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29 अगस्त 2026

विश्व बाजार में दाम तेज होने से उत्तर भारत में कॉटन महंगी, बिनौला के दाम घटे

नई दिल्ली। विश्व बाजार में कॉटन की कीमतों में आई तेजी से शुक्रवार को उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन महंगी हो गई है, हालांकि इस दौरान बिनौला की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।


पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 100 रुपये तेज होकर 6,900 से 7,050 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के 100 रुपये बढ़कर 6,750 से 6,850 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 100 रुपये तेज होकर 6,750 से 7,050 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 1,000 रुपये तेज होकर 65,000 से 66,000 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

आईसीई कॉटन वायदा में 27 अगस्त, गुरुवार को बड़ी तेजी आई थी, तथा इसके दाम तेज होकर 90 सेंट के लेवल से ऊपर चले गए, क्योंकि अमेरिका और चीन में फसल की खराब होती संभावनाओं, प्रतिकूल मौसम और अनाज बाजारों में मजबूती ने खरीदारी को बढ़ावा दिया था।

एक्टिव दिसंबर 2026 कॉटन कॉन्ट्रैक्ट 92.41 सेंट प्रति पाउंड पर सेटल हुआ, जो पिछले सेशन से 3.27 सेंट तेज हुआ, तथा इसके दाम 2024 की शुरुआत के बाद से सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। अगस्त में अब तक दिसंबर वायदा अनुबंध में कॉटन की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो इस बढ़ती चिंता को दिखाता है कि मौसम की वजह से पैदावार में कमी आने की आशंका है और विश्व स्तर पर इन्वेंट्री में कमी आ सकती है।

अमेरिका में फसल का खराब होना मुख्य तेजी का कारण बना हुआ है। हाल ही में अमेरिका के कपास की खेती वाले इलाकों के दौरे से पता चला कि बारिश की कमी से फसलों पर दबाव है, जबकि यूएसडीए की ताजा फसल प्रोग्रेस रिपोर्ट में दिखाया गया कि यूएस में कॉटन फसल की सिर्फ 37 फीसदी ही फसल को अच्छी रेटिंग दी गई है, जो एक साल पहले के 54 फीसदी से काफी कम है। कमजोर रेटिंग ने इस उम्मीद को और पक्का कर दिया कि पैदावार और उत्पादन पहले के अनुमानों से कम हो सकती हैं।

आईसीई कॉटन वायदा के भाव में गुरुवार को बड़ी तेजी दर्ज की गई थी। दिसंबर-26 वायदा अनुबंध में इसके दाम 3.27 सेंट तेज होकर 92.41 सेंट हो गए थे। मार्च-27 वायदा अनुबंध में इसके दाम 3.33 सेंट तेज होकर 94.4 सेंट हो गए। मई-27 वायदा अनुबंध में इसके दाम 3.25 सेंट बढ़कर 95.5 सेंट हो गए।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 21 अगस्त तक देशभर में कॉटन की बुआई थोड़ी कम होकर 108.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 108.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इसकी बुआई में सबसे ज्यादा कमी राजस्थान में 1.06 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर में तथा पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई है। हालांकि इसकी बुआई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी तेलंगाना में 1.32 लाख हेक्टेयर में, गुजरात में 0.67 लाख हेक्टेयर में तथा कर्नाटक में 0.14 लाख हेक्टेयर में देखी गई। कुल मिलाकर, कपास की बुआई में थोड़ी कमी मुख्य रूप से राजस्थान और हरियाणा में हुई बड़ी कमी की वजह से हुई है, जिसने तेलंगाना और गुजरात में हुई बढ़ोतरी को भी काफी हद तक कम कर दिया है।

जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। हालांकि नई फसल को देखते हुए स्पिनिंग मिल जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रहे हैं। उत्तर भारत के राज्यों में नई कपास की आवक सितंबर में तथा अन्य राज्यों में अक्टूबर में बनेगी। अधिकांश राज्यों में प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: कपास की नई फसल की आवक तक अधिकांश स्पिनिंग मिलों को कॉटन की खरीद सीसीआई से ही करनी होगी।

तेल मिलों की खरीद सीमित होने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में बिनौले की कीमतों में मंदा आया। हरियाणा में बिनौले के भाव 150 रुपये कमजोर होकर 4,200 से 4,650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान राजस्थान में बिनौला के भाव 150 रुपये घटकर 4,200 से 4,650 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। बिनौला के दाम पंजाब में 100 रुपये कमजोर होकर 4,150 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

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