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29 अगस्त 2026

केंद्र सरकार की सख्ती के बाद चीनी के थोक एवं खुदरा भाव कमजोर हुए

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की सख्ती के बाद से चीनी की थोक एवं खुदरा की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में पिछले चार दिनों में चीनी की थोक कीमतों में जहां 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है, वहीं इसके खुदरा भाव भी इस दौरान 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक कम हुए हैं।


व्यापारियों के अनुसार दिल्ली में चीनी के खुदरा भाव मंगलवार को घटकर 63 रुपये और कानपुर में इसके दाम कमजोर होकर 63 रुपये प्रति किलो रह गए। 21 अगस्त को दिल्ली में चीनी के खुदरा दाम 68 रुपये और कानपुर में 70 रुपये प्रति किलो थे। इसी तरह से मुंबई में चीनी की खुदरा कीमत मंगलवार को घटकर 62 रुपये और कोलकाता में 63 रुपये प्रति किलो रह गई। 21 अगस्त को मुंबई में चीनी के खुदरा भाव 68 रुपये और कोलकाता में 70 रुपये प्रति किलो थे।

इसी तरह से चीनी के थोक दाम 21 अगस्त को दिल्ली में 6,600 रुपये और कानपुर में 6,650 रुपये प्रति क्विंटल थे, जोकि मंगलवार को घटकर क्रमश: 6,000 रुपये और 6,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मुंबई में 21 अगस्त को चीनी के थोक भाव 6,700 रुपये और कोलकाता में 6,750 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो कि मंगलवार को घटकर क्रमश: 5,900 रुपये और 6,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

सरकार द्वारा रॉ शुगर चीनी के आयात की अनुमति देने और सट्टेबाजी व जमाखोरी पर कार्रवाई तेज करने के बाद चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। जानकारों के अनुसार चीनी की कीमतों में नरमी शुरू हो गई है तथा आने वाले दिनों में इनके भाव में और भी गिरावट आने की संभावना है।

पेराई सीजन 2025-26 में चीनी का उत्पादन पहले के अनुमान 343 लाख टन के मुकाबले घटकर करीब 306 लाख टन होने का अनुमान है, लेकिन इसके बावजूद जानकारों का मानना है कि देश में चीनी का स्टॉक पर्याप्त है। भारत में चीनी की सालाना घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन की है।

चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात की अनुमति दी थी। इसके अलावा थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा लागू की गई और राज्यों को जमाखोरी तथा सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए कार्यवाही तेज करने के निर्देश दिए थे।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 21 अगस्त तक गन्ने की बुआई 58.44 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 58.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अत: गन्ने के क्षेत्र में 0.72 फीसदी की मामूली गिरावट दर्ज की गई।

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