कुल पेज दृश्य

17 जून 2021

चीनी का उत्पादन 306.65 लाख टन के पार, 58 लाख टन के हुए निर्यात सौदे

नई दिल्ली। चालू पेराई सीजन 2020-21 के पहले साढ़े आठ महीनों में पहली अक्टूबर 2020 से 15 जून 2021 तक चीनी का उत्पादन 10.71 फीसदी बढ़कर 306.65 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस दौरान केवल 271.11 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। विदेशी बाजार में दाम तेज होने से चालू पेराई सीजन में 58 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे भी हो चुके हैं। देशभर में इस समय केवल 5 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में महाराष्ट्र में 31 मई 2021 तक 106.28 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 61.69 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। राज्य की चीनी मिलों में पेराई 31 मई 2021 को बंद हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 120 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी, जिसमें से 119 मिलों में पेराई बंद हो चुकी है अत: इस समय केवल एक चीनी मिल में ही पेराई चल रही है। राज्य में 15 जून 2021 तक 110.61 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 126.30 लाख टन से 15.69 लाख टन कम है।

कर्नाटक में 15 अप्रैल 21 को ही पेराई सीजन समाप्त हो चुका है, तथा इस दौरान राज्य की मिलों ने 41.67 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में केवल 33.80 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। दक्षिण कर्नाटक में एक चीनी मिल में विशेष सत्र की पेराई हो रही हैं तथा पिछले विशेष पेराई सीजन में राज्य में 1.14 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 15 जून 2021 तक 6.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 6.12 लाख टन से ज्यादा है। राज्य में इस समय विशेष सत्र की पेराई चल रही है तथा पिछले साल तमिलनाडु में विशेष सत्र के दौरान 2 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

देश के अन्य राज्यों गुजरात, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा में 15 जून 2021 तक 41.39 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।

चालू पेराई सीजन में 15 जून 2021 तक देश से करीब 58 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे हो चुके हैं, जिसमें से 45.74 लाख टन चीनी की शिपमेंट भी हो चुकी है। केंद्र सरकार ने चालू पेराई सीजन में 60 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा तय किया हुआ है। सूत्रों के अनुसार विदेशी बाजार में दाम तेज होने से मिलों को निर्यात में अच्छी पैरिटी लग रही है।

मिलों की कमजोर मांग दिल्ली में मसूर मंदी, चना के साथ अन्य दालों के दाम स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने के कारण गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में मसूर की कीमतों में गिरावट जारी रही, जबकि अन्य दालों के दाम स्थिर हो गए।

काकीनाड़ा और मुंद्रा बंदरगाह पर विदेश से नियमित मसूर की आपूर्ति बढ़ने के साथ ही मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर के भाव में 50-50 रुपये घटकर दाम क्रमश: 6,450 रुपये और 6,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। केंद्र सरकार ने अभी तक मसूर के आयात शुल्क में किसी भी बदलाव की घोषणा नहीं की है।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने लेमन अरहर के दाम 6,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। अरहर दाल में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है। आयातित अरहर आने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से चेन्नई हाजिर पर अरहर की कीमतें 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जून डिलीवरी के 6,550 से 6,575 प्रति क्विंटल बोले गए।

चेन्नई के कमजोर संकेत के साथ ही विदेशों से आयातित उड़द की आवक बनने से मिलों की हाजिर मांग कमजोर हुई, जिससे उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 7,200 से 7,225 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

नीचे दाम पर बिकवाली कम आने से दिल्ली के लारेंस रोड़ पर राजस्थानी चना के भाव 5,075 से 5,100 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के दाम 5,25 से 5,050 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

16 जून 2021

दाल मिलों की कमजोर मांग से दिल्ली में अरहर, उड़द और मसूर में गिरावट

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने के कारण बुधवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर, उड़द के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

मुंबई बदरंगाह पर अगले सप्ताह 30,000 टन अरहर और 20 से 22 हजार टन उड़द चेन्नई पर आने का अनुमान है।

