कुल पेज दृश्य

28 फ़रवरी 2026

सीसीआई ने चालू सप्ताह में लगातार दूसरी बार कॉटन के बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने चालू सप्ताह में शुक्रवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इससे पहले भी निगम ने बुधवार को बिक्री भाव में बढ़ोतरी की थी।


सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 800 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने 1,00,500 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें मिलों ने 45,500 गांठ कॉटन की खरीद की, इसके अलावा व्यापारियों ने इस दौरान 55,000 गांठ खरीदी।

सीसीआई चालू सप्ताह में बुधवार को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 900 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी, तथा इस दौरान 2,78,000 गांठ की बिक्री की थी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन के दाम तेज हुए, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 100 रुपये तेज होकर 54,300 से 54,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,140 से 5,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,140 से 5,480 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,200 से 51,200 रुपये कैंडी बोले गए।
देशभर की मंडियों में कपास की आवक 112,350 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में शुक्रवार को तेजी का रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार सीसीआई द्वारा बिक्री दाम बढ़ा देने से स्पिनिंग मिलों की खरीद से गुजरात में कॉटन की कीमतों में सुधार आया, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर हो गए। सीसीआई चालू सप्ताह में कॉटन की बिक्री कीमतों में दो बार बढ़ोतरी कर चुकी है, जबकि इससे पहले चालू महीने में ही दो बाद इसके बिक्री भाव कम किए थे। ऐसे में स्पिनिंग मिल जरुरत के हिसाब से ही खरीद रही है। अत: हाजिर बाजार में भी इसकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान तो ज्यादा है ही, साथ ही आयात भी बढ़ेगा। मौजूदा भाव में प्राइवेट जिनिंग मिलों की बिकवाली कम आ रही है, क्योंकि उनके पास कुल स्टॉक कम है। घरेलू बाजार में कॉटन का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास है, इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई की बिक्री दाम पर ही ज्यादा निर्भर करेगी।

सीसीआई ने तेलंगाना में कपास की एमएसपी पर खरीद हेतु पंजीकरण की तिथि बढ़ाई


नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने तेलंगाना के कपास किसानों को राहत देने के लिए पंजीकरण की तिथि को बढ़ा दिया है। सीसीआई ने किसानों से आग्रह किया है, जिन किसानों के पास कपास का स्टॉक बचा हुआ है, वह 27 फरवरी 2026 तक कपास किसान एप पर जाकर पंजीकरण कर सकते है ताकि उनकी कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर की जा सके। पंजीकरण के बाद किसान सीसीआई के नजदीकी खरीद केंद्र पर कपास समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं।

सीसीआई के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने क्वालिटी स्टैंडर्ड, सेफ्टी और सिक्योरिटी उपायों, और पूरे सर्विस डिलीवरी सिस्टम का रिव्यू करने के लिए तेलंगाना के अलग-अलग गोदामों का दौरा किया। यह दौरा एमएसपी के तहत खरीदे गए कपास के स्टॉक को सुरक्षित रखने में ट्रांसपेरेंसी, एफिशिएंसी, और बेस्ट इन क्लास स्टोरेज प्रैक्टिस बनाए रखने के लिए है।

सीसीआई ने गुरुवार को ई नीलामी के माध्यम से 4,18,000 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की, जिसमें से केवल 53,000 क्विंटल बिनौले की बिक्री हुई।


स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने के कारण गुरुवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम लगभग स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को 54,200 से 54,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो पर स्थिर हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,490 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,140 से 5,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,140 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,200 से 51,200 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 77,850 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

महाराष्ट्र में 60 चीनी मिलों में पेराई बंद, उत्पादन 25 फीसदी बढ़कर 92 लाख टन के पार

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 23 फरवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 24.73 फीसदी बढ़कर 92.29 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 73.99 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य की 60 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है।


