है, लेकिन आपूर्ति कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. कारोबारी सूत्रों ने बताया कि जनवरी के बाद दाम बढ़ने की संभावना है। पिछले सीजन में अब तक की सबसे ज्यादा कीमत मिली थी। इसलिए इस साल कपास का रकबा बढ़ा है। हालांकि भारी बारिश के कारण कपास की पैदावार में 50 से 60 फीसदी की कमी आ रही है। उत्पादन घटने से निर्माता 'कहीं खुशी, कहीं गम' की स्थिति में आ गए हैं. क्षेत्र में कपास और सोयाबीन नकदी फसलें हैं। किसान मुख्य रूप से इन्हीं फसलों पर निर्भर हैं। फसलों के बढ़ते मौसम के दौरान क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर अगस्त और सितंबर में भारी बारिश हुई थी। इसके अलावा, बादल छाए रहेंगे, धूप की कमी, खेतों में पानी भर गया, फसलों की वृद्धि रुक ​​गई। कपास पीली पड़ गई। कीट और रोगों के प्रकोप के कारण उत्पादन में कमी आई है।दिवाली की पृष्ठभूमि में कपास की तुड़ाई शुरू हुई, लेकिन कपास की उपज प्रति एकड़ दो से तीन क्विंटल कपास थी। कई गांवों में बारिश से हुई क्षति के कारण उन गांवों को सरकारी मदद नहीं मिली.



निकासी घटी, कुछ क्षेत्र जहां आवक नहीं बढ़ी, जहां सीतादई हो रही है। बोंड को बॉलवर्म ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। भाव दस रुपए किलो तक हो गए, फिर भी लेबर नहीं मिल रही, कुछ इलाकों में दो हफ्ते में उलंगवाड़ी आने की संभावना है। जब दाम बढ़ रहे हैं, किसानों के घरों में कपास नहीं है, गांवों में लूट जारी है.


किसानों का बजट चरमरा गया, सरकारी मदद पाने के लिए भारी बारिश से प्रमुख फसलों का उत्पादन घटा. बीज, रोपण, छिड़काव, कटाई की लागत को देखते हुए उत्पादन लागत कम नहीं होगी। नतीजतन, इस साल किसानों का वित्तीय बजट चरमरा गया है। विरुल पूर्णा के किसान सुमीत बोबडे ने लोकमत से बात करते हुए कहा कि इसलिए सरकार को बारिश से हुए नुकसान के लिए राहत राशि देनी चाहिए और फसल बीमा का लाभ मिलना चाहिए.



इसी सप्ताह सीतदई हुई, बारिश से कपास को भारी नुकसान हुआ है। उसे भी सुंडी ने क्षतिग्रस्त कर दिया। खरीद भी बढ़ी गांवों में खरीद मूल्य बढ़ने के बावजूद किसानों के पास कपास नहीं है। एक बड़ी निराशा है।- रावसाहेब खंडारे, किसान

बासमती प्रजाति के धान एवं चावल में राइस

मिलों तथा निर्यातकों की चौतरफा लिवाली चलने से लगातार बाजार बढ़ता ज रहा है।

 गौरतलब है कि शरबती धान चावल यूपी में काफी तेज हो गया है।

 इसके अलावा 1509 धान की आवक घटने लगी है।

उधर पाकिस्तान में फसल फेल होने से निर्यातकों का रुझान हरियाणा पंजाब की राइस मिलों से खरीद का बना हुआ है।

ईरान के भी सौदे पेंडिंग में है जिसको पूरा करने के लिए निर्यातक माल खरीद रहे हैं इन परिस्थितियों को देखते हुए बासमती प्रजाति के सभी चावल में तेजी जारी रहेगी।

इसके अलावा मोटा धान चावल भी तेज रहेगा।

रबी फसलों की बुआई 7.20 फीसदी बढ़कर 268 लाख हेक्टेयर के पार

नई दिल्ली। देशभर के राज्यों में रबी फसलों की बुआई जोरो पर चल रही है, तथा अभी तक कुल बुआई 7.20 फीसदी बढ़कर 268.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 250.76 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 18 नवंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 101.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 88.46 लाख हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

