नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। अत: स्पिनिंग मिलों की खरीद शाम के सत्र में उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम तेज हुए।
सीसीआई ने सोमवार को फसल सीजन 2025-26 की कुल 17,500 गांठ कॉटन की बिक्री की तथा इस दौरान इसकी बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। पिछले सप्ताह भी निगम ने इसकी कीमत 800 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ाई थी।
कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया सीसीआई चालू फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई लगभग 57,38,700 कपास गांठ की बिक्री अभी तक कर चुकी हैं।
सीसीआई ने पिछले सप्ताह में 20 अप्रैल से 24 अप्रैल के दौरान घरेलू बाजार में 3,92,700 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की थी।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,060 से 6,260 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,920 से 6,020 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,940 से 6,300 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 58,000 से 59,000 रुपये कैंडी बोले गए।
देशभर की मंडियों में कपास की आवक 35,400 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।
घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 68 रुपये कमजोर होकर 1,710 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। एमसीएक्स पर अप्रैल 26 के वायदा अनुबंध में कॉटन के भाव 28,400 रुपये प्रति कैंडी पर स्थिर हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर बनी रही। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों की खरीद बढ़ने से उत्तर भारत में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जबकि यार्न में निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है, इसलिए मिलों को कॉटन की ज्यादा खरीद सीसीआई से करनी पड़ रही है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है हालांकि निगम के पास अभी भी 50 लाख गांठ से ज्यादा का कॉटन का स्टॉक है। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।
