नई दिल्ली। नीचे दाम पर दाल मिलों की मांग बढ़ने से मंगलवार को घरेलू बाजार में अरहर एवं उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान चना के साथ देसी मसूर के दाम नरम हुए। मूंग की कीमत स्थिर हो गई।
बर्मा से आयातित उड़द एफएक्यू एवं एसक्यू की कीमत चेन्नई में स्थिर हो गई। उड़द एफएक्यू के दाम जुलाई एवं अगस्त शिपमेंट के 920 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव जुलाई एवं अगस्त शिपमेंट के 1,015 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।
लेमन अरहर फसल सीजन 2026 के भाव चेन्नई में जुलाई एवं अगस्त शिपमेंट के भाव 855 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।
चेन्नई में उड़द की कीमत स्थिर हो गई, जबकि इस दौरान बर्मा में एफएक्यू के दाम तेज हुए, जबकि एसक्यू के स्थिर बने रहे। घरेलू बाजार में नीचे दाम पर दाल मिलों की खरीद से उड़द की कीमतों में तेजी आई। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के बावजूद भी दाल मिलर्स उड़द की खरीद जरुरत के हिसाब से ही कर रहे हैं, क्योंकि अगस्त में आयात बढ़ने का अनुमान है। इसलिए उड़द के भाव में हल्का सुधार तो बन सकता है, लेकिन एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। हालांकि उत्पादक मंडियों में समर उड़द की आवक पहले की तुलना में कम हुई। जानकारों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण अगस्त मध्य के बाद में उड़द मोगर एवं गोटा में की मांग बढ़ेगी। अभी आषाढ़ का महीना चल रहा है, जिसमें शादियों के साथ ही त्योहार के न होने के कारण बिक्री कमजोर है तथा 15 अगस्त के बाद श्रावण का महीना शुरू होगा, उसके बाद दाल में ग्राहकी बनेगी।
अगस्त के मध्य से म्यांमार और ब्राजील से उड़द का आयात बढ़ेगा। खरीफ उड़द की बुआई बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और गुजरात में बढ़ी है। नई खरीफ की आवक सितंबर के मध्य में आने की संभावना है, जबकि इस दौरान ब्राजील से शिपमेंट भी बढ़ने की संभावना है। अधिकांश ट्रेडर्स और स्टॉकिस्टों के पास उड़द का अच्छा स्टॉक है, जिससे मांग काफी हद तक सीमित रहने की उम्मीद है।
चेन्नई में लेमन अरहर के दाम स्थिर हो गए, जबकि इस दौरान बर्मा में इसकी कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में नीचे दाम पर दाल मिलों की खरीद से अरहर के भाव तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में जिस तरह से बर्मा में लेमन की कीमतों में मंदा आया है, उसे देखते हुए हाजिर बाजार में इसकी कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है। चालू खरीफ में अरहर की बुआई प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में पीछे चल रही है तथा व्यापारियों की नजर इन राज्यों में आगामी दिनों में मानसूनी बारिश कैसी होती है, इस पर लगी हुई है। वैसे आगामी दिनों में खपत का सीजन होने के कारण अरहर दाल की मांग में सुधार आयेगा। उत्पादक मंडियों में देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है।
अरहर के आयात में कमी से इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। म्यांमार से आयात कम हो रहा है, जबकि पोर्ट पर आयातित अरहर का स्टॉक कम है। मीडियम टर्म में, कीमतों में उतार-चढ़ाव मिलर्स और ट्रेडर्स की डिमांड, आयात पैरिटी और माल ढुलाई दरों के साथ ही मानसून की प्रगति और म्यांमार और अफ्रीकी देशों से आयात की मात्रा पर निर्भर करेगा। हालांकि, मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण खरीफ रकबे में कमी से कीमतें में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। कर्नाटक के गुलबर्गा और महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में अब तक बारिश कम हुई है, जिससे इन क्षेत्रों में अरहर की बुवाई पर असर पड़ा है।
तंजानिया की मतवारा अरहर के दाम नवा सेवा बंदरगाह पर अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के भाव 615 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। इस दौरान मोजाम्बिक की अरहर के दाम नवा सेवा बंदरगाह पर अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के 10 डॉलर तेज होकर 550 से 560 डॉलर प्रति टन, सीएंडएफ हो गए।
दाल मिलों की मांग कमजोर होने से दिल्ली में चना के दाम कमजोर हुए। व्यापारियों के अनुसार बढ़े दाम पर मिलों की मांग कम हुई है, लेकिन व्यापारी बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने एल नीनो को देखते हुए कृषि मंत्रालय से केंद्रीय पूल से दलहन की बिक्री रोकने पर विचार करने का कहां है। जानकारों के अनुसार दाल मिलों की खरीद बढ़ी है। इसलिए चना के भाव में और भी सुधार बनने की उम्मीद है। वैसे भी अधिकांश दाल मिलों के पास चना का बकाया स्टॉक कम है। उत्पादक मंडियों में चना की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है जबकि आयात पड़ते उंचे हैं। अगस्त में त्योहारी मांग निकलेगी, जिस कारण मिलों की खरीद बढ़ेगी। आयातित चना की शिपमेंट कम आ रही है। चालू सीजन में चना के साथ ही पीली मटर का आयात पिछले साल की तुलना में कम हुआ है, जिससे चना की खपत बढ़ने का अनुमान है। हालांकि केंद्रीय पूल में चना का स्टॉक ज्यादा है लेकिन नेफेड उंचे दाम पर ही बिक्री कर रही है।
मंडियों में चना की आवक काफी कम हो गई है, जबकि स्टॉकिस्ट कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद में सीमित मात्रा में ही बेच रहे हैं। दाल एवं बेसन की त्योहारी सीजन की डिमांड को पूरा करने के लिए मिलर्स ने चना खरीदना शुरू कर दिया है, जो अगस्त के मध्य तक जारी रहेगा। अत: आने वाले समय में चने की त्योहारी मांग जारी रहने की उम्मीद है, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिलेगा।
