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29 मार्च 2026

फरवरी में कैस्टर तेल का निर्यात 23 फीसदी फीसदी से ज्यादा घटा - एसईए

नई दिल्ली। फरवरी में देश से कैस्टर तेल का निर्यात 23.48 फीसदी घटकर 44,448 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल फरवरी में इसका निर्यात 58,092 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से फरवरी में कैस्टर तेल का निर्यात 606.80 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जो कि पिछले साल फरवरी के 790.01 करोड़ रुपये की तुलना में कम है।

एसईए के अनुसार चालू वर्ष 2026 के पहले दो महीनों जनवरी से फरवरी के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 87,686 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 111,018 टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वर्ष 2026 के जनवरी से फरवरी के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 1,212,45 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि के दौरान मूल्य के हिसाब से कैस्टर तेल का निर्यात 1,504.2 करोड़ रुपये का हुआ था।

गुजरात के राजकोट में शनिवार को कैस्टर सीड के भाव 6,300 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक 1 से 1.10 लाख बोरी, एक बोरी 75 किलो की हो रही है। हजार बोरियों, एक बोरी 75 किलो की हुई। राजकोट में कैस्टर तेल एफएसजी के दाम 1,345 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए।

व्यापारियों के अनुसार मार्च क्लोजिंग के कारण व्यापार कर कम हो रहा है। अगले महीने उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी होगी, जिससे मौजूदा कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ सकती है।

कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2025-26 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 16.96 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान 17.86 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

सीसीआई ने कॉटन के बिक्री दाम 300 रुपये बढ़ाए, हाजिर बाजार भाव हुए तेज

नई दिल्ली। सीसीआई द्वारा कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी करने से शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा।


कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने शुक्रवार को 3,41,000 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री। इस दौरान स्पिनिंग मिलों ने 1,37,000 गांठ एवं व्यापारियों ने 2,04,000 गांठ कॉटन की खरीद की। निगम ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 300 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 250 रुपये तेज होकर 56,300 से 56,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,650 से 5,840 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,500 से 5,670 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,490 से 5,850 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,100 से 54,100 रुपये कैंडी बोले गए।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 23 रुपये तेज होकर 1,560 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख रहा।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम तेज हो गए। व्यापारियों के अनुसार, सीसीआई ने चालू सप्ताह में लगातार दूसरी बार कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की है। उधर विश्व बाजार में भी हाल ही में कॉटन के दाम तेज हुए है, इसलिए हाजिर बाजार में इसकी कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है। घरेलू बाजार में अधिकांश स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जबकि यार्न में स्थानीय एवं निर्यात मांग अच्छी है।

सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है तथा निगम के पास कॉटन का भारी, भरकम स्टॉक है अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान तो ज्यादा है ही, साथ ही आयात भी बढ़ेगा, हालांकि मौजूदा भाव में जिनर्स की बिकवाली कम आ रही है।

केंद्र सरकार ने अप्रैल के लिए 23 लाख टन चीनी कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अप्रैल के लिए 23 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है, जोकि मार्च 2026 में जारी किए गए 22.50 लाख टन से ज्यादा है लेकिन पिछले साल अप्रैल 2025 जारी कोटे की तुलना में कम है।


केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के लिए 23 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया है, जोकि अप्रैल 2025 की तुलना में जारी किए गए 23.5 लाख टन की तुलना में 50 हजार टन कम है।

व्यापारियों के अनुसार गर्मियों के मौसम में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अप्रैल 2026 के लिए मार्च 2026 की की तुलना में चीनी का कोटा बढ़ाया है। आमतौर पर अप्रैल और मई में चीनी की मांग पीक पर होती है। अत: माना जा रहा है कि 23 लाख टन का कोटा जारी के बाद बाजार में इसके दाम सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है।

देश में जल्द ही चीनी मिलों का पेराई सीजन खत्म होने की संभावना है, इसलिए सरकार चीनी आपूर्ति की स्थिति पर सावधानीपूर्वक नजर बनाए हुए है।

विश्व बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़त जारी है तथा इसके दाम पांच महीने के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गए हैं। अत: घरेलू बाजार से चीनी के निर्यात में पड़ते लग रहे हैं। विश्व बाजार में दाम तेज होने के साथ ही रुपया कमजोर होने कारण चीनी के निर्यात में पड़ते लग रहे हैं, तथा हाल ही में करीब एक लाख टन के निर्यात सौदे हुए हैं। अगले महीने गर्मी का सीजन शुरू होने के बाद चीनी की घरेलू मांग भी बढ़ने की उम्मीद है।

