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25 अप्रैल 2020

पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद में आई तेजी, उत्तर प्रदेश में ढीली

आर एस राणा
नई दिल्ली। पंजाब के साथ ही हरियाणा और मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद में तेजी आई है लेकिन सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में खरीद की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है।
पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में एमएसपी पर पहले दस दिनों में ही 35.07 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 60 फीसदी से भी ज्यादा है। पिछले साल इस समय तक राज्य से 21.15 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई थी। चालू रबी में राज्य से गेहूं की खरीद का लक्ष्य 135 लाख टन का तय किया गया है जबकि पिछले रबी सीजन में 129.12 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।
हरियाणा में पिछले पांच दिनों में 14.92 लाख टन गेहूं खरीदा गया
हरियाणा से पिछले पांच दिनों में गेहूं की एमएसपी पर खरीद 14.92 लाख टन की हो चुकी है। राज्य सरकार ने 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू की थी तथा चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 95 लाख टन का तय किया है जबकि पिछले रबी सीजन में राज्य से 93.20 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। आढ़तियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद से राज्य में गेहूं की खरीद में तेजी आई है।
मध्य प्रदेश से 11 लाख टन गेहूं की हो चुकी है खरीद
मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति शिवशेखर शुक्ला के अनुसार राज्य से एमएसपी पर गेहूं की खरीद पिछले दस दिनों में 11 लाख टन हो गई है जबकि पिछले साल इस आंकड़े तक पहुंचने में 21 दिन का समय लगा था। उन्होंने बताया कि बंगाल में जूट बोरे बनाने वाले कारखाने बंद होने की वजह से जो समस्या आई थी, उसे दूर करने के लिए प्लास्टिक बैग मंगाए गए हैं। किसानों के भुगतान के लिए 350 करोड़ रुपये बैंकों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। पिछले साल राज्य से एमएसपी पर 67.25 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
उत्तर प्रदेश से अभी तक 2.97 लाख टन की ही हुई है खरीद
सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश से एमएसपी पर अभी तक केवल 2.97 लाख टन गेहूं की खरीद ही हुई है जबकि राज्य से चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का तय किया गया है। राज्य के खाद एवं रसद विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जूट के बोरो की कमी के कारण प्लास्टिक बोरे मंगाए गए है, तथा सभी खरीद केंद्रों पर बोरे पहुंचाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के कारण सोशल डिस्टेंस का पालन के लिए राज्य में गेहूं खरीद के लिए 5,438 खरीद केंद्र खोले गए हैं तथा अभी तक 51,342 किसानों से गेहूं की खरीद की जा चुकी है।
इस बार खरीद का लक्ष्य 407 लाख टन, पिछले साल 341.32 लाख टन खरीदा था
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में एमएसपी पर 407 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले रबी में 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है जोकि पिछले रबी सीजन के 10.37 करोड़ टन से ज्यादा है। चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि पिछले रबी में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद हुई थी।............  आर एस राणा

गेहूं खरीद : उत्तर प्रदेश में बारदाने की कमी, मध्य प्रदेश में सोसाइटी कर्ज काटकर कर रहीं हैं भुगतान

आर एस राणा
नई दिल्ली। गेहूं किसानों को कोरोना वायरस के साथ ही सरकारी सिस्टम से भी लड़ना पड़ रहा है। लॉकडाउन के कारण पहले ही गेहूं की सरकारी खरीद 15 दिन की देरी से शुरू हुई वहीं अब बादारने की कमी के कारण उत्तर प्रदेश के किसानों के खरीद केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश में सोसाइटी कर्ज की रकम काट कर किसानों को भुगतान कर रही हैं।
बहराइच जिले की तहसील मोतीपुर के गांव महेशपुर के किसान कुलदीप सिंह जिन्होंने 9 एकड़ में गेहूं की फसल बोई हुई थी लगातार पांच-छह दिनों से महीनपूर कॉ-ऑपरेटिव खरीद केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन केंद्र के प्रभारी हर रोज यही कहते हैं कि बारदाना नहीं आया है। कुलदीप सिंह ने आउटलुक को बताया कि थ्रेसिंग के बाद गेहूं मंडी में लेकर गए तो बताया कि बारदाना आने पर खरीद की जायेगी, जबकि उपर से मौसम भी खराब बना हुआ है। उन्होंने बताया कि व्यापारी 1,600 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव गेहूं की खरीद कर रहे है, ऐसे में किसानों को मजबूरीवश व्यापारियों को गेहूं बेचना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश में बोरो की उपलब्धता कम
चालू रबी में उत्तर प्रदेश से 55 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले रबी में राज्य से 37 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की थी। राज्य की खाद्य एवं रसद विभाग एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जूट बोरी की जरूरतें पूरी करने की कोशिश की जा रही है, साथ ही प्लास्टिक बोरियों का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। जल्द ही खरीद में तेजी आयेगी। उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद के लिए अभी तक 68,526 टोकन जारी किए जा चुके हैं। एमएसपी पर अभी तक राज्य से 1.75 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।  
मध्य प्रदेश में सोयाइटी कर्ज का पैसा काटकर कर रही है भुगतान
मध्य प्रदेश के सीहोर में किसान मूलचंद ने 16 क्विंटल गेहूं 30,800 रुपये में बेचा था, कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी ने 30,164 रुपये कर्ज के काटकर किसान के खाते में 636 रुपये जमा करा दिए। मध्य प्रदेश से चालू रबी में अभी तक एमएसपी पर 2.50 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि चालू रबी में राज्य से खरीद का लक्ष्य 100 लाख टन का तय किया गया है। पिछले रबी में 67.25 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हुई थी।
राजस्थान में गेहूं की खरीद की गति धीमी
राजस्थान से चालू रबी में अभी तक केवल 42,278 टन गेहूं की खरीद ही हो पाई है जबकि खरीद का लक्ष्य 17 लाख टन का तय किया गया है। पिछले रबी में राज्य से 14.11 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई थी। राजस्थान में खरीद की गति धीमी होने के कारण किसानों को एमएसपी से 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल नीचे दाम पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार पंजाब से चालू रबी में अभी तक 17.55 लाख टन और हरियाणा से 5.45 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। पंजाब से गेहूं की खरीद का लक्ष्य 135 और हरियाणा से 95 लाख टन का तय किया गया है।
चालू रबी में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 407 लाख टन
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में एमएसपी पर 407 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले रबी में 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि पिछले रबी में 10.37 करोड़ टन का उत्पादन हुआ था। चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले रबी में 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद हुई थी।.....  आर एस राणा

सरकार ने 2020-21 के लिए 29.83 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया

आर एस राणा
नई दिल्ली। कृषि मंत्रालय ने अच्छे मानसून की उम्मीदों के बल पर फसल वर्ष 2020-21 में देश में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन 63.5 लाख टन बढ़ाकर 29.83 करोड़ टन होने का लक्ष्य तय किया है।
राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन 2020 को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि सभी राज्यों को खरीफ के लिए लक्ष्य को प्राप्त करने पर जोर देना चाहिए और किसानों की आय दोगुनी करना के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि 'गाँव, गरीब और किसान' को कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के इस संकट के दौरान पीड़ित नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि प्रत्येक किसान को दो योजनाएं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
खरीफ फसलों का उत्पादन बारिश पर करता है निर्भर
कृषि आयुक्त एसके मल्होत्रा ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का अनुमान है कि जून से सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिमी मानसून के की बारिश कुल मिलाकर सामान्य रहने का अनुमान है। खरीफ फसलों का उत्पादन बारिश पर ज्यादा निर्भर करता है, अत: अच्छे मानसून से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ेगा। मंत्रालय द्वारा फरवरी में जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल वर्ष 2019-20 में देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 29.19 करोड़ टन होने का अनुमान है।
देश के कई हिस्सों में पहले ही खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है
मल्होत्रा ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर राज्य सरकारों को बताया कि कृषि से जुड़ी गतिविधियों को पाबंदियों से किस तरह की छूट दी गई है। उन्होंने खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान लोगों के बीच परस्पर दूरी बनाये रखने तथा स्वच्छता का उचित प्रबंध किये जाने की जरूरत के बारे में भी राज्य को अवगत किया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में पहले ही खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है। फसल सीजन 2020-21 के दौरान खरीफ में 14.99 करोड़ टन और रबी सीजन में 14.84 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह पूरे फसल वर्ष 2020-21 के दौरान 29.83 करोड़ टन खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य है।..... आर एस राणा

