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21 फ़रवरी 2026

महाराष्ट्र में एफआरपी भुगतान के देरी पर मिलों को 15 फीसदी ब्याज देना होगा - चीनी आयुक्त

पुणे, महाराष्ट्र। राज्य में चीनी का पेराई सीजन अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है और शुगर कमिश्नरेट ने किसानों को उनके गन्ने के बकाया भुगतान के लिए शुगर फैक्ट्रियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुगर कमिश्नर डॉ. संजय कोलते ने पिछले हफ्ते हुई सुनवाई के दौरान मिलों को चेतावनी दी थी कि, शुगर फैक्ट्रियों द्वारा एफआरपी भुगतान में अगर देरी होती है तो उन्हें किसानों को 15 फीसदी ब्याज देना होगा। हालांकि, कुछ फैक्ट्रियों ने कहा कि एग्रीमेंट के मुताबिक किसानों को एफआरपी का भुगतान किया जा रही है।


राज्य की जिन मिलों ने किसानों को एफआरपी का 60 फीसदी से कम पेमेंट किया है, उन 45 शुगर फैक्ट्रियों की सुनवाई 17 और 18 फरवरी को शुगर कमिश्नरेट कार्यालय में हुई। डॉ. कोलते ने कहा कि जैसे ही कमिश्नरेट ने फैक्ट्रियों को बकाया एफआरपी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया, कुछ फैक्ट्रियों ने बकाया रकम का भुगतान कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर मिलें, इसके लिए हमारी कोशिशें जारी हैं।

शुगर कमिश्नरेट की तरफ से 18 फरवरी को जारी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की 157 चीनी मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक गन्ना किसानों को 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी का भुगतान कर दिया है। शुगर कमिश्नरेट की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पेराई कर रही 206 चीनी मिलों में से 157 चीनी मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक पूरा एफआरपी का भुगतान नहीं किया है तथा इस दौरान केवल 49 मिलों ने ही 100 फीसदी एफआरपी का भुगतान किया है। 31 जनवरी तक राज्य की चीनी मिलों ने 870.11 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

इस गन्ने के लिए (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) कुल एफआरपी 33,697 करोड़ रुपये होता है। इसमें से 29,382 करोड़ रुपये (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) का भुगतान किसानों को किया जा चुका हैं तथा 49 फैक्ट्रियों ने 100 फीसदी एफआरपी का भुगतान कर दिया है। 58 फैक्ट्रियों ने 80 से 99.99 फीसदी एफआरपी का भुगतान किसानों को किया है। 58 फैक्ट्रियों ने 60 से 79.99 फीसदी एफआरपी किसानों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है। 41 फैक्ट्रियों ने 60 परसेंट से कम एफआरपी अभी तक किसानों को दिया है। अत: राज्य की गन्ना मिलों पर 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी अभी बकाया है।

चालू समर सीजन के शुरूआती चरण में फसलों की कुल बुआई 2.19 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 के शुरूआती चरण में फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 2.19 फीसदी आगे चल रही है, हालांकि इस दौरान धान की रोपाई 2.73 फीसदी पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 13 फरवरी 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई बढ़कर 15.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 14.75 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में घटकर 12.80 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 13.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 0.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 0.50 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 44 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के लगभग बराबर है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में बढ़कर 82 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 50 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान समर मक्का की बुआई 63 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 48 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 99 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 59 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 87 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 49 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर और शीशम सीड की बुआई शुरू हो चुकी है। 

मध्य फरवरी तक चीनी का उत्पादन 14 फीसदी बढ़कर 225 लाख टन के पार - एनएफसीएसएफ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 14 फरवरी तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 13.90 फीसदी बढ़कर 225.30 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 197.80 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। देशभर के राज्यों में अब तक तकरीबन 80 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है।


नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के आकड़ों के अनुसार 14 फरवरी 2026 तक 454 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जबकि सीजन में कुल 534 मिलों में पेराई हो रही थी। अत: तक 80 मिलें पेराई बंद कर चुकी है। चालू सीजन में देशभर की चीनी मिलों ने अब तक 2419.59 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी की दर पिछले पेराई सीजन की तुलना में ज्यादा आई है। चालू सीजन में अब तक औसत चीनी की रिकवरी की दर 9.31 फीसदी की बैठी है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में औसत चीनी रिकवरी की दर 9.09 फीसदी बैठी थी।

पेराई सीजन 2024-25 के दौरान देशभर में 532 चीनी मिलों ने पेराई में हिस्सा लिया था और 14 फरवरी 2025 तक 75 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी थी तथा इस दौरान चीनी मिलों द्वारा 2176.97 लाख टन गन्ना पेराई कर 197.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

चीनी उत्पादन के मामलें में महाराष्ट्र सबसे आगे है और उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है। एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 14 फरवरी तक 89.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में इस दौरान 65.60 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है। तीसरे नंबर पर कर्नाटक है।कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 14 फरवरी तक 41.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।

सोमवार को दिल्ली में एम ग्रेड चीनी के थोक दाम 4,370 रुपये और कानपुर में 4,400 रुपये तथा मुंबई में 4,120 रुपये तथा कोलकाता में 4,380 रुपये प्रति क्विंटल रहे। इस दौरान दिल्ली में चीनी के रिटेल भाव 46 रुपये और कानपुर में 45 रुपये तथा मुंबई और कोलकाता में क्रमश: 45-45 रुपये प्रति किलो बोले गए।

सीसीआई ने 28,800 गांठ कॉटन की बिक्री की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 9 फरवरी से 13 फरवरी के बीच फसल सीजन 2025-26 के दौरान खरीदी हुई 28,800 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की।  निगम ने अपनी बिक्री को बढ़ावा देने के लिए 2025-26 की कॉटन की कीमत में 1,400-1,700 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की कटौती की है।


स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसकी कीमत स्थिर हो गई।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 100 रुपये तेज होकर 54,000 से 54,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए। पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,270 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,150 से 5,280 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,300 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,000 से 51,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 93,700 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात में कॉटन की कीमतों में सुधार, लेकिन इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार अमेरिका एवं बांग्लादेश के बीच हुई ट्रेड डील के बाद घरेलू मिलें जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है।

घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। इसलिए अधिकांश मिलें इन्वेंट्री नहीं बढ़ाना चाहती। चालू सीजन में कॉटन का आयात भी रिकॉर्ड होने का अनुमान है। सीसीआई लगातार घरेलू बाजार में कॉटन की बिकवाली कर रही है तथा चालू सीजन में सीसीआई ने 89 लाख गांठ के करीब कॉटन की खरीद की है। ऐसे में कॉटन की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है।

14 फ़रवरी 2026

केंद्र ने 30 लाख टन गेहूं एवं गेहूं उत्पादों के साथ 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 13 फरवरी। केंद्र सरकार ने देश में गेहूं और चीनी के जरुरत से ज्यादा स्टॉक को हल्का करने और इनकी कीमतों में स्थिरता को ध्यान में रखते हुए 25 लाख टन गेहूं के साथ-साथ 5 लाख टन गेहूं उत्पादों एवं पांच लाख टन चीनी के और निर्यात को मंजूरी दी है।


केंद्र सरकार ने गेहूं और चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। सरकार ने 25 लाख टन गेहूं, 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। यह निर्णय घरेलू बाजार की उपलब्ध स्टॉक और कीमतों के व्यापक आकलन के बाद लिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्यात की इस अनुमति से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के केंद्रीय भंडार में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। वहीं, निजी संस्थाओं के पास 2025-26 के दौरान लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 32 लाख टन अधिक है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर का हो गया है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मजबूत खरीद तंत्र पर किसानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है और आने वाले समय में बेहतर उत्पादन की संभावना को मजबूत करता है। अधिक स्टॉक, कीमतों में नरमी और फसल आवक के चरम समय में मजबूरी में बिक्री को रोकने के उद्देश्य से सरकार ने गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। इससे घरेलू बाजार में कीमतों की स्थिरता, स्टॉक रोटेशन में सुधार और किसानों को बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी।

चीनी निर्यात को भी मिली अतिरिक्त मंजूरी

केंद्र सरकार ने चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का भी फैसला किया है। इससे पहले नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई थी। सरकारी आदेश के अनुसार, अतिरिक्त चीनी का निर्यात कोटा उन्हीं मिलों को मिलेगा, जो आवंटित मात्रा का कम से कम 70 फीसदी निर्यात 30 जून 2026 तक पूरा करेंगी। चीनी के कोटा का आवंटन आनुपातिक आधार पर किया जाएगा और इसे किसी अन्य मिल के साथ बदला या स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से गेहूं और चीनी दोनों के निर्यात में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश में उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे किसानों की आय को मजबूती और कृषि बाजारों में स्थिरता आएगी।

चालू तेल वर्ष की पहली तिमाही में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले तीन महीनों नवंबर-25 एवं जनवरी-26 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2 फीसदी कम होकर 3,960,102 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 4,046,423 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जनवरी 2026 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 20 फीसदी बढ़कर 1,339,375 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी में इनका आयात 1,119,893 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,311,847 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 27,528 टन का हुआ है।

जनवरी 2026 में खाद्य तेलों का आयात थोड़ा कम होकर 13.12 लाख टन का रह गया, जबकि दिसंबर 2025 में 13.62 लाख टन का था। हालांकि, जनवरी 2026 में आयात 20 फीसदी बढ़कर 13.39 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल यह 11.20 लाख टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) के दौरान पाम तेल का आयात 18 फीसदी बढ़कर 19.08 लाख टन का हो गया, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान इनका आयात 16.22 लाख टन का हुआ था। पहली फरवरी, 2026 को पाम तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 4.53 लाख टन से बढ़कर 4.86 लाख टन का बताया गया, जो पिछले महीनों से 33,000 टन ज्यादा है।

पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) में क्रूड सोया तेल का आयात 9 फीसदी घटकर 12.03 लाख टन का रह गया, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान 12.72 लाख टन का आयात हुआ था। 1 फरवरी, 2026 को सोया तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 1.90 लाख टन का है, जबकि पिछले महीनों में यह 3.00 लाख टन था, जो कि 1.10 लाख टन कम है।

पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) में क्रूड सनफ्लावर तेल का आयात 15 फीसदी घटकर 7.59 लाख टन का ही हुआ है, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान इसका आयात 8.94 लाख टन का हुआ था। 1 फरवरी, 2026 को सनफ्लावर तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 1.85 लाख टन बताया गया, जबकि पिछले महीनों में यह 2.00 लाख टन था, जो कि 15,000 टन कम है।

नवंबर 2025 के दौरान, नेपाल ने लगभग 54,000 टन रिफाइंड तेल का निर्यात किया, जिसमें 47,639 टन रिफाइंड सोया तेल, 3,022 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल और 2,484 टन आरबीडी पामोलिन शामिल थे। दिसंबर 2025 में, नेपाल ने, भारत को लगभग 48,000 टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोया तेल और थोड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल और आरबीडी पामोलिन शामिल थे।

एसईए के अनुसार नवंबर’25-जनवरी’26 के दौरान, 617,837 टन के मुकाबले सिर्फ़ 60,445 टन रिफाइंड तेल के आयात किया गया और नवंबर’24-जनवरी’25 के 3,303,867 टन के मुकाबले 3,818,252 टन क्रूड तेल का आयात किया गया। अत: रिफाइंड तेल का रेश्यो इस दौरान 16 फीसदी से घटकर 2 फीसदी रह गया, जबकि क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण क्रूड तेल का रेश्यो 84 फीसदी से बढ़कर 98 फीसदी हो गया।

जनवरी में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भारतीय बंदरगाह पर तेजी का रुख रहा। जनवरी में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,079 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 1,058 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर जनवरी में बढ़कर 1,119 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 1,094 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोया तेल का भाव दिसंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1,188 डॉलर प्रति टन था, जोकि जनवरी में बढ़कर 1,220 डॉलर प्रति टन का हो गया।

जनवरी अंत तक उत्पादक मंडियों में 220 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की आवक - सीएआई

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2025-26 में जनवरी अंत तक उत्पादक राज्यों की मंडियों में 220.58 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो की आवक हो चुकी है।


देश में कॉटन का उत्पादन 317 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि इसके पहले के अनुमान के बराबर ही है। मालूम हो कि उद्योग ने दिसंबर 2025 में 309.50 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान जारी किया था, जोकि आरंभिक अनुमान से 4.50 लाख गांठ ज्यादा था।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन में 50 लाख गांठ कॉटन के आयात का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 41 लाख गांठ से 9 लाख गांठ ज्यादा है। चालू फसल सीजन के पहले चार महीनों में जनवरी अंत तक 35 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुकी है।

चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान देश से 15 लाख गांठ कॉटन के निर्यात का अनुमान है, जबकि चालू फसल सीजन के पहले चार महीनों में जनवरी अंत देश से 6 लाख गांठ कॉटन का निर्यात हो चुका है।

सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन 2025-26 में देश में 317 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन का कुल उत्पादन 30.50 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें पंजाब की हिस्सेदारी 2 लाख गांठ, हरियाणा की 7 लाख गांठ के अलावा अपर राजस्थान में 12.50 लाख गांठ के अलावा लोअर राजस्थान में 9 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

मध्य भारत के राज्यों में कॉटन का उत्पादन 187 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें गुजरात की हिस्सेदारी 75 लाख गांठ तथा महाराष्ट्र की 94 लाख गांठ के अलावा मध्य प्रदेश की 18 लाख गांठ है।

दक्षिण भारत के राज्यों में चालू फसल सीजन में 94 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। इसमें तेलंगाना की हिस्सेदारी 45 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश 17 लाख गांठ के अलावा कर्नाटक 27 लाख गांठ तथा तमिलनाडु में 5 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

अन्य राज्यों में ओडिशा में चालू सीजन में 3.50 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

एसएआई के अनुसार चालू फसल सीजन के आरंभ में 60.59 लाख गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ था जबकि 317 लाख गांठ का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस दौरान 50 लाख गांठ आयातित कॉटन आयेगी। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता 427.59 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल खपत 305 लाख गांठ की होने का अनुमान है, इसके अलावा 15 लाख गांठ का निर्यात हो जायेगा। अत: क्लोजिंग स्टॉक 107.59 लाख गांठ का बैठेगा। सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी एवं जिनर्स के साथ ही व्यापारियों एवं निर्यातकों के पास 131.17 लाख गांठ कॉटन का स्टॉक है।