नई दिल्ली। आने वाले महीनों में अल नीनो जलवायु पैटर्न के और मजबूत होने की संभावना है। इससे भारत में बारिश और तापमान को लेकर चिंता बढ़ गई है। रूरल वॉयस ने एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग जलवायु केंद्र (एपीसीसी) द्वारा जारी ताजा मौसमी पूर्वानुमान के हवाले से यह जानकारी दी है। एपीसीसी की मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई) मौसमी आउटलुक 18 अगस्त को जारी की गई, जिसमें सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक की जलवायु परिस्थितियों का पूर्वानुमान दिया गया है।
इसके ईएनएसओ अलर्ट में अल नीनो को प्रमुख जलवायु स्थिति बताया गया है और संकेत दिया गया है कि आने वाले मौसमों में यह स्थिति और विकसित हो सकती है। पूर्वानुमान के अनुसार, सितंबर से नवंबर 2026 के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ गई है। वहीं, देश के अधिकांश हिस्सों और एशिया के बड़े क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।
सितंबर-नवंबर के मौसम के लिए एपीसीसी ने भारत में सामान्य से कम वर्षा की संभावना अधिक रहने का अनुमान लगाया है। पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर, मैरीटाइम कॉन्टिनेंट और पश्चिमी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना काफी अधिक बताई गई है। इसके अलावा, दक्षिण प्रशांत के कुछ उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों, उष्णकटिबंधीय उत्तरी अटलांटिक, पश्चिमी भूमध्यरेखीय अटलांटिक, मध्य अमेरिका, कैरेबियन और उत्तरी दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान है।
हालांकि, दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान भारत में बारिश का पैटर्न अलग हो सकता है। एपीसीसी ने देश के मध्य हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की प्रवृत्ति का अनुमान लगाया है। मध्य और पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों में भी सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। इससे संकेत मिलता है कि, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक पूरे छह महीने भारत में लगातार सामान्य से कम बारिश नहीं होगी। क्षेत्र और मौसम के अनुसार बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।
तापमान को लेकर पूर्वानुमान में ज्यादा व्यापक गर्मी का संकेत दिया गया है। सितंबर-नवंबर के दौरान एपीसीसी ने हिंद महासागर और एशिया के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना काफी अधिक बताई है। इसी तरह अफ्रीका के बड़े हिस्सों, भूमध्यसागरीय क्षेत्र, पश्चिमी यूरोप, आर्कटिक, उष्णकटिबंधीय प्रशांत, दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया, कैरेबियन, मध्य अमेरिका और उत्तरी दक्षिण अमेरिका में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है।दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान भी गर्मी का यह रुझान जारी रहने की संभावना है। दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, हिंद महासागर, अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों, उष्णकटिबंधीय प्रशांत और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में सामान्य से अधिक तापमान का अनुमान है।
इस अवधि में भूमध्यसागरीय क्षेत्र और पश्चिमी यूरोप, उत्तरी कनाडा, कैरेबियन, मध्य अमेरिका और उत्तरी दक्षिण अमेरिका में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है।भारत के लिए मानसून के बाद बारिश में कमी और सामान्य से अधिक तापमान का संयोजन मिट्टी की नमी, पानी की उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों पर असर डाल सकता है।
सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान अल नीनो के बने रहने और और मजबूत होने की संभावना है। केंद्र ने नीनो 3.4 सूचकांक के लिए भी पूर्वानुमान जारी किया है। यह मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में ईएनएसओ की स्थिति और उसकी तीव्रता का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्रमुख सूचकांक है।
अल नीनो तब विकसित होता है जब मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान सामान्य से असामान्य रूप से अधिक गर्म हो जाता है। इससे वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आ सकता है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश तथा तापमान के पैटर्न प्रभावित हो सकते हैं। भारत के संदर्भ में अल नीनो का संबंध ऐतिहासिक रूप से कमजोर मानसूनी बारिश के बढ़े हुए जोखिम से रहा है। हालांकि, यह संबंध हमेशा सीधा या निश्चित नहीं होता। समुद्र और वायुमंडल से जुड़े कई अन्य कारक भी भारतीय मानसून को प्रभावित करते हैं और वे अल नीनो के प्रभाव को बढ़ा या कम कर सकते हैं।
21 अगस्त 2026
देश में बारिश की कमी का खतरा बढ़ा, अल नीनो के मजबूत होने की आशंका
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