घरेलू बाजार में दिल्ली में बुधवार को चीनी की थोक दाम 4,300 रुपये, कानपुर में 4,330 रुपये और मुंबई में 4,070 रुपये तथा कोलकाता में 4,280 रुपये प्रति क्विंटल रहे। दिल्ली में चीनी के खुदरा भाव इस दौरान 45 रुपये तथा कानपुर में 45 रुपये और मुंबई में 44 रुपये तथा कोलकाता में 45 रुपये प्रति किलो बोले गए। 

समर में धान की रोपाई के साथ तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई कम - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 में फसलों की कुल बुआई में पिछले साल की तुलना में 2.31 फीसदी कमी आई है। इस दौरान दलहन की बुआई बढ़ी है, जबकि धान की रोपाई के साथ मोटे अनाज एवं तिलहन की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 20 मार्च 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई घटकर 42.68 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 43.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में घटकर केवल 27.86 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई 28.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 4.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 3.47 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 2.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.18 हजार हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है। इस दौरान उड़द की बुआई 1.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि के 1.14 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में घटकर 6.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 6.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इस दौरान समर मक्का की बुआई 4.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। इस दौरान ज्वार की बुआई 20 हजार हेक्टेयर, बाजरा की 1.38 लाख हेक्टेयर तथा रागी की 20 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई घटकर 4.69 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 4.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 2.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 2.97 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर की 32 हजार हेक्टेयर में और शीशम सीड की बुआई 1.35 लाख हेक्टेयर हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 28 हजार हेक्टेयर और 1.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में दलहन आयात 18 फीसदी से ज्यादा घटा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दस महीनों अप्रैल 25 से जनवरी 26 के दौरान दलहन का आयात 18.50 फीसदी कमजोर होकर 48.99 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 60.11 लाख टन का हुआ था। इस दौरान जहां पीली मटर, मसूर और चना के आयात में कमी आई है, वहीं अरहर एवं उड़द के आयात में बढ़ोतरी हुई है।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल 25 से जनवरी 26 के दौरान पीली मटर का आयात 49 फीसदी घटकर 10.01 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 19.61 लाख टन का हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2025-26 के के पहले दस महीनों के दौरान चना का आयात 20 फीसदी घटकर 6.88 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 8.64 लाख टन का हुआ था।

मसूर का आयात चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी के दौरान 24 फीसदी घटकर 7.37 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 9.67 लाख टन का हुआ था।

अरहर का आयात चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में 15.56 फीसदी बढ़कर 13.54 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 11.71 लाख टन का ही हुआ था। इसी तरह से उड़द का आयात चालू वित्त वर्ष के अप्रैल 25 से जनवरी 26 के दौरान 35.38 फीसदी बढ़कर 9.04 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका आयात केवल 6.68 लाख टन का ही हुआ था।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार दलहन आयात की मौजूदा पॉलिसी में बदलाव नहीं करेगी। सरकार आमतौर पर नए वित्त वर्ष से पहले दालों की आयात नीति का रिव्यू करती है, और मौजूदा पॉलिसी 31 मार्च 2026 को खत्म होने वाली है। इस समय अरहर, चना और उड़द का आयात ड्यूटी फ्री है, जबकि मसूर के आयात पर 10 फीसदी और पीली मटर पर 30 फीसदी ड्यूटी लगती है। मूंग का आयात 2022 से ही बंद है।

केंद्रीय पूल में दलहन का 22 लाख टन का स्टॉक है जोकि तय मानकों 35 लाख टन की तुलना में कम है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार चालू रबी में चना एवं मसूर की समर्थन मूल्य पर खरीद बढ़ाकर बफर स्टॉक में दलहन के स्टॉक को बढ़ा सकती है।

देश में दलहन की सालाना खपत करीब 280 लाख टन की होती है, अत: हमें हर साल करीब 55 से 60 लाख टन दलहन का आयात करना पड़ता है। फसल सीजन 2025-26 के दौरान देश में 238.69 लाख टन दलहन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि फसल सीजन 2024-25 के 256.83 लाख टन की तुलना में कम है।

