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30 मई 2026

केंद्र सरकार ने जून 2026 के लिए 22.5 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को जून 2026 के लिए घरेलू बिक्री हेतु 22.5 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया है। यह कोटा मई 2026 के बराबर है, जबकि अप्रैल 2026 के 23 लाख टन की तुलना में कम है।


केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने पिछले साल जून 2025 में घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 23 लाख अन चीनी का कोटा जारी किया था।

व्यापारियों के अनुसार, जून 2026 के लिए मई के समान कोटा तय करने के पीछे सरकार का उद्देश्य चीनी की मांग को संतुलित बनाए रखना है। पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति और मानसून की शुरुआत को देखते हुए अनुमान है कि चीनी की मांग सामान्य बनी रह सकती है।

हालांकि आमतौर पर अप्रैल और मई के दौरान गर्मी के कारण चीनी की खपत अधिक रहती है। मानसून शुरू होने के बाद इसमें कुछ कमी देखने को मिलती है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि कम कोटे की घोषणा के बाद चीनी की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है।

देशभर में अधिकांश चीनी मिलों का पेराई सत्र समाप्त हो चुका है। इसलिए सरकार फिलहाल चीनी की खपत और उपलब्धता पर सावधानीपूर्वक नजर बनाए हुए है। मांग और आपूर्ति की स्थिति के आधार पर आगे के महीनों में कोटा तय किया जाएगा।

सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 2,300 रुपये की भारी कटौती की

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने शुक्रवार को ई-ऑक्शन के माध्यम से फिर से कॉटन की बिक्री शुरू कर दी है। हाल ही में ग्लोबल मार्केट में आई गिरावट को देखते हुए, सीसीआई ने शुक्रवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 2,300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो की भारी कटौती की। इसलिए घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव देखा गया।


सीसीआई ने शुक्रवार को ई-ऑक्शन के माध्यम केवल 1,200 गांठ कॉटन की ही बिक्री की। इसमें स्पिनिंग मिलों ने 800 गांठ और व्यापारियों ने 400 गांठ कॉटन की खरीद की। व्यापारियों सूती धागे में ग्राहकी सामान्य की तुलना में कमजोर है, जिस मिलें इन्वेंट्री नहीं बढ़ाना चाहती।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर से कमजोर हुई हैं। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

विश्व बाजार में कॉटन की कीमतों में पिछले दिनों बड़ी गिरावट आई थी, जिस कारण घरेलू बाजार भी इसकी कीमतों पर दबाव है। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास नहीं के बराबर है, जबकि सीसीआई के पास बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

उद्योग ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में एक बार फिर 10 लाख गांठ की बढ़ोतरी कर दी। चालू सीजन में कॉटन का आयात भी बढ़कर 47 लाख गांठ होने का अनुमान है। हालांकि प्राइवेट जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जिस कारण इनकी बिकवाली कम आ रही है।

स्पिनिंग मिलों की खरीद कमजोर होने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 200 रुपये कमजोर होकर 63,400 से 63,700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 6,500 से 6,650 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 6,300 से 6,350 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 6,400 से 6,650 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 61,000 से 62,000 रुपये कैंडी बोले गए।