चालू रबी में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 66.81 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 59.22 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 63.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 55.13 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई चालू रबी में घटकर 1.54 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसी बुआई 1.87 हेक्टेयर में ही हुई थी। सफ्लावर, सनफ्लावर और असली की बुआई क्रमशः 30 हजार, 31 हजार एवं 1.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहन की बुआई चालू रबी में थोड़ी घटकर 73.25 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 76.08 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 52.57 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 52.83 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। अन्य दालों में मसूर की 8.19 लाख हेक्टेयर में, एवं मटर की 5.11 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले रबी सीजन में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 8.85 और 6.58 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई चालू रबी में 1.87 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 24 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में घटकर 19.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 19.80 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी में मक्का की बुआई 3.92 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 11.85 लाख हेक्टेयर में तथा रागी की 28 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले रबी सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 3.12 लाख हेक्टेयर में 14.21 लाख हेक्टेयर में और 25 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुआई चालू रबी में 3.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.17 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान की रोपाई चालू रबी में 8.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.21 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू पेराई सीजन में पंद्रह नवंबर तक चीनी का उत्पादन घटा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन अक्टूबर से सितंबर में पहली अक्टूबर 22 से 15 नवंबर 22 के दौरान देशभर में 19.9 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ है, जोकि इसके पिछले साल की समान अवधि के 20.8 लाख टन से थोड़ा कम है।


हालांकि चालू पेराई सीजन में देशभर में 321 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई आरंभ हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 308 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही थी।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में 15 नवंबर तक उत्तर प्रदेश में जहां 3.6 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, वहीं महाराष्ट्र में 8.6 लाख टन, कर्नाटक में 6.1 लाख टन, गुजरात में 6 हजार टन, तमिलनाडु में 8 हजार टन और अन्य राज्यों में 2 हजार टन चीनी का उत्पादन हुआ है।

इस्मा के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी मिलें अभी तक करीब 35 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे कर चुकी हैं, जिसमें से अक्टूबर में 2 लाख टन की शिपमेंट भी हो चुकी है। पिछले साल अक्टूबर में 4 लाख टन चीनी के निर्यात की शिपमेंट हो चुकी थी। 

अक्टूबर में डीओसी का निर्यात 35 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। अक्टूबर में सोया डीओसी का निर्यात 35 फीसदी बढ़कर 213,154 टन का हुआ है, जबकि इससे पिछले साल की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 157,590 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान डीओसी का निर्यात 38 फीसदी बढ़कर 1,984,833 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान 1,433,813 टन का ही डीओसी का निर्यात हुआ था।

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले सात महीनों के दौरान सरसों डीओसी का निर्यात बढ़कर 1,341,832 टन का हो गया, जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 658,230 टन से दोगुना है। सरसों का घरेलू उत्पादन बढ़ने के साथ ही क्रॉसिंग ज्यादा होने से इसकी उपलब्धता ज्यादा रही थी। वर्तमान में भारत से दक्षिण कोरिया, वियतनाम, थाईलैंड और अन्य सुदूर पूर्व के देशों को 295 डॉलर प्रति टन, एफओबी की दर से सरसों डीओसी का निर्यात निर्यात हो रहा है, जबकि हैम्बर्ग एक्स-मिल डीओसी की कीमत 363 डॉलर प्रति टन है।

चालू खरीफ सीजन में देश में सोयाबीन का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है, जबकि नोन जीएम होने के कारण भारतीय सोया डीओसी की विश्व के कई देशों से अच्छी मांग आती है। ऐसे में उम्मीद है कि आगामी दिनों में सोया डीओसी का निर्यात बढ़ेगा। अक्टूबर में सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 40,196 टन का हुआ है, जबकि सितंबर में इसका निर्यात केवल 13,718 टन का ही हुआ था।

भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी का भाव अक्टूबर में घटकर 508 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर में इसका भाव 565 डॉलर प्रति टन था। हालांकि इस सरसों डीओसी का भाव भारतीय बंदरगाह पर सितंबर के भाव 295 डॉलर प्रति टन पर स्थिर बना रहा। कैस्टर डीओसी का भाव अक्टूबर में घटकर 141 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर में इसका भाव 152 डॉलर प्रति टन था। दक्षिण कोरिया के साथ ही वियतनाम और थाईलैंड को डीओसी के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। 

