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09 दिसंबर 2023

गेहूं की कीमतों को काबू करने के लिए केंद्र ने एक फिर स्टॉक लिमिट घटाई

नई दिल्ली। गेहूं की कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्टॉक सीमा की मात्रा में कटौती कर दी है। केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार गेहूं की जमाखोरी रोकने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से थोक विक्रेताओं, खुदरा व्यापारियों, बिग चेन रिटेलर्स और मिलर्स के लिए स्टॉक लिमिट में कटौती करने का फैसला किया गया है।


सरकार ने ट्रेडर्स होलसेलर्स के लिए गेहूं की स्टॉक लिमिट को 2,000 टन से घटाकर 1,000 टन करने का फैसला किया है। सरकार ने यह फैसला गेहूं की जमाखोरी और होर्डिंग रोकने के लिए लिया है जिससे बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ाई जा सकें। इसी तरह से रिटेलर्स के लिए स्टॉक लिमिट को 10 टन से घटाकर 5 टन, बिग चेन रिटेलर्स के लिए आउटलेट में 10 टन से घटाकर 5 टन करने का फैसला लिया है। मिलर्स के मामले में मासिक स्थापित क्षमता का 70 फीसदी 2023-24 के शेष महीनों से गुणा करके रख सकते हैं।

संशोधित स्टॉक सीमा तत्काल प्रभाव से लागू होगी, तथा व्यापारियों को स्टॉक को संशोधित सीमा तक कम करने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा।

मंत्रालय के अनुसार सभी संस्थाओं को गेहूं स्टॉक सीमा पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। साथ ही हर शुक्रवार को स्टॉक की स्थिति को अपडेट करनी होगी। यदि कोई भी संस्था, जो पोर्टल पर पंजीकृत नहीं पाई गई या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करती है, उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले केंद्र सरकार ने 14 सितंबर 2023 को थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं पर स्टॉक सीमा को 3,000 टन से घटाकर 2,000 टन किया था।

केंद्र सरकार ने 12 जून 2023 को गेहूं के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रृंखला के खुदरा विक्रेताओं पर मार्च 2024 तक 3,000 टन की स्टॉक सीमा लगाई थी, जिसे 14 सितंबर 2023 को कम कर दिया था। 

केंद्र ने गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, हालांकि शीरे से एथेनॉल का उत्पादन जारी रहेगा।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरीज को गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर तत्काल रोक के निर्देश दे दिए हैं। सरकार ने गन्ने से इथेनॉल बनाने पर रोक इसलिए लगाई है क्योंकि इस बार खराब मानसून के चलते गन्ने की फसल प्रभावित हुई है तथा इससे घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी आई है।

चालू पेराई सीजन में देश में चीनी के उत्पादन में करीब 12 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। इसलिए सरकार चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी रोकने के लिए उपाय कर रही है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत डायरेक्टर शुगर की ओर से जारी आदेश में कहां गया है कि सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरीज गन्ने के जूस/सिरप का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए नहीं करें। बी हैवी मोलेसेस यानी शीरे से एथेनॉल का उत्पादन जारी रहेगा।

कमजोर मानसून के कारण चालू सीजन में देश के कई राज्यों में गन्ने की फसल प्रभावित हुई है तथा सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में हुआ है। ऐसे में चीनी का उत्पादन पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2023-24 के अक्टूबर से सितंबर के दौरान घटकर 285 से 290 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 331 लाख टन का हुआ था।  

केंद्र सरकार ने 2.40 लाख टन गैर बासमती चावल के निर्यात की मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोमोरोस, मेडागास्कर, इक्वेटोरियल गिनी, मिस्र, केन्या को 2.40 लाख टन गैर बासमती चावल के निर्यात को मंजूरी दी है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 7 दिसंबर 2023 को जारी अधिसूचना के अनुसार इन देशों को गैर बासमती चावल का निर्यात नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड, एनसीईएल के माध्यम से किया जायेगा।


मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार केन्या को एक लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया जाएगा, जबकि 60 हजार टन मिस्र को, इक्वेटोरियल गिनी को 10,000 टन, मेडागास्कर को 50,000 टन तथा कोमोरोस को 20,000 टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया जायेगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान गैर बासमती चावल के निर्यात में 23.14 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 68.82 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 89.54 लाख टन का हुआ था।

केंद्र सरकार ने घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए 20 जुलाई से गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन कई देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरत के मद्देनजर सरकार उनके लिए गैर-बासमती चावल के निर्यात की अनुमति देती है।

उत्तर भारत के राज्यों में नवंबर अंत तक 22.76 लाख गांठ कॉटन की हुई आवक

नई दिल्ली। पहली सितंबर 2023 से नवंबर 2023 तक उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में 22.76 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन की आवक हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 16.21 लाख गांठ से ज्यादा है।


इंडियन कॉटन एसोसिएशन लिमिटेड के अनुसार पहली सितंबर 23 से 30 नवंबर 2023 तक पंजाब की मंडियों में कॉटन की आवक 1,27,675 गांठ की, हरियाणा की मंडियों में 7,33,235 गांठ तथा राजस्थान की गंगानगर लाइन में 6,38,570 गांठ तथा इस दौरान लोअर राजस्थान में 7,76,700 गांठ कॉटन की आवक हुई है।

चालू फसल सीजन 2023-24 में इन राज्यों में 44.37 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि पिछले फसल सीजन 41.18 लाख गांठ की तुलना में ज्यादा है। पंजाब में चालू फसल सीजन में 4.34 लाख गांठ, हरियाणा में 15.74 लाख गांठ तथा गंगानगर लाइन में 12.68 लाख गांठ के अलावा लोअर राजस्थान में भी 12.68 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने इन राज्यों से न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 35,907 गांठ कपास की खरीद की है। अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की मंडियों से 17,258 गांठ, हरियाणा की मंडियों से 12,289 गांठ, गंगानगर लाइन की मंडियों से 4,225 गांठ के अलावा लोअर राजस्थान की मंडियों 3,000 गांठ कपास की खरीद हुई है। 

राजस्थान में गेहूं, चना एवं सरसों के साथ ही जौ की बुआई तय लक्ष्य से कम

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में 4 दिसंबर 2023 तक राजस्थान में गेहूं, चना, सरसों के साथ ही जौ की बुआई तय लक्ष्य से पीछे चल रही है। हालांकि गेहूं की बुआई के लिए अभी समय है लेकिन चना, सरसों तथा जौ की बुआई का समय लगभग समाप्त हो चुका है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में जौ की बुआई घटकर 3.54 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि तय लक्ष्य 3.65 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। हालांकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में जौ की बुआई 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई घटकर राज्य में 34.91 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि तय लक्ष्य 41 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। पिछले साल इस समय तक राज्य में 37.10 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुआई हो चुकी थी। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 36.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि तय लक्ष्य 43.60 लाख हेक्टेयर से कम है।

दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में घटकर 17.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि तय लक्ष्य 21 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। पिछले साल इस समय तक राज्य में चना की बुआई 20.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। दलहन की कुल बुआई चालू रबी में राज्य में 18.10 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 20.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों की बुआई का लक्ष्य 21.40 लाख हेक्टेयर तय किया गया है।

गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में 21.97 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 23.49 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। चालू रबी में राज्य में 31 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुआई का लक्ष्य राज्य के कृषि निदेशालय ने तय किया हुआ है।

गुजरात में दलहन एवं तिलहन की बुआई पीछे, गेहूं में हल्का सुधार

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गुजरात में दलहन एवं तिलहन की बुआई पीछे चल रही है, जबकि गेहूं की बुआई में हल्का सुधार आया है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 4 दिसंबर तक तिलहन की बुआई केवल 2.43 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में 2.43 लाख हेक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.87 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है।

