नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। यह निर्णय राज्य के करीब 74 फीसदी हिस्से को प्रभावित करता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के बाद यह फैसला लिया गया है। धाराशिव और बीड समेत कई जिलों में जुलाई के बाद से बहुत कम या लगभग न के बराबर बारिश हुई है। इसके कारण फसलों के साथ-साथ पशुधन और किसानों व कृषि मजदूरों की दैनिक पानी की जरूरतें भी प्रभावित हुई हैं।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 1 जून से 18 सितंबर के बीच 424.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 613.1 मिलीमीटर होती है। इस तरह संभाग में 30.8 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। धाराशिव सहित मराठवाड़ा के पांच अन्य जिले इसी संभाग का हिस्सा हैं। इसी तरह पुणे और नासिक संभागों में करीब 30 फीसदी, जबकि अमरावती और नागपुर संभागों में 27 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। वहीं, कोंकण संभाग में बारिश की कमी 6.3 फीसदी रही।
पूरे महाराष्ट्र में 1 जून से 18 सितंबर के बीच कुल 755.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 932.3 मिलीमीटर है। इस तरह राज्य में कुल 18.8 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। यह कमी एल नीनो की स्थिति के बीच सामने आई है। कम से कम छह जिलों, जिनमें अमरावती, सोलापुर और लातूर शामिल हैं, में बारिश की कमी 40 से 50 फीसदी के बीच रही।
खरीफ सीजन में महाराष्ट्र के किसान मुख्य रूप से सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी फसलें उगाते हैं। कई जिलों के किसानों ने पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसलों को हुए नुकसान की जानकारी दी है। इसके अलावा कीट और रोगों का प्रकोप भी बढ़ा है। 16 सितंबर को राज्य के कई जिलों में किसानों ने प्रदर्शन कर सूखा राहत और फसल नुकसान के मुआवजे की मांग की थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए जल्द ही पंचनामा और जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
26 सितंबर 2026
महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, बारिश की कमी से फसलें प्रभावित
सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में कटौती के बावजूद मिलर्स एवं ट्रेडर्स की खरीद घटी
नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में कटौती करने के बावजूद भी चालू सप्ताह में इसकी बिक्री में कमी देखी गई। नई फसल को देखते हुए स्पिनिंग मिल निगम से खरीद सीमित मात्रा में ही कर रही है।
सीसीआई ने चालू सप्ताह में कॉटन की बिक्री कीमतों में 1,700 से 2,000 रुपये प्रति कैंडी की कटौती की है, जबकि 21 से 25 सितंबर के द्वारा निगम ने केवल 10,700 गांठ कॉटन की बिक्री की है, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 3,600 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 7,100 गांठ कॉटन की खरीद की है। 25 सितंबर को निगम ने केवल 700 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 300 गांठ एवं ट्रेडर्स 400 गांठ की खरीद की।
घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों की खरीद कमजोर बनी रहने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। चालू सप्ताह में उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही मध्य प्रदेश में नई कपास की आवकों में बढ़ोतरी हुई है, तथा मौसम अनुकूल रहा तो आगामी दिनों में कपास की आवकों में और बढ़ोतरी होगी। अन्य राज्यों की मंडियों में नई कपास की आवकों का दबाव अक्टूबर में बनेगा। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों पर दबाव बना रहने की उम्मीद है।
स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण शुक्रवार को लगातार चौथे दिन गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन की कीमतों में मंदा आया।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 250 रुपये कमजोर होकर 66,500 से 66,700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए। पिछले चार कार्यदिवस में इसके दाम 750 रुपये प्रति कैंडी तक कमजोर हो चुके हैं।
पंजाब में नई रुई हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 6,625 से 6,675 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव घटकर 6,550 से 6,625 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम घटकर 6,625 से 6,7675 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 63,500 से 63,800 रुपये कैंडी बोले गए।
उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका से बासमती चावल के साथ ही धान के भाव तेज
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब एवं हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश की कमी से बासमती धान की पैदावार में कमी आने की आशंका है। उत्पादक राज्यों में गुरुवार को जहां बासमती चावल की कीमतों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई, वहीं इन राज्यों की मंडियों में पूसा 1,509 किस्म के बासमती धान के दाम 200 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए।
हरियाणा एवं पंजाब लाइन से पूसा 1,509 किस्म के नए स्टीम चावल का व्यापार 200 रुपये तेज होकर 8,300 से 8,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। इस दौरान सेला चावल का व्यापार 8,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ तथा इसके दाम भी 200 रुपये तेज हुए। राजस्थान की बूंदी लाइन से पूसा 1,509 किस्म के सेला चावल का 300 से 400 टन का व्यापार 8,100 से 8,150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
राजपुरा मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव 225 रुपये तेज होकर 3,900 से 4,225 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि आवक करीब 8,000 बोरी की हुई। फरीदकोट मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के दाम 300 रुपये तेज होकर 3,900 से 4,335 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दिल्ली की नजफगढ़ मंडी में पूसा 1,509 किस्म के कंबाइन के धान के भाव तेज होकर 3,800 से 4,100 रुपये और हाथ की कटाई के बढ़कर 4,200 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
व्यापारियों के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक ज्यादा हो रही है, जबकि परमल, शरबती एवं एचआर 10 किस्म की अगेती फसल की छिटपुट आवक शुरू हो गई है। अक्टूबर में पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में परमल धान की आवक बढ़ेगी, तथा इन राज्यों में परमल धान की खरीद भी पहली अक्टूबर से शुरू होगी।
भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 23 सितंबर तक देशभर में बारिश सामान्य की तुलना में 15 फीसदी कम हुई है। इस दौरान पंजाब सामान्य से 40 फीसदी एवं हरियाणा में 23 फीसदी कम बारिश हुई है। अन्य राज्यों पूर्वी राजस्थान में 17 फीसदी और पश्चिमी राजस्थान में 30 फीसदी सामान्य के मुकाबले कम बारिश हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य के मुकाबले 11 फीसदी कम हुई है, हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 3 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई और राज्य की एजेंसियां पहली अक्टूबर से पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों से धान खरीदना शुरू करेगी, और नवंबर के आखिर तक पंजाब से 18 मिलियन टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है। पिछले साल पंजाब से 15.7 मिलियन टन धान खरीदा था।
सरकार ने ओडिशा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे कई बड़े चावल उत्पादक राज्यों से चालू खरीफ विपणन सीजन में, पिछले साल की तुलना में धान खरीदने का लक्ष्य कम कर दिया है।
चालू खरीफ सीजन में देशभर में धान की बुआई पिछले साल की तुलना में लगभग 4 फीसदी घटकर 42.93 मिलियन हेक्टेयर रह गई, क्योंकि एल नीनो की वजह से खराब और असमान बारिश के कारण किसानों ने दूसरी फसल को तरजीह दी।
चालू खरीफ सीजन में धान बुआई में कमी के बावजूद, सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान 71.95 मिलियन टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है, जो काफी हद तक पिछले साल के लगभग बराबर ही है।
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