अक्टूबर में 50 हजार सोया डीओसी का निर्यात - सोपा

नई दिल्ली। अक्टूबर में देश से सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 50 हजार टन का हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 22 हजार टन की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार अक्टूबर में 6.43 लाख टन सोया डीओसी का उत्पादन हुआ, जोकि पिछले साल के 5.19 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान 50 हजार टन का निर्यात हुआ, तथा 75 हजार टन डीओसी की खपत की फूड में एवं 6 लाख टन की खपत फीड में हुई।

सोपा के अनुसार अक्टूबर में देशभर की मंडियों में 17 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई, जिसमें से 8 लाख टन की पेराई हुई। पिछले साल अक्टूबर में जहां सोयाबीन की आवक 15 लाख टन की हुई थी, जबकि पेराई केवल 6.50 लाख टन की हुई थी। अत: पहली नवंबर को किसानों, व्यापारियों एवं मिलों के पास 124.05 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है जबकि पिछले साल पहली नवंबर को सोयाबीन का बकाया स्टॉक 106.46 लाख टन का ही था।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन में सोयाबीन का उत्पादन 120.40 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 118.89 लाख टन का उत्पादन हुआ था। पहली अक्टूबर को नई फसल की आवकों के समय 25.15 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: चालू सीजन में सोयाबीन की कुल उपलब्धता 145.55 लाख टन की बैठेगी, जोकि पिछले सीजन के 120.72 लाख टन से ज्यादा है। 

चालू सीजन में 344 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान, निर्यात घटेगा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2022 से शुरू हुए फसल सीजन 2022-23 में देश में 344 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि घरेलू बाजार में कीमतें तेज होने के कारण निर्यात पहले के अनुमान से पांच लाख गांठ घटकर 30 लाख गांठ ही होने का अनुमान है। 


कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें तेज हैं, जिस कारण इसका निर्यात 35 लाख गांठ से घटकर 30 लाख गांठ ही होने का अनुमान है। चालू सीजन में 12 लाख गांठ कॉटन का आयात होने का अनुमान है। 

चालू फसल सीजन की पहली तिमाही में कपास की घरेलू खपत केवल 55 लाख गांठ ही होने की उम्मीद है, क्योंकि मिलें केवल 50/60 फीसदी उत्पादन क्षमता का ही उपयोग कर पा रही हैं । पिछले साल की पहली तिमाही में 80 लाख गांठ कॉटन की खपत हुई थी। सूती धागे और कपड़े में निर्यात मांग कमजोर है जिस कारण आरंभिक अनुमान के अनुसार कॉटन की खपत 320 लाख गांठ में 20 लाख गांठ घटकर केवल 300 लाख गांठ की ही होने का अनुमान है। 

सीएआई के अनुसार कपास की खपत में 20 लाख गांठ और निर्यात में 5 लाख गांठ कम होने से क्लोजिंग स्टॉक 32.89 लाख गांठ से बढ़कर 57.89 लाख गांठ बचने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कॉटन का उत्पादन 47.50 लाख गांठ ही होने का अनुमान है, जोकि इसके पहले के अनुमान 50 लाख गांठ से 2.50 लाख गांठ कम है। 

हालांकि गुजरात में चालू सीजन में कॉटन का उत्पादन बढ़कर 93.50 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि इसके पहले के अनुमान 91 लाख गांठ से 2.50 लाख गांठ ज्यादा है। 

अन्य राज्यों महाराष्ट्र में चालू सीजन में 84.50 लाख गांठ, मध्य प्रदेश 20 लाख गांठ, तेलंगाना 45 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 16 लाख गांठ, तमिलनाडु में 6 लाख गांठ के साथ ही ओडिशा में 3 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 3.50 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। 

चालू रबी में फसलों की बुआई 5.63 फीसदी आगे, गेहूं के साथ ही तिलहन की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई में तेजी आने लगी है, तथा देशभर के राज्यों में अभी तक कुल बुआई 5.63 फीसदी बढ़कर 178.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 168.66 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 11 नवंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 45.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 41.17 लाख हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

चालू रबी में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 58.11 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 51.50 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 55.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 48.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई चालू रबी में घटकर 1.23 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसी बुआई 1.58 हेक्टेयर में ही हुई थी। सफ्लावर, सनफ्लावर और असली की बुआई क्रमशः 19 हजार, 25 हजार एवं 1.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहन की बुआई चालू रबी में थोड़ी घटकर 54.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 55.41 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 39.52 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 39.12 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। अन्य दालों में मसूर की 6.05 लाख हेक्टेयर में, एवं मटर की 4.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले रबी में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 5.19 और 5.77 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई चालू रबी में 1.31 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 12 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में घटकर 13.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 14.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी में मक्का की बुआई 2.50 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 8.19 लाख हेक्टेयर में तथा रागी की 25 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले रबी सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 2.22 लाख हेक्टेयर में 10.91 लाख हेक्टेयर में और 11 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुआई चालू रबी में 2.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.19 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान की रोपाई चालू रबी में 7.05 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.99 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

विदेश में गिरावट के बावजूद भी घरेलू बाजार में कॉटन के दाम बढ़े

नई दिल्ली। विदेशी बाजार में गिरावट के बावजूद भी स्टॉकिस्टों की सक्रियता से घरेलू बाजार में कॉटन के दाम शाम के सत्र में तेज हुए। अहमदाबाद में शंकर 6 किस्म की कॉटन की कीमतें 550 रुपये तेज होकर 66,400 से 66,600 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।


इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों पंजाब में कॉटन की कीमतें 100 रुपये तेज होकर 6525 से 6575 रुपये प्रति मन हो गई। हरियाणा कॉटन की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 6400 से 6500 रुपये और अपर राजस्थान में इसके दाम 50 रुपये तेज होकर 6650 से 6700 रुपये प्रति मन हो गए।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतें शाम के सत्र में दिसंबर वायदा अनुबंध में 78 प्वाइंट कमजोर होकर 86.9 सेंट रह गई, जबकि मार्च-23 वायदा अनुबंध में इसके दाम 67 प्वाइंट घटकर 85.07 सेंट रह गए।

उत्पादक मंडियों में पहले की तुलना में कपास की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन अभी कुल आवक पिछले साल की तुलना में कम हो रही है। इसका प्रमुख कारण किसान नीचे दाम पर बिकवाली कम रहे हैं, साथ ही सितंबर के अंत और अक्टूबर में हुई बारिश से गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों में नई फसल की आवकों में देरी हुई है।  देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में बुधवार को कॉटन की आवक 94,600 गांठ की हुई है, जबकि पिछले कारोबारी दिवस में इसकी आवक 78,700 गांठ की हुई थी।

व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में हाल ही में कॉटन की कीमतें तो तेज हुई, लेकिन इसके अनुपात में धागे के दाम नहीं बढ़ पाये। इसलिए बढ़े दाम पर स्पिनिंग मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही हैं। सीजन होने के बावजूद भी इस समय करीब 60 से 65 फीसदी मिलें ही चल रही है। हालांकि चालू सीजन में देश में कपास का उत्पादन अनुमान ज्यादा है इसलिए आगामी दिनों में इसकी कपास की दैनिक आवक और बढ़ेगी। साथ ही मिलों की खरीद में भी तेजी आयेगी। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। 

केंद्र ने चालू पेराई सीजन के लिए 60 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा जारी किया

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 22 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2022-23 के लिए केंद्र सरकार ने 60 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार चीनी मिलों ने पिछले 3 साल में औसतन जितनी चीनी का उत्पादन किया है उसका 18.23 फीसदी निर्यात करने का कोटा दिया गया है।


पहली अक्टूबर 2021 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2021-22 के दौरान केंद्र सरकार ने पहले 80 लाख टन चीनी के निर्यात का कोटा जारी किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 112 लाख टन कर दिया था।

उद्योग ने चालू पेराई सीजन 2022-23 के लिए केंद्र सरकार ने 80 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा जारी करने की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार निर्यातकों ने 2022-23 पेराई सीजन के लिए पहले ही 4 से 5 लाख टन रॉ शुगर के निर्यात के सौदे कर लिए है। हालांकि पिछले साल विश्व बाजार में चीनी के दाम तेज थे, लेकिन इस बार ब्राजील में चीनी का उत्पादन अनुमान ज्यादा है तथा मई में ब्राजील की चीनी बाजार में आ जायेगी। इसलिए चीनी का निर्यात पिछले साल की तुलना में कम होने की आशंका है।

भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ इस साल दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक भी रहा है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार पहली अक्टूबर 2022 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन अक्टूबर-22 से सितंबर-23 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन 365 लाख टन (45 लाख टन एथेनॉल में उपयोग के बाद) होने का अनुमान है, जो एक साल पहले की अवधि की तुलना में दो फीसदी अधिक होगा। इथेनॉल के लिए अधिक डायवर्जन के बावजूद उत्पादन में अनुमानित वृद्धि के साथ इस्मा को इस सत्र में अच्छे निर्यात की उम्मीद है।

चालू रबी में दलहन के साथ ही तिलहन की बुआई आगे, कुल 17 फीसदी ज्यादा

नई दिल्ली। रबी फसलों की बुआई में तेजी आने लगी है तथा शुरुआती चरण में बुआई 16.72 फीसदी बढ़कर 97.41 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 83.45 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


सितंबर के अंत एवं अक्टूबर में देशभर के कई राज्यों में हुई बारिश से रबी फसलों खासकर के दलहन एवं तिलहन की बुआई बढ़ी है। भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली अक्टूबर से 4 नवंबर तक देशभर में सामान्य से 41 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 4 नवंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 7.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.47 लाख हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

चालू रबी में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 47.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 40.72 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 45.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 38.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई चालू रबी में घटकर 87 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसी बुआई 1.37 हेक्टेयर में ही हुई थी। सफ्लावर, सनफ्लावर और असली की बुआई क्रमश: 7 हजार, 10 हजार एवं 29 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहन की बुआई चालू रबी में बढ़कर 29.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 27.13 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 22.08 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 19.87 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। अन्य दालों में मसूर की 2.04 लाख हेक्टेयर में, एवं मटर की 1.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले रबी में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.30 और 1.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई चालू रबी में 92 हजार हेक्टेयर में और मूंग की 7 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में घटकर 7.63 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 8.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी में मक्का की बुआई 1.57 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 4.77 लाख हेक्टेयर में तथा रागी की 22 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले रबी सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 2.76 लाख हेक्टेयर में, 5.27 लाख हेक्टेयर में और 17 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुआई चालू रबी में 1.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 44 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान की रोपाई चालू रबी में 6.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

02 नवंबर 2022

ग्राहकी कमजोर होने से दलहन की कीमतों में गिरावट, नीचे दाम पर बिकवाली कमजोर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने के कारण मंगलवार को अरहर, उड़द एवं मूंग के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार दालों में थोक के साथ ही खुदरा में ग्राहकी कमजोर हुई है, हालांकि नीचे दाम पर बिकवाली भी पहले की तुलना में घटी है। इसलिए हाजिर बाजार में इनके भाव में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है।


एनसीसीएफ ने आज एक लाख टन आयातित अरहर की खरीद के लिए निविदा जारी की है। केंद्र सरकार बफर स्टॉक के लिए आयातित अरहर की खरीद कर रही है तथा केंद्र सरकार ने बर्मा की अरहर की खरीद का आधार मूल्य 7,953 रुपये प्रति क्विंटल और अफ्रीका अरहर की खरीद के लिए 5,980 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया है। 

सूत्रों के अनुसार बर्मा में उड़द एफएक्यू, एसक्यू के भाव क्रमशः: 800 डॉलर और 940 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे। इस दौरान लेमन अरहर की 905 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ के पूर्व स्तर पर टिकी रही। हालांकि इन भाव में आज भी भारतीय आयातकों ने कोई व्यापार नहीं किया। म्यांमार की वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारतीय आयातक अभी इंतजार करों एवं देखो की नीति अपना रहे हैं।

अफ्रीकी देशों से अरहर के वैसल रवाना शुरू होने से कीमतों पर दबाव बना है, हालांकि देसी अरहर में अच्छी क्वालिटी में बिकवाली कमजोर है। दूसरा केंद्रीय एजेंसियां बफर स्टॉक के लिए अरहर की खरीद कर रही हैं। इसलिए अरहर की कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है। राज्य सरकारें जहां अरहर दाल की खरीद निविदा के माध्यम से कर रही हैं, वहीं अरहर की नई फसल की आवक दिसंबर में ही बनेगी। चालू खरीफ में बुआई में कमी आई है, साथ ही उत्पादक राज्यों में मौसम भी प्रतिकूल रहा था, जिसका असर उत्पादकता पर भी पड़ने का डर है।

उड़द की आवक उत्पादक राज्यों की मंडियों में बराबर हो रही है, तथा हल्की क्वालिटी के मालों की आवक ज्यादा होने से कीमतों पर दबाव है। व्यापारियों के अनुसार बर्मा में दाम कम होने से उड़द की कीमतों में मंदा आया है, लेकिन अभी बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है। उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बढ़ने की संभावना है, साथ ही मिलर्स अच्छी क्वालिटी की उड़द की खरीद कर रही हैं। केंद्रीय पूल में भी उड़द का बकाया स्टॉक कमजोर है, जबकि केंद्रीय एजेंसियां आयातित उड़द निविदा के माध्यम से खरीद रही है।

ऑस्ट्रेलिया में मौसम में सुधार आने से मसूर की कीमतों पर दबाव बना है, जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में हाल ही में मसूर के दाम एकतरफा तेज हुए थे, इसलिए हल्की गिरावट आई है। हालांकि उत्पादक मंडियों में देसी मसूर की आवक नहीं के बराबर हो रही है, जबकि नई फसल की आवक अप्रैल में बनेगी। इसलिए मसूर की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। आगामी दिनों में ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से आयातित मसूर के आधार पर बाजार चलेगा।

मूंग की आवक राजस्थान एवं मध्य प्रदेश की लाईन की मंडियों में बढ़ी है, जबकि मिलर्स केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रहे हैं, इसलिए बढ़े भाव में मांग कम होने से मूंग की कीमतों में गिरावट आई है। आगामी दिनों में मूंग की तेजी, मंदी काफी हद तक एमएसपी पर खरीद कैसी होती है इस पर निर्भर करेगी।

चना की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहेगी। नेफेड जहां लगातार नीचे दाम पर चना की बिकवाली कर रही है, वहीं ब्याह शादियों का सीजन होने के कारण चना दाल और बेसन में मांग बनी रहने की उम्मीद है।  

मुंबई में बर्मा लाइन की लेमन अरहर का हाजिर में बकाया स्टॉक नहीं के बराबर है।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के दाम 50 रुपये प्रति क्विंटल तक कमजोर हुए। तंजानिया की अरुषा अरहर के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 6300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मटवारा अरहर के दाम 50 रुपये घटकर 6100 से 6150 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मलावी से आयातित अरहर के दाम 50 घटकर 5250 से 5350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 50 रुपये नरम होकर 600 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ स्थिर हो गई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 7650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

महाराष्ट्र की मंडियों में देसी अरहर के दाम कमजोर होने से दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर के भाव में 75 रुपये की गिरावट आकर दाम 7650 से 7675 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

इस दौरान चेन्नई में लेमन अरहर के भाव 50 रुपये घटकर दाम 7350 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगामी दिनों में तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारों की निविदा से अरहर दाल में मांग बढ़ सकती है।

दाल मिलों की कमजोर मांग से मुंबई में उड़द एफएक्यू की कीमतों में 100 रुपये की गिरावट आकर भाव 7000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में दाम कमजोर होने से दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव में 25-75 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 7200 से 7225 रुपये और 8250 से 8275 प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के दाम हाजिर डिलीवरी के 75 रुपये घटकर 7900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान दिसंबर डिलीवरी के उड़द एसक्यू के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 7850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दाल मिलों की मांग कमजोर होने से मुंद्रा बंदरगाह पर मसूर के दाम 50 रुपये घटकर 6,400 से 6425 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर इसके दाम 6,525-6,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6800 रुपये प्रति क्विंटल स्थिर बनी रही लेकिन ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें वैसल में 50 रुपये कमजोर होकर 6750 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की गिरावट आकर भाव 7050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान कनाडा की मसूर के दाम 6,725 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के चना के भाव 4875 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे, जबकि मध्य प्रदेश के चना के भाव 4825 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गए।

राजस्थान लाईन की मूंग के दाम दिल्ली में शाम के सत्र में 100 रुपये कमजोर होकर भाव 7100 से 7150 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

पहली छमाही में बासमती के साथ गैर बासमती चावल का निर्यात बढ़ा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान जहां बासमती चावल के निर्यात में 10.67 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं गैर बासमती चावल का निर्यात इस दौरान 9.28 फीसदी ज्यादा हुआ।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 21.57 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 19.49 लाख टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बासमती चावल का निर्यात 17,896 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 12,294 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था।

गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बढ़कर 89.56 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 81.95 लाख टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में में गैर बासमती चावल का निर्यात 25,191 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 21,853 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था।

उत्पादक मंडियों में पिछले दो दिनों से जहां धान के दाम तेज हुए हैं, वहीं चावल की कीमतें भी बढ़ी है। व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में धान की आवक सामान्य की तुलना में कम हो रही है, जिस कारण राइस मिलों की खरीद बढ़ने भाव में तेजी आई है। बासमती चावल के दाल पिछले दो दिनों में करीब 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए हैं।

हरियाणा की सफीदों मंडी में मंगलवार को पूसा 1,121 किस्म के हाथ की कटाई के धान के दाम बढ़कर 4321 रुपये एवं 1,718 किस्म के धान के भाव हाथ की कटाई के 3,830 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। राज्य की पिल्लूखेड़ा मंडी में धान की आवक 30 हजार बोरियों की हुई तथा पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम बढ़कर 3,525 से 4,325 रुपये, 1,718 किस्म के धान के भाव 3,350 से 3825 रुपये एवं 1,509 किस्म के धान के भाव 3,671 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। राज्य की गोहाना मंडी में पूसा 1,121 किस्म का धान ऊपर में 4,441 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका।

चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध एक साल तक बढ़ाया, कोटे के तहत निर्यात रहेगा जारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओपन जनरल लाइसेंस, ओजीएल के तहत चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध की अवधि को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। अत: चालू पेराई सीजन में भी कोटे के तहत ही चीनी का निर्यात होगा।


विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार ओजीएल के तहत चीनी के निर्यात पर रोक की अवधि को 31 अक्टूबर, 2023 तक बढ़ा दिया गया है, जबकि इससे पहले केंद्र सरकार ने 24 मई 2022 में इसके निर्यात पर रोक लगाई थी, जिसकी अवधि 31 अक्टूबर 2022 को समाप्त हो रही थी।

ओजीएल के तहत रॉ शुगर, रिफाइंड और व्हाइट चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई है। हालांकि टीआरक्यू (टैरिफ रेट कोटा) के तहत चीनी का निर्यात जारी रहेगा। सरकार ने यह साफ किया है कि ये पाबंदियां यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका को सीएक्सएल और टीआरक्यू शुल्क रियायत कोटा के तहत किए जाने वाले निर्यात पर लागू नहीं होंगी।

पहली अक्टूबर 2021 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2021-22 के दौरान केंद्र सरकार ने 112 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए कोटा जारी किया था, तथा उद्योग चालू पेराई सीजन 2022-23 के लिए 80 लाख टन चीनी का निर्यात का कोटा जारी करने की मांग कर रहा है। जानकारों के अनुसार निर्यातकों ने 2022-23 पेराई सीजन के लिए पहले ही 4 लाख टन रॉ शुगर के निर्यात के लिए सौदा कर लिया है। पिछले साल विश्व बाजार में चीनी के दाम कम थे, लेकिन इस बार ब्राजील में उत्पादन अनुमान ज्यादा है तथा मई में ब्राजील की फसल आ जायेगी। इसलिए चीनी का निर्यात पिछले साल की तुलना में कम होने की आशंका है।

भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ इस साल दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक भी रहा है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, इस्मा के अनुसार पहली अक्टूबर 2022 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन अक्टूबर-22 से सितंबर-23 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन 365 लाख टन (45 लाख टन एथेनॉल में उपयोग के बाद) होने का अनुमान है, जो एक साल पहले की अवधि की तुलना में दो फीसदी अधिक होगा। इथेनॉल के लिए अधिक डायवर्जन के बावजूद उत्पादन में अनुमानित वृद्धि के साथ इस्मा को इस सत्र में लगभग 80 से 90 लाख टन चीनी का निर्यात होने की उम्मीद है।

रबी फसलों की बुआई 39 फीसदी आगे, दलहन एवं तिलहन में ज्यादा बढ़ोतरी

नई दिल्ली। रबी फसलों की बुआई में तेजी आने लगी है तथा शुरुआती चरण में बुआई 38.58 फीसदी बढ़कर 37.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 27.24 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