दलहन का आयात ओजीएल के तहत किये जाने के बाद अब विदेशों से दलहन आयात होनी शुरू होगी, हालांकि विदेशों में अभी अरहर और उड़द का स्टॉक ज्यादा नहीं माना जा रहा।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने लेमन अरहर के दाम 50 रुपये घटकर 6,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अरहर दाल में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है। आयातित अरहर आने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से चेन्नई हाजिर पर अरहर की कीमतें 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जून डिलीवरी के 25 रुपये घटकर 6,550 से 6,575 प्रति क्विंटल बोले गए।

चेन्नई के कमजोर संकेत के साथ ही विदेशों से आयातित उड़द की आवक बनने से मिलों की हाजिर मांग कमजोर हुई, जिससे उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव 50 से 75 रुपये घटकर क्रमश: 6,750 रुपये और 7,200 से 7,225 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

काकीनाड़ा और मुंद्रा बंदरगाह पर विदेश से मसूर की आपूर्ति बढ़ने के साथ ही मिलों की मांग घटने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर के भाव में 25 से 100 रुपये घटकर क्रमश: 6,500 रुपये और 6,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। केंद्र सरकार ने अभी तक मसूर के आयात शुल्क में किसी भी बदलाव की घोषणा नहीं की है।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जुलाई डिलीवरी वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 65 रुपये की गिरावट आई, जबकि अगस्त वायदा अनुबंध में इसकी कीमतों में 70 रुपये का मंदा आया।

15 जून 2021

दिल्ली में मिलों कमजोर मांग से अरहर, चना और मसूर में मंदा, उड़द के दाम स्थिर

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर बनी रहने के कारण मंगलवार को दिल्ली के नया बाजार में अरहर चना के साथ ही मसूर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जबकि उड़द के दाम स्थिर बने रहे।

दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने लेमन अरहर के दाम 6,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। अरहर दाल में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर बनी हुई है। आयातित अरहर आने के साथ ही दाल मिलों की कमजोर मांग से चेन्नई हाजिर पर अरहर की कीमतें 50 रुपये घटकर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। आगे के सौदों में, बर्मा की नई अरहर के दाम चेन्नई से दिल्ली के लिए जून डिलीवरी के 6,600 प्रति क्विंटल बोले गए।

चना दाल और बेसन में ग्राहकी कमजोर होने से दिल्ली में चना के दाम 100 रुपये घटकर राजस्थानी चना के 5,150 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के 5,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।  

चेन्नई के कमजोर संकेत के साथ ही विदेशों से आयातित उड़द की आवक बनने से मिलों की मांग सुस्त रही, जिससे दिल्ली में उड़द एफएक्यू के भाव 6,800 रुपये और एसक्यू उड़द के भाव 7,275 से 7,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

काकीनाड़ा और मुंद्रा बंदरगाह पर विदेश से मसूर की आपूर्ति बढ़ने के साथ ही मिलों की मांग घटने से दिल्ली में कनाडा और मध्य प्रदेश लाईन की मसूर के भाव में 25 से 25 रुपये घटकर क्रमश: 6,525 रुपये और 6,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। केंद्र सरकार ने अभी तक मसूर के आयात शुल्क में किसी भी बदलाव की घोषणा नहीं की है।

मुंबई में उड़द, अरहर के साथ ही चना एवं काबूली चना के दाम घटे

नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से मुंबई में उड़द, अरहर के साथ ही चना एवं काबूली चना की कीमतें घटकर बंद हुई।

घरेलू बाजारों में दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से लेमन अरहर के साथ ही अरुषा अरहर के दाम मुंबई में 50-75 रुपये घटकर क्रमश: 6,000 रुपये और 5,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगे के व्यापार में, बर्मा की लेमन अरहर में जून-जुलाई शिपमेंट के लिए 6,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भाव बोले गए।

विदेशों से चेन्नई बंदरगाह पर उड़द की नियमित आवक बनने एवं दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी की कीमतों में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमशः 6,550 रुपये और 6,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। आगे के व्यापार में, बर्मा उड़द एफएक्यू के भाव जून-जुलाई शिपमेंट के लिए 6,425-6,450 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए, हालांकि, इन भाव में ​कोई व्यापार नहीं हुआ।

तंजानिया लाईन के चना के साथ ही सूडान और रूस के काबुली चना में दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण 50-50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। सरकार द्वारा चना एवं काबुली चना के आयात शुल्क में कटौती को लेकर बाजार सतर्क है।

