नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से सोमवार को गुजरात में कॉटन महंगी हो गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए।
सीसीआई ने 10 अगस्त, शुक्रवार को कॉटन के बिक्री भाव 700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो तक तेज किए थे। इस दौरान निगम ने 80,800 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 40,800 गांठ और ट्रेडर्स ने 40,000 गांठ कॉटन की खरीद की।
सीसीआई चालू फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई 91,17,600 गांठ कॉटन की बिक्री घरेलू बाजार में कर चुकी है तथा निगम के पास अब केवल 14 लाख गांठ से भी कम कॉटन बची हुई है।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 200 रुपये तेज होकर 67,700 से 678,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 6,750 से 6,900 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 6,575 से 6,600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 6,600 से 6,900 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 63,000 से 64,000 रुपये कैंडी बोले गए।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।
घरेलू बाजार में गुजरात में कॉटन के दाम तेज हुए, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में स्थिर हो गए। उधर प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है।
हालांकि केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।
घरेलू बाजार में प्राइवेट जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है, जिस कारण इनकी बिकवाली कम आ रही है।

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