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27 अक्तूबर 2023

गुजरात में मूंगफली का उत्पादन 11.50 बढ़कर 33.50 लाख टन होने का अनुमान - एसईए

नई दिल्ली। बुआई में कमी आने के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन 11.50 फीसदी बढ़कर 33.50 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 30 लाख टन का उत्पादन हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू खरीफ सीजन में गुजरात में मूंगफली की बुआई 4.33 फीसदी घटकर 16.35 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इसकी बुआई 17.09 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

एसईए के अनुसार देशभर के राज्यों में चालू खरीफ में मूंगफली की बुआई 43.91 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले खरीफ के 45.54 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.62 लाख हेक्टेयर कम है।

उत्तरी गुजरात की उत्पादक मंडियों में इस समय मूंगफली की नई फसल की आवक जोरों पर है, क्योंकि इस क्षेत्र में किसान फसल काटते ही बेचना पसंद करते हैं और लंबे समय तक रोक कर नहीं रखते हैं। उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी की मूंगफली के भाव 6,250 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि चालू खरीफ सीजन के लिए केंद्र सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 6,377 रुपये प्रति क्विंटल है।

एसईए के अनुसार गुजरात के द्वारका जिले में मूंगफली का सबसे ज्यादा उत्पादन 5.80 लाख टन एवं जूनागढ़ में 4.90 लाख टन होने का अनुमान है। अन्य जिलों में जामनगर में 3.20 लाख टन, राजकोट में 3.95 लाख टन, पोरबंदर में 1.95 लाख टन, गिर सोमनाथ में 1.90 लाख टन, भावनगर में 1.70 लाख टन, अमरेली में 1.50 लाख टन, मोरबी में 1.05 लाख टन तथा सुरेंद्रनगर में 30 हजार टन होने का अनुमान है।

अन्य राज्यों कच्छ में 1.30 लाख टन, साबरकांठा में 1.25 लाख टन, बनासकांठा में 2.90 लाख टन तथा अरावली में 90 हजार टन तथा अन्य जिलों में 80 हजार टन के उत्पादन का अनुमान है।

चालू रबी में तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई आगे, दलहन एवं धान की पिछे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन के शुरूआती चरण में जहां तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई आगे चल रही है, वहीं दलहनी फसलों के साथ धान की रोपाई पिछड़ रही है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 21 अक्टूबर तक देशभर में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 12.93 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.97 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में 12.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.97 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। अन्य तिलहनों में मूंगफली की बुआई 19 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 3.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.88 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू सीजन में बढ़कर 2.90 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.04 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मक्का की बुआई चालू रबी में 73 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 70 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू रबी में 21 अक्टूबर तक केवल 3.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 4.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 3.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अविध के 3.51 लाख हेक्टेयर से कम है।

धान की रोपाई चालू रबी में 2.18 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले रबी सीजन की समान अवधि के 2.71 लाख हेक्टेयर से कम है।  

राइस मिलों की खरीद शुरू होने से धान की कीमतों में सुधार, दैनिक आवक भी बढ़ी

नई दिल्ली। राइस मिलों की खरीद शुरू होने से शुक्रवार को धान की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। साथ ही उत्पादक मंडियों धान की दैनिक आवकों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।


ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, एआईआरईए के अध्यक्ष नाथी राम गुप्ता ने राइस मिलर्स एवं निर्यातकों से कहां है धान की खरीद अपने विवेक से करे, क्योंकि बासमती सेला चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य, एमईपी को 1,200 डॉलर प्रति टन कम करने की फाइल जीओएम की बैठक में आने वाली है, तथा यह बैठक होने में अभी समय लग सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा बासमती सेला चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 1,200 डॉलर प्रति टन करने के साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को देखते हुए ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से चावल एवं धान की खरीद को बंद करने को कहां था, जिस कारण पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में पिछले चार, पांच दिनों से धान की खरीद लगभग बंद सी हो गई थी, साथ ही इसकी दैनिक आवकों में भी कमी आई थी। इसका असर मंडियों में धान की कीमतों पर भी पड़ा था।

