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20 अगस्त 2026

पहली सितंबर से नवंबर अंत तक चीनी के थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक सीमा लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चीनी के थोक उपभोक्ताओं के लिए अस्थायी स्टॉक रखने की सीमा लागू कर दी है। इसके तहत बड़े उपभोक्ता अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर चीनी का स्टॉक ही अपने पास रख सकेंगे। यह व्यवस्था पहली सितंबर 2026 से लागू होकर 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

केंद्र सरकार का उद्देश्य निर्धारित अवधि के दौरान बड़े संस्थागत और औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा रखे जाने वाले चीनी के स्टॉक की मात्रा को नियंत्रित करना है। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3(1) के तहत जारी किया गया है और इसे ‘शुगर (स्टॉक होल्डिंग लिमिट ऑफ बल्क कंज्यूमर) ऑर्डर, 2026’ नाम दिया गया है।

आदेश के अनुसार, उत्पादन, उपभोग या किसी भी अन्य उपयोग के लिए कच्चे माल के रूप में प्रति माह 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल या खपत करने वाले थोक उपभोक्ता अपने पास 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इस प्रतिबंध का उद्देश्य निर्धारित अवधि के दौरान बड़े संस्थागत और औद्योगिक उपभोक्ताओं के पास मौजूद चीनी की मात्रा को नियंत्रित करना है।

आदेश में थोक उपभोक्ता की श्रेणी में कन्फेक्शनरी निर्माता, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदारों को शामिल किया गया है। ऐसे उपभोक्ता, जिन्होंने मौजूदा महीने को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसतन कम से कम 10 टन चीनी प्रति माह की खपत की है, इस श्रेणी में आएंगे। हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थानों पर यह स्टॉक सीमा लागू नहीं होगी।

सरकार ने थोक उपभोक्ताओं द्वारा चीनी की खरीद और खपत की पुष्टि के लिए भी एक व्यवस्था निर्धारित की है। इसके तहत प्रत्येक चीनी मिल द्वारा किसी थोक उपभोक्ता को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई मासिक चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए विक्रेताओं और/या खरीदारों द्वारा दाखिल किए गए जीएसटी रिटर्न का उपयोग किया जाएगा। चीनी से संबंधित निर्धारित एचएसएन कोड के आधार पर लेनदेन की पहचान की जाएगी और इसी के माध्यम से चीनी की वास्तविक खपत का आकलन किया जाएगा। सरकार का यह कदम त्योहारी सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बड़े उपभोक्ताओं द्वारा अत्यधिक स्टॉक जमा करने पर नियंत्रण रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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