नई दिल्ली। विश्व बाजार में दाम तेज होने के साथ ही कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी करने से हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में गुरुवार को 500 से 1,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो की तेजी दर्ज की गई।
आईसीई कॉटन वायदा के भाव में बुधवार को बड़ी तेजी दर्ज की गई थी। दिसंबर-26 वायदा अनुबंध में इसके दाम 2.94 सेंट तेज होकर 88.35 सेंट हो गए थे। डॉलर में भारी गिरावट और अमेरिका के कपास उत्पादक क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम के कारण बढ़ती चिंताओं से बुधवार को आईसीई कॉटन वायदा मई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
सीसीआई ने 20 अगस्त, गुरुवार को कॉटन के बिक्री भाव 600 रुपये प्रति कैंडी तक तेज किए। इस दौरान निगम ने 41,800 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 23,800 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 18,000 गांठ कॉटन की खरीद की। चालू फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई करीब 93 लाख गांठ कॉटन की बिक्री सीसीआई अभी तक कर चुकी है।
जुलाई एवं अगस्त में हुई बारिश से देशभर में कपास की बुआई में बढ़ोतरी हुई है तथा देशभर के राज्यों में इसकी बुआई का अंतर पिछले साल की तुलना में घटकर केवल 0.50 फीसदी का रह गया। कृषि मंत्रालय के अनुसार देशभर के राज्यों में 14 अगस्त तक कपास की बुआई 107.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 107.87 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है।
स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुरुवार को गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।
गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 500 रुपये तेज होकर 69,000 से 69,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।
पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 6,900 से 7,050 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,725 से 6,750 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 6,750 से 7,050 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 65,000 से 66,000 रुपये कैंडी बोले गए।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर से तेज हो गई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। उत्तर भारत के राज्यों में कपास की नई फसल की आवक सितंबर में एवं अन्य राज्यों में अक्टूबर में बनेगी। जानकारों के अनुसार अभी तक मौसम फसल के लगभग अनुकूल रहा है तथा व्यापारियों के साथ ही मिलों की नजर आगामी दिनों में मानसूनी बारिश उत्पादक राज्यों में कैसी होती है, इस पर लगी हुई है।
घरेलू बाजार में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यें में कॉटन की कीमतों में तेजी आई, क्योंकि विदेश में दाम तेज होने से इसके आयात पड़ते महंगे हुए हैं। हालांकि अधिकांश राज्यों में प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है।
हालांकि केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।
21 अगस्त 2026
विश्व बाजार में आई तेजी के साथ ही सीसीआई द्वारा बिक्री भाव बढ़ाने से कॉटन हुई महंगी
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