इसी तरह से चालू रबी में दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में घटकर 4.56 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 5.07 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 4.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 5.39 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में थोड़ी सुधरकर 6.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.86 लाख हेक्टेयर में बुआई ही हुई थी।

मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू रबी में राज्य में 17,929 हेक्टेयर में, मक्का की 83,087 हेक्टेयर में तथा अन्य फसलों की 10,233 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल क्रमश: इनकी बुआई 14,982 हेक्टेयर में, 84,995 हेक्टेयर में तथा 9,381 हेक्टेयर में हो चुकी थी। 


उत्पादक राज्यों में हाल ही में हो रही बारिश चना की फसल के लिए फायदेमंद

नई दिल्ली। चालू रबी में चना की बुआई में भले ही 11 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है, लेकिन हाल में उत्पादक राज्यों में हो रही बारिश इसकी फसल के लिए फायदेमंद है। इससे चना की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में बढ़ोतरी होने की संभावना है।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान, दक्षिणी तमिलनाडु, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट, विदर्भ, मराठवाड़ा, मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों और पूर्वी गुजरात और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश हुई।

आईएमडी के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश संभव है। आंतरिक तमिलनाडु और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में हल्की बारिश संभव है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 1 दिसंबर 23 तक चना की बुआई 11.26 फीसदी कम होकर 75.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 85.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में चालू रबी में चना की बुआई बढ़कर 20.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18.60 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि महाराष्ट्र में चालू रबी इसकी बुआई घटकर केवल 15.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 19.36 लाख हेक्टेयर से कम है।

कर्नाटक में चालू रबी में चना की बुआई कम होकर 8.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.73 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से आंध्र प्रदेश में चना की बुआई 1.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राजस्थान में चालू रबी में चना की बुआई घटकर 17.52 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 20.42 लाख हेक्टेयर से कम है। उत्तर प्रदेश में चना की बुआई 6.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.82 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

गुजरात में चना की बुआई चालू रबी में घटकर 3.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 4.65 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। छत्तीसगढ़ में चालू रबी में चना की बुआई 1.22 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.30 लाख हेक्टेयर से कम है।

चालू रबी में गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा मोटे अनाजों की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 1 दिसंबर तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई 187.94 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 197.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी दलहन की बुआई घटकर चालू सीजन में 108.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 119.37 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 75.09 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 85.54 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 14.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 13.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 7.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 7.57 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 2.46 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.17 लाख हेक्टेयर से कम है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में 39.93 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 41.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू रबी में 16.74 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 14.55 लाख हेक्टेयर में और जौ की 7.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 18.21 लाख हेक्टेयर, 14.27 लाख हेक्टेयर और 7.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 89.49 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 89.88 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 84.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 83.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 2.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.74 लाख हेक्टेयर से कम है। सफ्लावर की बुआई चालू रबी में 47 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 53 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई चालू में बढ़कर 2.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 2 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

धान की रोपाई चालू रबी में 9.28 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.70 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी फसलों की कुल बुआई चालू रबी सीजन में 434.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 459.22 लाख हेक्टेयर से कम है।

चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में कैस्टर तेल का निर्यात 3.38 फीसदी बढ़ा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 3.38 फीसदी बढ़कर 3.66 लाख टन का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 3.54 लाख टन का ही हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार अक्टूबर में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 50,070 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका निर्यात केवल 39,783 टन ही हुआ था।

एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से वित्त वर्ष 2023-24 के पहले सात महीनों में कैस्टर  तेल का निर्यात 4,607.97 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के अप्रैल से मार्च के दौरान इसका निर्यात 9,027.64 करोड़ रुपये का हुआ था।

व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी कमजोर होने से कैस्टर सीड के साथ ही कैस्टर तेल की कीमतों में गिरावट आई। गुजरात की राजकोट मंडी में केस्टर तेल कर्मिशलय के भाव गुरुवार को कमजोर होकर 1,230 रुपये और एफएसजी के दाम घटकर 1,240 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। राजकोट मंडी में कैस्टर सीड के दाम घटकर 1,185 से 1,210 रुपये और गोंडल मंडी में 1,120 से 1,151 रुपये तथा जूनागढ़ में 1,130 से 1,170 रुपये तथा जामनगर मंडी में इसके दाम घटकर 1,130 से 1,167 रुपये प्रति 20 किलो रहे।  

