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25 नवंबर 2023

दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी

 केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने दिसंबर के लिए चीनी का कोटा 24 लाख टन का जारी किया है। 

दलहन एवं तिलहन के साथ धान की बुआई चालू रबी सीजन में पिछड़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन एवं तिलहन के साथ ही धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 24 नवंबर तक दलहन की बुआई घटकर 94.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 103.32 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 66.19 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 75.07 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 12.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 12.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 7.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.62 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 1.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.46 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 82.01 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 82.53 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 77.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 77.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 1.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.07 लाख हेक्टेयर से कम है। सफ्लावर की बुआई चालू रबी में 37 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 41 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई चालू में बढ़कर 1.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.65 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

धान की रोपाई चालू रबी में 8.41 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.15 लाख हेक्टेयर से कम है।

खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर, अरहर एवं उड़द के साथ मूंग तथा मसूर में गिरावट

नई दिल्ली। खुदरा के साथ ही थोक में दालों में ग्राहकी कमजोर होने से इनकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। घरेलू बाजार में गुरुवार को अरहर एवं उड़द के साथ ही मूंग तथा मसूर की कीमतों में मंदा आया, जबकि इस दौरान चना की कीमतें स्थिर हो गई।


चेन्नई में बर्मा की उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उड़द एफएक्यू के भाव दिसंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के दाम 15 डॉलर कमजोर होकर भाव 1,080 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के दाम 20 डॉलर घटकर 1,170 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए। बर्मा में लेमन अरहर के भाव दिसंबर शिपमेंट के 1,450 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।
 
आयात पड़ते सस्ते होने के कारण घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी उड़द की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट जारी रही। व्यापारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश की मंडियों में नई उड़द की छिटपुट आवक हो रही है, तथा चालू महीने के अंत तक आवक बढ़ने की उम्मीद है। वैसे भी मध्य दिसंबर तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं तेलंगाना की नई फसल आयेगी। उधर बर्मा में भी दिसंबर में एक छोटी फसल आती है। ऐसे में दाल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, इसलिए उड़द की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। हालांकि खपत का सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग बनी रहने के आसार है, जबकि उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी की देसी उड़द की आवक कम हो रही है। इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में हल्की गिरावट और भी आ सकती है।

घरेलू बाजार में आयातित के साथ ही देसी अरहर की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उधर कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र की मंडियों में भी नई अरहर की छिटपुट आवक शुरू हो गई है तथा इन राज्य की मंडियों में आवक चालू महीने के अंत तक बढ़ेगी। हालांकि आवकों का दबाव दिसंबर में ही बनेगा। जानकारों के अनुसार इन राज्यों में अरहर के उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है, लेकिन केंद्र सरकार लगातार दलहन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण आगामी दिनों में अरहर दाल की खुदरा एवं थोक मांग बनी रहने के आसार हैं। बर्मा के साथ ही अफ्रीकी देशों से अरहर के आयात पड़ते महंगे है। इसलिए मौजूदा कीमतों में धीरे, धीरे गिरावट आयेगी।

चना की कीमतें घरेलू बाजार में स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार चना में जहां नीचे दाम पर बिकवाली कम हो जाती है, वहीं बढ़े दाम पर मिलें भी जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही हैं। उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है, तथा स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण भी दाल मिलों के पास सप्लाई तंग है। वैसे भी चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। खपत का सीजन होने के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी। नेफेड के पास बफर स्टॉक एवं अन्य कल्याणकारी योजना के अलावा खुले बाजार में बेचने के लिए चना का स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है। इसलिए इसकी मौजूदा कीमतों में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने पिछले चार महीने में करीब 13 लाख चना की बिक्री खुले बाजार में की है, अत: अब केंद्र सरकार के पास अब 18 से 19 लाख टन चना का बकाया स्टॉक ही बचा हुआ है। इसमें से 10 लाख टन बफर स्टॉक का एवं करीब छह लाख टन अन्य कल्याणकारी योजनाओं में खपत होगा। ऐसे में अब खुले बाजार में बेचने के लिए दो से तीन लाख टन चना का ही बकाया स्टॉक बचा हुआ है।

देसी मसूर के दाम दिल्ली में नरम हुए, जबकि मुंबई में आयातित की कीमतें स्थिर बनी रही। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में कनाडा से मसूर का आयात ज्यादा मात्रा में हुआ है, जिस कारण इसकी कीमतों में मंदा आया था। हालांकि व्यापारी अभी मसूर में बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है, क्योंकि खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार, बंगाल एवं असम की मांग आगामी दिनों में बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है। वैसे भी उत्पादक राज्यों में किसानों के पास देसी मसूर का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है। इसलिए स्टॉकिस्टों एवं आयातकों दाम घटाकर बिकवाली नहीं करना चाहते।

आस्ट्रेलिया में मसूर की कटाई जोरों पर है, तथा चालू सीजन में इसके उत्पादन में पिछले साल की तुलना में कमी आने की आशंका है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन 1.69 मिलियन टन की तुलना में घटकर 1.23 मिलियन टन का ही होने का अनुमान है।

स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से मूंग की कीमतें दिल्ली में कमजोर हो गई, जबकि उत्पादक मंडियों में इसके दाम स्थिर बनी रहे। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल में मांग बनी रहेगी, तथा चालू सीजन में मूंग की बुआई कम हुई। वैसे भी अगस्त में बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ मूंग की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता पिछले साल की तुलना में कम बैठ रही है। हालांकि उत्पादक राज्यों में नई मूंग की दैनिक आवक बराबर बनी हुई है साथ ही नेफेड राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश में लगातार मूंग की बिकवाली कर रही है। इसलिए एकतरफा बड़ी तेजी के आसार कम है।

चेन्नई में एसक्यू उड़द के दाम 9,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान एफएक्यू उड़द की कीमतें कमजोर होकर 8,800 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई।

दिल्ली में एसक्यू उड़द के दाम 50 रुपये कमजोर होकर दाम 10,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान एफएक्यू उड़द की कीमतें 75 रुपये नरम होकर 9,200 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

मुंबई में उड़द के दाम 150 रुपये घटकर दाम 8,850 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

सोलापुर मंडी में नई देसी उड़द के भाव 8,000 से 10,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान इंदौर मंडी में बोल्ड उड़द के भाव 9,201 से 9,701 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चेन्नई में लेमन अरहर के दाम 125 रुपये कमजोर होकर भाव 10,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के दाम 200 रुपये कमजोर होकर भाव 11,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में लेमन अरहर के दाम 250 रुपये कमजोर होकर भाव 10,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें कमजोर हो गई। सूडान से आयातित अरहर के दाम 200 रुपये घटकर 11,100 से 11,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 100 रुपये घटकर दाम 8,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मतवारा अरहर के भाव 150 रुपये घटकर दाम 8,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम 25 रुपये नरम होकर 6,550 से 6,575 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के दाम 6025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर कनाडा की मसूर के भाव 6100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। ऑस्ट्रेलिया की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6300 से 6350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। कनाडा की मसूर की कीमतें कंटेनर में 6300 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई।

दिल्ली में राजस्थान लाइन के चना के दाम 6,475 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन में चना के भाव 6,400 से 6,425 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में मूंग के भाव 200 रुपये कमजोर होकर दाम 8,300 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान जयपुर मंडी में मूंग के बिल्टी भाव 7500 से 8600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इंदौर में बोल्ड मूंग के भाव 8000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 269.95 लाख टन के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2023-24 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 269.95 लाख टन की हो चुकी है। अभी तक हुई कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब एवं हरियाणा की है।


पंजाब से चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 178.57 लाख टन की हो चुकी है, जबकि हरियाणा की मंडियों से इस दौरान समर्थन मूल्य पर 58.78 लाख टन धान खरीदा जा चुका है।

इस दौरान छत्तीसगढ़ से 9.05 लाख टन, तमिलनाडु से 5.38 लाख टन तथा तेलंगाना से 8.07 लाख टन एवं उत्तराखंड से 4.09 लाख टन तथा उत्तर प्रदेश की मंडियों से 4.81 लाख टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है।

अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश से 21,826 टन, बिहार से 28,669 टन, गुजरात से 8,263 टन, हिमाचल प्रदेश से 20,795 टन तथा जम्मू-कश्मीर से 16,948 टन के अलावा केरल से 20,074 टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीद हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए कॉमन ग्रेड धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 2,183 रुपये और कॉमन ग्रेड धान का एमएसपी 2,203 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 

गुजरात में चालू रबी में चना एवं सरसों के साथ ही अन्य फसलों की बुआई घटी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में गुजरात में चना एवं सरसों के साथ ही अन्य फसलों की बुआई में भारी कमी आई है। जानकारों के अनुसार सितंबर में राज्य में औसत से कम बारिश का असर फसलों की बुआई पर पड़ा है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 20 नवंबर तक सरसों की बुआई केवल 1.66 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अत: राज्य में सरसों की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 33 फीसदी पिछड़ रही है।

इसी तरह से चालू रबी में दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में करीब 44 फीसदी पिछड़कर 1.86 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.31 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू रबी में 2.14 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 3.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई चालू रबी में राज्य में 33 फीसदी घटकर केवल 1.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.81 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

मोटे अनाजों में ज्वार एवं बाजरा तथा अन्य फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 2.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.49 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। 

विदेश में दाम कमजोर होने से घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें घटी

नई दिल्ली। विदेशी बाजार में दाम कमजोर होने से स्पिनिंग मिलों की मांग स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर हो गई, जिससे उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में कॉटन के दाम नरम हो गए।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 56,600 से 57,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5525 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5500 से 5600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5325 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम 55,200 से 55,500 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 1,25,600 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई। एमएसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में शाम के सत्र में गिरावट का रुख रहा।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट का रुख देखा गया। उत्तर भारत के साथ ही गुजरात में स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने से कॉटन की कीमतें नरम हुई। व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है, जबकि उत्पादक मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ रही है। घरेलू बाजार से यार्न की स्थानीय मांग बढ़ने पर ही कॉटन की कीमतों में तेजी टिक पायेगी।

हालांकि देश के कई राज्यों की मंडियों से कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई कपास की एमएसपी पर खरीद कर रही है। जानकारों के अनुसार त्योहारी छुट्टियों के कारण पिछले सप्ताह जहां कपास की आवक कम हो रही थी, वहीं आगामी दिनों में इसकी दैनिक आवक बढ़ेगी।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन 294.10 लाख गांठ होने का जारी किया है, जबकि पहले आरंभिक अनुमान में 295.10 लाख गांठ होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों में आज मिलाजुला रुख रहा, जबकि घरेलू बाजार में कॉटन वॉश के दाम स्थिर बने रहे। राजकोट में कॉटन वॉश के दाम 880 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 865 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बने रहे। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें 885 रुपये प्रति दस किलो पर स्थिर बनी रही।

सीएआई ने कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख गांठ की कटौती की

नई दिल्ली,उद्योग ने पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में कॉटन के आरंभिक अनुमान में एक लाख  गांठ की कटौती कर कुल उत्पादन 294.10 लाख गांठ होने का जारी किया है, जबकि पहले आरंभिक अनुमान में 295.10 लाख गांठ होने का अनुमान था। फसल सीजन 2022-23 के दौरान देशभर में 318.90 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।


कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के दूसरे आरंभिक अनुसार के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों पंजाब में कॉटन का उत्पादन फसल सीजन 2023-24 में 4.50 लाख गांठ, हरियाणा में 15 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 11 लाख गांठ एवं लोअर राजस्थान के 11.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 42 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार मध्य भारत के राज्यों गुजरात में चालू फसल सीजन में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76.60 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश के 18 लाख गांठ को मिलाकर कुल 179.60 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में चालू फसल सीजन में 30 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 12.50 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 18.50 लाख गांठ तथा तमिलनाडु के 6.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 67.50 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

ओडिशा में चालू खरीफ में 3 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार अक्टूबर 23 में देशभर की मंडियों में 24.34 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी है।

नई फसल की आवकों के समय पहली अक्टूबर को 28.90 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक था, जबकि अक्टूबर में 24.34 लाख गांठ की आवक हुई। इस दौरान 1.50 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंची। अत: अक्टूबर अंत में कुल उपलब्धता 54.74 लाख गांठ की बैठी, जिसमें से 26 लाख गांठ की घरेलू खपत हुई तथा एक लाख गांठ की निर्यात शिपमेंट हुई। अत: अक्टूबर अंत में मिलों के पास करीब 25 लाख गांठ का तथा सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी एवं जिनर्स के व्यापारी तथा निर्यातकों के पास 2.74 लाख गांठ का बकाया स्टॉक है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 को कॉटन का बकाया स्टॉक 28.90 लाख गांठ का बचा हुआ था, जबकि 294.10 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में करीब 22 लाख गांठ कॉटन का आयात होने की उम्मीद है। ऐसे में कुल उपलब्धता 345 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल घरेलू खपत 311 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि इस दौरान 14 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद है। ऐसे में कॉटन का बकाया स्टॉक आगामी नई फसल की आवक के समय 20 लाख गांठ का बचेगा।

बुआई में कमी के साथ ही अगस्त में बारिश की भारी कमी का असर चालू सीजन में कपास की फसल पर पड़ा है, जिस कारण इसके उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।

दलहन एवं तिलहन के साथ धान की बुआई घटी, मोटे अनाजों की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन एवं तिलहन के साथ ही धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है, जबकि इस दौरान मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 17 नवंबर तक दलहन की बुआई घटकर 65.16 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 69.37 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 44.66 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 49.64 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 8.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 7.60 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 5.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 5.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 1.45 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.85 लाख हेक्टेयर से कम है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी सीजन में बढ़कर 18.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.85 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 12.38 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 3.21 लाख हेक्टेयर में तथा जौ की 2.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 9.33 लाख हेक्टेयर में तथा 3.49 लाख हेक्टेयर एवं 2.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में घटकर 71.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 73.17 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में घटकर 68.55 लाख हेक्टेयर में ही  हुई है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई 69.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 1.43 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.81 लाख हेक्टेयर से कम है।

धान की रोपाई चालू रबी में 7.65 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.05 लाख हेक्टेयर से कम है। 

बासमती चावल के पांच लाख टन के निर्यात सौदे, राइस मिलों की मांग से धान तेज

नई दिल्ली। यूरोप और मध्य पूर्व के प्रमुख बाजारों से बढ़ती मांग को देखते हुए भारत से हाल ही में पांच लाख टन नए सीजन के बासमती चावल के निर्यात सौदे हुए हैं। इससे घरेलू बाजार में बासमती चावल के साथ ही धान की कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।


व्यापारियों के अनुसार भारतीय निर्यातकों ने हाल ही में करीब पांच लाख टन बासमती चावल के निर्यात सौदे किए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में राइस मिलों की खरीद धान में बढ़ गई। अक्टूबर के अंत में एक्सपोर्ट प्रमोशन संस्था एपिडा को भेजे एक पत्र में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि बासमती चावल के निर्यात के लिए कॉन्ट्रैक्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए मूल्य सीमा को 1,200 डॉलर प्रति टन से संशोधित कर 950 डॉलर प्रति टन करने का निर्णय लिया गया है।

सूत्रों के अनुसार विश्व बाजार में भारतीय चावल अभी भी सस्ता है, इसलिए भारत से निर्यात मांग बराबर बनी हुई है। दीपावली की छुट्टियों के कारण उत्पादक मंडियों में चालू सप्ताह में धान की आवक कम हो रही थी, लेकिन गुरुवार को जहां मंडियों में धान की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी हुई, वहीं मिलों की मांग भी बनी रही।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 7.05 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 23.08 लाख टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात केवल 21.56 लाख टन का हुआ था।

पूसा 1,509 किस्म के स्टीम चावल नई फसल के ए ग्रेड का भाव बढ़कर उत्तर भारत के राज्यों में 7800 से 8100 रुपये और इसके सेला चावल का भाव 7,100 से 7,200 रुपये तथा गोल्डन सेला चावल का दाम 7,600 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस दौरान 1,121 बासमती चावल स्टीम नई फसल का ग्रेड ए किस्म का दाम बढ़कर 9,700 से 10,000 रुपये और इसके सेला चावल का 8,400 से 8,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इस दौरान 1,718 किस्म के स्टीम ए ग्रेड नई फसल का दाम तेज होकर 8,500 से 8,800 रुपये और इसके सेला चावल का 7,800 से 7,950 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

पंजाब की मुक्तसर मंडी में गुरुवार को पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम बढ़कर 4,200 से 4,850 रुपये, 1,718 किस्म के धान के दाम तेज होकर 3400 से 4,731 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हरियाणा की फतेहाबाद मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के दाम 4,840 रुपये, 1,401 किस्म के धान के दाम तेज होकर 4,590 रुपये तथा 1,718 किस्म के 4,440 रुपये और 1,509 किस्म के धान के दाम 3,770 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उत्तर प्रदेश की जहांगीराबाद मंडी में 1,509 किस्म के धान के दाम तेज होकर 3,500 से 3,670 रुपये और आर एस 10 किस्म के धान के भाव 2,500 से 2,750 रुपये तथा ताज किस्म के धान के भाव 2,800 से 3,001 रुपये तथा शरबती किस्म के धान के भाव 2,500 से 2,700 रुपये और सुगंधा के 2,800 से 3,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

भारत सालाना करीब 40 लाख टन से अधिक बासमती चावल का निर्यात करता है, तथा इसके प्रमुख आयातक देशों में ईरान, इराक, यमन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख आयातक हैं। 

स्पिनिंग मिलों की मांग से बढ़ने से उत्तर भारत के साथ गुजरात में कॉटन के दाम तेज

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण मंगलवार को उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में कॉटन के दाम तेज हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 100 रुपये तेज होकर 56,600 से 56,800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5475 से 5575 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5450 से 5500 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 5325 से 5625 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम तेज होकर 55,100 से 55,400 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

त्योहार की छुट्टियों के कारण उत्पादक मंडियों में कपास की दैनिक आवकों में कमी दर्ज की गई, साथ ही मिलों में अवकाश होने के कारण व्यापार भी सीमित मात्रा में ही हुआ। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख देखा गया।

व्यापारियों के अनुसार हाल ही विश्व बाजार में कॉटन के दाम तेज हुए हैं। अत: उत्तर भारत के राज्यों के साथ ही गुजरात में स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से इसकी कीमतों में तेजी आई है। हालांकि व्यापारी अभी एकतरफा बड़ी तेजी में नहीं है क्योंकि घरेलू बाजार में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है। वैसे भी आगामी दिनों में उत्पादक मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ेगी।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों में आज तेजी का रुख रहा, लेकिन घरेलू बाजार में कॉटन वॉश के दाम स्थिर ही बने रहे। जालना में कॉटन वॉश के दाम 865 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 870 रुपये प्रति 10 किलो पर स्थिर बने रहे। अमरावती में कॉटन वॉश की कीमतें 885 रुपये प्रति दस किलो पर स्थिर बनी रही।

चालू रबी में राजस्थान में सरसों की बुआई घटी, तेल मिलों की खरीद बढ़ने से दाम तेज

नई दिल्ली। तेल मिलों की खरीद बढ़ने से घरेलू बाजार में शनिवार को सरसों की कीमतें तेज हुई।  जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव 25 रुपये तेज होकर दाम 5,875 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान सरसों की दैनिक आवक घटकर 1.50 लाख बोरियों की हुई।


कृषि मंत्रालय के अनुसार सरसों की बुआई चालू रबी में थोड़ी बढ़कर 57.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई केवल 56.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।
हालांकि चालू प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में जहां सरसों की बुआई में कमी आई है, वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बुआई बढ़ी है।

मंत्रालय के अनुसार 10 अक्टूबर तक राजस्थान में सरसों की बुआई केवल 29.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 32.06 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि उत्तर प्रदेश में इसकी बुआई बढ़कर 14.32 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मध्य प्रदेश में भी सरसों की बुआई बढ़कर 10.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.98 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

पश्चिम बंगाल में सरसों की बुआई 1.77 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.13 लाख हेक्टेयर से कम है।  

व्यापारियों के अनुसार दीपावली के त्योहार की छुट्टियों के कारण देशभर के कई मंडियां बंद होने के कारण सरसों की दैनिक आवकों में तो कमी आई ही, साथ ही कारोबार भी सीमित मात्रा में ही हुआ। विदेशी बाजार में सप्ताहांत में खाद्वय तेलों के दाम तेज हुए थे। इसलिए घरेलू बाजार में आज सरसों तेल की कीमतें तेज, हुई जबकि सरसों खल की कीमतें स्थिर बनी रही।

जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्यों में सरसों का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। इसलिए मंडियों में दैनिक दीपावली के बाद दैनिक आवकों में फिर बढ़ोतरी होने का अनुमान है। सरसों तेल में त्योहारी मांग लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन खपत का सीजन है इसलिए सरसों तेल में मांग आगामी दिनों में भी बनी रहेगी। हालांकि इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक आयातित खाद्वय तेलों के दाम पर ही निर्भर करेगी।

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में शनिवार को तेज हुई। कच्ची घानी तेल के भाव 20 रुपये तेज होकर दाम 1,091 रुपये प्रति 10 किलो हो गए, जबकि एक्सपेलर तेल के दाम भी 20 रुपये बढ़कर भाव 1,081 रुपये प्रति 10 किलो बोले गए। जयपुर में शनिवार को सरसों खल के दाम 2,975 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक घटकर 1.50 लाख बोरियों की ही हुई, जबकि इसके पिछले कारोबारी दिवस में आवक 2.50 लाख बोरियों की हुई थी।

राजस्थान एवं कर्नाटक में चना की बुआई पिछड़ी, मध्य प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र में आगे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में जहां प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान के साथ ही कर्नाटक में चना की बुआई में कमी आई है, वहीं मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र इसकी बुआई में बढ़ोतरी हुई है।


राजस्थान में चना की बुआई चालू रबी में चना की बुआई 12.53 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 13.80 लाख हेक्टेयर है। राज्य में सामान्यत: चना की बुआई 20.82 लाख हेक्टेयर में होती है।

इस दौरान कर्नाटक में 6.24 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल इस समय तक हुई 8.32 लाख हेक्टेयर से कम है। राज्य में चना की बुआई सामान्यत: 8.48 लाख हेक्टेयर में होती है। आंध्र प्रदेश में चालू रबी में चना की बुआई केवल 65 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल के 1.29 लाख हेक्टेयर से कम है। राज्य में चना की बुआई औसतन 4.36 लाख हेक्टेयर में होती है।

मध्य प्रदेश में चालू रबी सीजन में चना की बुआई बढ़कर 12.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक केवल 11.77 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। राज्य में चना की बुआई 22.47 लाख हेक्टेयर में होती है। इसी तरह से महाराष्ट्र में इसकी बुआई बढ़कर 5.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.54 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। राज्य में चना की बुआई 23.27 लाख हेक्टेयर में होती है।

उत्तर प्रदेश में चालू रबी चना की बुआई 3.82 लाख हेक्टेयर ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.84 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है। राज्य में चना की बुआई 6.18 लाख हेक्टेयर में होती है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 10 नवंबर तक चना की बुआई 41.44 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 41.97 लाख हेक्टेयर से कम है। औसतन चना की बुआई देशभर में 100.92 लाख हेक्टेयर में होती है।

चालू रबी में दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई आगे, तिलहन की पीछे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल की तुलना में आगे चल रही है, लेकिन इस दौरान तिलहन के साथ ही धान की रोपाई पीछे चल रही है। जानकारों के अनुसार चालू महीने में रबी फसलों की बुआई में तेजी जाने का अनुमान है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 10 नवंबर तक दलहन की बुआई बढ़कर 58.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 57.71 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 41.44 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 41.97 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 7.74 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.61 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 4.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 2.29 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुआई 99 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.33 लाख हेक्टेयर से कम है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी सीजन में बढ़कर 15.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 13.39 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 11.60 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 2.50 लाख हेक्टेयर में तथा जौ की 1.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 8.31 लाख हेक्टेयर में तथा 2.73 लाख हेक्टेयर एवं 2.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में थोड़ी घटकर 59.67 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 60.39 लाख हेक्टेयर से कम है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 57.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई केवल 56.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 1.15 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.71 लाख हेक्टेयर से कम है।

धान की रोपाई चालू रबी में 6.94 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.06 लाख हेक्टेयर से कम है। 

09 नवंबर 2023

चालू महीने में गुजरात में कॉटन 1,200 रुपये मंदी हुई, सीसीआई करेगी एमएसपी पर खरीद

नई दिल्ली। कॉटन के साथ ही धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग कमजोर होने से चालू महीने में ही गुजरात की मंडियों में कॉटन की कीमतों में 1,200 प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो का मंदा आ चुका है। राज्य की मंडियों से कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई जल्द ही कपास की एमएसपी पर खरीद शुरू करेगी।

अहमदाबाद में 31 अक्टूबर 2023 को शंकर 6 किस्म की 29 एमएम कॉटन के दाम 57,400 से 57,700 रुपये प्रति कैंडी थे, जोकि 8 नवंबर को घटकर 56,200 से 56,500 रुपये प्रति कैंडी रह गए।

जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में सूती धागे में स्थानीय एवं निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है, जबकि उत्पादक मंडियों में नई कपास की आवक लगातार बढ़ रही है। घरेलू बाजार से कॉटन एवं यार्न के निर्यात में पड़ते नहीं लग रहे, इसलिए कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने अहमदाबाद एवं राजकोट में कपास की एमएसपी पर खरीद के लिए 72 खरीद केंद्र खोले हैं। किसानों ने कपास की खरीद तय मानकों के अनुसार की जायेगी। किसान खरीद केंद्र आदि के बारे में अधिक जानकारी के लिए सीसीआई की वेबसाइट पर विजिट करके मोबाइल एप्लिकेशन कॉट-एली डाउनलोड कर सकते हैं।

व्यापारियों के अनुसार अच्छी गुणवत्ता की कपास उत्पादक मंडियों में अभी एमएसपी से ऊपर ही बिक रही है। सीसीआई के अनुसार राज्य में किसानों से एमएसपी पर कपास खरीदने के लिए सभी खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सीसीआई के मुताबिक जब भी उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) कपास की कीमतें समर्थन मूल्य से नीचे आएगी, वह किसानों से खरीद शुरू करेगी।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 6,620 रुपये और लोंग स्टेपल कपास का एमएसपी 7,020 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

विश्व स्तर पर कॉटन के उत्पादन में 4.7 फीसदी की कमी आने की आशंका

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2023-24 में विश्व स्तर पर कॉटन के उत्पादन में 4.7 फीसदी की कमी आने की आशंका है। प्रमुख उत्पादक देशों अमेरिका, चीन एवं ऑस्ट्रेलिया के साथ ही भारत में भी कॉटन का उत्पादन घटने का अनुमान है।

फिच सॉल्यूशंस की इकाई अनुसंधान एजेंसी बीएमआई के अनुसार फसल सीजन 2023-24 में विश्व में कॉटन का उत्पादन घटकर 112.1 मिलियन गांठ ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन 2022-23 में विश्व स्तर पर इसका उत्पादन 117.6 मिलियन गांठ का हुआ था। अत: सालाना आधार पर इसके उत्पादन में 4.7 फीसदी की कमी आने की आशंका है।

जानकारों के अनुसार वर्तमान में विश्व बाजार के साथ ही भारत में कॉटन की कीमतों में मंदा आया है, तथा मौजूदा तिमाही में इसकी कीमतों में गिरावट जारी रहने का अनुमान है। हालांकि 2024 की दूसरी तिमाही में इसके भाव बढ़ने का अनुमान है।

विश्व स्तर पर कॉटन के उत्पादन में कमी का प्रमुख कारण चीन और अमेरिका के साथ ही भारत में इसके बुआई क्षेत्रफल में कमी आने के साथ ही कई देशों में प्रतिकूल मौसम को माना जा रहा है। चीन और अमेरिका में सालाना आधार पर कॉटन के बुआई क्षेत्रफल में करीब 12.1 फीसदी की कमी आई है।

जानकारों के अनुसार कॉटन के उत्पादन अनुमान में कमी आने का असर टेक्सटाइल उद्योग पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह सिंथेटिक और मिश्रित फाइबर जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में देश में कपास की बुआई 123.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी, जोकि इसके पिछले साल के 127.73 लाख हेक्टेयर में कम थी।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में भारत में 295.10 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन 2022-23 के 318.90 लाख गांठ से कम है। व्यापारियों के अनुसार कपास के नए सीजन के आरंभ में देश में करीब 25 से 30 गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ था।

आईसीई कॉटन वायदा के भाव में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई थी। दिसंबर-23 वायदा अनुबंध में इसके दाम 1.62 सेंट कमजोर होकर 78.00 सेंट रह गए। इस दौरान मार्च-24 वायदा अनुबंध में इसके दाम 1.20 सेंट कमजोर होकर 80.92 सेंट रह गए। मई-24 वायदा अनुबंध में इसके दाम 3.18 सेंट घटकर 82.00 सेंट रह गए। मंगलवार को भी आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतें कमजोर हुई। 


गुजरात में चालू रबी सीजन में गेहूं, मोटे अनाज एवं दलहन तथा तिलहन की बुआई पीछे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन के शुरूआती चरण में गुजरात में गेहूं के साथ ही मोटे अनाज एवं दलहन तथा तिलहनी फसलों की बुआई पिछड़ रही है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 6 नवंबर तक राज्य में गेहूं की बुआई केवल 7,348 हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 27,378 हेक्टेयर की तुलना में कम है।

इसी तरह से चालू रबी सीजन में मोटे अनाजों की बुआई राज्य में अभी तक केवल 17,779 हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 58,343 हेक्टेयर में इनकी बुआई हो चुकी थी। चालू रबी में मक्का की बुआई राज्य में 3,837 हेक्टेयर में और ज्वार की बुआई 6,454 हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 27,136 हेक्टेयर में तथा 3,274 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दलहन की बुआई चालू रबी में राज्य में 51,469 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 63,884 हेक्टेयर की तुलना में कम है। चना की बुआई चालू रबी में 28,659 हेक्टेयर एवं अन्य दालों की 22,810 हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 49,908 हेक्टेयर एवं 13,976 हेक्टेयर में हो चुकी थी

रबी तिलहन की बुआई चालू रबी में 52,988 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1,18,577 हेक्टेयर में इनकी बुआई हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई 52,921 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1,18,546 हेक्टेयर की तुलना में काफी कम है। 

चालू रबी में दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई आगे, गेहूं की पिछड़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन के शुरूआती चरण में जहां गेहूं की बुआई आगे चल रही है, वहीं दलहन एवं तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। जानकारों के अनुसार अक्टूबर में मौसम गर्म था, जबकि अब मौसम में हल्की ठंड शुरू होगी, ऐसे में रबी फसलों की बुआई में तेजी जाने का अनुमान है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन रबी में 3 नवंबर तक गेहूं की बुआई 18.05 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 20.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मध्य प्रदेश में चालू रबी में गेहूं की बुआई 12.83 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 13.89 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। पंजाब में गेहूं की बुआई 2.11 लाख हेक्टेयर में, उत्तर प्रदेश में 2.02 लाख हेक्टेयर में तथा राजस्थान में 56 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी सीजन में बढ़कर 11.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.78 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 8.93 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 1.80 लाख हेक्टेयर में तथा जौ की 27 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 4.90 लाख हेक्टेयर में तथा 1.69 लाख हेक्टेयर एवं 97 हजार हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 47.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 43.61 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में बढ़कर 45.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले इस समय तक इसकी बुआई केवल 40.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य रबी तिलहन में मूंगफली की बुआई 89 हजार हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.55 लाख हेक्टेयर से कम है।

दलहन की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 38.15 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 37.65 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू सीजन में 26.32 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 27.86 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि इस दौरान मसूर की बुआई चालू रबी में बढ़कर 5.56 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 4.17 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मटर की बुआई चालू रबी में 3.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 2.52 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू खरीफ में धान की सरकारी खरीद 161 लाख टन के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2023-24 में पहली नवंबर तक 9.33 लाख किसानों से धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 161.47 लाख टन की हो चुकी है।


केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ विपणन सीजन 203-24 में चावल ट्रम में खरीद का लक्ष्य 521.27 लाख टन का तय किया गया है, जिसमें से 20.76 फीसदी करीब 108.23 लाख टन की खरीद अभी तक हो चुकी है। अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब का योगदान 66.42 लाख टन, हरियाणा का 36.11 लाख टन एवं तमिलनाडु का 3.26 लाख टन का है।

केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए कॉमन धान का एमएसपी 2,183 रुपये और ए ग्रेड किस्म के धान का एमएसपी 2,203 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

राजस्थान में मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू, मूंगफली की 18 नवंबर से

नई दिल्ली। राजस्थान में राजफैड ने बुधवार से न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर मूंग एवं उड़द के साथ ही सोयाबीन की खरीद शुरू कर दी है। राज्य की मंडियों में मूंगफली की एमएसपी पर खरीद 18 नवंबर से शुरू होगी।

व्यापारियों के अनुसार राज्य की मंडियों में अच्छी क्वालिटी की उड़द एवं मूंग तथा सोयाबीन के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर चल रहे हैं, हालांकि हल्की क्वालिटी के माल नीचे दाम पर भी बिक रहे हैं। माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू होने से कीमतों में सुधार आयेगा।

केंद्र सरकार ने राजस्थान से चालू खरीफ सीजन में एमएसपी पर मूंग की खरीद का लक्ष्य 2,93,865 टन, उड़द की खरीद का लक्ष्य 1,35,200 टन तथा मूंगफली की खरीद का लक्ष्य 4,80,603 टन तथा सोयाबीन की खरीद का लक्ष्य 3,01,650 टन का तय किया है।

केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2023-24 के लिए सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4,600 रुपये, उड़द का 6,950 रुपये तथा मूंगफली का एमएसपी 6,377 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ हैं। मूंग का समर्थन मूल्य 8,558 रुपये प्रति क्विंटल है।

सूत्रों के अनुसार राज्य की मंडियों में मूंगफली की एमएसपी पर खरीद 18 नवंबर से शुरू होगी, तथा जिन किसानों ने पंजीकरण नहीं कराया है, वह पंजीकरण करवा सकते हैं। पंजीकरण कराने के लिए किसानों को जन आधार कार्ड नंबर, खसरा गिरदावरी की प्रति और बैंक की पासबुक की प्रति पंजीयन फार्म के साथ अपलोड करनी होगी। जो किसान बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवायेंगे, उनका पंजीकरण समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए मान्य नहीं होगा। अत: किसान ई-मित्र केंद्र से समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए अपना पंजीयन सावधानी पूर्वक करें।