कुल पेज दृश्य

14 फ़रवरी 2026

केंद्र ने 30 लाख टन गेहूं एवं गेहूं उत्पादों के साथ 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 13 फरवरी। केंद्र सरकार ने देश में गेहूं और चीनी के जरुरत से ज्यादा स्टॉक को हल्का करने और इनकी कीमतों में स्थिरता को ध्यान में रखते हुए 25 लाख टन गेहूं के साथ-साथ 5 लाख टन गेहूं उत्पादों एवं पांच लाख टन चीनी के और निर्यात को मंजूरी दी है।


केंद्र सरकार ने गेहूं और चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। सरकार ने 25 लाख टन गेहूं, 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। यह निर्णय घरेलू बाजार की उपलब्ध स्टॉक और कीमतों के व्यापक आकलन के बाद लिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्यात की इस अनुमति से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के केंद्रीय भंडार में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। वहीं, निजी संस्थाओं के पास 2025-26 के दौरान लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 32 लाख टन अधिक है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर का हो गया है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मजबूत खरीद तंत्र पर किसानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है और आने वाले समय में बेहतर उत्पादन की संभावना को मजबूत करता है। अधिक स्टॉक, कीमतों में नरमी और फसल आवक के चरम समय में मजबूरी में बिक्री को रोकने के उद्देश्य से सरकार ने गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। इससे घरेलू बाजार में कीमतों की स्थिरता, स्टॉक रोटेशन में सुधार और किसानों को बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी।

चीनी निर्यात को भी मिली अतिरिक्त मंजूरी

केंद्र सरकार ने चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का भी फैसला किया है। इससे पहले नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई थी। सरकारी आदेश के अनुसार, अतिरिक्त चीनी का निर्यात कोटा उन्हीं मिलों को मिलेगा, जो आवंटित मात्रा का कम से कम 70 फीसदी निर्यात 30 जून 2026 तक पूरा करेंगी। चीनी के कोटा का आवंटन आनुपातिक आधार पर किया जाएगा और इसे किसी अन्य मिल के साथ बदला या स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से गेहूं और चीनी दोनों के निर्यात में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश में उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे किसानों की आय को मजबूती और कृषि बाजारों में स्थिरता आएगी।

चालू तेल वर्ष की पहली तिमाही में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले तीन महीनों नवंबर-25 एवं जनवरी-26 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2 फीसदी कम होकर 3,960,102 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 4,046,423 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जनवरी 2026 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 20 फीसदी बढ़कर 1,339,375 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी में इनका आयात 1,119,893 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,311,847 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 27,528 टन का हुआ है।

जनवरी 2026 में खाद्य तेलों का आयात थोड़ा कम होकर 13.12 लाख टन का रह गया, जबकि दिसंबर 2025 में 13.62 लाख टन का था। हालांकि, जनवरी 2026 में आयात 20 फीसदी बढ़कर 13.39 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल यह 11.20 लाख टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) के दौरान पाम तेल का आयात 18 फीसदी बढ़कर 19.08 लाख टन का हो गया, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान इनका आयात 16.22 लाख टन का हुआ था। पहली फरवरी, 2026 को पाम तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 4.53 लाख टन से बढ़कर 4.86 लाख टन का बताया गया, जो पिछले महीनों से 33,000 टन ज्यादा है।

पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) में क्रूड सोया तेल का आयात 9 फीसदी घटकर 12.03 लाख टन का रह गया, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान 12.72 लाख टन का आयात हुआ था। 1 फरवरी, 2026 को सोया तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 1.90 लाख टन का है, जबकि पिछले महीनों में यह 3.00 लाख टन था, जो कि 1.10 लाख टन कम है।

पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) में क्रूड सनफ्लावर तेल का आयात 15 फीसदी घटकर 7.59 लाख टन का ही हुआ है, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान इसका आयात 8.94 लाख टन का हुआ था। 1 फरवरी, 2026 को सनफ्लावर तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 1.85 लाख टन बताया गया, जबकि पिछले महीनों में यह 2.00 लाख टन था, जो कि 15,000 टन कम है।