मध्य अप्रैल तक चीनी के उत्पादन में आई 20 फीसदी से ज्यादा की कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2019-20 के पहले साढ़े छह महीनों में चीनी के उत्पादन में 20.51 फीसदी की कमी आकर कुल 247.80 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस दौरान 311.75 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार इस समय देशभर में केवल 137 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही है, जिनमें से ज्यादातर उत्तर भारत की है। पिछले साल इस समय देश में 172 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी। कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण चीनी की घरेलू मांग में कमी आई है, क्योंकि होटल, दुकानें तथा मॉल आदि बंद हैं। उद्योग के अनुसार गर्मी का सीजन होने के लॉकडाउन खुलने के बाद चीनी में बड़ी खपत कंपनियों की मांग बढ़ेगी। चीनी की कुल खपत में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है।
उत्तर प्रदेश में उत्पादन बढ़ा, महाराष्ट्र में घटा
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 108.25 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में केवल 105.55 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य की 119 चीनी मिलों में से 21 में पेराई बंद हो चुकी है तथा इस समय 98 में ही पेराई चल रही है। लॉकडाउन के कारण राज्य में गुड़ और खांडसारी इकाइयां लगभग बंद हो चुकी है जिस कारण चीनी मिलों को ज्यादा गन्ना मिल रहा है। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में अभी तक केवल 60.12 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 106.71 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। राज्य में 136 चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई थी जिसमें से इस समय केवल 10 मिलों में ही पेराई चल रही है।
कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में भी उत्पादन में आई कमी
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में मध्य अप्रैल तक चीनी का उत्पादन घटकर 33.82 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 43.20 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। तमिलनाडु में चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में 4.95 लाख टन का ही हुआ है जोकि पिछले साल के 6.85 लाख टन से कम है। गुजरात में पिछले साल इस समय तक 11.19 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था, जबकि चालू पेराई सीजन में केवल 8.80 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है।
लॉकडाउन के कारण देश की अधिकांश चीनी मिलें हैंड सैनिटाइजर बना रही हैं
अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तथा राजस्थान को मिलाकर 15 अप्रैल तक 31.86 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। इस्मा के अनुसार विश्व बाजार में चीनी की कीमतों में आई नरमी से निर्यात सौदे प्रभाति हुए हैं, हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपया नीचले स्तर पर आने से निर्यातकों को कुछ राहत मिली है। कोरोना वायरस के कारण इस समय देश की अधिकांश चीनी मिलें हैंड सैनिटाइजर बनाकर अस्पतालों को सप्लाई कर रही हैं।..........  आर एस राणा

दाल मिलों ने उड़द आयात के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की

आर एस राणा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के लिए देशभर में चल रहे 3 मई तक लॉकडाउन के कारण दाल मिलों ने उड़द आयात के लिए केंद्र सरकार समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। लॉकडाउन के कारण ट्रकों की आवाजाही कम होने और बंदरगाहों पर 80 फीसदी तक कारोबार बंद होने से दाल मिलों ने सरकार से उड़द आयात की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
आल इंडिया दाल मिल्स एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्रालय और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) को पत्र लिखकर ढाई लाख टन कोटे की उड़द के आयात की मियाद 2 महीने बढ़ाने की मांग की है। केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जारी ढाई लाख टन अतिरिक्त उड़द के आयात के लिए 30 अप्रैल तक का समय दिया हुआ है।
आल इंडिया दाल मिल्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुरेश अग्रवाल के मुताबिक देश में 24 मार्च से 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा था, जिसे केंद्र सरकार ने बढ़ाकर 3 मई कर दिया है। ऐसे में शिपिंग कंपनियां भारत के लिए म्यांमार से माल ढुलाई के लिए तैयार नहीं हो रही हैं। वहीं बंदरगाहों पर 80 फीसदी कारोबारी बंद है। लॉकडाउन की वजह से ट्रांसपोर्टेशन की भी दिक्कत है। जिससे काफी माल बंदरगाहों पर ही अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में 30 अप्रैल तक उड़द आयात करना सम्भव नहीं है। लिहाजा सरकार को आयात की मियाद दो महीने तक बढ़ानी चाहिए।
हालांकि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दूसरे चरण में ट्रकों की आवाजाही को छूट देने के साथ इनके लिए नेशनल हाइवे के इस्तेमाल और हाइवे पर ढाबों और मरम्मत के लिए गैराजों और मैकेनिकों को भी छूट दी है। लेकिन इसके बावजूद भी परिवहन आदि में परेशानी आ रही है। सुरेश अग्रवाल ने कहा कि इस समय व्यापारी एक शहर से दूसरे शहर को भी नहीं जा सकते हैं। इस हालात को देखते हुए कुछ शिपिंग कंपनियां 3 मई से पहले माल की ढुलाई से इनकार कर रही हैं। जबकि मौजूदा शर्तों के मुताबिक माल को 30 अप्रैल तक हर हाल में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाना चाहिए। ऐसे में आयात की मियाद बढ़ाना ही एक उपाय है।....... आर एस राणा

मौसम विभाग : इस साल देश में सामान्य मासून रहने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस साल देश में सामान्य मानसून रहने का अनुमान है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव माधवन राजीव ने दक्षिण पश्चिम मानसून के पहले दीर्घकालिक अनुमान को जारी करते हुए बताया कि देश में इस साल मानसून सामान्य रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण पश्चिम मानसून(जून से सितंबर) के दौरान 96 से 104 फीसदी बारिश इसमें (पांच फीसदी कम या पांच फीसदी ज्यादा) होने का अनुमान है। सामान्य मानसूनी बारिश खेती के लिये मददगार साबित होगी, क्योंकि खरीफ की अधिकांश फसलें बारिश पर ही निर्भर करती हैं।
दक्षिण पश्चिम मानसून, सामान्य तौर पर एक जून को दक्षिणी इलाकों से देश में दस्तक देता है और 30 सितंबर तक इसकी वापसी हो जाती है। डा. राजीवन ने बताया कि मौसम विभाग ने इस साल से मानसून के आने और वापस जाने की तारीखों में भी बदलाव किया है। हालांकि केरल में इस मानसून के इस साल एक जून को ही दस्तक देने का अनुमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज जारी किया गया पूर्वानुमान, दक्षिण पश्चिम मानसून की राष्ट्रीय स्थिति को दर्शाता है। इसका क्षेत्रीय पूर्वानुमान मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में जारी किया जायेगा। जिसके आधार पर यह बताया जा सकेगा कि देश के किस इलाके में मानसून की बारिश का कैसा हाल रहने का अनुमान है।
एक जून को केरल तट से दस्तक दे सकता है
मौसम विभाग के महानिदेशक डा. मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि दक्षिण पश्चिम मानसून, अनुमान के मुताबिक एक जून को केरल तट से दस्तक दे सकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न शहरों में मानसून के दस्तक देने और वापसी की अनुमानित तारीखों का निर्धारण कर दिया गया। पिछले कुछ दशकों से जलवायु संबंधी परिस्थितियों में सामान्य रूप से होने वाले समयगत बदलावों के देखते हुए मानसून की दस्तक और वापसी, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले या देर से हो रही थी। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने 1950 के दशक में निर्धारित किये गए मानसून के कार्यक्रम को इस साल पुनर्निर्धारित किया है। डा. महापात्रा ने बताया कि दक्षिण पश्चिम मानसून में बारिश की मात्रा दीर्घकालिक अनुमान के मुताबिक शत प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान बारिश की मात्रा 96 प्रतिशत से 104 प्रतिशत के बीच रहने की स्थिति को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है।........... आर एस राणा

