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19 अगस्त 2026

सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत कॉटन तेज

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने बुधवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 400 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की, जिस गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में इसकी कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


सीसीआई ने कॉटन के बिक्री भाव 400 रुपये प्रति कैंडी तक तेज किए है जबकि इस दौरान निगम ने 29,000 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 14,000 गांठ और ट्रेडर्स ने 15,000 गांठ कॉटन की खरीद की। मालूम हो कि चालू सप्ताह के आरंभ में सोमवार को भी निगम ने कॉटन के बिक्री दाम 700 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़ाये थे।

उद्योग ने एक बार फिर कॉटन के उत्पादन अनुमान में 2 लाख गांठ की बढ़ोतरी कर दी है। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2025-26 में देश में कॉटन का उत्पादन 339 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलो) होने का अनुमान है, जबकि इससे पहले 337 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान जारी किया था।

चालू सीजन में पहली अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक 62 लाख गांठ कॉटन का आयात होने की उम्मीद है, जिसमें से 54 लाख गांठ की शिपमेंट जुलाई 2026 अंत तक हो चुकी है।

सीएआई के अनुसार 30-9-26 को कॉटन का क्लोजिंग स्टॉक 93.59 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के क्लोजिंग स्टॉक 55.59 लाख गांठ से ज्यादा है।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 350 रुपये तेज होकर 68,300 से 68,700 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,800 से 6,950 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,625 से 6,650 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 6,650 से 6,950 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 64,000 से 65,000 रुपये कैंडी बोले गए।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। घरेलू बाजार में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम तेज हुए। अधिकांश राज्यों में प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है।

हालांकि केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है, जिस कारण इसके आयात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में  सीसीआई के पास अभी बकाया स्टॉक अभी भी अच्छी मात्रा में बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

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