सीसीआई ने चालू सप्ताह में 956,300 गांठ कॉटन की बिक्री की, हाजिर बाजार में दाम नरम

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने चालू सप्ताह में 16 से 20 मार्च के दौरान फसल सीजन 2025-26 की खरीदी हुई 956,300 गांठ कॉटन की बिक्री की। स्पिनिंग मिलों की मांग नरम होने से शनिवार को कॉटन की कीमतों में नरमी आई।


स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने के कारण शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन की कीमतों में नरमी आई।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 50 रुपये नरम होकर 55,800 से 56,100 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,500 से 5,690 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,350 से 5,500 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,350 से 5,700 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 52,000 से 53,000 रुपये कैंडी बोले गए।

गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में नरमी आई। व्यापारियों के अनुसार सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार कॉटन बेच रही है तथा निगम के पास कॉटन का भारी, भरकम स्टॉक है। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान तो ज्यादा है ही, साथ ही आयात भी बढ़ेगा, हालांकि मौजूदा भाव में जिनर्स की बिकवाली कम आ रही है। इसलिए अभी कॉटन की कीमतों में सीमित घटबढ़ बनी रह सकती है।

अमेरिका, इजरायल एवं ईरान युद्ध की वजह से मैन मेड फाइबर की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि हाल ही में क्रूड ऑयल की कीमतें में तेजी आई हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि इसका असर नेचुरल फाइबर की मांग पर पड़ेगा। क्रूड ऑयल के बढ़ने से हाल ही के दिनों में पॉलिएस्टर फाइबर की कीमत 10-25 फीसदी तक बढ़ गई हैं। ऐसे में उद्योग को उम्मीद है कि सितंबर में खत्म होने वाले मौजूदा सीजन 2025-26 के दौरान कॉटन की खपत जनवरी में लगाए गए अनुमानों की तुलना में 10 लाख लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो तक बढ़ जाएगी। इस समय भारतीय कॉटन सबसे सस्ती है।

21 मार्च 2026

महाराष्ट्र में 85 फीसदी चीनी मिलों में पेराई बंद, केवल 28 मिलें ही चल रही हैं

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) के दौरान 18 मार्च महाराष्ट्र की 85 फीसदी से अधिक मिलों ने गन्ने की कमी के कारण पेराई कार्य बंद कर दिया है तथा अब केवल 28 मिलों में ही पेराई चल रही है।


महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार बेमौसम बारिश से गन्ने की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे चालू सीजन में गन्ने का उत्पादन और मिलों को आपूर्ति प्रभावित हुई है। 18 मार्च तक राज्य की मिलों ने केवल 837.31 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 1,029.98 लाख टन थी। इसी तरह से चालू पेराई सीजन में चीनी की रिकवरी दर भी घटकर 9.45 फीसदी की बैठी है, जो पिछले साल के 10.16 फीसदी से कम है।

चालू सीजन में कुल 202 चीनी मिलों में से 85 फीसदी से अधिक चीनी मिलों ने गन्ने की कमी के कारण पेराई कार्य बंद कर दिया है। इस समय केवल 28 मिलों में ही पेराई जारी है। राज्य की लगभग 172 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई पूरी कर ली है। इनमें सोलापुर की 45, कोल्हापुर की 40, पुणे की 24, नांदेड़ की 24, छत्रपति संभाजीनगर की 18, अहिल्यानगर की 20 और अमरावती क्षेत्र की 1 मिल शामिल है। पिछले सीजन में की समान अवधि में केवल 103 चीनी मिलों ने पेराई समाप्त की थी।

इस सीजन में गन्ने की कमी के कारण समय से पहले पेराई बंद होने और आने वाले खरीफ मौसम में सूखे जैसी स्थिति की आशंका के चलते महाराष्ट्र के चीनी उद्योग की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। जानकारों के अनुसार यदि एल नीनो के कारण महाराष्ट्र में सूखा पड़ता है, तो फिर सरकार को गन्ने की खेती को हतोत्साहित करने का निर्णय लेना पड़ सकता है, क्योंकि यह अत्यधिक पानी की खपत वाली फसल है। इसके बजाय कृषि अनुसंधान विश्वविद्यालयों की मदद से किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सूखे की स्थिति में कम पानी वाली फसलें जैसे मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों पर जोर दिया जाएगा।