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04 जुलाई 2026

महाराष्ट्र ने एक बार फिर केंद्र से चीनी एमएसपी एवं एथेनॉल का कोटा बढ़ाने की मांग की

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर केंद्र से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) एवं एथेनॉल की कीमतों के साथ ही कोटा बढ़ाने की मांग की है। यह जानकारी राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील ने विधान परिषद में दी।


महाराष्ट्र सरकार राज्य के चीनी उद्योग की आर्थिक चुनौतियों को दूर करने के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी के साथ ही एथेनॉल की कीमत एवं इसके कोटा को बढ़ाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार से लगातार संपर्क बनाए हुए है।

बाबासाहेब पाटील के अनुसार राज्य में 200 से अधिक सहकारी और निजी चीनी मिलें संचालित हो रही हैं। वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में रिकॉर्ड स्तर पर चीनी उत्पादन हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा चीनी निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण चीनी उद्योग और गन्ना उत्पादक किसानों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

विधान परिषद में इस मुद्दे पर जवाब देते हुए सहकार मंत्री ने स्पष्ट किया कि, चीनी निर्यात नीति पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है। यदि यह प्रतिबंध आगे भी जारी रहता है तो इसका असर राज्य के चीनी उद्योग के साथ ही गन्ना उत्पादक किसानों और इससे जुड़ी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

मंत्री बाबासाहेब पाटील ने बताया कि, 24 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य के चीनी उद्योग की समस्याओं पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इसमें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए राज्य के प्रतिनिधिमंडल को केंद्र से सीधे बातचीत करने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि इससे पहले 27 मई 2026 को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह एवं सहकार मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बैठक में सहकारी चीनी मिलों की विभिन्न समस्याएं और मांगें जैसे की एमएसपी) में बढ़ोतरी के साथ ही एथेनॉल की कीमत एवं इसके कोटा को बढ़ाने की मांग उनके समक्ष रखी गई थी। सहकार मंत्री ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने इन मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।

चालू खरीफ में सोयाबीन की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ने का अनुमान - सोपा

नई दिल्ली। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ेगी। 30 जून तक देशभर के राज्यों में सोयाबीन की बुआई 28.92 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। हालांकि कृषि मंत्रालय के अनुसार अभी तक बुआई केवल 6.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है।


सोपा के अनुसार सरकार द्वारा जारी बुआई के आंकड़ों में 7 से 10 दिन का गैप होता है, यही वजह है कि कृषि मंत्रालय के बुआई के आंकड़े हमारे अनुमान से कम हैं। हमें उम्मीद है कि इस बार सोयाबीन का बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ेगी। कई किसान जिन्होंने पिछले साल मक्का की खेती की थी, वे इस साल सोयाबीन की अच्छी कीमतों की वजह से वापस सोयाबीन की खेती करेंगे। हालांकि ज्यादा बुआई बेशक अगले तीन महीनों में उत्पादक राज्यों में होने वाली बारिश के डिस्ट्रीब्यूशन पर निर्भर करेगी।

सोपा के अनुसार चालू खरीफ में दक्षिण पश्चिमी मानसून में देरी की वजह से पिछले साल के मुकाबले बुआई देर से शुरू हुई। हालांकि, मध्य प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश होने से, बुआई के कार्य में तेजी आई है और हमें उम्मीद है कि 15 जुलाई तक पूरे राज्य में बुआई हो जाएगी। महाराष्ट्र में मिट्टी में नमी की कमी की वजह से बुआई धीमी गति से चल रही है, लेकिन हमें उम्मीद है कि अगले दो सप्ताह में बुआई की गति में तेजी आयेगी। दूसरे बड़े उत्पादक राज्यों में बुआई ठीक-ठाक चल रही है।

राजस्थान में चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुआई तय एरिया का लगभग 35 से 40 फीसदी तक हो चुकी है।

महाराष्ट्र में चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन बुआई राज्यों में नमी के अनुसार चल रही है। कुछ जिलों में इसकी बुआई 40–50 फीसदी क्षेत्रफल कवर हो चुका है, जबकि दूसरों कई जिलों में अभी तक केवल 5–10 फीसदी ही बुआई हो पाई है। आगामी दिनों में इसकी बुआई की गति अच्छी बारिश पर निर्भर करेगी।