11 अप्रैल 2020

लॉकडाउन के कारण सीसीआई के खरीद केंद्रों पर नहीं आ रही कपास

आर एस राणा
नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की खरीद के लिए केंद्र तो खुले हुए हैं लेकिन देशभर में लॉकडाउन के कारण कपास की आवक नहीं हो रही है।
कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की सीएमडी डॉ. पीअली रानी ने बताया कि निगम के खरीद केंद्र खुले हुए हैं लेकिन लॉकडाउन में जिला स्तर तक सीमाएं बंद होने के कारण खरीद केंद्रों तक किसान ला नहीं पा रहे हैं हालांकि उन्होंने कहा कि ज्यों ही आवक शुरू होगी खरीद भी होने लगेगी। उन्होंने बताया कि जिन खरीद केंद्रों पर जिनिंग और ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा मिल रही है वहां निगम कपास की खरीद भी रही है। ऐसे केन्द्रों पर कल कुछ खरीद हुई है और आज भी कुछ जगहों पर खरीद जारी है।
पंजाब में कुछ जिनिंग मिलों पर सीसीआई की खरीद चल रही है। सूत्रों का कहना है कि राज्य में जहां पर मजदूरों की व्यवस्था है वहां जिंगिंग मिलों में काम हो रहा है। हालांकि मंडियों में कारोबार पूरी तरह से ठप है। सीसीआई के अनुसार चालू फसल सीजन में अब तक निगम ने किसानों से एमएसपी पर करीब 82 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास की खरीद की है। हालांकि मौजूदा समय में विश्व बाजार में कपास का भाव काफी नीचे आ गया है जिस कारण घरेलू बाजार में भी दाम कम हुए हैं ऐसे में घरेलू किसानों को बाकी फसल बेचने के लिए भी सीसीआई से ही उम्मीदें है। पंजाब सरकार ने रबी फसलों को देखते हुए किसानों के लिए लॉकडाउन में छूट का एलान किया है। देखना होगा कि इसका कपास के किसानों को कितना फायदा मिल पाता है।....  आर एस राणा


उड़द आयात के नियमों में ढील देने की मांग

आर एस राणा
नई दिल्ली। देशभर में चल रहे लॉकडाउन को देखते हुए इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से उड़द आयात नियमों में ढील देने की मांग की है। आईपीजीए ने इसके तहत 2019-20 के 2.5 लाख टन आयात कोटे की मियाद को 60 दिन बढ़ाने और चालू साल में 4 लाख टन आयात कोटे के लिए मिलों को आवदेन देने के लिए और समय देने की मांग की है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय, डीजीएफटी को लिखे पत्र में आईपीजीए ने कहा है कि भारत मे लॉकडाउन की स्थिति में मिलर्स आवेदन के सभी ज़रूरी दस्तावेज जुटा नहीं पा रहे हैं। लिहाजा आवदेन के लिए 30 दिन का और वक़्त मिलना चाहिए। एसोसिएशन ने इस दौरान देश में कोरोना वायरस से चल रहे लॉकडाउन को भी खत्म होने की उम्मीद जताई है।
दलहन आयात कोटे के तहत आवेदन के लिए पहले 23 मार्च अंतिम तिथि थी, जिसे बढ़ाकर सरकार ने 15 अप्रैल कर दिया था। लेकिन मौजूदा हालात में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन के हटने की उम्मीद नहीं के बराबर है। ऐसे में कारोबारियों को आवेदन करने में दिक्कत आ रही है। पिछले साल के उड़द आयात के कोटे को सरकार ने बढ़ाकर 4 लाख टन कर दिया था, जिस कारण 2.5 लाख टन का और आयात होना है। जिसे हर हाल में 30 अप्रैल तक भारतीय बन्दरगाहों तक पहुंचने की शर्त दी गई है। हालांकि कारोबरियों का मानना है कि भारत की तरह इसका ओरिजिन देश म्यानमार में भी लॉकडाउन होने की वजह से इस तारीख तक इसे ला पाना संभव नहीं होगा। ऐसे में इसकी मियाद 2 महीने बढ़ाने की जरूरत है।..........  आर एस राणा

कोरोना वायरस : एफसीआई ने खाद्यानन के बिक्री नियमों में दी ढील

आर एस राणा
नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए चल रहे 12 दिनों के लॉकडाउन में खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिचित करने के लिए खाद्य मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत बेचे जा रहे खाद्यान्न के बिक्री नियमों में ढील दी है। खरीददार अब निविदा के बजाए सीधे एफसीआई के गोदामों से तय भाव पर खरीद कर सकेंगे।
एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खाद्यान्न के खरीद नियमों में ढील देने का फैसला गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले तीन मंत्रियों के समूह की बैठक में लिया गया। मंत्री समूह में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन और उपभोक्ता मामले एवं खाद्य मंत्री राम विलास पासवान शामिल थे।
बड़े खरीददार गेहूं 21 रुपये और चावल 22 रुपये प्रति किलो पर सीधे कर सकते हैं खरीद
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से कोई भी संस्था अथवा बड़ा उपभोक्ता जैसे रोलर फ्लोर मिल आदि सीधे गोदाम से 21 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं और 22 रुपये प्रति किलो की दर से चावल खरीद सकेंगे, साथ ही मात्रा भी तय नहीं होगी। एफसीआई अभी तक ओएमएसएस के गेहूं और चावल की बिक्री निविदा प्रक्रिया के माध्यम से करती थी, जिसमें कई तरह की शर्तें थी जबकि अब फ्लोर मिलों सीधे खरीद कर सकेंगी तो खाद्यान्न की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का स्टॉक बफर से ज्यादा
केंद्रीय पुल में खाद्यान्न की उपलब्धता तय मात्रा बफर स्टॉक से ज्यादा है। केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का कुल स्टॉक 544 लाख टन का है, जिसमें 306 लाख चावल और 238 लाख टन गेहूं है जबकि तय मात्रा के हिसाब से पहली अप्रैल को केंद्रीय खूल में खाद्यान्न का बफर स्टॉक गेहूं और चावल को मिलाकर 210.40 लाख टन को होना चाहिए। रबी की प्रमुख फसल गेहूं की कटाई आरंभ हो चुकी है तथा चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है।
विभिन्न राज्यों में 864 रेलवे रेकों के माध्यम से 24.19 लाख टन खाद्यान्न भेजा
लॉकडाउन के कारण देश के 81 करोड़ लाभार्थियों को खाद्यन्न की आपूर्ति सूनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने पूरे देश में गेहूं और चावल की सप्लाई बढ़ा दी है। लॉकडाउन के बाद यानि 24 मार्च से एफसीआई ने देशभर के विभिन्न राज्यों में 864 रेलवे रेकों के माध्यम से 24.19 लाख टन खाद्यान्न पहुंचाया है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार लॉकडाउन अवधि के दौरान एफसीआई पूरे देश में गेहूं और चावल की "निर्बाध" आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है तथा इस दौरान निगम ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से खाद्यान्न को अन्य राज्यों में पहुँचाया है।.......... आर एस राणा

राजस्थान की बूंदी मंडी में कामकाज शुरू

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन में मंडियों में कामकाज की छूट और राजस्थान सरकार के अथक प्रयासों के बाद राज्य की बूंदी मंडी में आखिरकार कामकाज शुरू हो गया है। मंडी में गेहूं की नीलामी शुरू हो गई है लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग नियमों की वजह से कामकाज कम हो रहा है पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी देखकर जिले के किसान और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है।
जिले की रामगंजबालाजी कुंवरती मंडी को राज्य सरकार ने पायलेट प्रोजेक्ट पर वैसे तो मंगलवार से ही शुरू करा दिया था। लेकिन यहां सुचारू रूप से नीलामी बुधवार से शुरू हुई। सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का खास ख्याल रखने की वजह से प्रत्येक आढ़तिया को एक दिन में तीन किसानों की महज 3 ट्रॉलियों को ही मंगाने की छूट दी गई है। किसानों को बाकायदा इसके किये कूपन जारी किया जा रहा है, जिसके जरिये ही वे मंडी में प्रवेश कर पा रहे हैं। साथ ही ये भी सुनिश्चित किया गया है कि किसानों का प्रवेश सुबह 7 बजे से 12 बजे के बीच ही हो सकेगा।
इसके बाद मंडी में खड़ी ट्राली में ही अनाज की नीलामी हो रही है। मंडी में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सिर्फ दो लोगों को आने की इजाजत है। रोज करीब 500 ट्रालियों के टोकन जारी हो रहे हैं। सभी लोगों को मास्क लगाना अनिवार्य है। सूत्रों के मुताबिक पायलेट प्रोजेक्ट पर शुरू हुई इस मंडी के रिस्पॉन्स को देखकर राज्य सरकार जल्द ही प्रदेश की दूसरी मंडियों को भी शुरू करने का फैसला ले सकती है।.......... आर एस राणा

