नई दिल्ली। अमेरिकी गेहूं संघ के अनुसार, अमेरिका के लगभग 69 फीसदी शीतकालीन गेहूं उत्पादक क्षेत्र में इस समय सूखे की स्थिति बनी हुई है। अमेरिकी गेहूं बाजार विश्लेषक ल्यूक मुलर ने 1 मई की अपनी मूल्य रिपोर्ट में बताया कि, शुष्क मौसम की स्थिति मुख्य कारण बनी हुई है जिसकी वजह से गेहूं वायदा कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है।अमेरिकी गेहूं संघ के अनुसार, कैनसस सिटी बोर्ड ऑफ ट्रेड पर अमेरिकी हार्ड रेड विंटर गेहूं की कीमत 24 सेंट बढ़कर 6.83 डॉलर प्रति बुशेल हो गई है। प्रशांत उत्तर पश्चिम क्षेत्र में पोर्टलैंड बाजार में सॉफ्ट व्हाइट गेहूं की कीमत करीब 6.30 डॉलर प्रति बुशेल है। अमेरिकी सूखा मॉनिटर के मुताबिक इस क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा असामान्य रूप से शुष्क है या वहां मध्यम स्तर का सूखा पड़ा हुआ है।
वाशिंगटन एसोसिएशन ऑफ व्हीट ग्रोअर्स के अनुसार सामान्य ब्रेकइवन कीमत 7.71 डॉलर प्रति बुशेल है। मुलर और अमेरिकी गेहूं संघ की संचार एवं आउटरीच निदेशक जूलिया डेब्स ने कैपिटल प्रेस को बताया कि, कीमतों में अधिकांश बढ़ोतरी वायदा बाजार की वजह से हुई है, जबकि बेसिस यानी स्थानीय नकद बाजार और वायदा कीमत के बीच का अंतर काफी हद तक स्थिर बना हुआ है। मुलर और डेब्स ने कहा कि, अन्य प्रमुख उत्पादक देशों की तुलना में अमेरिकी कीमतें कुछ ऊपर खिसकी हैं, क्योंकि बाजार प्रमुख शीतकालीन गेहूं उत्पादन क्षेत्रों में पड़े सूखे के असर को समझने में लगा है। उत्तरी गोलार्ध में अन्य प्रतिस्पर्धी देश अभी भी काफी अच्छी स्थिति में हैं।
सूखे की गंभीरता के बारे में मुलर और डेब्स ने बताया कि, स्थानीय क्षेत्रों में सूखे की तीव्रता अलग अलग रही है। उन्होंने कहा कि हम उस बिंदु के करीब पहुंच रहे हैं जहां कुछ फसलों के लिए बारिश बहुत देर से आ सकती है। पिछले हफ्ते मैदानी इलाकों में छिटपुट बारिश हुई और ऐसे वर्षों में, जहां भी नमी मिली उसके आधार पर, प्रभावित क्षेत्रों में खेतों के बीच उत्पादन में काफी अंतर देखने को मिलेगा।इससे पहले दिसंबर 2022 में भी करीब 69 प्रतिशत शीतकालीन गेहूं फसल सूखे की चपेट में थी।
07 मई 2026
अमेरिका के 69 फीसदी शीतकालीन गेहूं उत्पादक क्षेत्र में सूखे की चपेट में
सीसीआई द्वारा लगातार तीसरे दिन बिक्री भाव बढ़ाने से हाजिर बाजार में कॉटन हुई महंगी
नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा लगातार तीसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से बुधवार को उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही।
सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन कॉटन की बिक्री कीमतों में 400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने फसल सीजन 2025-26 की 1,22,200 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से 55,400 गांठ की खरीद स्पिनिंग मिलों ने की तथा 66,800 गांठ की खरीद व्यापारियों ने की।
सीसीआई पिछले तीन कार्यदिवस में कॉटन की कीमत 4,100 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ा चुकी है।
सीसीआई चालू फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई लगभग 64,50,500 कपास गांठ की बिक्री अभी तक कर चुकी हैं।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को 750 रुपये तेज होकर 64,800 से 65,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,600 से 6,800 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,450 से 6,500 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,500 से 6,800 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 62,500 से 63,500 रुपये कैंडी बोले गए।
हालांकि आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में भी लगातार तीसरे दिन 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। उत्तर भारत के राज्यों की मंडियों में कपास के दाम तेज होकर 8,400 से 8,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसके दाम 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल थे। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।
आईसीई कॉटन वायदा में मंगलवार को भी तेजी जारी रही थी, तथा बेंचमार्क जुलाई वायदा अनुबंध दो साल से ज्यादा समय के अपने सबसे ऊंचे लेवल पर बंद हुआ था क्योंकि वेस्ट टेक्सास में लगातार सूखे की वजह से फसल को नुकसान की चिंता बनी हुई है।
सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से लगातार कॉटन की कीमतों में तेजी बनी हुई। व्यापारियों के अनुसार सूती धागे में स्थानीय मांग अच्छी है, साथ ही चीन की आयात मांग भी बराबर बनी हुई है। घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास नहीं के बराबर है, जबकि सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अच्छा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है ऐसे में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।
कर्नाटक से 9,023 टन सूरजमुखी एवं महाराष्ट्र से 8.19 लाख चना की खरीद को मंजूरी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्नाटक के किसानों से 9,023 टन सूरजमुखी की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद को मंजूरी दी है साथ ही महाराष्ट्र से चना की सरकारी खरीद की मात्रा को बढ़ाकर 8.19 लाख टन कर दिया है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक से रबी 2026 सीजन के लिए एमएसपी पर 9,023 टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है, वहीं महाराष्ट्र में रबी 2025-26 सीजन के दौरान चने की अधिकतम खरीद सीमा को बढ़ाकर 8,19,882 टन कर दिया है। इन दोनों फैसलों के जरिए किसानों को 4,886.46 करोड़ रुपए से अधिक की एमएसपी सुरक्षा उपलब्ध होगी।
कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2026 सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत 9,023 टन सूरजमुखी की खरीद को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 69.66 करोड़ रुपये से अधिक होगा। इस निर्णय से कर्नाटक के सूरजमुखी उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।
केंद्र सरकार का यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहतकारी साबित होगा, जिन्हें बाजार में कम कीमत मिलने की आशंका के कारण मजबूरी में अपनी उपज बेचनी पड़ती है। एमएसपी पर खरीद की स्वीकृति से किसानों का भरोसा मजबूत होगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव पर निर्णय लेते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी 2025-26 सीजन के दौरान राज्य से पीएसएस स्कीम के तहत चने की अधिकतम खरीद मात्रा बढ़ाकर 8,19,882 टन करने को मंजूरी दी है। इस स्वीकृति का कुल एमएसपी मूल्य 4,816.80 करोड़ रुपये से अधिक होगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र में चना खरीद की समय सीमा को भी 30 दिनों तक बढ़कर इसे 29 मई 2026 तक कर दिया है। यह फैसला उन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो निर्धारित अवधि में अपनी उपज की बिक्री पूरी नहीं कर पाए।
05 मई 2026
कपास उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए 5,659 करोड़ के 'कॉटन मिशन' को मंजूरी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय कपास क्षेत्र की चुनौतियों को दूर करने और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने 'कपास उत्पादकता मिशन' (2026-27 से 2030-31) को मंजूरी दी है, जिसके लिए 5,659.22 करोड़ रुपये का खर्च निर्धारित किया गया है। यह मिशन सरकार के '5F' विजन (फार्म टू फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और फॉरेन) के अनुरूप तैयार किया गया है, जो कपास की उत्पादकता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
मिशन के तहत अनुसंधान और तकनीक पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिसमें जलवायु-अनुकूल और कीट-प्रतिरोधी उन्नत बीज किस्मों का विकास शामिल है। राज्य सरकारों, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से आधुनिक खेती तकनीकों जैसे हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) और एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, कपास की सफाई और प्रसंस्करण में सुधार के लिए देश की लगभग 2000 जिनिंग और प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे कपास में अशुद्धियों को 2% से कम रखा जा सके।
भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए 'कस्तूरी कॉटन भारत' के तहत ब्रांडिंग और ट्रैसेबिलिटी को मजबूत किया जाएगा। गुणवत्ता जांच के लिए देश भर में मान्यता प्राप्त और आधुनिक परीक्षण बुनियादी ढांचे का जाल बिछाया जाएगा। इसके अलावा, डिजिटल एकीकरण के माध्यम से मंडियों को जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य और सीधी बाजार पहुंच प्राप्त हो सके
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित होने वाले इस मिशन में 14 राज्यों के 140 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2031 तक कपास की उत्पादकता को 440 किलोग्राम से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना और कुल उत्पादन 498 लाख गांठों तक पहुंचाना है, जिससे देश के लगभग 32 लाख किसानों के जीवन में समृद्धि आए और भारत कपास क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
चालू रबी में गेहूं की सरकारी खरीद 7.58 फीसदी घटकर 251 लाख टन के पार
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2026-27 में 3 अप्रैल तक गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 250.95 लाख टन की हो गई है जोकि रबी विपणन सीजन 2025-26 की समान अवधि के 271.56 लाख टन की तुलना में 7.58 फीसदी कम है।
प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से चालू रबी सीजन में 3 अप्रैल तक 117.55 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 110.43 लाख टन से 6.44 फीसदी ज्यादा है।
हरियाणा से चालू रबी सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 78.20 लाख टन की हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 72 लाख टन से ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में राज्य से 67.50 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई थी। अत: चालू रबी में गेहूं की खरीद पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.85 फीसदी ज्यादा गेहूं खरीदा गया है।
मध्य प्रदेश से चालू रबी सीजन में 3 अप्रैल तक केवल 35.62 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 672.66 लाख टन की तुलना में 50.97 फीसदी कम है। केंद्र सरकार ने राज्य में गेहूं की खरीद के तय लक्ष्य को 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है। राज्य सरकार मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद के लिए तय किए न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के अलावा अतिरिक्त बोनस भी दे रही है।
भारतीय खाद्वय निगम, एफसीआई के अनुसार उत्तर प्रदेश से चालू रबी में गेहूं की खरीद 7.88 लाख टन और राजस्थान से 11.07 लाख टन की हुई है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में इन राज्यों से क्रमश: 8.37 लाख टन और 12.30 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी थी। बिहार से चालू रबी में 22,00 टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15,000 लाख टन से ज्यादा है।