पंजाब की अमृतसर मंडी में शुक्रवार को धान की दैनिक आवक बढ़कर एक लाख कट्टों की हुई तथा पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव 2,300 से 3,435 रुपये और 1,847 किस्म के धान के भाव 2,400 से 3,125 रुपये प्रति क्विंटल रहे। राज्य तरनतारन मंडी में धान की आवक 22,000 कट्टों की हुई तथा 1,509 किस्म के धान के दाम 150 रुपये तेज होकर 3,660 रुपये और कंबाइन के 2,700 से 3,610 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

हरियाणा की जींद मंडी में पूसा 1,121 किस्म के हाथ के धान के भाव 100 रुपये तेज होकर दाम 4,515 रुपये और 1,718 किस्म के धान के दाम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव 3,350 से 3,650 रुपये प्रति क्विंटल रहे। राज्य की खरखौदा मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के भाव 4,551 रुपये, 1,718 किस्म के धान के भाव 3,951 रुपये तथा 1,847 किस्म के धान के दाम 3,471 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

दिल्ली की नरेला मंडी में 1,121 किस्म के धान के दाम तेज होकर 4,614 रुपये, 1,718 किस्म के धान के भाव 4,000 रुपये और 1,509 किस्म के धान के भाव 3,200 से 3,470 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उत्तर भारत के राज्यों में पूसा 1,509 किस्म के सेला चावल का भाव 6,500 से 6,700 रुपये और इसके स्टीम चावल का 7,500 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा। 

दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 में रिकार्ड 32.35 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली फसल सीजन 2022-23 में देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड 32.35 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन 2021-22 में 31.56 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।


कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 में चावल का रिकार्ड उत्पादन 1,308.37 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2021-22 के दौरान उत्पादन 1,294.71 लाख टन का हुआ था।

इस दौरान गेहूं का उत्पादन बढ़कर 1,121.82 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है जबकि पिछले फसल सीजन के दौरान इसका उत्पादन 1,077.42 लाख टन का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान मक्का का रिकार्ड उत्पादन 346.13 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इसका उत्पादन 337.30 लाख टन का ही हुआ था। इस दौरान जौ का उत्पादन बढ़कर रिकार्ड 22.04 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इसका उत्पादन 13.71 लाख टन का ही हुआ था।

फसल सीजन 2022-23 के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार दालों का उत्पादन बढ़कर 278.10 लाख का रिकॉर्ड होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले फसल सीजन में उत्पादन 273.2 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।

दलहनी फसलों में अरहर का उत्पादन घटकर फसल सीजन 2022-23 के दौरान 36.66 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में उत्पादन 42.20 लाख टन का हुआ था। चना का उत्पादन बढ़कर 136.32 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले फसल सीजन में उत्पादन 135.44 लाख टन का ही हुआ था। अन्य दलहन में उड़द का 26.82 लाख टन तथा मूंग का 35.45 लाख टन होने का उत्पादन अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इनका उत्पादन क्रमश: 27.76 लाख टन और 31.66 लाख टन का हुआ था। मसूर का उत्पादन फसल सीजन 2022-23 के दौरान बढ़कर 15.99 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान 12.69 लाख टन का हुआ था।

दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान तिलहनी फसलों का उत्पादन 400.01 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2021-22 के दौरान इनका उत्पादन केवल 379.63 लाख टन का ही हुआ था। हालांकि तिलहनी फसलों में मूंगफली का उत्पादन घटकर 100.56 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले सीजन में 101.35 लाख टन का हुआ था। कैस्टर सीड का उत्पादन बढ़कर 18.82 लाख टन और शीशम का 7.49 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले फसल सीजन में इनका उत्पादन क्रमश: 16.19 लाख टन एवं 7.89 लाख टन का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 139.75 लाख टन होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले फसल सीजन में उत्पादन 129.87 लाख टन का ही हुआ था। दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान सरसों का उत्पादन 128.28 लाख टन होने का होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले सीजन में उत्पादन 119.63 लाख टन का हुआ था।

कपास का उत्पादन फसल सीजन 2022-23 के दौरान बढ़कर 337.23 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2021-22 के दौरान उत्पादन 311.18 लाख गांठ होने का अनुमान है। 