लॉकडाउन की मार कपास की कीमतों पर, खपत में 25 लाख गांठ कमी की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। जानलेवा कोरोना वायरस के कारण देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से देशभर में यार्न मिलें बंद पड़ी हुई है जिस कारण देश में कपास की खपत में भारी कमी आई है। इसलिए कपास की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के अनुसार, लॉकडाउन से कपड़ा क्षेत्र की मांग और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ने की आशंका। वर्ष 2020-21 के दौरान इंडस्ट्री पोर्टफोलियो एबीडिटा में कम से कम 15 फीसदी की गिरावट संभव है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के प्रेसिडेंट अतुल गनात्रा ने कहा कि मिलों के बंद होने से कपास की खपत में 25 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) की कमी हो सकती है।
सीजन के अंत तक 42 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद
सीएआई 2019-20 सीजन के अंत तक 42 लाख गांठ कपास निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आश्वस्त है, जिसमें से 31 लाख गांठ के निर्यात सौदे पहले ही हो चुक हैं। गनात्रा ने माना कि अगर लॉकडाउन की अवधि बढ़ी तो खपत में और कमी आएगी और इससे कारोबार की अनिश्चितता भी बढ़ेगी। इंटरनेशनल कॉटन एडवायजरी बोर्ड ने कहा है कि कोरोना वायरस की वजह से कपास की सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। बोर्ड के मुताबिक "ब्रांड और खुदरा विक्रेता सौदों को रद्द कर रहे हैं। एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में स्पिनरों और कपड़ा कंपनियों पर वित्तीय संकट बढ़ने का खतरा है। फसल सीजन 2019-20 के लिए बोर्ड का वैश्विक कपास उत्पादन का अनुमान 2.59 करोड़ टन पर अपरिवर्तित है। हालांकि, आईसीएसी ने खपत अनुमान को संशोधित कर 2.46 करोड़ टन कर दिया है।
देश कपास के बंपर उत्पादन और खपत में कमी का सामना कर रहा
भारत कपास के बंपर उत्पादन और खपत में कमी का सामना कर रहा है। सीएआई ने 2019-20 सीज़न के लिए 354.50 लाख गांठ कपास के उत्पादन के अनुमान को स्थिर रखा है। पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू कपास सीजन में 31 मार्च तक 283.03 लाख गांठ की दैनिक आवक एवं 12.50 लाख गांठ का आयात हो चुका है। भारत महामारी के खिलाफ लड़ाई के अलावा वैश्विक मंदी का भी सामना कर रहा है। दुनिया के ज्यादातर देशों से निकलने वाले डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोई सकारात्मक स्थिति नहीं दिखा रहे हैं, जो पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है।
देश से कपास का निर्यात बढ़ना जरुरी
भारत कपास के आयात पर निर्भर नहीं है, बल्कि यहां से कपास का निर्यात होना ज्यादा जरूरी है। इसलिए, अमेरिका, यूके, यूएई और चीन सहित प्रमुख बाजारों से मांग आनी महत्वपूर्ण है। सीएआई को लॉकडाउन के बाद अपने बड़े खरीदारों बांग्लादेश और चीन से मांग निकलने की उम्मीद है। हालांकि विश्व बाजार भी इस समय मंदी बनी हुई है। विश्व बाजार में कोरोना के कारण और मंदी आने की आशंका है, जिससे नौकरियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में 21 दिनों का लॉकडाउन भारतीय टेक्सटाइल और कपास क्षेत्र के लिए भारी पड़ने जा रहा है। यह सही है कि रुपये में कमजोरी से भारत से निर्यात के लिए अच्छा मौका मिला था, लेकिन लॉकडाउन के कारण यह भी हाथ से निकल गया।
विश्व बाजार में दाम 11 साल के न्यूनतम स्तर पर
विश्व बाजार में कपास का दाम 50 सेंट के नीचे का स्तर छू चुका है, तथा यह 11 साल के निचले स्तर पर है और पिछले एक महीने में ही करीब 17 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। सीएआई के अनुसार 20 मार्च तक कपास के निर्यात सौदे 37,000 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) पर हुए थे। उनका मानना है कि आगे विश्व बाजार में कपास का भाव 45-60 सेंट प्रति पाउंड के दायरे में रह सकता है जिसका निर्यात सौदों पर भी पड़ेगा।.......  आर एस राणा

कपास का उत्पादन अनुमान बरकरार, 31 लाख गांठ के निर्यात सौदे

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने देश में इस साल 354.5 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) उत्पादन अनुमान को बरकरार रखा है। कोरोना वायरस और लॉक डाउन की वजह से सीएआई ने मई के पहले हफ्ते में कमेटी की बैठक बुलाई है। जिसमें मौजूद कॉटन स्टॉक की समीक्षा की जाएगी।
एसोसिएशन के मुताबिक 31 मार्च तक देश से 31 लाख गांठ के निर्यात सौदे हुए है जबकि अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 तक देश में करीब 154 लाख गांठ कॉटन की खपत हुई है। लॉकडाउन होने के कारण कपास की दैनिक आवक मंडियों नहीं हो रही है, जबकि निर्यात शिपमेंट भी नहीं हो पा रही है। उधर विश्व बाजार में कपास की कीमतें नीचे बनी हुई है तथा जब तक विश्व बाजार में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक कपास की निर्यात मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद भी नहीं है।

कोरोना वायरस : किसानों को पास देने के साथ ही केंद्र बढ़ाकर गेहूं खरीद की तैयारी

आर एस राणा
नई दिल्ली। देशभर में फैले कोरोना वायरस को देखते हुए गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद में एहतियात बरतते हुए राज्यों ने किसानों को पास जारी करने के साथ ही केंद्रों की संख्या बढ़ाकर खरीद करने का फैसला लिया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी 15 अप्रैल से गेहूं की खरीद करने का निर्णय किया है।
पंजाब के खाद्य और आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में गेहूं के खरीद केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 4,000 कर दिया है। उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद की तारिख और समय के बारे में किसानों को आढ़तियों के माध्यम से सूचना दी जायेगी, साथ ही गेहूं बेचने के लिए मंडी में गेहूं लाने के लिए किसानों को पास भी आढ़ती जारी करेंगे, उसी के हिसाब से किसान मंडी में आयेगा। इससे मंडी में अनावश्यक रूप से होने वाली भीड़ से बचा जा सकेगा। पंजाब से रबी विपणन सीजन 2019-20 में समर्थन मूल्य पर 129.12 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
हरियाणा में खरीद केंद्र होंगे ज्यादा, किसानों को देंगे बारदाना
हरियाणा में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए राज्य सरकार खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ायेगी। राज्य के खाद्य और आपूर्ति विभाग के अनुसार गेहूं की खरीद 20 अप्रैल से शुरू की जायेगी तथा आढ़तियों के माध्यम से किसानों को बारदाना पहले ही दे दिया जायेगा। समर्थन मूल्य पर राज्य से पिछले रबी सीजन में 93.20 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जबकि चालू रबी में राज्य में गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य 132.71 लाख टन का तय किया है।
राजस्थान में ऐप से बनेंगे मंडी पास, मध्य प्रदेश में खरीद केंद्रों की बढ़ेगी संख्या
राजस्थान के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार राज्य में किसानों से गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से की जायेगी तथा गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए किसानों के लिए ऐप बनाया गया है। किसान ऐप के माध्यम से मंडी पास बना सकेंगे, तथा अगल-अलग फसलों के लिए अलग-अलग पास बनाना होगा। मध्य प्रदेश ने गेहूं की खरीद के लिए 15 अप्रैल की तारिख घोषित कर दी है। राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गेहूं की खरीद में भीड़ कम हो, इसके लिए खरीद केन्द्रों की संख्या भी बढ़ाई जायेगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल राज्य से 67.25 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी, लेकिन चालू रबी में बुवाई में हुई बढ़ोतरी से उत्पादन अनुमान ज्यादा है। इसलिए खरीद भी बढ़ने का अनुमान है। राज्य में गेहूं की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में करीब 20 लाख हेक्टेयर ज्यादा हुई है।
सामान्यत: मध्य प्रदेश और राजस्थान से खरीद 15 मार्च के बाद हो जाती है शुरू
गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद मध्य प्रदेश और राजस्थान से 15 मार्च के बाद शुरू हो जाती है जबकि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से खरीद पहली अप्रैल से शुरू होती है। कोरोना वायरस के कारण देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन को देखते हुए राज्य ने खरीद की तारिख बढ़ा दी है। 14 अप्रैल तक देशभर में लॉकडाउन है, इसलिए पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश ने खरीद 15 अप्रैल से और हरियाणा ने 20 अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की हुई है। रबी विपणन सीजन 2019-20 में 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई थी जबकि चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है। इसलिए खरीद में भी बढ़ोतरी का अनुमान है। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।............  आर एस राणा