गुजरात से चालू रबी में गेहूं की सरकारी खरीद 22 हजार टन की और हिमाचल प्रदेश से 3 हजार टन की हुई है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को चालू रबी सीजन में नुकसान हुआ है। अत: किसानों को राहत देते हुए केंद्र सरकार ने हरियाणा और राजस्थान के बाद पंजाब में भी गेहूं की चमक में कमी, लस्टर लॉस की सीमा को बढ़ाकर 70 फीसदी और टूटे दानों की सीमा को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।
सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 (अप्रैल-मार्च) के दौरान गेहूं की खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 345 लाख टन कर दिया है, जबकि पहले 303 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया था।
सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में भारी बढ़ोतरी से उत्तर भारत एवं गुजरात में कॉटन महंगी
नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने से सोमवार को शाम के सत्र में उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में कॉटन की कीमतों में भारी तेजी दर्ज की गई।
सूत्रों के अनुसार कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 2,900 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने फसल सीजन 2025-26 की 89,600 गांठ कॉटन स्पिनिंग मिलों को बेची।
सीसीआई चालू फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई लगभग 61,02,100 कपास गांठ की बिक्री अभी तक कर चुकी हैं। निगम द्वारा अभी तक कुल बिक्री में सबसे ज्यादा 21.48 लाख गांठ महाराष्ट्र में तथा 10 लाख गांठ गुजरात में बेची है। सीसीआई ने तेलंगाना में भी 10.93 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश में 4.80 लाख गांठ के अलावा कर्नाटक 4.17 लाख गांठ तथा राजस्थान में 3.04 लाख गांठ और ओडिशा में 2.39 लाख गांठ के अलावा हरियाणा 1.64 और आंध्रप्रदेश 1.22 के अलावा पंजाब में 41,800 गांठ काटन की बिक्री की है।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव सोमवार को 1,750 रुपये तेज होकर 63,800 से 64,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,400 से 6,600 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,260 से 6,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 6,300 से 6,600 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 60,500 से 61,500 रुपये कैंडी बोले गए।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।
सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में इसके दाम तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार सूती धागे में स्थानीय मांग अच्छी है, साथ ही चीन की आयात मांग भी बराबर बनी हुई है। घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास नहीं के बराबर है, जबकि सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अच्छा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है ऐसे में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।
उद्योग ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की थी। साथ ही चालू सीजन में कॉटन का आयात भी बढ़ेगा, हालांकि प्राइवेट जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जिस कारण इनकी बिकवाली कम आ रही है।
गेहूं की सरकारी खरीद 232 लाख टन के पार, हरियाणा से खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2026-27 में 30 अप्रैल तक गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 232.5 लाख टन की हो गई है जोकि रबी विपणन सीजन 2025-26 की समान अवधि के 253.63 लाख टन की तुलना में 9.28 फीसदी कम है।
प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से चालू रबी सीजन में 30 अप्रैल तक 111 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 103.9 लाख टन से 7 फीसदी ज्यादा है।
हरियाणा से चालू रबी सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 76.6 लाख टन की हो चुकी है, जोकि तय लक्ष्य 72 लाख टन से ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में राज्य से 65.7 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई थी। अत: चालू रबी में गेहूं की खरीद पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 17 फीसदी ज्यादा गेहूं खरीदा गया है।
मध्य प्रदेश से चालू रबी सीजन में 30 अप्रैल तक केवल 27.5 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 67.68 लाख टन की तुलना में 59 फीसदी कम है। केंद्र सरकार ने राज्य में गेहूं की खरीद के तय लक्ष्य को 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है। राज्य सरकार मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद के लिए तय किए न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के अलावा अतिरिक्त बोनस भी दे रही है।
भारतीय खाद्वय निगम, एफसीआई के अनुसार उत्तर प्रदेश से चालू रबी में गेहूं की खरीद 7.12 लाख टन और राजस्थान से 9.76 लाख टन की हुई है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में इन राज्यों से क्रमश: 7.54 लाख टन और 11.44 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी थी। बिहार से चालू रबी में 19,485 टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 14,291 लाख टन से ज्यादा है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को चालू रबी सीजन में नुकसान हुआ है। अत: किसानों को राहत देते हुए केंद्र सरकार ने हरियाणा और राजस्थान के बाद पंजाब में भी गेहूं की चमक में कमी, लस्टर लॉस की सीमा को बढ़ाकर 70 फीसदी और टूटे दानों की सीमा को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।
सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 (अप्रैल-मार्च) के दौरान गेहूं की खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 345 लाख टन कर दिया है, जबकि पहले 303 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया था।