ऑस्ट्रेलिया के चना के दाम अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के कोलकाता पहुंच दाम 610 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।
दाल मिलों की मांग कमजोर होने से देसी मसूर के दाम दिल्ली में 25 रुपये कमजोर हुए। इस दौरान आयातित मसूर के दाम बंदरगाह पर स्थिर बने रहे। हालांकि व्यापारी मसूर की कीमतों में यहां से बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। खपत का सीजन होने के कारण दाल मिलों की खरीद मसूर में आगामी दिनों में बढ़ेगी, साथ ही आयात पड़ते तेज हैं। इसलिए इसके भाव में आगे सुधार आने की उम्मीद है। त्योहारी सीजन होने के कारण अगस्त में दालों की खपत आमतौर पर अच्छी रहती है। उत्पादक मंडियों में मसूर की दैनिक आवकों में पहले की तुलना में कमी आई है, साथ ही इसके दाम कई मंडियों में अभी भी समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं। चालू सीजन में मसूर का उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम हुआ था।
मूंग के दाम अधिकांश उत्पादक मंडियों में स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार मूंग की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने की उम्मीद है। स्टॉकिस्टों की बिकवाली कमजोर है, क्योंकि समर मूंग की आवक उत्पादक मंडियों पहले की तुलना में कम होने लगी है तथा आगामी दिनों में आवक और घटेगी। दाल मिलों की खरीद आगामी दिनों में बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए इसके भाव में हल्का सुधार बन सकता है। चालू खरीफ सीजन में मूंग की बुआई पिछले साल की तुलना में थोड़ा पीछे चल रही है। हालांकि केंद्रीय पूल में मूंग का स्टॉक सबसे ज्यादा है तथा इसकी कीमत उत्पादक मंडियों में एमएसपी से नीचे बनी हुई है।
चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 75 रुपये तेज होकर 9,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 100 रुपये तेज होकर 9,575 से 9,600 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
दिल्ली में उड़द एफएक्यू के दाम 9,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 50 रुपये तेज होकर 9,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
मुंबई में उड़द एफएक्यू के दाम 75 रुपये तेज होकर 9,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
कोलकाता में उड़द एफएक्यू के दाम 9000 से 9,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
गुंटूर में उड़द पॉलिश के दाम 50 रुपये बढ़कर 9,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। विजयवाड़ा में उड़द पॉलिश के भाव 9,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
चेन्नई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 100 रुपये तेज होकर 7,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दिल्ली में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 75 रुपये बढ़कर 8,050 से 8,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
मुंबई में लेमन नई अरहर के भाव शाम के सत्र में 100 रुपये तेज होकर 7,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान पुरानी लेमन के दाम 100 रुपये बढ़कर 7,750 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
देसी अरहर के भाव सोलापुर और कानपुर में तेज हुए, जबकि अन्य अधिकांश उत्पादक मंडियों में स्थिर बने रहे।
मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के भाव तेज हुए। सूडान से आयातित अरहर के भाव 100 रुपये बढ़कर 6,600 से 6,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर 5,900 से 5,950 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मतवारा की अरहर के भाव 50 रुपये बढ़कर 5,850 से 5,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सफेद अरहर के दाम 100 रुपये तेज होकर 6,100 से 6,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दिल्ली में देसी मसूर के दाम 25 रुपये नरम होकर 6,750 से 6,775 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,050 से 6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जबकि ऑस्ट्रेलिया की मसूर के भाव कंटेनर में 6,025 से 6,050 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कनाडा की मसूर के दाम मुद्रा बंदरगाह पर 5,675 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। हजिरा बंदरगाह पर इसके दाम 5,750 से 5,775 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। पटना मंडी में देसी मसूर के भाव 6,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
दिल्ली में राजस्थान के चना के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 6,250 से 6,275 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना का व्यापार 50 रुपये घटकर 6,175 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।
इंदौर में बोल्ड किस्म के मूंग की कीमत 7,400 से 7,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। इस दौरान जयपुर में चमकी मूंग के भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। उत्तर प्रदेश लाइन की मूंग के दाम 7,650 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। अकोला में चमकी मूंग के भाव 8,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