लॉकडाउन के कारण खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात मार्च में 32 फीसदी घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। दुनिया भर में फेले कोरोना वायरस का असर देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात पर भी पड़ है। मार्च में इनके आयात में 32 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल आयात 9,41,219 टन का ही हुआ है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार मार्च में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 32 फीसदी घटकर 9,41,219 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल मार्च में इनका आयात 13,91,255 टन का हुआ था। चालू तेल वर्ष (नवंबर-19 से अक्टूबर-20) के पहले पांच महीनों नवंबर से मार्च के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में 10 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 53,91,807 टन का ही हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 60,05,067 टन का हुआ था।
आरबीडी पॉमोलीन का आयात प्रतिबंधित श्रेण में होने के कारण आयात घटा
केंद्र सरकार 8 जनवरी को आरबीडी पॉमोलीन के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में डाला था, जिस कारण मार्च में इसका आयात घटकर 30,850 टन का ही हुआ है। पिछले साल के मार्च की तुलना में इसमें 90 फीसदी की गिरावट आई है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों के साथ ही मूंगफली आदि की कटाई चल रही है लेकिन लॉकडाउन के कारण देशभर की मंडियां बंद है, जिस कारण मंडियों में इनकी दैनिक आवक नहीं हो रही है। ... आर एस राणा

गेहूं की खरीद में देरी से बिगड़ा गणित : कटाई से लेकर भंडारण तक में आ रही है परेशानी

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की खरीद प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पहली अप्रैल से शुरू होती है तथा मध्य प्रदेश और राजस्थान से खरीद मध्य मार्च से शुरू जाती है। कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे 21 दिनों के लॉकडाउन के कारण अभी तक कहीं खरीद शुरू नहीं हो पाई है जबकि कई राज्यों में कटाई के साथ ही कढ़ाई भी शुरू हो गई है। खरीद मध्य अप्रैल के बाद ही शुरू होने की संभावना है, ऐसे में गेहूं किसानों के सामने कटाई से लेकर भंडारण तक की परेशाानी खड़ी हो गई है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में कटाई जोरों पर है, जबकि इन राज्यों से खरीद अभी शुरू नहीं हो पाई है। मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार लॉकडाउन के कारण गेहूं की खरीद को स्थगित कर दिया है, तथा नई तारिख की घोषणा अभी नहीं की गई है। पंजाब में गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से और हरियाणा में 20 अप्रैल से शुरू होनी है। उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने गेहूं की खरीद 15 अपैल से शुरू करने की घोषणा की है।
गेहूं किसानों पर पहले मौसम की मार पड़ी, अब लॉकडाउन की
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने कहा कि गेहूं की कटाई के लिए किसानों को लेबर नहीं मिल रही है। दूकानें बंद होने के कारण कंबाइन हार्वेस्टर तथा अन्य मशीनों की रिपेयरिंग नहीं हो पाई है। लॉकडाउन के कारण मंडियां बंद है जिस वजह से गेहूं की खरीद शुरू नहीं हो पाई है। इसलिए किसानों को कटाई से लेकर भंडारण तक में परेशानी उठानी पड़ रही है। आमतौर पर किसान गेहूं की थ्रेसिंग करता है और सीधा मंडी में बेचने चला जाता है। उन्होंने कहा कि पहले किसानों पर मौसम की मार पड़ी, अब लॉकडाउन की मार पड़ रही है।  
हरियाणा में किसानों को सरकार देगी बारदाना, 20 अप्रैल से होगी खरीद शुरू
हरियाणा सरकार ने किसानों को बारदाना देने की घोषणा की है, जिससे किसान गेहूं को बोरियों में भरकर रख ले। राज्य सरकार ने 20 अप्रैल से खरीद शुरू करने की घोषणा की हुई है। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि किसानों के सामने कटाई से लेकर भंडारण की परेशानी आयेगी। हमने सरकार से बादराने के साथ ही तिरपाल देने की मांग भी की थी, लेकिन राज्य सरकार ने आढ़तियों के माध्यम से केवल बारदाना देने की मांग मानी है। उन्होंने बताया कि गेहूं की कटाई के लिए लेबर नहीं मिल रही है, कंबाइन हार्वेस्टरों पर पंजाब की लेबर काम करती है, जोकि कर्फ्यू लगा होने के कारण आ नहीं पा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मशीनों की रिपेयरिंग की दुकानों को खोलने का निर्णय भी 3 अप्रैल को किया है जबकि कटाई आरंभ हो चुकी है।
गेहूं की कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब की, 15 अप्रैल से होगी खरीद शुरू
पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राज्य में गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से शुरू करने की तैयारी है, इसके लिए बादाना मंडियों में पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन गांव की दूरी मंडी से एक-दो किलोमीटर की है, उन गांव में जाकर सीधे खरीद करने की योजना बनाई जा रही है। गेहूं खरीद में पंजाब की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी होती है। रबी विपणन सीजन 2019-20 में पंजाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 129.12 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
रिकार्ड पैदावार का अनुमान, खरीद भी बढ़ने की संभावना
रबी विपणन सीजन 2019-20 में 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई थी। चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है। इसलिए खरीद भी 350 लाख टन से ज्यादा ही होने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।...........   आर एस राणा

02 अप्रैल 2020

लॉकडाउन के कारण दूध की बिक्री 30 फीसदी से ज्यादा घटी, किसानों पर पड़ रही है मार

आर एस राणा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे 21 दिन के लॉकडाउन की मार दूध किसानों पर पड़ रही है। होटल, रेस्त्रां, हलवाई समेत कमर्शियल ऑफिस बंद होने के कारण सहकारी संस्थाओं की दूध की बिक्री करीब 25 से 30 फीसदी तक घट गई है। बिक्री कम होने के कारण देश में बड़ी सहकारी समितियां किसानों से दूध खरीदने से मना कर रही हैं।
किसानों से दूध की खरीद मुख्यत: सहकारी समितियां के साथ ही निजी कंपनियां करती हैं। सहकारी समितियों ने निजी कंपनियों को इस समस्या के लिए दोषी ठहराया है कि वे किसानों से खरीद नहीं कर रही हैं जबकि निजी कंपनियों का कहना है कि पुलिस की बर्बरता और कोरोना वायरस संक्रमण की आशंका के कारण दैनिक श्रमिकों ने नौकरी छोड़ दी है, जबकि दूध की बिक्री कम हो रही है इसलिए उनके पास अपनी डेयरियों को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
सहकारी समितियां किसानों से दूध कम खरीद रही हैं
राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (आरसीडीएफएल) जोकि राजस्थान के सबसे बड़े दूध खरीददारों में से एक है, ने दूध की खरीद में 25 फीसदी की कमी कर दी है। आरसीडीएफएल के डिप्टी मैनेजर विनोद गेरा कहते हैं कि 15 मार्च से पहले हम एक दिन में 41 लाख लीटर दूध की खरीद करते थे लेकिन अब हमने इसे घटाकर 30 लाख लीटर कर दिया है। किसान जोकि पहले निजी कंपनियों को दूध बेच रहे थे, उन्होंने आरसीडीएफएल को दूध बेचना शुरू कर दिया है इसलिए हमारे पास खरीद से इनकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। डेयरी मालिक अधिक दूध को पाउडर में बदलते हैं लेकिन गेरा का कहना है कि यह भी एक निश्चित क्षमता है। हम उत्तर प्रदेश में दूध भेज रहे हैं क्योंकि वहां हमारा पाउडर बनाने का संयंत्र हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम अतिरिक्त दूध खरीदे और फिर परिवहन कर उसे संयंत्र में पहुंचाये।
लॉकडाउन के बाद दूध की मांग में आई कमी
गाँव स्तर पर कुल 1,90,500 सहकारी समितियाँ हैं। एक अनुमान के अनुसार, 1 मार्च से 15 मार्च तक दूध की औसत खरीद प्रति दिन लगभग 500 लाख लीटर थी और बिक्री केवल प्रति दिन लगभग 390 लाख थी। जबकि लॉकडाउन के सात दिन के बाद 30 मार्च को दैनिक खरीद 533 लाख लीटर तक पहुंच गई जबकि बिक्री घटकर 330 लाख लीटर प्रति दिन रह गई।
अमूल के दूध की बिक्री में 10 फीसदी की आई कमी
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड, अमूल के मैनेजिंड डायरेक्टर रूपिंदर सिंह सोढ़ी ने माना कि उसके ब्रांड की बिक्री में 10 फीसदी की गिरावट आई है। लॉकडाउन के तुरंत बाद, घबराहट हुई थी और लोगों ने तीन-चार दिनों के लिए दूध का भंडारण किया था लेकिन इसके बाद 30 फीसदी तक की गिरावट आ गई थी। हालांकि अब बिक्री थोड़ा स्थिर हो गई है लेकिन अभी भी हमारी बिक्री में 10 फीसदी कम है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है जैसे ही गर्मी बढ़नी शुरू होगी, दूध उत्पादन में कमी और मांग में बढ़ोताी होगी।
लॉकडाउन लागू करने से पहले सरकार की दूरदर्शिता और नीतियों पर उठाया सवाल
कोल्हापुर मिल्क यूनियन जो​कि महाराष्ट्र में दूध की एक बड़ी कंपनी है, इसके 25 फीसदी दूध का कोई खरीदार नहीं है। किसानों से खरीदे जाने वाले 12 लाख लीटर में से 3 लाख बिना बिके रह जाता है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर डीवी घनेकर ने लॉकडाउन लागू करने से पहले सरकार की दूरदर्शिता और नीतियों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि मिठाई की दुकानें हमारे उपभोक्ताओं का एक बड़ा हिस्सा हैं। अगर केमिस्ट और किराने की दुकानों को खुला रखने की अनुमति है, तो हमें यह समझ नहीं आ रहा कि मिठाई की दुकानों को क्यों बंद कर दिया?
झारखंड में नहीं है दूध को पाउडर में बदलने का संयंत्र
झारखंड मिल्क फेडरेशन ने लॉकडाउन के ​तीन बाद से किसानों से दूध नहीं खरीदा है क्योंकि कंपनी के पास भंडारण क्षमता नहीं है। जेएमएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर कुमार सिंह ने आउटलुक को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को रियायती मूल्य पर बचा हुआ दूध खरीदने और गरीबों और प्रवासियों के बीच वितरित करने की पेशकश की लेकिन सरकार ने प्रस्ताव नहीं माना। उन्होंने कहा कि चूंकि झारखंड में दूध को पाउडर में बदलने के लिए कोई संयंत्र नहीं है, इसलिए मैंने दो दूध के टैंकर यानि 20,000 लीटर दूध को लखनऊ भेजा है। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में दुखद है कि हजारों प्रवासी श्रमिक भूखे र​ह रहे हैं और बचा हुआ दूध उन तक नहीं पहुंचाया जा रहा।..............  आर एस राणा