नवंबर 2025 के दौरान, नेपाल ने लगभग 54,000 टन रिफाइंड तेल का निर्यात किया, जिसमें 47,639 टन रिफाइंड सोया तेल, 3,022 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल और 2,484 टन आरबीडी पामोलिन शामिल थे। दिसंबर 2025 में, नेपाल ने, भारत को लगभग 48,000 टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोया तेल और थोड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल और आरबीडी पामोलिन शामिल थे।

एसईए के अनुसार नवंबर’25-जनवरी’26 के दौरान, 617,837 टन के मुकाबले सिर्फ़ 60,445 टन रिफाइंड तेल के आयात किया गया और नवंबर’24-जनवरी’25 के 3,303,867 टन के मुकाबले 3,818,252 टन क्रूड तेल का आयात किया गया। अत: रिफाइंड तेल का रेश्यो इस दौरान 16 फीसदी से घटकर 2 फीसदी रह गया, जबकि क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण क्रूड तेल का रेश्यो 84 फीसदी से बढ़कर 98 फीसदी हो गया।

जनवरी में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भारतीय बंदरगाह पर तेजी का रुख रहा। जनवरी में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,079 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 1,058 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर जनवरी में बढ़कर 1,119 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 1,094 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोया तेल का भाव दिसंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1,188 डॉलर प्रति टन था, जोकि जनवरी में बढ़कर 1,220 डॉलर प्रति टन का हो गया।

जनवरी अंत तक उत्पादक मंडियों में 220 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की आवक - सीएआई

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2025-26 में जनवरी अंत तक उत्पादक राज्यों की मंडियों में 220.58 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो की आवक हो चुकी है।


देश में कॉटन का उत्पादन 317 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि इसके पहले के अनुमान के बराबर ही है। मालूम हो कि उद्योग ने दिसंबर 2025 में 309.50 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान जारी किया था, जोकि आरंभिक अनुमान से 4.50 लाख गांठ ज्यादा था।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन में 50 लाख गांठ कॉटन के आयात का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 41 लाख गांठ से 9 लाख गांठ ज्यादा है। चालू फसल सीजन के पहले चार महीनों में जनवरी अंत तक 35 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुकी है।

चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान देश से 15 लाख गांठ कॉटन के निर्यात का अनुमान है, जबकि चालू फसल सीजन के पहले चार महीनों में जनवरी अंत देश से 6 लाख गांठ कॉटन का निर्यात हो चुका है।

सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन 2025-26 में देश में 317 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन का कुल उत्पादन 30.50 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें पंजाब की हिस्सेदारी 2 लाख गांठ, हरियाणा की 7 लाख गांठ के अलावा अपर राजस्थान में 12.50 लाख गांठ के अलावा लोअर राजस्थान में 9 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

मध्य भारत के राज्यों में कॉटन का उत्पादन 187 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें गुजरात की हिस्सेदारी 75 लाख गांठ तथा महाराष्ट्र की 94 लाख गांठ के अलावा मध्य प्रदेश की 18 लाख गांठ है।

दक्षिण भारत के राज्यों में चालू फसल सीजन में 94 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। इसमें तेलंगाना की हिस्सेदारी 45 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश 17 लाख गांठ के अलावा कर्नाटक 27 लाख गांठ तथा तमिलनाडु में 5 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

अन्य राज्यों में ओडिशा में चालू सीजन में 3.50 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

एसएआई के अनुसार चालू फसल सीजन के आरंभ में 60.59 लाख गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ था जबकि 317 लाख गांठ का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस दौरान 50 लाख गांठ आयातित कॉटन आयेगी। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता 427.59 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल खपत 305 लाख गांठ की होने का अनुमान है, इसके अलावा 15 लाख गांठ का निर्यात हो जायेगा। अत: क्लोजिंग स्टॉक 107.59 लाख गांठ का बैठेगा। सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी एवं जिनर्स के साथ ही व्यापारियों एवं निर्यातकों के पास 131.17 लाख गांठ कॉटन का स्टॉक है। 