सितंबर अंत एवं अक्टूबर के पहले सप्ताह में देशभर के कई राज्यों में हुई बारिश से रबी फसलों खासकर के चना एवं सरसों की शुरुआती बुआई बढ़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में 28 अक्टूबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई 54 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 35 हजार हेक्टेयर में तुलना में आगे चल रही है।

चालू रबी में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 19.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.13 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 18.99 लाख हेक्टेयर में और मूंगफली की 55 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक सरसों की बुआई 14.21 लाख हेक्टेयर में और मूंगफली की 40 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। सफ्लावर, सनफ्लावर और असली की बुआई क्रमश: 4 हजार, 7 हजार एवं 4 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहन की बुआई चालू रबी में बढ़कर 8.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.91 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 6.96 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 4.12 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। अन्य दालों में मसूर की 38 हजार, एवं मटर की 31 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। उड़द की बुआई चालू रबी में 30 हजार हेक्टेयर में और मूंग की 4 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 4.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी में मक्का की बुआई 96 हजार हेक्टेयर में और ज्वार की 3.42 लाख हेक्टेयर में तथा रागी की 15 हजार हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले रबी सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 62 हजार हेक्टेयर और 1.58 लाख हेक्टेयर में और पांच हजार हेक्टेयर में ही हुई थी।

धान की रोपाई चालू रबी में 4.02 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.54 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

जीएम सरसों को विशेषज्ञों की समिति जीईएसी ने दी मंज़ूरी

नई दिल्ली। देश में बीस साल बाद पहली जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसल सरसों के इनवायरेंमेंटल रिलीज को मंजूरी की सिफारिश कर दी गई है। भारतीय कृषि क्षेत्र में पहली खाद्य फसल जिसकी खेती की अनुमति दी गई है।


दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. दीपक पेंटल द्वारा विकसित जीएम सरसों की किस्म धारा मस्टर्ड हाइब्रिड -11 (डीएमएच-11)  किस्म के लिए यह मंजूरी दी गई है। जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जीईएसी) की 18 अक्टूबर, 2022 को हुई 147वीं बैठक में इसकी सिफारिश की गई है। सरसों की इस किस्म को हालांकि चालू रबी सीजन में इसकी बुआई नहीं हो पाएगी, क्योंकि सरसों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। जीईएसी की सिफारिशों को सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे उगाना संभव हो पाएगा।

जीईएसी ने सरसों की जिस डीएमस-11 हाइब्रिड किस्म के इनवायरमेंटल रिलीज की सिफारिश की है उसे दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ दिल्ली कैंपस स्थित सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (सीजीएमसीपी) ने विकसित किया है। ट्रांसजनिक सरसों हाइब्रिड डीएमएच-11 में  पैरेंटल लाइन बीएन3.6 और एमओबीए2.99 बारनेस, बारस्टार और बार जीन का उपयोग किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक जीएईसी की सिफारिशों को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री की सहमति के बाद ही जारी किया जाता है। इसलिए यह माना जा रहा है कि पर्यावरण मंत्री जीईएसी के जीएम सरसों की किस्म के जारी सिफारिशों से सहमत हैं इसलिए इन सिफारिशों को सरकार की मंजूरी मिलने की संभावना काफी अधिक हो जाती है। साल 2010 के पहले तक जीईएसी की सिफारिशों को ही अंतिम मंजूरी माना जाता था लेकिन उसके बाद से इन सिफारिशों को जारी करने के पहले संबंधित मंत्री की सहमति लेने का प्रावधान कर दिया गया था।

जीईएसी की सिफारिशों को सरकारी मंजूरी मिलने के बाद जीएम सरसों की इस किस्म को बिना किसी कंट्रोल्ड एनवायरमेंट के उगाया जा सकेगा। इसके लिए पॉलिनेटर और दूसरे प्रभावों की निगरानी की जाएगी और आंकड़े एकत्र किये जाएंगे। माना जा रहा है कि यह एक स्टेंडर्ड प्रक्रिया है और अब इस किस्म का बीज तैयार किया जा सकेगा। निगरानी का काम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को दिया गया है। जीएम किस्म के कमर्शियल रिलीज के लिए आईसीएआर द्वारा बीज अधिनियम के तहत जो प्रक्रिया अपनाई जाती है वही अपनाई जाएगी। जीईएसी की मंजूरी चार साल के लिए मिली है।