आज से शुरू नहीं हो पाई गेहूं की सरकारी खरीद, एमपी-गुजरात-राजस्थान की मंडियां नहीं खुली

आर एस राणा
नई दिल्ली। गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर आज दो अप्रैल से खरीद शुरू होनी थी लेकिन मंडियां बंद होने के कारण गेहूं की आवक नहीं हुई, जिस कारण खरीद शुरू नहीं हो पाई।
मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सहायक आपूर्ति अधिकारी आशीष दूबे ने आउटलुक को बताया कि गेहूं की एमएसपी पर खरीद को फिलहाल स्थगित कर दिया है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन चल रहा है तथा मंडी खुलेगी तो भीड इकठ्ठा होगी। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल तक तो खरीद शुरू नहीं होगी, उसके बाद स्थिति की समीक्षा की जायेगी। उन्होंने बताया कि खरीद के लिए अभी नई तारिख का ऐलान नहीं किया गया है।
राजस्थान के व्यापार मंडल ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है कि अभी गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं की जाए, क्योंकि अगर खरीद शुरू की गई तो मंडी में किसानों के साथ ही आढ़तियों, पल्लेदारों और ट्रक ड्राइवरों के साथ ही अधिकारियों की भीड़ जुटेंगी जिससे लॉकडाउन समाप्त हो जायेगा। लॉकडाउन के कारण गुजरात की मंडियां भी बंद है तथा वहां की मंडियों में भी गेहूं की आवक नहीं हो रही।
किसान समर्थन मूल्य से नीचे दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर
मध्य प्रदेश के मोरेना में स्थित एक रोलर फ्लोर मिलर्स के मालिक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि राज्य में गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग जोरों पर है, जबकि मंडियां बंद है। अत: किसान बिचौलियों को 1,600 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि रोलर फ्लोर मिलें भी 50 फीसदी क्षमता का ही उपयोग कर पा रही है, क्योंकि परिवहन के साथ ही लेबर की दिक्कतें हैं। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
केंद्र सरकार ने मंडियां खोलने की दी हुई है छूट, लॉकडाउन के कारण राज्य नहीं खोल रहे
केंद्र सरकार ने गेहूं की खरीद शुरू करने के लिए राज्य सरकारों को मंडियां खोलने के आदेश दे दिए हैं, लेकिन राज्य सरकारें अभी खरीद शुरू नहीं कर रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में गेहूं की कटाई जोरो पर हैं, जबकि हरियाणा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कटाई आरंभ हो गई है। पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की कटाई अगले सप्ताह शुरू होने का अनुमान है। पंजाब और उत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से और हरियाणा में 20 अप्रैल से शुरू होगी। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रबी विपणन सीजन 2019-20 में 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है। इसलिए खरीद में भी 350 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है।.........  आर एस राणा

मार्च अंत तक 232.74 लाख टन हुआ चीनी का उत्पादन, 21.58 फीसदी घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2019 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2019-20 के पहले छह महीनों में चीनी के उत्पादन में 21.58 फीसदी की कमी आकर कुल 232.74 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस दौरान 296.82 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार इस समय देशभर में केवल 186 चीनी मिलों में ही पेराई चल रही है, जिनमें से ज्यादातर उत्तर भारत की है। पिछले साल इस समय देश में 240 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी। कोरोना वायरस के कारण देशभर में हुए लॉकडाउन के कारण ट्रकों की उपलब्धता में कमी के साथ ही आवाजाही प्रभावित हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के कारण, पिछले 4-5 दिनों से स्थिति में सुधार हो गया है। इस्मा ने सरकार को आश्वासन दिया है कि देश में चीनी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तथा जिन राज्यों में गन्ना बचा हुआ है वहां चीनी मिलों में पेराई जारी रहेगी और गन्ना किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आनी दी जायेगी।
उत्तर प्रदेश में उत्पादन ज्यादा, महाराष्ट्र में कम
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में मार्च अंत तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 97.20 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में केवल 95.67 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में अभी तक केवल 58.70 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन में इस समय तक 105.16 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। राज्य की 118 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है तथा इस समय केवल 28 मिलों में ही पेराई चल रही है।
कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में चीनी के उत्पादन में आई कमी
कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में मार्च अंत तक चीनी का उत्पादन घटकर 33.50 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 43.18 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। तमिलनाडु में चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में 4.50 लाख टन का ही हुआ है जोकि पिछले साल के 6.33 लाख टन से कम है। गुजरात में पिछले साल इस समय तक 10.64 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था, जबकि चालू पेराई सीजन में केवल 8.50 लाख टन का ही उत्पादन हुआ है। इसी तरह से आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में चीनी का उत्पादन घटकर 4.10 लाख टन का ही हुआ है जोकि पिछले साल के 7.25 लाख टन से कम है।
लॉकडाउन के कारण पेट्रोल में मांग कम है जिसका असर एथेनॉल के उठाव पर
अन्य राज्यों में बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तथा राजस्थान को मिलाकर मार्च अंत तक 26.24 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। इस्मा के अनुसार चीनी मिलों को एथेनॉल के उठाव की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि देशभर में लॉकडाउन होने के कारण पेट्रोल में मांग में कमी आना है।........... आर एस राणा

