नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गेहूं, ड्यूरम गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों (जैसे आटा, मैदा और सूजी) के निर्यात पर लगे पुराने प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा दिया है। इन्हें 'प्रतिबंधित' से 'मुक्त' (फ्री) श्रेणी में डाल दिया गया है, जिससे चार साल बाद वैश्विक बाजारों में इनका निर्यात फिर से शुरू हो पायेगा। यह नया नियम 24 अगस्त 2026 से तुरंत प्रभाव से लागू होगा।
केंद्र सरकार ने गेहूं से बने उत्पादों की निर्यात नीति में बदलाव करते हुए उन्हें प्रतिबंधित श्रेणी से मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। यह जानकारी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में दी गई है।
संशोधित नीति के तहत अब गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेंहू के आटा के निर्यात की अनुमति बिना किसी प्रतिबंध के होगी।
जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार के निर्णय से गेहूं एवं इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना है। आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में तेजी आने के आसार है। दिल्ली के लॉरेंस रोड पर सोमवार को गेहूं के भाव 15 रुपये तेज होकर 2,885 से 2,890 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने 2022 में गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए थे।
13 मई 2022 को गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया था। इसके बाद उसी साल अगस्त में गेहूं के आटे के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू किया गया था।
यह फैसला रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति में आए व्यवधान के बीच लिया गया था। इससे भारतीय गेहूं की विदेशी मांग बढ़ गई थी और घरेलू कीमतों पर भी दबाव बढ़ा था।
उस दौरान सरकार ने कहा था कि देश की 1.4 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गेहूं तथा गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए निर्यात प्रतिबंध जरूरी थे।
हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद गेहूं से बने कुछ विशेष उत्पादों के निर्यात की अनुमति केंद्र सरकार द्वारा दी गई थी।
इस साल फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने बेहतर स्टॉक उपलब्धता का हवाला देते हुए 25 लाख टन गेहूं और अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी।
सरकार द्वारा मई में जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 5.3 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष इनका उत्पादन 35.7732 करोड़ टन का हुआ था।
फसलवार आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 11.7945 करोड़ टन की तुलना में 27.12 लाख टन अधिक है।
इस दौरान चावल का उत्पादन 15.4024 करोड़ टन होने का अनुमान है, जो 2024-25 के 15.0184 करोड़ टन से 38.4 लाख टन ज्यादा है।

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