शुगर कमिश्नर के अनुसार 23 फरवरी तक राज्य में 980.85 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 92.29 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.41 फीसदी की बैठ रही है। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 793.56 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 73.99 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 9.32 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 206.19 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 22.59 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.96 फीसदी की है। इसी तरह से पुणे डिवीजन में अब तक 209.11 लाख टन गन्ने की पेराई कर 20.37 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.75 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में 211.34 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 18.04 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.54 फीसदी की है। अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में चीनी मिलों ने 122.42 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 10.03 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.01 फीसदी है।

छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में चीनी मिलों ने अब तक 103.3 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.38 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 8.11 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में चीनी मिलों ने 115.3 लाख टन गन्ने की पेराई कर 10.73 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.31 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में चीनी मिलों ने अब तक 11.39 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा 1.05 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। चीनी में रिकवरी की दर इस डिवीजन में 9.27 फीसदी है। नागपुर डिवीजन में 1.8 लाख टन पेराई हुई है।

चालू समर सीजन में फसलों की कुल बुआई 4.51 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 में फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 4.51 फीसदी आगे चल रही है। इस दौरान दलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है, जबकि धान की रोपाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 20 फरवरी 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई बढ़कर 21.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 20.38 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में 17.78 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल के लगभग बराबर ही है। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 0.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 0.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 59 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 56 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में बढ़कर 1.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.08 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान समर मक्का की बुआई 1.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 0.89 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 1.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 0.77 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 1.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 0.60 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर और शीशम सीड की बुआई क्रमश 7 हजार एवं 12 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। 

समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद को पारदर्शी और मजबूत बनाने पर सरकार का जोर - केंद्रीय कृषि मंत्री

नई दिल्ली। जिंसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य, (एमएसपी) पर खरीद को और मजबूत बनाने के साथ ही खरीद पारदर्शिता होनी चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को परेशानी से बचाने के लिए खरीद केंद्रों को अच्छी तरह से तैयार और मैनेज किया जाना चाहिए।


शुक्रवार को नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) की रिव्यू मीटिंग में उन्होंने कहा कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) और प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (पीएसएफ) के तहत खरीद ऑपरेशन की मजबूत करने पर सरकार का जोर है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने चल रही खरीद की स्थिति का रिव्यू किया साथ ही ऑपरेशनल चुनौतियों का आकलन किया और खरीद सिस्टम को और ज्यादा कुशल और किसान केंद्रित बनाने के तरीके खोजने पर जोर दिया, ताकि किसानों को बिना देरी के उनकी उपज का सही दाम मिल सके।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को परेशानी से बचाने के लिए खरीद केंद्रों में जरूरी सामान और अच्छा मैनेजमेंट होना चाहिए। उन्होंने खरीद केंद्र पर आसान और बिना किसी परेशानी के काम करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें समय पर पेमेंट, सही इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोक्योरमेंट शेड्यूल पर ईमानदारी से काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद सिस्टम में किसानों का भरोसा पक्का करना सबसे जरूरी है। अरहर, उड़द और मसूर जैसी खास दालों का उत्पादन और खरीद बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी और आयात पर बाध्यता कम करने के लिए इन फसलों की अहमियत को देखते हुए, इनका उत्पादन और खरीद बढ़ाने की जरूरत है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने और एमएसपवी पर खरीद की गारंटी देने के मकसद से छह साल के ‘दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन’ पर भी जोर दिया।

प्रस्तावित मिशन के तहत, खेती के तरीकों को बेहतर बनाने, अच्छी क्वालिटी के बीजों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को टेक्निकल सपोर्ट देने और मार्केटिंग और खरीद सिस्टम को मजबूत करने जैसे उपायों पर अधिकारियों संग चर्चा की। इस मिशन का मकसद भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू कीमतों को स्थिर करना और किसानों की इनकम में लगातार बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय मंत्री ने किसानों को सीधे सरकारी खरीद सिस्टम से जोड़कर बिचौलियों पर निर्भरता से मुक्त करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अधिकारियों को खरीद के कामों को सुचारू और एक जैसा लागू करने के लिए राज्य सरकारों के साथ तालमेल मजबूत करने का निर्देश दिया। एमएसपी पर खरीदी गई उपज की सुरक्षित और कुशल हैंडलिंग सुनिश्चित करने के लिए खरीद और स्टोरेज के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिरता के लिए प्रभावी खरीद और पर्याप्त स्टोरेज जरूरी है। कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम करने और किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा करने में मदद करना जरुरी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद की योजना प्रोएक्टिव होनी चाहिए और फसल की आवक के समय खरीद सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन अनुमान के साथ नीति बनानी चाहिए।