अक्टूबर में 20 लाख टन सोयाबीन की आवक, एक लाख टन सोया डीओसी का निर्यात

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2023-24 के पहले महीने अक्टूबर में घरेलू मंडियों में 20 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी आवक केवल 17 लाख टन की हुई थी।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार अक्टूबर में एक लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में केवल 49 हजार टन का ही हुआ था। अक्टूबर में सोया डीओसी का उत्पादन 9.07 लाख टन हा हुआ है, जबकि 1.17 लाख टन का पिछला स्टॉक बचा हुआ है। अत: इस दौरान डीओसी की घरेलू खपत फीड में 6.50 लाख टन और फूड में 75 हजार टन की हुई है। अत: पहली नवंबर को 1.99 लाख टन सोया डीओसी का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जबकि पिछले साल पहली नवंबर के 2.25 लाख की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार अक्टूबर में उत्पादक मंडियों में 20 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जिसमें से 11.50 लाख टन की क्रॉसिंग हो चुकी है। 40 हजार टन सोयाबीन की इस दौरान सीधी खपत हुई है। अत: पहली नवंबर को किसान, व्यापारियों एवं प्लांटों के पास 118.21 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 126.37 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन में सोयाबीन का उत्पादन 118.74 लाख टन होने क अनुमान है, जोकि पिछले साल के 124.11 लाख टन से कम है। चालू फसल सीजन में पहली अक्टूबर को सीजन की शुरुआत में घरेलू बाजार में 24.07 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। 


25 नवंबर 2023

दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी

 केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी किया है। 

दलहन एवं तिलहन के साथ धान की बुआई चालू रबी सीजन में पिछड़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन एवं तिलहन के साथ ही धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 24 नवंबर तक दलहन की बुआई घटकर 94.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 103.32 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 66.19 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 75.07 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 12.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 12.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 7.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.62 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 1.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.46 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 82.01 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 82.53 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 77.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 77.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 1.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.07 लाख हेक्टेयर से कम है। सफ्लावर की बुआई चालू रबी में 37 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 41 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई चालू में बढ़कर 1.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.65 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

धान की रोपाई चालू रबी में 8.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.15 लाख हेक्टेयर से कम है।

खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर, अरहर एवं उड़द के साथ मूंग तथा मसूर में गिरावट

नई दिल्ली। खुदरा के साथ ही थोक में दालों में ग्राहकी कमजोर होने से इनकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। घरेलू बाजार में गुरुवार को अरहर एवं उड़द के साथ ही मूंग तथा मसूर की कीमतों में मंदा आया, जबकि इस दौरान चना की कीमतें स्थिर हो गई।


चेन्नई में बर्मा की उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उड़द एफएक्यू के भाव दिसंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के दाम 15 डॉलर कमजोर होकर भाव 1,080 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के दाम 20 डॉलर घटकर 1,170 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए। बर्मा में लेमन अरहर के भाव दिसंबर शिपमेंट के 1,450 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।
 
आयात पड़ते सस्ते होने के कारण घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी उड़द की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट जारी रही। व्यापारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई उड़द की छिटपुट आवक हो रही है, तथा चालू महीने के अंत तक आवक बढ़ने की उम्मीद है। वैसे भी मध्य दिसंबर तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं तेलंगाना की नई फसल आयेगी। उधर बर्मा में भी दिसंबर में एक छोटी फसल आती है। ऐसे में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, इसलिए उड़द की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। हालांकि खपत का सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बनी रहने के आसार है, जबकि उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी की देसी उड़द की आवक कम हो रही है। इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में हल्की गिरावट और भी आ सकती है।

घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी अरहर की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उधर कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र की मंडियों में भी नई अरहर की छिटपुट आवक शुरू हो गई है तथा इन राज्य की मंडियों में आवक चालू महीने के अंत तक बढ़ेगी। हालांकि आवकों का दबाव दिसंबर में ही बनेगा। जानकारों के अनुसार इन राज्यों में अरहर के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है, लेकिन केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में अरहर दाल की खुदरा एवं थोक मांग बनी रहने के आसार हैं। बर्मा के साथ ही अफ्रीकी देशों से अरहर के आयात पड़ते महंगे है। इसलिए मौजूदा कीमतों में धीरे, धीरे गिरावट आयेगी।

चना की कीमतें घरेलू बाजार में स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार चना में जहां नीचे दाम पर बिकवाली कम हो जाती है, वहीं बढ़े दाम पर मिलें भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है, तथा स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण भी दाल मिलों के पास सप्लाई तंग है। वैसे भी चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। खपत का सीजन होने के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी। नेफेड के पास बफर स्टॉक एवं अन्य कल्याणकारी योजना के अलावा खुले बाजार में बेचने के लिए चना का स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है। इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने पिछले चार महीने में करीब 13 लाख चना की बिक्री खुले बाजार में की है, अत: अब केंद्र सरकार के पास अब 18 से 19 लाख टन चना का बकाया स्टॉक ही बचा हुआ है। इसमें से 10 लाख टन बफर स्टॉक का एवं करीब छह लाख टन अन्य कल्याणकारी योजनाओं में खपत होगा। ऐसे में अब खुले बाजार में बेचने के लिए दो से तीन लाख टन चना का ही बकाया स्टॉक बचा हुआ है।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में नरम हुए, जबकि मुंबई में आयातित की कीमतें स्थिर बनी रही। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में कनाडा से मसूर का आयात ज्यादा मात्रा में हुआ है, जिस कारण इसकी कीमतों में मंदा आया था। हालांकि व्यापारी अभी मसूर में बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, क्योंकि खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार, बंगाल एवं असम की मांग आगामी दिनों में बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। वैसे भी उत्पादक राज्यों में किसानों के पास देसी मसूर का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है। इसलिए स्टॉकिस्टों एवं आयातकों दाम घटाकर बिकवाली नहीं करना चाहते।

आस्ट्रेलिया में मसूर की कटाई जोरों पर है, तथा चालू सीजन में इसके उत्पादन में पिछले साल की तुलना में कमी आने की आशंका है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन 1.69 मिलियन टन की तुलना में घटकर 1.23 मिलियन टन का ही होने का अनुमान है।

स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से मूंग की कीमतें दिल्ली में कमजोर हो गई, जबकि उत्पादक मंडियों में इसके दाम स्थिर बनी रहे। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग बनी रहेगी, तथा चालू सीजन में मूंग की बुआई कम हुई। वैसे भी अगस्त में बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ मूंग की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता पिछले साल की तुलना में कम बैठ रही है। हालांकि उत्पादक राज्यों में नई मूंग की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है साथ ही नेफेड राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश में लगातार मूंग की बिकवाली कर रही है। इसलिए एकतरफा बड़ी तेजी के आसार कम है।

चेन्नई में एसक्यू उड़द के दाम 9,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान एफएक्यू उड़द की कीमतें कमजोर होकर 8,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई।

दिल्ली में एसक्यू उड़द के दाम 50 रुपये कमजोर होकर दाम 10,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान एफएक्यू उड़द की कीमतें 75 रुपये नरम होकर 9,200 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

मुंबई में उड़द के दाम 150 रुपये घटकर दाम 8,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

