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13 जून 2026

नवंबर-25 से मई-26 के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 12 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले सात महीनों नवंबर-25 से मई-26 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 12 फीसदी बढ़कर 93.65 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 83.39 लाख टन का हुआ था। मई 2026 में खाद्य तेलों का आयात अप्रैल 2026 के 13.07 लाख टन से बढ़कर 13.39 लाख टन को हो गया। नवंबर 2025 से मई 2026 के दौरान खाद्य तेलों का कुल आयात बढ़कर 92.17 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 81.31 लाख टन था, जिसमें 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार मई 2026 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़कर 13.65 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले साल मई में इनका आयात 12.67 लाख टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 13.39 लाख टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 26,202 टन का हुआ है।

एसईए के अनुसार मई 2026 में देश में खाद्य तेलों का आयात अप्रैल 2026 के मुकाबले 2.4 फीसदी बढ़ा। इसकी मुख्य वजह क्रूड सोया तेल का ज्यादा आयात था, क्योंकि पाम तेल के मुकाबले सोया तेल का भाव कम हो गया था, जिससे इसके आयात पड़ते सस्ते थे। 1 जून, 2026 से, केंद्र सरकार ने आयात टैरिफ वैल्यू में बदलाव किया, जिससे क्रूड पाम तेल (सीपीओ) की टैरिफ वैल्यू 1,218 डॉलर प्रति टन और आरबीडी पाम तेल की टैरिफ वैल्यू 1,222 डॉलर प्रति टन हो गई, जबकि क्रूड सोया तेल की टैरिफ वैल्यू थोड़ी कम कर दी गई।

मई 2026 के दौरान आरबीडी पामोलिन का कोई आयात रिकॉर्ड नहीं किया गया। नवंबर 2025 से मई 2026 के दौरान आरबीडी पामोलिन का कुल आयात पिछले साल की समान अवधि के 826,800 टन से घटकर 47,270 टन का रह गया। यह गिरावट क्रूड और रिफाइंड तेलों के बीच उच्च शुल्क अंतर बनाए रखने की सरकार की नीति को दर्शाती है, जिसने क्रूड पाम तेल के आयात को बढ़ावा दिया है और घरेलू रिफाइनिंग, मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन का समर्थन किया है।

नेपाल से रिफाइंड तेल का आयात उच्च स्तर पर जारी रहा। नवंबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान, नेपाल ने भारत को लगभग 280,349 टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें 246,005 टन रिफाइंड सोया तेल, 17,356 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल, 14,287 टन आरबीडी पामोलिन और 2,701 टन रेपसीड तेल शामिल था। अप्रैल 2026 में नेपाल का भारत को रिफाइंड तेल निर्यात लगभग 58,000 टन और मई 2026 में बढ़कर 60,000 टन होने का अनुमान था, जिसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोया तेल, साथ ही थोड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल और आरबीडी पामोलिन शामिल थे। नेपाल द्वारा भारत को खाद्य तेलों के निर्यात पर साफ्टा एग्रीमेंट के तहत कोई आयात शुल्क नहीं लगता।

केंद्र ने 22 से 30 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क हटाया, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में अधिक मात्रा में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 22 फीसदी से 30 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को समाप्त कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य देश में वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ाना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। सरकारी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 22 फीसदी से 30 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को अब उत्पाद शुल्क से पूरी तरह छूट मिलेगी।


उत्पाद शुल्क एक प्रकार का कर (टैक्स) होता है, जो सरकार कुछ विशेष वस्तुओं, खासकर ईंधनों पर लगाती है। इस कर को हटाने से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उत्पादन और आपूर्ति करने वाली कंपनियों को आर्थिक लाभ मिलेगा। यह छूट केवल उन पेट्रोल मिश्रणों पर लागू होगी जिनमें एथेनॉल की मात्रा 22 फीसदी से 30 फीसदी के बीच होगी। फिलहाल आम पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले नियमित पेट्रोल में कोई तत्काल बदलाव घोषित नहीं किया गया है, लेकिन इस कदम से उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन के विकास और उपलब्धता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। एथेनॉल जो कि गन्ने के रस और अन्य अनाजों जैसे मक्का, चावल एवं बाजरा आदि कृषि जिंसों से देश में ही तैयार किया जाता है, विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद करता है। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार भी तैयार हुआ है और यह सरकार की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पिछले एक दशक में भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की मात्रा तेजी से बढ़ाई है, जिससे तेल आयात बिल कम करने और स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देने में सहायता मिलती है।

केंद्र सरकार के इस फैसले का तत्काल प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर सीमित हो सकता है, क्योंकि नियमित पेट्रोल की कीमतों या संरचना में अभी कोई बदलाव होने की अभी संभावना नहीं है। हालांकि यह निर्णय देश की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत परिवहन ईंधन में घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई जाएगी। सरकार का यह कदम बढ़ती ऊर्जा मांग और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।