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में डीओसी का निर्यात 29 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान डीओसी का निर्यात 29 फीसदी बढ़कर 2,276,121 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 1,762,343 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार सितंबर में डीओसी का निर्यात 37 फीसदी बढ़कर 330,568 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अगस्त में इसका निर्यात केवल 240,669 टन का ही हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर में सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 586,850 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 121,338 टन का हुआ था। इसी तरह से सरसों डीओसी का निर्यात अप्रैल से सितंबर के दौरान बढ़कर 1,344,495 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में निर्यात केवल 1,240,733 टन का हुआ था। हालांकि राइस ब्रान डीओसी का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में घटकर 151,614 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 204,895 टन का हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर के दौरान कैस्टर डीओसी का निर्यात बढ़कर 181,996 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 154,291 टन का हुआ था।

भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी का भाव सितंबर 23 में घटकर औसतन 545 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर 2022 में इसका दाम 565 डॉलर प्रति टन था। हालांकि इस दौरान सरसों डीओसी का भाव सितंबर 23 में भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 314 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि पिछले साल सितंबर 22 में भी इसका भाव 295 डॉलर प्रति टन ही था। कैस्टर डीओसी का दाम सितंबर 23 में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 120 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर 22 में इसका दाम 152 डॉलर प्रति टन था।  

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान दक्षिण कोरिया और वियतनाम को डीओसी के निर्यात में कमी आई है जबकि इस दौरान थाईलैंड और बांग्लादेश तथा ताइवान को निर्यात में बढ़ोतरी हुई है।

केंद्र ने चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर 23 से अगले आदेश तक बढ़ाया

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर 2023 से अगले आदेश तक बढ़ा दिया है।


वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 18 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध को 31 अक्टूबर 2023 से अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। सरकार ने चीनी का निर्यात 1 जून, 2022 से प्रतिबंधित कर दिया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश में कमी की आशंका के बीच घरेलू खपत के लिए पर्याप्त स्टॉक हो।

चालू सीजन प्रतिकूल मौसम से प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र के साथ ही कर्नाटक में गन्ने की पैदावार में कमी आने की आशंका है। अत: पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका है। 

महाराष्ट्र में कपास, गन्ने के साथ ही दलहन एवं तिलहन के उत्पादन में कमी की आशंका

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में प्रतिकूल मौसम का असर महाराष्ट्र में खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। राज्य के कृषि निदेशालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में कपास के साथ ही गन्ने एवं दलहन तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।


राज्य के कृषि निदेशालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ में कपास का उत्पादन घटकर 75.73 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल राज्य में 84.13 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।

इस दौरान राज्य में गन्ने का उत्पादन घटकर 10,68,05,200 टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल गन्ने की पैदावार 13,57,54,300 टन की हुई थी।

आरंभिक अनुमान के अनुसार दलहनी फसलों का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 10.69 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल खरीफ में इनका उत्पादन 13.96 लाख टन का हुआ था। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन घटकर 8.76 लाख टन, उड़द का 87 हजार टन एवं मूंग का 59,900 टन ही होने का अनुमान है। पिछले खरीफ सीजन में राज्य में अरहर का उत्पादन 9.25 लाख टन का, उड़द का 2.25 लाख टन और मूंग का 1.70 लाख टन का हुआ था।

तिलहनी फसलों में सोयाबीन का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 47.72 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल राज्य में 66.05 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 1.24 लाख टन, शीशम का 1,100 टन एवं नाइजर सीड का 1,000 टन तथा सनफ्लावर का 600 टन का ही होने का अनुमान है। पिछले खरीफ में राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.90 लाख टन का, शीशम का 1,500 टन एवं नाइजर सीड का 1,300 टन तथा सनफ्लावर का 6,900 टन का हुआ था।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चावल का उत्पादन 34.48 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले खरीफ में इसका उत्पादन 34.53 लाख टन का हुआ था। मक्का का उत्पादन 13.57 लाख टन और बाजरा का 2 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ में इनका उत्पादन क्रमश: 27.12 लाख टन का और 4.44 लाख टन का हुआ था। रागी का उत्पादन चालू खरीफ में 81,000 टन एवं ज्वार का 90,800 टन ही होने का अनुमान है। 

केंद्र ने पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर शुल्क की अवधि को 31 मार्च 2024 तक बढ़ाया

नई दिल्ली। सरकार ने त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले घरेलू बाजार में चावल की कीमत को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर शुल्क की अवधि को 31 मार्च 2024 तक बढ़ा दिया है।


वित्त मंत्रालय द्वारा 13 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर शुल्क की अवधि को 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया है। घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अगस्त में पारबॉइल्ड चावल के निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने का फैसला किया था। 

सितंबर में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पांच फीसदी घटा - उद्योग

नई दिल्ली। सितंबर में देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पांच फीसदी घटकर 1,552,026 टन का ही हुआ, जबकि पिछले साल सितंबर-22 में इनका आयात 1,637,239 टन का हुआ था। सितंबर के दौरान खाद्वय तेलों का आयात 1,494,086 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 57,940 टन का हुआ है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष 2022-23 (नवंबर-22 से अक्टूबर-23) की पहले 11 महीनों नवंबर-22 एवं सितंबर-23 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात इसके पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 20 फीसदी बढ़कर 15,673,102 टन का हुआ है। जबकि पिछले साल नवंबर से सितंबर के दौरान इनका आयात 13,013,465 टन का हुआ था।

चालू तेल वर्ष की पहले 11 महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात बढ़कर 154.69 लाख टन को देखते हुए, अक्टूबर 23 में समाप्त होने वाले चालू तेल वर्ष के दौरान इसका कुल आयात बढ़कर 165 से 170 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इससे पहले देश में खाद्वय तेलों का रिकॉर्ड आयात 2016-17 में 151 लाख टन का हुआ था।

देशभर में अगस्त में मानसूनी बारिश की भारी कमी, के बाद सितंबर में ज्यादा हुई। हालांकि चालू मानसूनी सीजन में कुल बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई। खरीफ तिलहन की बुआई पिछले साल के 196 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ी कम होकर 193 लाख हेक्टेयर में ही हुई।  सोयाबीन और कैस्टर सीड की बुआई में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि मुख्य रूप से सौराष्ट्र में सोयाबीन की बुआई अधिक होने से मूंगफली की बुआई में कमी आई।

एसईए के अनुसार नवंबर 22 से सितंबर 23 के दौरान, पाम उत्पादों का आयात तेजी से बढ़ा और पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के 7,028,032 टन की तुलना में बढ़कर 9,080,986 टन का हो गया। कुल आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी 55 फीसदी से बढ़कर 59 फीसदी हो गई। पिछले छह महीनों में, सूरजमुखी और सोयाबीन तेलों की शिपमेंट में भी वृद्धि हुई है और चालू तेल वर्ष के पहले ग्यारह महीनों के दौरान कुल आयात 6,387,926 टन हो गया है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में 5,635,813 टन का आयात हुआ था, अत: इन तेलों की हिस्सेदारी 45 फीसदी से घटकर 41 फीसदी रह गई।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में आयातित खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलिन का भाव घटकर 867 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि अगस्ता में इसका भाव 894 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव सितंबर में घटकर 883 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि अगस्त में इसका भाव 924 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड सोयाबीन तेल का भाव अगस्त के 1,0856 डॉलर से घटकर सितंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1000 डॉलर प्रति टन रह गया। क्रूड सनफ्लावर तेल का भाव अगस्त के 1,005 डॉलर प्रति टन से घटकर सितंबर में 911 डॉलर प्रति टन रह गया। 

नवंबर में नई फसल की आवक बनने की संभावना से कैस्टर सीड की कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली। उत्तर गुजरात के साथ ही कच्छ में कैस्टर सीड की अगेती बुआई थी, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगेती फसल की आवक दीपावली बाद शुरू हो जायेगी, तथा नवंबर के अंत एवं दिसंबर में आवकों में बढ़ोतरी होगी। साथ ही उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड का बकाया स्टॉक भी ज्यादा माना जा रहा है। इसलिए कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

राजकोट में गुरुवार को कैस्टर सीड के भाव 20 रुपये कमजोर होकर दाम 1,185 से 1,200 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। इस दौरान गोंडल मार्केट में इसके दाम 10 रुपये कमजोर होकर भाव 1,125 से 1,160 रुपये, जूनागढ़ में 20 रुपये कमजोर होकर 1,110 से 1,130 रुपये और  जामनगर में इसके भाव घटकर 1,120 से 1,140 रुपये प्रति 20 किलो रह गए।

राजकोट में कैस्टर तेल के दाम कमर्शियल के 10 रुपये कमजोर होकर भाव 1,210 रुपये तथा राजकोट में एफएसजी के भाव 10 रुपये नरम होकर 1,230 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

व्यापारियों के अनुसार गुजरात के साथ ही राजस्थान को मिलाकर कैस्टर सीड की दैनिक आवक 45 से 50 हजार बोरी, एक बोरी 35 किलो की आवक हो रही है। उत्पादक राज्यों में किसानों के साथ ही स्टॉकिस्टों के पास कैस्टर सीड का बकाया स्टॉक भी पिछले साल की तुलना में ज्यादा माना जा रहा है कि जबकि दीपावली के बाद नई फसल की शुरूआती आवक बनेगी तथा दिसंबर में आवकों में बढ़ोतरी होगी।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार सितंबर में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 43,258 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल सितंबर में इसका निर्यात केवल 34,042 टन का ही हुआ था। जानकारों के अनुसार पिछले तीन महीनों अगस्त से सितंबर के दौरान कैस्टर तेल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 3,16,653 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की छमाही में इसका निर्यात केवल 3,14,732 टन का ही हुआ था।

चालू खरीफ सीजन में कैस्टर सीड की बुआई 9.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


महाराष्ट्र में चालू खरीफ में दलहन उत्पादन में 35 फीसदी कमी आने की आशंका

नई दिल्ली। प्रतिकूल मौसम के कारण चालू खरीफ सीजन में महाराष्ट्र में दालों के उत्पादन में 35 फीसदी की कमी आने की आशंका है। इसके साथ ही मोटे अनाज के उत्पादन में भी कमी आने का अनुमान है।

राज्य के कृषि निदेशालय द्वारा जारी अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में राज्य में दालों का उत्पादन घटकर 10.6 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन 16.5 लाख टन की तुलना में 35 फीसदी कम है।

खरीफ दलहन की प्रमुख अरहर का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 8.7 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के औसत उत्पादन 12.5 लाख टन की तुलना में 30 फीसदी कम है। इसी तरह से उड़द का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 0.8 लाख टन और मूंग का 0.6 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले पांच साल के औसतन उत्पादन क्रमश: 1.7 लाख टन और 1.7 लाख टन का हुआ था।

चालू खरीफ में मोटे अनाजों का उत्पादन चालू खरीफ में राज्य में घटकर 51.9 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन 63.3 लाख की तुलना में 18 फीसदी कम है।

मोटे अनाजों में मक्का का उत्पादन 13.5 लाख टन और बाजार का दो लाख टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन क्रमश: 22.9 लाख टन एवं 5.9 लाख टन के मुकाबले कम है। ज्वार का उत्पादन भी चालू खरीफ में घटकर 0.9 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि पिछले पांच साल के औसत उत्पादन 2.7 लाख टन से कम है।

सरकार ने बासमती चावल के एमईपी को घटाकर 950 डॉलर प्रति टन किया

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। बासमती चावल की अधिक कीमत के कारण इसका निर्यात प्रभावित होने की चिंताओं के बीच सरकार ने बासमती चावल निर्यात के लिए न्यूनतम मूल्य को 1,200 डॉलर प्रति टन से घटाकर 950 डॉलर प्रति टन कर दिया है।

निर्यात संवर्धन निकाय एपीडा को भेजे एक पत्र में वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि बासमती चावल के निर्यात के लिए अनुबंध पंजीकरण के लिए मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से संशोधित कर 950 डॉलर प्रति टन करने का निर्णय लिया गया है।

इसके साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को केवल उन्हीं अनुबंधों को पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है जिनका मूल्य 950 डॉलर प्रति टन और उससे अधिक है।

सरकार ने 27 अगस्त को प्रीमियम बासमती चावल की आड़ में सफेद गैर-बासमती चावल के ‘अवैध’ निर्यात पर रोक लगाने के लिए 1,200 डॉलर प्रति टन से कम मूल्य वाले बासमती चावल के निर्यात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया था।

कीमत के हिसाब से वित्त वर्ष 2022-23 में भारत का बासमती चावल का कुल निर्यात 4.8 अरब डॉलर का रहा, जबकि मात्रा के हिसाब से यह 45.6 लाख टन था।

चावल निर्यातक संघ पिछले दो महीनों से इस आधार मूल्य में कटौती की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण भारत अपना निर्यात बाजार खो रहा है।

उनका यह तर्क भी रहा है कि पिछले दो-तीन वर्षों में भारत की औसत निर्यात प्राप्ति 800-900 डॉलर प्रति टन रही है।

इन मांगों के बीच खाद्य मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को कहा था कि सरकार आधार मूल्य कम करने की उद्योग की मांग पर विचार कर रही है।

अंतिम अनुमान के अनुसार, चावल का उत्पादन वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 13 करोड़ 57.5 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके एक साल पहले यह उत्पादन 12 करोड़ 94.7 लाख टन था।

उद्योग के अनुसार, वर्ष 2021 और वर्ष 2022 में बासमती चावल का औसत निर्यात मूल्य 850-900 डॉलर प्रति टन रहा।

इस साल 1,200 डॉलर प्रति टन से नीचे के अनुबंधों को पंजीकृत नहीं करने के फैसले से पहले यह दाम लगभग 1,050 रुपये प्रति टन था।

जानकारों के अनुसार सरकार के इस कदम से वैश्विक बाजारों में भारतीय बासमती चावल निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल होगी, साथ ही इस फैसले से निर्यातकों और किसानों को राहत मिलेगी।

व्यापारियों के अनुसार बासमती चावल की लगभग 40 किस्में हैं जिनकी औसत कीमत 850-1,600 डॉलर प्रति टन तक है। बासमती चावल की निचली किस्मों का निर्यात बाजार में 70 प्रतिशत योगदान है।

09 अक्तूबर 2023

MANDI- NARELA paddy rate 9 Oct. Delhi.

 MANDI- NARELA Delhi.


Paddy 1509 

Arrival 50000 bag

Comb..@3200 to 3553/

Hand ..@3500 to 3747/


Paddy 1847

Arrival 7000 bag

Comb..@2800 to 3200/

Hand @3100 to 3451/


Paddy Taj

Arrival 7000 bag

Comb@2300 to 2550/

Hand @2600 to 2761/


Rh 10

Arrival 1000 

Hand @2300to 2580/


Paddy 1121 

Arrival 50 bag 

 Comb.@4502/

दिनांक 09 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार बाजार बंद (MARKET CLOSE)

 दिनांक 09 अक्टूबर 2023  दिन सोमवार  बाजार बंद (MARKET CLOSE) 


दिल्ली (DELHI) 

चना (CHANA) एमपी नया(MP NEW)-6275/6300+75

राजस्थान नया(RAJ.NEW)-6300/25+50

मसूर (MASUR) (2/50 kG)-6575/6600+25

मूंग(MUNG) 

राजस्थान (RAJ.) लाइन (LINE)-8600+75

मोठ(MOTH) (राजस्थान RAJ.) नया (NEW)-6900+50

गेंहू(WHEAT) एमपी&यूपी&राज. (MP&UP& RAJ.)-2650+25

तुवर (TUAR )  

लेमन (LEMON)-11800+0

महाराष्ट्र (MAH)-11900+0

उड़द (URAD)

एफएक्यू (FAQ)-8850+0

एसक्यू (SQ)-9700+0

उत्तर भारत के राज्यों में कपास का उत्पादन 50 लाख गांठ से ज्यादा होने का अनुमान

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में बुआई में हुई बढ़ोतरी से उत्तर भारत के राज्यों में कपास का उत्पादन बढ़कर 50.02 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ सीजन में उत्पादन 41.21 लाख गांठ का हुआ था।


इंडियन कॉटन एसोसिएशन लिमिटेड के अनुसार फसल सीजन 2023-24 में पंजाब में कपास का उत्पादन बढ़कर 4.89 लाख गांठ का होने का अनुमान है, जोकि पिछले फसल सीजन के 2.52 लाख गांठ से ज्यादा है। इस दौरान हरियाणा में कपास का उत्पादन बढ़कर 17.48 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 9.88 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। राजस्थान की गंगानगर लाइन में कपास का उत्पादन 16.25 लाख गांठ और लोअर राजस्थान में 12.61 लाख गांठ होने का अनुमान है। पिछले फसल सीजन में इनमें कपास का उत्पादन क्रमश: 19 लाख गांठ एवं 10.79 लाख गांठ का हुआ था।

इन राज्यों में सितंबर में नई कपास की आवक 3.60 लाख गांठ की हो चुकी है जबकि पिछले साल सितंबर में आवक 2.12 लाख गांठ की हुई थी।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5960 से 6060 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव में घटकर 5900 से 6000 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम नरम होकर 5825 से 6070 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम 6075 से 6100 रुपये प्रति मन बोले गए।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई 16.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

महाराष्ट्र में सोयाबीन और कपास की बुआई बढ़ी, मूंगफली एवं अरहर की घटी

नई दिल्ली। चालू खरीफ में महाराष्ट्र में जहां सोयाबीन और कपास की बुआई बढ़ी है, वहीं मूंगफली के साथ ही अरहर की बुआई घटी है। दलहन की कुल बुआई भी चालू खरीफ में पिछले साल की तुलना में कम हुई है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 3 अक्टूबर तक राज्य में सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 50.85 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के 49.09 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू सीजन में 52.45 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल के 51 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 1.43 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई 1.60 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 3 अक्टूबर तक घटकर 16.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक बुआई 18.84 लाख हेक्टेयर में हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर राज्य में 11.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 11.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से मूंग की बुआई चालू खरीफ में 1.81 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 2.56 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.69 लाख हेक्टेयर में और 3.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मक्का की बुआई चालू खरीफ में 9.13 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 8.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 15.32 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय 15.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। ज्वार की बुआई चालू सीजन में घटकर 1.11 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राज्य में कपास की बुआई बढ़कर 42.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 42.29 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

राज्य में चालू खरीफ सीजन में कुल फसलों की बुआई 141.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 143.09 लाख हेक्टेयर से कम है।

आयातित खाद्य तेल सस्ते होने से कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा, बिनौले में मिलाजुला रुख

नई दिल्ली। आयातित खाद्वय तेलों के दाम सस्ते होने के साथ ही वनस्पति घी निर्माताओं की मांग कमजोर होने से गुरुवार को कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा आया, जबकि इस दौरान बिनौला के भाव मिलाजुला रुख रहा। कपास खली की कीमतें स्थिर बनी रही।


व्यापारियों के अनुसार आगामी दिनों में आपूर्ति बढ़ने से कॉटन वॉश की उपलब्धता बढ़ेगी, जबकि सबसे बड़े आयातक भारत और चीन मांग कमजोर बनी हुई है। इसलिए विश्व बाजार में अभी खाद्वय तेलों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट का रुख रहा, अत: घरेलू बाजार में कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा आया। अकोला में कॉटन वॉश के दाम 10 रुपये कमजोर होकर भाव 785 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 20 रुपये घटकर 785 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। जालना में कॉटन वॉश की कीमतें कमजोर होकर 775 रुपये प्रति दस किलो के स्तर पर आ गई।

मलेशियाई पाम तेल की कीमतों में 2.8 फीसदी की गिरावट आई, साथ ही शिकागो में भी सोया तेल की कीमतें कमजोर हुई। कपास की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में लगातार बढ़ रही है, जिससे कॉटन वॉश की उपलब्धता आगे और बढ़ेगी। विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है इसलिए इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है, लेकिन ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है।

तेल मिलों की ग्राहकी सीमित बनी रहने से बिनौले के भाव में उत्तर भारत के राज्यों में मिलाजुला रुख रहा। हरियाणा में बिनौले के भाव 3050 से 3150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान श्रीगंगानगर लाइन में बिनौला के भाव 50 रुपये बढ़कर 3250 से 3450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 50 रुपये नरम होकर 3100 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

तेल मिलों की सीमित मांग के कारण बिनौला की कीमतों में उत्तर भारत में मिलाजुला रुख रहा। भारत के साथ ही चीन की आयात मांग कमजोर होने के कारण विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी आगामी दिनों में घरेलू मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ने से बिनौला की उपलब्धता बढ़ेगी। आयात ज्यादा होने से घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों का बकाया स्टॉक ज्यादा है। इसलिए बिनौला की मौजूदा कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

ग्राहकी सीमित बनी रहने से कपास खली की कीमतें स्थिर बनी रही। पिंपलगाव में कपास खली की कीमतें 2900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। इस दौरान जितुंर में पतली कपास खली के दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मोरबी में शुगर बारदाने में कपास खली के दाम 1620 रुपये प्रति 50 किलो पर स्थिर हो गए।

तेल मिलों की बिक्री नीचे दाम पर कम आने से कपास खली की कीमतें गुरुवार को स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर तेल मिलों को पड़ते नहीं लग रहे हैं, इसलिए बिकवाली तो कमजोर है, लेकिन बढ़े दाम पर खपत राज्यों की मांग भी सीमित बनी हुई है। ऐसे में इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है, इसलिए आगामी दिनों बिनौला की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कपास खली का उत्पादन बढ़ेगा।

खरीफ में धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी, दलहन एवं तिलहन की घटी

नई दिल्ली। चालू मानसूनी सीजन में बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन में धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है, जबकि दलहन के साथ ही तिलहन एवं कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में कम हुई है।


चालू खरीफ सीजन में 29 सितंबर तक कुल फसलों की बुआई बढ़कर 1107.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1104.79 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 29 सितंबर के दौरान देशभर में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रोपाई 411.96 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 404.27 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 123.57 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 128.98 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 43.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 46.13 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई घटकर चालू सीजन में 33.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 33.52 लाख हेक्टेयर से कम है।

इस दौरान मूंग की बुआई घटकर 31.94 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 33.99 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 14.21 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई इस समय तक 14.81 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 188.02 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 184.77 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में 14.53 लाख हेक्टेयर में, बाजरा की 70.95 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 85.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 15.88 लाख हेक्टेयर में, तथा 70.59 लाख हेक्टेयर में एवं 82.62 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

रागी की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 11 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.64 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 193.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 196.39 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 43.91 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 125.62 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 12.43 लाख हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 9.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 45.53 लाख हेक्टेयर में, 124.79 लाख हेक्टेयर में, 13.44 लाख हेक्टेयर में और 9.31 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 29 सितंबर तक कपास की बुआई 123.87 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 127.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 59.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मानसूनी बारिश की कमी से चालू खरीफ में कपास की बुआई तीन फीसदी घटी

नई दिल्ली। देशभर में मानसूनी बारिश 6 फीसदी कम होने से चालू खरीफ सीजन में कपास की बुआई में 3.02 फीसदी की कमी आई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 29 सितंबर तक कपास की बुआई घटकर 123.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 127.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक देशभर में सामान्य की तुलना में 6 फीसदी बारिश कम हुई है।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 16.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक हरियाणा में बारिश सामान्य से एक फीसदी कम, पंजाब में सामान्य से 5 फीसदी कम तथा राजस्थान में सामान्य से 15 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

गुजरात में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 26.82 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 25.48 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

महाराष्ट्र में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 42.34 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 42.29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से तीन फीसदी कम बारिश हुई है।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर 6.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य बारिश हुई है।

तेलंगाना में कपास की बुआई खरीफ में घटकर 18.12 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 20.23 लाख हेक्टेयर से कम है। आंध्र प्रदेश में कपास की बुआई खरीफ में घटकर 3.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.47 लाख हेक्टेयर से कम है।

आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक तेलंगाना में सामान्य से 15 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इस दौरान आंध्र प्रदेश में सामान्य से सात फीसदी कम बारिश हुई है।

कर्नाटक में कपास की बुआई खरीफ में घटकर 6.97 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.25 लाख हेक्टेयर से कम है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई है।

ओडिशा में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 2.35 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से तीन फीसदी कम बारिश हुई है।