सोलापुर मंडी में नई देसी उड़द के भाव 8,000 से 10,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान इंदौर मंडी में बोल्ड उड़द के भाव 9,201 से 9,701 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 125 रुपये कमजोर होकर भाव 10,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के दाम 200 रुपये कमजोर होकर भाव 11,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 250 रुपये कमजोर होकर भाव 10,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें कमजोर हो गई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 200 रुपये घटकर 11,100 से 11,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 100 रुपये घटकर दाम 8,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मतवारा अरहर के भाव 150 रुपये घटकर दाम 8,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम 25 रुपये नरम होकर 6,550 से 6,575 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 6025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 6100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6300 से 6350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6300 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के चना के दाम 6,475 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन में चना के भाव 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में मूंग के भाव 200 रुपये कमजोर होकर दाम 8,300 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 7500 से 8600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में बोल्ड मूंग के भाव 8000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 269.95 लाख टन के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2023-24 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 269.95 लाख टन की हो चुकी है। अभी तक हुई कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब एवं हरियाणा की है।


पंजाब से चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 178.57 लाख टन की हो चुकी है, जबकि हरियाणा की मंडियों से इस दौरान समर्थन मूल्य पर 58.78 लाख टन धान खरीदा जा चुका है।

इस दौरान छत्तीसगढ़ से 9.05 लाख टन, तमिलनाडु से 5.38 लाख टन तथा तेलंगाना से 8.07 लाख टन एवं उत्तराखंड से 4.09 लाख टन तथा उत्तर प्रदेश की मंडियों से 4.81 लाख टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है।

अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश से 21,826 टन, बिहार से 28,669 टन, गुजरात से 8,263 टन, हिमाचल प्रदेश से 20,795 टन तथा जम्मू-कश्मीर से 16,948 टन के अलावा केरल से 20,074 टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीद हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए कॉमन ग्रेड धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 2,183 रुपये और कॉमन ग्रेड धान का एमएसपी 2,203 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 

गुजरात में चालू रबी में चना एवं सरसों के साथ ही अन्य फसलों की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गुजरात में चना एवं सरसों के साथ ही अन्य फसलों की बुआई में भारी कमी आई है। जानकारों के अनुसार सितंबर में राज्य में औसत से कम बारिश का असर फसलों की बुआई पर पड़ा है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 20 नवंबर तक सरसों की बुआई केवल 1.66 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अत: राज्य में सरसों की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 33 फीसदी पिछड़ रही है।

इसी तरह से चालू रबी में दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में करीब 44 फीसदी पिछड़कर 1.86 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.31 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 2.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 3.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में 33 फीसदी घटकर केवल 1.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.81 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

मोटे अनाजों में ज्वार एवं बाजरा तथा अन्य फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 2.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.49 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। 

विदेश में दाम कमजोर होने से घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें घटी

नई दिल्ली। विदेशी बाजार में दाम कमजोर होने से स्पिनिंग मिलों की मांग स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर हो गई, जिससे उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में कॉटन के दाम नरम हो गए।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 56,600 से 57,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5525 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5500 से 5600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5325 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम 55,200 से 55,500 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 1,25,600 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई। एमएसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में शाम के सत्र में गिरावट का रुख रहा।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख देखा गया। उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से कॉटन की कीमतें नरम हुई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है, जबकि उत्पादक मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ रही है। घरेलू बाजार से यार्न की स्थानीय मांग बढ़ने पर ही कॉटन की कीमतों में तेजी टिक पायेगी।

हालांकि देश के कई राज्यों की मंडियों से कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई कपास की एमएसपी पर खरीद कर रही है। जानकारों के अनुसार त्योहारी छुट्टियों के कारण पिछले सप्ताह जहां कपास की आवक कम हो रही थी, वहीं आगामी दिनों में इसकी दैनिक आवक बढ़ेगी।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन 294.10 लाख गांठ होने का जारी किया है, जबकि पहले आरंभिक अनुमान में 295.10 लाख गांठ होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों में आज मिलाजुला रुख रहा, जबकि घरेलू बाजार में कॉटन वॉश के दाम स्थिर बने रहे। राजकोट में कॉटन वॉश के दाम 880 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 865 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बने रहे। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें 885 रुपये प्रति दस किलो पर स्थिर बनी रही।

सीएआई ने कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कटौती की

नई दिल्ली,उद्योग ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख  गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन 294.10 लाख गांठ होने का जारी किया है, जबकि पहले आरंभिक अनुमान में 295.10 लाख गांठ होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।


कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के दूसरे आरंभिक अनुसार के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों पंजाब में कॉटन का उत्पादन फसल सीजन 2023-24 में 4.50 लाख गांठ, हरियाणा में 15 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 11 लाख गांठ एवं लोअर राजस्थान के 11.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 42 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार मध्य भारत के राज्यों गुजरात में चालू फसल सीजन में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76.60 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश के 18 लाख गांठ को मिलाकर कुल 179.60 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में चालू फसल सीजन में 30 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 12.50 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 18.50 लाख गांठ तथा तमिलनाडु के 6.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 67.50 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

ओडिशा में चालू खरीफ में 3 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार अक्टूबर 23 में देशभर की मंडियों में 24.34 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी है।

नई फसल की आवकों के समय पहली अक्टूबर को 28.90 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक था, जबकि अक्टूबर में 24.34 लाख गांठ की आवक हुई। इस दौरान 1.50 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंची। अत: अक्टूबर अंत में कुल उपलब्धता 54.74 लाख गांठ की बैठी, जिसमें से 26 लाख गांठ की घरेलू खपत हुई तथा एक लाख गांठ की निर्यात शिपमेंट हुई। अत: अक्टूबर अंत में मिलों के पास करीब 25 लाख गांठ का तथा सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी एवं जिनर्स के व्यापारी तथा निर्यातकों के पास 2.74 लाख गांठ का बकाया स्टॉक है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 को कॉटन का बकाया स्टॉक 28.90 लाख गांठ का बचा हुआ था, जबकि 294.10 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में करीब 22 लाख गांठ कॉटन का आयात होने की उम्मीद है। ऐसे में कुल उपलब्धता 345 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल घरेलू खपत 311 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि इस दौरान 14 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद है। ऐसे में कॉटन का बकाया स्टॉक आगामी नई फसल की आवक के समय 20 लाख गांठ का बचेगा।

बुआई में कमी के साथ ही अगस्त में बारिश की भारी कमी का असर चालू सीजन में कपास की फसल पर पड़ा है, जिस कारण इसके उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।

दलहन एवं तिलहन के साथ धान की बुआई घटी, मोटे अनाजों की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन एवं तिलहन के साथ ही धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है, जबकि इस दौरान मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 17 नवंबर तक दलहन की बुआई घटकर 65.16 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 69.37 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 44.66 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 49.64 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 8.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 7.60 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 5.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 5.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 1.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.85 लाख हेक्टेयर से कम है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी सीजन में बढ़कर 18.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.85 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 12.38 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 3.21 लाख हेक्टेयर में तथा जौ की 2.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 9.33 लाख हेक्टेयर में तथा 3.49 लाख हेक्टेयर एवं 2.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 71.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 73.17 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में घटकर 68.55 लाख हेक्टेयर में ही  हुई है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 69.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 1.43 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.81 लाख हेक्टेयर से कम है।

धान की रोपाई चालू रबी में 7.65 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.05 लाख हेक्टेयर से कम है। 

बासमती चावल के पांच लाख टन के निर्यात सौदे, राइस मिलों की मांग से धान तेज

नई दिल्ली। यूरोप और मध्य पूर्व के प्रमुख बाजारों से बढ़ती मांग को देखते हुए भारत से हाल ही में पांच लाख टन नए सीजन के बासमती चावल के निर्यात सौदे हुए हैं। इससे घरेलू बाजार में बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।


व्यापारियों के अनुसार भारतीय निर्यातकों ने हाल ही में करीब पांच लाख टन बासमती चावल के निर्यात सौदे किए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में राइस मिलों की खरीद धान में बढ़ गई। अक्टूबर के अंत में एक्सपोर्ट प्रमोशन संस्था एपिडा को भेजे एक पत्र में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि बासमती चावल के निर्यात के लिए कॉन्ट्रैक्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से संशोधित कर 950 डॉलर प्रति टन करने का निर्णय लिया गया है।

सूत्रों के अनुसार विश्व बाजार में भारतीय चावल अभी भी सस्ता है, इसलिए भारत से निर्यात मांग बराबर बनी हुई है। दीपावली की छुट्टियों के कारण उत्पादक मंडियों में चालू सप्ताह में धान की आवक कम हो रही थी, लेकिन गुरुवार को जहां मंडियों में धान की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी हुई, वहीं मिलों की मांग भी बनी रही।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 7.05 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 23.08 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात केवल 21.56 लाख टन का हुआ था।

पूसा 1,509 किस्म के स्टीम चावल नई फसल के ए ग्रेड का भाव बढ़कर उत्तर भारत के राज्यों में 7800 से 8100 रुपये और इसके सेला चावल का भाव 7,100 से 7,200 रुपये तथा गोल्डन सेला चावल का दाम 7,600 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस दौरान 1,121 बासमती चावल स्टीम नई फसल का ग्रेड ए किस्म का दाम बढ़कर 9,700 से 10,000 रुपये और इसके सेला चावल का 8,400 से 8,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस दौरान 1,718 किस्म के स्टीम ए ग्रेड नई फसल का दाम तेज होकर 8,500 से 8,800 रुपये और इसके सेला चावल का 7,800 से 7,950 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

पंजाब की मुक्तसर मंडी में गुरुवार को पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम बढ़कर 4,200 से 4,850 रुपये, 1,718 किस्म के धान के दाम तेज होकर 3400 से 4,731 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हरियाणा की फतेहाबाद मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम 4,840 रुपये, 1,401 किस्म के धान के दाम तेज होकर 4,590 रुपये तथा 1,718 किस्म के 4,440 रुपये और 1,509 किस्म के धान के दाम 3,770 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उत्तर प्रदेश की जहांगीराबाद मंडी में 1,509 किस्म के धान के दाम तेज होकर 3,500 से 3,670 रुपये और आर एस 10 किस्म के धान के भाव 2,500 से 2,750 रुपये तथा ताज किस्म के धान के भाव 2,800 से 3,001 रुपये तथा शरबती किस्म के धान के भाव 2,500 से 2,700 रुपये और सुगंधा के 2,800 से 3,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

भारत सालाना करीब 40 लाख टन से अधिक बासमती चावल का निर्यात करता है, तथा इसके प्रमुख आयातक देशों में ईरान, इराक, यमन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख आयातक हैं। 

स्पिनिंग मिलों की मांग से बढ़ने से उत्तर भारत के साथ गुजरात में कॉटन के दाम तेज

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण मंगलवार को उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में कॉटन के दाम तेज हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 100 रुपये तेज होकर 56,600 से 56,800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5475 से 5575 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5450 से 5500 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 5325 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम तेज होकर 55,100 से 55,400 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

त्योहार की छुट्टियों के कारण उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी दर्ज की गई, साथ ही मिलों में अवकाश होने के कारण व्यापार भी सीमित मात्रा में ही हुआ। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख देखा गया।

व्यापारियों के अनुसार हाल ही विश्व बाजार में कॉटन के दाम तेज हुए हैं। अत: उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से इसकी कीमतों में तेजी आई है। हालांकि व्यापारी अभी एकतरफा बड़ी तेजी में नहीं है क्योंकि घरेलू बाजार में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है। वैसे भी आगामी दिनों में उत्पादक मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ेगी।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों में आज तेजी का रुख रहा, लेकिन घरेलू बाजार में कॉटन वॉश के दाम स्थिर ही बने रहे। जालना में कॉटन वॉश के दाम 865 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 870 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बने रहे। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें 885 रुपये प्रति दस किलो पर स्थिर बनी रही।