सीसीआई ने बिनौले की बिक्री कीमतों में कटौती की, हाजिर बाजार में इसके भाव पर दबाव

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने सोमवार को बिनौले की बिक्री कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की। इससे हाजिर बाजार में भी इसकी कीमतों पर दबाव देखा गया।


सीसीआई ने सोमवार को 3 ई नीलामी के माध्यम से 6,89,300 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की तथा बिक्री केंद्रों पर इसकी कीमतों में कटौती की। सीसीआई द्वारा बिनौले के बिक्री दाम घटाने से हाजिर बाजार में इसकी कीमतों में 75 से 100 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आया।

तेल मिलों की खरीद कमजोर होने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में बिनौले की कीमत 100 रुपये कमजोर हुई। हरियाणा में बिनौले के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 3,800 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान राजस्थान में बिनौला के भाव 100 रुपये घटकर 3,850 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। बिनौला के दाम में पंजाब में 100 रुपये का मंदा आकर भाव 3,875 से 3,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मध्य प्रदेश में बिनौले के बिक्री दाम 75 रुपये कमजोर होकर 3,500 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

पशु आहार वालों की मांग कमजोर होने से कपास खली की कीमतों में भी मंदा आया। सेलू में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली की कीमत 90 रुपये कमजोर होकर 3,680 रुपये प्रति क्विंटल स्थिर रह गई। इस दौरान भोकर में रेगुलर कपास खली की कीमतों में 100 रुपये का मंदा आकर भाव 3,670 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। शाहपुर में रेगुलर कपास खली के भाव 90 रुपये कमजोर होकर 3,680 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरा बीड में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के दाम कमजोर होकर 3,650 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

व्यापारियों के अनुसार प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास बिनौले का स्टॉक कम है। चालू फसल सीजन 2025-26 में सीसीआई समर्थन मूल्य पर 89 लाख गांठ कॉटन की खरीद कर चुकी है जिस कारण बिनौले का निगम के पास बंपर स्टॉक है। निगम लगातार घरेलू बाजार में बिनौले की बिक्री कर रही है। अत: हाजिर बाजार में बिनौले के साथ ही कपास खली के भाव में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री भाव पर ही निर्भर कर रही है।

09 फ़रवरी 2026

महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 35 फीसदी बढ़कर 80.63 लाख टन के पार पहुंचा



नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 4 फरवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 35 फीसदी बढ़कर 80.63 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 59.81 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

शुगर कमिश्नर के अनुसार 4 जनवरी तक राज्य में 870.29 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 80.63 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.27 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 4 फरवरी तक कुल 199 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में भी 199 चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 657.6 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 59.81 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 9.1 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 187.24 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 20.29 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.84 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं। इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 197.45 लाख टन गन्ने की पेराई कर 18.92 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.58 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 47 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 30 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 186.23 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 15.57 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.37 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट में पेराई चल रही हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 108.22 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 9.54 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.82 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) में पेराई चल रही है तथा उन्होंने 85.29 लाख टन गन्ने की पेराई कर 6.72 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.88 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 20 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 94.91 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.65 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.12 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 1.41 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

दालों में आत्मनिर्भर भारत, मध्य प्रदेश के सिहोर में होगी नेशनल प्लसेस कॉन्फ्रेंस

सिहोर/नई दिल्ली। देश को दालों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को गति देने के लिए शनिवार, 7 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के आमला स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (फूड लेग्यूम रिसर्च प्लेटफार्म – एफएलआरपी) में राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री भी शामिल होंगे।


यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआरडीए) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत 7 फरवरी को सुबह पौधारोपण से होगी। तत्पश्चात, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह खेतों में उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं दलहन की नई किस्मों के प्रदर्शन का अवलोकन करेंगे और किसानों से संवाद करेंगे। वे यहां प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र और पादप जीनोमिक्स, ऊतक संवर्धन, प्रजनन एवं रोग विज्ञान से संबंधित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन भी करेंगे। साथ ही, दलहन के उन्नत बीज, उत्पाद एवं तकनीक से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद “दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन” पर राष्ट्रीय परामर्श शुरू होगा। इस अवसर पर "पल्सेस मिशन पोर्टल” भी लांच होगा और प्रगतिशील किसानों को उन्नत किस्मों के बीजों का प्रतीकात्मक वितरण किया जाएगा।

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान देश में दालों के उत्पादन, एमएसपी, बीज प्रणाली, वैल्यू चेन और किसानों की आय में वृद्धि से जुड़ी सरकार की रणनीति पर विस्तृत संबोधन देंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा।

इस राष्ट्रीय परामर्श में ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री भाग लेंगे, वहीं पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़ेंगे।

आईसीएआर और आईसीएआरडीए के शीर्ष वैज्ञानिक, नेफेड–एनसीसीएफ, राष्ट्रीय बीज निगम, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी संस्थाएँ, बीज व प्रसंस्करण क्षेत्र के साथी और प्लांट–बेस्ड फूड सेक्टर के प्रतिनिधि एक प्लेटफ़ॉर्म पर बैठकर नई किस्मों, बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन, मशीनीकरण, वैल्यू एडिशन और बाजार से जुड़ाव की ठोस रणनीति पर विचार–विमर्श करेंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण मिशन का लक्ष्य है कि भारत दालों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने, आयात पर निर्भरता कम हो और किसानों को अच्छी उपज के साथ उचित दाम भी सुनिश्चित हो। इस राष्ट्रीय परामर्श में अरहर, उड़द, मसूर जैसी प्रमुख दलहनी फसलों पर विशेष ध्यान देते हुए बीज, उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण, विपणन और एमएसपी पर समयबद्ध खरीद जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, ताकि खेत से थाली तक पूरी दलहन वैल्यू चेन मजबूत हो सके।

यह राष्ट्रीय परामर्श केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करेगा तथा विभिन्न हितधारकों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर भविष्य की स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार करने में मदद करेगा।

शिवराज सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि इस पहल से न केवल दलहन क्षेत्र को नई दिशा मिले, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और दालों में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने में भी ऐतिहासिक योगदान हो।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश के किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित - केंद्रीय कृषि मंत्री

नई दिल्ली। भारत एवं अमेरिका व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और गरिमा का एक नया उदाहरण है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि यह समझौता “भारतीय किसानों के हितों” की रक्षा के लिए पूरी सावधानी के साथ किया गया है। भारत तथा अमेरिका व्यापार समझौते से अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो जाएगा, जबकि वाशिंगटन ने दावा किया है कि यह समझौता उसे नई दिल्ली को अधिक कृषि उत्पाद निर्यात करने में मदद करेगा।


केंद्रीय कृषि मंत्री के अनुसार प्रमुख कृषि क्षेत्र जिसमें मुख्य फसलें और डेयरी शामिल हैं, इनका हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसी भी तरह से घरेलू कृषि हितों से समझौता नहीं करता है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और गरिमा का एक नया उदाहरण है। हम संतुलित और मजबूत बातचीत में विश्वास करते हैं, संघर्ष में नहीं।किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है। किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हमारे मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें और बाजरा सभी सुरक्षित हैं। साथ ही हमारे डेयरी उत्पाद भी सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, खासकर टैरिफ में कमी के माध्यम से, जिसका किसानों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। टैरिफ में कमी से हमारा निर्यात बढ़ेगा। जब कपड़ा निर्यात बढ़ेगा, तो कपास किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि हमारी सभी मुख्य फसलें और डेयरी सेक्टर सुरक्षित हैं। यह डील किसानों की भलाई और देश के हितों को ध्यान में रखकर की गई है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने बाजार इस तरह से नहीं खोले हैं कि इससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो।