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21 मई 2026

सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 700 रुपये की कटौती की, हाजिर बाजार में दाम घटे

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने बुधवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की कटौती की। जिस कारण घरेलू बाजार में भी कॉटन की कीमतों में मंदा आया।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 200 रुपये कमजोर होकर 65,900 से 66,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 6,620 से 6,780 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव घटकर 6,440 से 6,480 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम नरम होकर 6,530 से 6,780 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 62,200 से 63,300 रुपये कैंडी बोले गए।

सीसीआई ने बुधवार की नीलामी के लिए कॉटन की बिक्री कीमतों में 700 रुपये प्रति कैंडी की कटौती की। एजेंसी ने बुधवार को केवल 1,500 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से मिलर्स ने 1,000 गांठ और ट्रेडर्स ने 500 गांठ की खरीद ही की। निगम अभी तक 70 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की बिक्री कर चुकी है, जबकि चालू सीजन सीजन में उसने कुल 105 लाख गांठ कॉटन की खरीद की थी।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत कमजोर हुई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। सीसीआई ने आज कॉटन की बिक्री कीमतों में कटौती की, तथा स्पिनिंग मिलों के साथ ही व्यापारियों की खरीद काफी कम हुई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास नहीं के बराबर है, जबकि सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। सीसीआई घरेलू बाजार में कॉटन की बिक्री किस दाम पर करेगी, इस पर इसकी कीमतों में तेजी, मंदी तय होगी।

खाद्य तेलों के आयात में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण नेपाल से ड्यूटी फ्री आयात - एसईए

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में खाद्य तेलों के आयात में 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसका प्रमुख कारण नेपाल से साफ्टा के तहत शुल्क मुक्त आयात को माना जा रहा है।  


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान देश में खाद्य तेलों का आयात 166.51 लाख टन का हुआ है, जोकि पिछले वित्त वर्ष   2024-25 की समान अवधि के मुकाबले 3 फीसदी बढ़ा है। इस दौरान विश्व बाजार में खाद्य तेलों की कीमत बढ़ी है, और डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

खाद्य तेलों के कुल आयात में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण साफ्टा के तहत नेपाल से आयात में भारी बढ़ोतरी थी, जिसके तहत नेपाल, भारत को रिफाइंड खाने के तेलों का निर्यात जीरो ड्यूटी के तहत करता है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान नेपाल ने भारत को 7.36 लाख टन खाद्य तेलों का निर्यात किया, जबकि पिछले साल यह सिर्फ 3.45 लाख टन था, यानी कि 113 फीसदी की भारी बढ़ोतरी। नेपाल से देश में हुए आयात में रिफाइंड सोया तेल का बड़ा हिस्सा था, साथ ही सूरजमुखी तेल, आरबीडी पामोलिन और रेपसीड तेल की थोड़ी मात्रा भी थी।

अगर साफ्टा के तहत नेपाल को जीरो-ड्यूटी निर्यात की सुविधा नहीं मिली होती, तो 2025-26 के दौरान भारत का कुल खाद्य तेलों का आयात घरेलू मांग बढ़ने के बावजूद पिछले साल के मुकाबले कम ही होता। नेपाल से रिफाइंड तेलों के ड्यूटी-फ्री आयात में बढ़ोतरी ने इस साल भारत के कुल खाने के तेल के आयात में हुई बढ़ोतरी में काफी योगदान दिया।

भारत अभी भी खाद्य तेल के आयात पर निर्भर है क्योंकि घरेलू उत्पादन कुल खपत की सिर्फ 40 फीसदी ही पूरी करता है। तिलहन की कम पैदावार, जोत का आकार छोटा होना, सिंचाई की अपर्याप्त सुविधाएँ और गेहूं और धान की खेती को लेकर पॉलिसी में प्राथमिकता घरेलू तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी को रोक रही है।

एसोसिएशन का मानना है कि खाद्य तेलों के आयात पर लंबे समय की निर्भरता कम करने और घरेलू खाद्य तेल सेक्टर में स्थिरता पैदा करने के लिए, देश में तिलहन का उत्पादन बढ़ाना होगा। उत्पादकता में सुधार और देश के अंदर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना जरूरी है। इस संदर्भ में, खाद्य तेलों की खपत कम करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील अहम हो जाती है, क्योंकि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ज्यादा खपत को कम करके आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा खर्च पर दबाव कम करने और बढ़ती ग्लोबल सप्लाई अनिश्चितताओं के बीच देश की लंबे समय की खाद्य तेलों की सुरक्षा में सुधार करने में मदद मिलेगी।