21 फ़रवरी 2026

महाराष्ट्र में एफआरपी भुगतान के देरी पर मिलों को 15 फीसदी ब्याज देना होगा - चीनी आयुक्त

पुणे, महाराष्ट्र। राज्य में चीनी का पेराई सीजन अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है और शुगर कमिश्नरेट ने किसानों को उनके गन्ने के बकाया भुगतान के लिए शुगर फैक्ट्रियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुगर कमिश्नर डॉ. संजय कोलते ने पिछले हफ्ते हुई सुनवाई के दौरान मिलों को चेतावनी दी थी कि, शुगर फैक्ट्रियों द्वारा एफआरपी भुगतान में अगर देरी होती है तो उन्हें किसानों को 15 फीसदी ब्याज देना होगा। हालांकि, कुछ फैक्ट्रियों ने कहा कि एग्रीमेंट के मुताबिक किसानों को एफआरपी का भुगतान किया जा रही है।


राज्य की जिन मिलों ने किसानों को एफआरपी का 60 फीसदी से कम पेमेंट किया है, उन 45 शुगर फैक्ट्रियों की सुनवाई 17 और 18 फरवरी को शुगर कमिश्नरेट कार्यालय में हुई। डॉ. कोलते ने कहा कि जैसे ही कमिश्नरेट ने फैक्ट्रियों को बकाया एफआरपी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया, कुछ फैक्ट्रियों ने बकाया रकम का भुगतान कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर मिलें, इसके लिए हमारी कोशिशें जारी हैं।

शुगर कमिश्नरेट की तरफ से 18 फरवरी को जारी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की 157 चीनी मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक गन्ना किसानों को 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी का भुगतान कर दिया है। शुगर कमिश्नरेट की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पेराई कर रही 206 चीनी मिलों में से 157 चीनी मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक पूरा एफआरपी का भुगतान नहीं किया है तथा इस दौरान केवल 49 मिलों ने ही 100 फीसदी एफआरपी का भुगतान किया है। 31 जनवरी तक राज्य की चीनी मिलों ने 870.11 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

इस गन्ने के लिए (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) कुल एफआरपी 33,697 करोड़ रुपये होता है। इसमें से 29,382 करोड़ रुपये (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) का भुगतान किसानों को किया जा चुका हैं तथा 49 फैक्ट्रियों ने 100 फीसदी एफआरपी का भुगतान कर दिया है। 58 फैक्ट्रियों ने 80 से 99.99 फीसदी एफआरपी का भुगतान किसानों को किया है। 58 फैक्ट्रियों ने 60 से 79.99 फीसदी एफआरपी किसानों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है। 41 फैक्ट्रियों ने 60 परसेंट से कम एफआरपी अभी तक किसानों को दिया है। अत: राज्य की गन्ना मिलों पर 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी अभी बकाया है।

चालू समर सीजन के शुरूआती चरण में फसलों की कुल बुआई 2.19 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 के शुरूआती चरण में फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 2.19 फीसदी आगे चल रही है, हालांकि इस दौरान धान की रोपाई 2.73 फीसदी पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 13 फरवरी 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई बढ़कर 15.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 14.75 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में घटकर 12.80 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 13.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 0.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 0.50 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 44 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के लगभग बराबर है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में बढ़कर 82 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 50 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान समर मक्का की बुआई 63 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 48 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 99 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 59 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 87 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 49 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर और शीशम सीड की बुआई शुरू हो चुकी है।