नई दिल्ली। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों के बाद मिल गेट (एक्स-मिल) चीनी की कीमतों में 25 से 30 फीसदी की गिरावट आई है तथा खुदरा में भी इसके दाम कम होने लग हैं।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार 1 से 15 सितंबर 2026 के बीच घरेलू बाजार के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा तय किया गया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार यह कोटा 1 सितंबर से प्रभावी होगा और 15 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा।
सूत्रों के अनुसार मिल गेट कीमतों में आई तेज गिरावट का असर थोक बाजारों में दिखाई देने लगा है। हालांकि, खुदरा कीमतों में कमी आने में अभी कुछ समय लग सकता है, क्योंकि व्यापारी और खुदरा विक्रेता पहले से ऊंची कीमतों पर खरीदे गए स्टॉक को बेच रहे हैं। 30 अगस्त 2026 को चीनी का औसत खुदरा भाव 64.23 रुपये प्रति किलो था, जबकि थोक बाजार में यह 59.72 रुपये प्रति किलो पर रही।
उद्योग सूत्रों के अनुसार खुदरा विक्रेता आमतौर पर चीनी की 10 से 15 बोरियां स्टॉक में रखते हैं। प्रत्येक बोरी का वजन करीब 50 किलो होता है। जिन कारोबारियों के पास महंगे दाम पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद है, वे उस स्टॉक के खत्म होने और सस्ती कीमत वाली नई चीनी आने तक बिक्री मूल्य घटाने से बच रहे हैं। अत: खुदरा कीमत में गिरावट आने में कम से कम 10 से 12 दिन लगेंगे।
मिल गेट कीमतों में गिरावट के पीछे सरकार का वह फैसला प्रमुख कारण है, जिसके तहत निर्यात के लिए चीनी का प्रसंस्करण करने वाली मिलों को रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है। अनुमान है कि अगले दो महीनों में ऐसी करीब 3 से 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध होगी। इससे बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, सरकार ने थोक चीनी उपभोक्ताओं के स्टॉक रखने के नियमों को भी सख्त किया है। 1 सितंबर से हर महीने 10 टन से अधिक चीनी खरीदने वाले उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। नए निगरानी तंत्र के तहत अलग-अलग चीनी मिलों द्वारा थोक उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से दी जाने वाली मासिक चीनी की मात्रा का भी सत्यापन किया जाएगा।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच करीब 2 से 3 रुपये प्रति किलो का अंतर सामान्य माना जाता है। वहीं, एक्स-मिल और खुदरा कीमतों के बीच 7 से 8 रुपये प्रति किलो का अंतर भी आम तौर पर सामान्य है। घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने चीनी आयात की अनुमति देने, थोक उपभोक्ताओं और डीलरों के स्टॉक नियमों को सख्त करने जैसे कदम उठाए हैं। इससे पहले सरकार ने चीनी के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाए थे।
केंद्र सरकार का कहना है कि, देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के लिए चीनी मिलों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। पहले उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन लगाया गया था। देश में चीनी की वार्षिक घरेलू खपत करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है।
31 अगस्त 2026
सरकारी सख्ती के बाद चीनी के एक्स मिल भाव कमजोर, 1 से 15 सितंबर के 13 लाख का कोटा
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