नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में पीएम-आशा योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर जिंसों की खरीद कार्यों का विस्तार किया है और आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत बिहार में पहली बार दलहन की खरीद शुरू की है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार ने इन राज्यों से खरीद अभियान का नेतृत्व नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएएफईडी) कर रहे हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि बिहार में, एनसीसीएफ ने केंद्रीय भंडारण निगम के सहयोग से डब्ल्यूडीआरए द्वारा अनुमोदित गोदामों के माध्यम से वैज्ञानिक भंडारण की सहायता से पहली बार मसूर (दाल) की संगठित खरीद शुरू की है।
तय लक्ष्य 32,000 टन के खरीद लक्ष्य के मुकाबले 22 अप्रैल तक बिहार से खरीद एजेंसियों ने 100.4 टन मसूर की खरीद समर्थन मूल्य पर की है। एनएएफईडी भी अपने सहकारी नेटवर्क के माध्यम से मूल्य समर्थन योजना के तहत राज्य में खरीद कार्यों को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
छत्तीसगढ़ में ई-संयुक्तता पोर्टल के माध्यम से किसानों की डिजिटल भागीदारी और दूरदर्शन के माध्यम से पहुंच के साथ ही सहभागिता सहित जागरूकता अभियानों के कारण पीएम-आशा के तहत जिंसों की खरीद में तेजी आई है। धमतरी, दुर्ग, बलोद, बलोदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जैसे जिलों में 85 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) केंद्रों का एक नेटवर्क कार्यरत है, और सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया में इसके विस्तार की योजना है।
एनसीसीएफ ने 63,325 टन चना और 5,360 टन मसूर की खरीद का लक्ष्य तय किया है, जिसमें 16,012 किसान चने के लिए और 451 किसान मसूर के लिए पंजीकृत करा चुके हैं। इसके मुकाबले, 22 अप्रैल 2026 तक, 9,032 टन चना और 7.98 टन मसूर की खरीद की गई है। इसके तहत 6,129 चना किसानों और 28 मसूर किसानों को लाभ हुआ। इस दौरान नेफेड ने राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से 137 खरीद केंद्र खोले थे, साथ ही अतिरिक्त प्रत्यक्ष केंद्र भी खोले थे, जिनमें से 7 चने के लिए और 3 मसूर के लिए थे।
चने के लिए कुल 39,467 किसान और मसूर के लिए 510 किसानों का पंजीकरण किया गया था। इस दौरान 3,850 टन चना और 109 टन मसूर की खरीद एमएसपी पर की गई हे, जिससे 2,645 चना किसानों और 281 मसूर किसानों को लाभ हुआ।
सरकार की यह पहल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आधारित खरीद प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और उन्हें औपचारिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के केंद्र सरकार के निरंतर प्रयास को दर्शाती हैं।