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर जून वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 84 रुपये की गिरावट आई, जबकि जुलाई वायदा अनुबंध में इसके भाव में 89 रुपये का मंदा आया।

14 जून 2021

एमएसपी पर 425 लाख टन रिकार्ड गेहूं की खरीद, पिछले रबी से 12.50 फीसदी ज्यादा

नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2021-22 में न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 13 जून 2021 तक देशभर की मंडियों से भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई ने 425.77 लाख टन गेहूं की खरीद की है, जोकि अभी तक का रिकार्ड है, पिछले रबी सीजन की समान अवधि में 378.44 लाख टन गेहूं की खरीद ही एमएसपी पर हो पाई थी।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार पिछले रबी विपणन सीजन 2020-21 में एमएसपी पर कुल खरीद 389.92 लाख टन ही हुई थी जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में एमएसपी पर 378.44 लाख टन गेहूं की खरीदा गया था। अत: पिछले रबी की तुलना में एफसीआई चालू रबी विपणन सीजन में 12.50 फीसदी ज्यादा गेहूं की एमएसपी पर खरीद कर चुकी है, इससे देशभर के 47.53 लाख किसानों के खाते में 84,089.77 करोड़ रुपये की राशि आई है।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 132.10 लाख टन की है, जबकि हरियाणा से चालू रबी में 84.93 लाख टन और मध्य प्रदेश से 128.08 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। अन्य राज्यों में राजस्थान से चालू रबी में अभी तक 21.94 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 52.54 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर की जा चुकी है, जबकि अन्य राज्यों से एमएसपी पर 6.18 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है।  

केंद्र सरकार ने चालू रबी में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य, 1,975 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी में एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल था।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद के तय लक्ष्य को पांच लाख टन बढ़ा दिया है। खरीद आरंभ होने के समय केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन में 427 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया था, जिसे बढ़ाकर 433 लाख टन कर दिया है।

कॉटन उत्पादन अनुमान में 4 लाख घटकर 356 लाख गांठ होने का अनुमान

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2020-21 में कपास का उत्पादन चार लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कम होकर 356 लाख गांठ का होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 360 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। कॉटन का निर्यात चालू फसल सीजन में बढ़कर 72 लाख गांठ का होने का अनुमान है, जोकि पिछले फसल सीजन में केवल 50 लाख गांठ का ​ही निर्यात हुआ था।

कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया, सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2020 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में 31 मई 2021 तक देशभर की मंडियों में 340.25 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है। ऐसे में ​अब बकाया केवल 15.75 लाख गांठ का ही स्टॉक बचा हुआ है। उत्तर भारत के राज्यों में कपास की नई फसल की आवक सितंबर में बनेगी।

सीएआई के अध्यक्ष अतुल गनात्रा के अनुसार चालू फसल सीजन में कपास का निर्यात बढ़कर 72 लाख गांठ का होने का अनुमान है, जोकि मई के आरंभिक  अनुमान 65 लाख गांठ से 7 लाख गांठ ज्यादा है। पिछले फसल सीजन में केवल 50 लाख गांठ का ही निर्यात हुआ था।

हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में आई तेजी के बावजूद भी चालू फसल सीजन में कॉटन का कुल आयात घटकर 10 लाख गांठ का ही होने का अनुमान है, जबकि पहले 11 लाख गांठ के आयात का अनुमान था। 31 मई तक 8.25 लाख गांठ कपास का आयात हो चुका है। देश में कॉटन की खपत पहले के अनुमान से 10 लाख गांठ बढ़कर 325 लाख गांठ होने का अनुमान है।

उद्योग के अनुसार अक्टूबर 2020 से मई 2021 के दौरान देश में कॉटन की खपत 220 लाख गांठ की हुई है, जबकि इस दौरान 58 लाख गांठ निर्यात की शिपमेंट भी हो चुकी है।

कीतमें तेज होने के साथ ही अनुकूल मौसम के कारण उद्योग को उम्मीद है कि देश में कपास की नई फसल का उत्पादन बढ़कर 400 लाख गांठ से ज्यादा होने का अनुमान है।