किसान समर्थन से नीचे दालें बेचने को मजबूर, केंद्र ने सात लाख टन आयात को दी मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों को अरहर मंडियों में समर्थन मूल्य से 900 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल नीचे दाम पर बेचनी पड़ी, लेकिन केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 4 लाख टन अरहर के आयात को मंजूरी दे दी। इसके अलावा 1.50 लाख टन मटर और 1.5 लाख टन मूंग के आयात की मंजूरी भी दी गई है।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार पहली अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2020—21 में दाल मिलों द्वारा 4 लाख टन अरहर का आयात किया जायेगा। इसके अलावा 1.50 लाख टन मटर के आयात को मजूरी दी है। मटर का आयात केवल कोलकाता बंदरगाह पर किया जायेगा, तथा मटर के आयात पर 200 रुपये प्रति किलो की दर से न्यूनतम आयात शुल्क की शर्त बरकरार रहेगी। इस दौरान दाल मिलें 1.50 लाख टन मूंग का आयात कर सकेंगी।
दलहन आयात की अनुमति का असर मौजूदा कीमतों पर पड़ेगा
केंद्र सरकार खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के किसानों को मंडियों में अरहर 4,800 से 4,900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ी। कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी चंद्रशेखर नादर ने बताया कि चार लाख टन अरहर के आयात की मंजूरी तो प्राइवेट दाल मिलोें को दी है, इसके अलावा करीब दो लाख टन अरहर का आयात सरकारी सत्र पर भी होगा। केंद्र सरकार ने मोजाम्बिक से अरहर आयात के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है। चना, मसूर, मटर और मूंग के साथ ही अन्य रबी दलहन की आवक घरेलू मंडियों में आगे बढ़ेगी, अत: आयात की अनुमति का असर इनकी कीमतों पर भी पड़ेगा। उन्होंने बताया कि चना और मसूर आदि के दाम पहले ही समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं।
दालों का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी सीजन में दालों का उत्पादन बढ़कर 151.1 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले रबी सीजन की समान अवधि के 139.8 लाख टन से ज्यादा है। फसल सीजन 2019-20 में दालों का उत्पादन बढ़कर 230.2 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इनका उत्पादन 220.8 लाख टन का ही हुआ था। फसल सीजन 2017-18 में देश में रिकार्ड 254.2 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था।............  आर एस राणा

लॉकडाउन : मिलों में प्रोसेसिंग बंद होने से दालों के साथ पशुचारे के दाम बढ़े

आर एस राणा
नई दिल्ली। देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन के कारण दाल मिलों में प्रोसेसिंग भी नाममात्र की ही हो रही है, जिस कारण दालों की कीमतों में कीमतों में तेजी आई ही है, साथ पशुचारा छिल्का, खांडा और चोकर के दाम भी 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार इलाहाबाद में सोमवार को उड़द दाल के खुदरा दाम 120 रुपये, मूंग दाल के 100 रुपये, अरहर दाल के 80 रुपये और चना दाल के 60 रुपये प्रति किलो रहे। पंचकुला में उड़द दाल के भाव 110 रुपये, मूंग दाल के 120 रुपये और अरहर दाल के 110 रुपये तथा चना दाल के 80 रुपये प्रति किलो हो गए। इस दौरान मुंबई में मूंग दाल के भाव 122 रुपये, उड़द दाल के 116 रुपये और अरहर दाल के 92 रुपये तथा चना दाल के 70 रुपये प्रति किलो रहे।
ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया कि देश की कृषि उपज मंडियों के बंद होने के कारण कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे आने वाले दिनों में दालों के साथ आटा और चावल सहित अन्य खाद्य पदार्थों की कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि दाल बाजारों को बंद रखने से होने वाली समस्याओं के बारे में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
पशुआहार की कीमतों में 150 से 200 रुपये की आई तेजी
बाहरी दिल्ली में दालों के साथ पशुआहार विक्रेता कपिल बंसल ने बताया कि मिलों में प्रोसेसिंग बंद होने के कारण दालों के साथ पशुआहार की आवक प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, केवल दो बार ही सप्लाई आई है जबकि पैनिक खरीददारी होने के कारण लोग जरुरत के मुकाबले तीन या चार गुणा खरीद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दालों की खुदरा कीमतें तो अब रुक गई है, लेकिन पशुचारे के दाम अभी भी बढ़ रहे हैं। सपताहभर में पशुचार की कीमतों में 150 से 200 रुपये की तेजी आ चुकी है। चोकर का दाम बढ़कर 550 रुपये प्रति 20 किलो और खांडा के दाम 1,250 रुपये प्रति 50 किलो हो गए। सरसों खल के भाव 1,200 रुपये और बिनौला खल के 13,00 रुपये प्रति 50 किलो हो गए।
साबूत दालों के दाम सप्ताहभर में 400-500 रुपये तक बढ़े
दिल्ली के नरेला के दलहन कारोबारी महेंद्र जैन ने बताया कि मिलों में पेसेसिंग नहीं के बराबर हो रही है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण मजूदर अपने गांव चले गए है। साथ ही उत्पादक राज्यों से कच्चा माल भी नहीं आ रहा। उन्होंने बताया कि दालों की प्रोसेसिंग से बचे हुए छिल्के का उपयोग पशुआहार में होता है। दिल्ली में साबूत दालों के दाम सप्ताहभर में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए है, जिसका असर खुदरा में दालों की कीमतों के साथ पशुआहार के दाम पर भी पड़ा है। चना के भाव दिल्ली में 4,700 रुपये और अरहर के भाव 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
मंडियां खुलने बाद भी एग्री जिंसों की आवक नहीं
राजस्थान की कोटा मंडी के कारोबारी भानू जैन ने बताया कि सरकार ने मंडियां खोलने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन लेबर नहीं होने के कारण मंडियों में कारोबार शुरू ही नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि किसान भी अभी जिंस लेकर मंडी नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थिति सामान्य होने में आठ से दस दिनों को समय लगेगा, तथा मंडियों में एग्री जिंसों की दैनिक आवक 14 अप्रैल के बाद ही बढ़ने की उम्मीद है।........ आर एस राणा

देशभर में लॉकडाउन : गेहूं की सरकारी खरीद में देरी की आशंका, हरियाणा में 20 दिन टल

आर एस राणा
नई दिल्ली। मार्च में हुई बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जबकि अब सरकारी खरीद में देरी होने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। चालू रबी में गेहूं की रिकार्ड पैदावार होने का अनुमान है जबकि देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए मोदी सरकार ने 21 दिनों तक 14 अप्रैल तक पूरे भारत में लॉकडाउन का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान से गेहूं की खरीद 25 मार्च से पहले शुरू हो जाती है जबकि इन राज्यों में अभी तक खरीद शुरू नहीं हो पाई है। हरियाणा में गेहूं की खरीद 20 दिन टाल दी गई है जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी गेहूं की खरीद पहली अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद कम है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण देशभर की मंडियां बंद है, हम राज्य सरकारों के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारों से मिले फीडबैक के अनुसार मंडियों में लेबर की भारी कमी है। लॉकडाउन के कारण लेबर अपने गांव चली गई है, इसलिए गेहूं की सरकारी खरीद में देरी हो सकती है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण राज्य में गेहूं की पहली अप्रैल 2020 से शुरू होने वाली खरीद को 20 अप्रैल तक टाल दिया गया है लेकिन इस बारे में हर रोज स्थिति की निगरानी की जा रही है, तथा संभव हुआ तो पहले भी गेहूं की खरीद शुरू की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदेगी।
सरकारी खरीद में देरी से किसान कहा करेगा गेहूं के भंडारण
चालू रबी में गेहूं के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान है, ऐसे में सरकारी खरीद में कमी या फिर देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की कटाई चल रही है जबकि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की कटाई मार्च के अंत में शुरू होकर सामान्यत: 15 अप्रैल तक चलती है। अत: सरकारी खरीद में देरी से किसानों को गेहूं के भंडारण में भी परेशानी आयेगी।
उत्पादन अनुमान ज्यादा होने से सरकारी खरीद भी बढ़ने की उम्मीद
रबी विपणन सीजन 2019-20 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी, जबकि उत्पादन में बढ़ोतरी को देखते हुए चालू रबी में खरीद ज्यादा ही होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है जोकि पिछले सीजन के 10.05 करोड़ टन से ज्यादा है। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी में गेहूं की खरीद 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की थी।
कोरोना वायरस के कारण लेबर घरों में बंद, कंबाइन मशीन आई नहीं
हरियाणा के सोनीपत जिले के खरखौदा के किसान अमित कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच एकड़ में गेहूं की फसल लगाई हुई है, तथा सप्ताहभर में कटाई शुरू होनी है लेकिन लेबर नहीं मिल रही। बिहार से जो लेबर यहां आई हुई थी, कोरोना वायरस के कारण उसमें से आधे से ज्यादा लोग अपने घरों को जा चुके हैं, जो बचे हुए हैं वह घर के अंदर रहने को मजबूर है। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ कि इस बार गेहूं की कटाई कैसे होगी। बहादुरगढ़ के मांडौठी गांव के गेहूं किसान चरण सिंह दलाल ने बताया कि हर साल पंजाब से कंबाइन मशीन 20-25 मार्च तक गांव में आ जाती थी, लेकिन इस बार नहीं आई है। उन्होंने बताया कि गांव की लेबर गेहूं काटने से मना का रही है। उन्होंने कंबाइन मशीन वाले को जोकि हर गेहूं काटने आता है को फोन किया, तो उसने बताया कि हमारे यहां कर्फ्यू लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि हर हाल में गेहूं की कटाई 13 अप्रैल से पहले करनी होगी क्योंकि 13 अप्रैल को मेक होती ह............ आर एस राणा

तीन महीने का एक साथ राशन ले सकेंगी राज्य सरकारें, पीडीएस पर कैबिनेट का फैसला

 आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राज्य सरकारों को अगले तीन महीने का राशन देने के फैसले को मंजूरी दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि इसके तहत राशन दुकानों से लाभार्थियों को पहले की ही तरह ही तीन रुपये प्रति किलो की दर से चावल और दो रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं का आवंटन किया जायेगा।
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार ने 80 करोड़ लोगों को 27 रुपये किलो वाला गेहूं 2 रुपये प्रति किलो की दर से और 37 रुपये किलो वाला चावल 3 रुपये प्रति किलो की दर से देने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य सरकारों को तीन महीने का एडवांस राशन खरीदने को कहा है।
पीडीएस में अगले तीन महीने का राशन अग्रिम दिया जाएगा
उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक विपणन प्रणाली (पीडीएस) के जरिए देश के 80 करोड़ लोगों की मदद करेगी तथा किसी भी जरूरी सामान की कमी नहीं होने देंगे। राज्य सरकारें भी लोगों की मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जान बचाने के लिए लॉकडाउन की जरूरत है, इसलिए तीन महीने का राशन अग्रिम दिया जाएगा। लोगों को जरूरत की चीजें मिलती रहेंगी, इसलिए अफवाहों से बचने की जरूरत है।
केंद्रीय खूल में खाद्यान्न का बंपर स्टॉक
केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के साथ ही और अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्रीय पूल से गेहूं और चावल के साथ ही मोटे अनाजों का आवंटन करती है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार पहली मार्च को केंद्रीय पूल में 584.97 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक है, जबकि तय मानकों बफर स्टॉक के अनुसार पहली अप्रैल 2020 को केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का 160.40 लाख टन स्टॉक होना चाहिए, इसमें रिजर्व 50 लाख टन को भी मिला दें तो कुल खाद्यान्न का स्टॉक 210.40 लाख टन का होना चाहिए।..........   आर एस राणा

कोरोना वायरस का असर : पैनिक खरीददारी से खुदरा में दालों के दाम 10-25 फीसदी बढ़े

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में दालों की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है जबकि केंद्रीय पूल में बकाया स्टॉक भी ज्यादा है लेकिन कोरोना वायरस के कारण दालों में पैनिक खरीदारी होने से सप्ताहभर ही खुदरा कीमतों में 10 से 25 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। खुदरा में उड़द दाल की कीमतों में इस दौरान 25 रुपये की तेजी आकर भाव 120 रुपये और मूंग दाल की कीमतों में 20 रुपये की तेजी आकर भाव 115 रुपये तथा अरहर दाल की कीमतों में 10 रुपये की तेजी आकर भाव 105 रुपये प्रति किलो हो गए।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को दिल्ली में चना दाल का भाव 72 रुपये, अरहर दाल का 93 रुपये, मूंग दाल का 101 रुपये, उड़द दाल का 108 रुपये और मसूर दाल का 71 रुपये प्रति किलो रहा। उत्पादक राज्यों में उड़द और मूंग के साथ ही मसूर और चना की नई फसल की आवक हो रही थी लेकिन लॉकडाउन से मंडियां बंद होने के कारण इनकी दैनिक आवक बंद हो गई है, जिस कारण दालों की प्रोसेसिंग भी रुक गई है।
कोरोना वायरस के कारण लोग दैनिक जरुरत की खरीद कर है ज्यादा
बाहरी दिल्ली के कंझावला में कपिल जनरल स्टोर चलाने वाले कपिस बंसल ने बताया कि कोरोना वायरस के डर से घरों में रहने की हिदायत देने के बाद से आम आदमी दैनिक जरुरत की वस्तुाओं की खरीददारी ही ज्यादा कर रहा है जिस कारण दालों की कीमतों में सप्ताहभर में 10 से 25 रुपये प्रति किलो तक की तेजी आ चुकी है। उन्होंने बताया कि चना और मसूर दाल की कीमतों में सप्ताहभर में पांच से सात रुपये प्रति किलो की तेजी आकर इनके भाव क्रमश 72 और 77 रुपये प्रति किलो हो गए जबकि इस दौरान सबसे ज्यादा तेजी उड़द और मूूंग दाल की कीमतों में क्रमश: 25 और 20 रुपये प्रति किलो की आई है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन होने के बाद सोमवार को लोग ज्यादा खरीददारी कर रहे थे, लेकिन आज मंगलवार को पुलिस की सख्ती के कारण लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे।
लॉकडाउन के कारण उत्पादक राज्यों की मंडियां है बंद
दिल्ली के नरेला में दाल मिल चलाने वाले महेंद्र जैन ने बताया कि उनकी मिल में अरहर दाल की प्रोसेसिंग होगी है, अरहर में कच्चे माल की आपूति पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से होती है जबकि इन राज्यों में लॉकडाउन है जिस कारण कच्चा माल नहीं आ रहा इसलिए मिल में प्रोसेसिंग बंद हो चुकी है। उन्होंने बताया कि सप्ताहभर में ही साबुत अरहर के दाम करीब 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो चुके हैं जिसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ा है।
कच्चा माल नहीं मिलने से दाल मिलों में प्रोसेसिंग हो चुकी है बंद
कर्नाटक के गुलबर्गा के दाल मिलर चंद्रशेखर ने बताया कि हमारी मिल में उड़द दाल की प्रोसेसिंग होगी है तथा इस समय उड़द की आवक महाराष्ट्र या आंध्रप्रदेश से होती है। इन राज्यों में लॉकडाउन है। उन्होंने बताया कि म्यांमार से उड़द का आयात तो हो रहा है, लेकिन आयातित उड़द की शिपमेंट अनलोड नहीं हो रही है, जिस कारण कच्चा माल नहीं मिलने से दाल मिल में प्रोसेसिंग बंद हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के डर के कारण आम आदमी आवश्यक वस्तुओं की पैनिक खरीददारी कर रहा था, जिस कारण दाल की थोक कीमतों में सप्ताहभर में 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है।
दालों का उत्पादन अनुमान ज्यादा
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2019-20 में दालों का उत्पादन 230.2 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 220.8 लाख टन से ज्यादा है। चालू रबी में दालों का उत्पादन पिछले साल के 139.8 लाख टन से बढ़कर 151.1 लाख टन होने का अनुमान है।.........  आर एस राणा

कोरोना वायरस : कई राज्यों में मंडियां बंद होने से किसानों को गेहूं बेचने में होगी परेशानी

आर एस राणा
नई दिल्ली। गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की कटाई आरंभ हो चुकी है जबकि अन्य राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों में कटाई शुरू होने वाली है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोरोना वायरस के कारण मंडियां बंद है जबकि इन राज्यों से गेहूं की खरीद 25 मार्च से शुरू होनी है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गेहूं की सरकारी खरीद पहली अप्रैल 2020 से शुरू होगी। ऐसे में अगर मंडियां नहीं खुली तो किसानों को गेहूं बेचने में दिक्कतों का सामाना करना पड़ सकता है।
मार्च महीने में कई राज्यों में हुई बेमौसम बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि से कई राज्यों में गेहूं की फसल को पहल ही नुकसान हुआ है। बारिश के साथ ही तेज हवा से फसल खेतों में गिर गई है जिसका असर उत्पादकता के साथ ही क्वालिटी पर भी पड़ेगा। केंद्र सरकार ने देशभर के 75 जिलों में लॉकडाउन किया हुआ है तथा मध्य प्रदेश और राजस्थान में मंडियां बंद की गई है, जबकि कई अन्य राज्यों में भी बंद होने की आशंका है। अत: मंडियां नहीं खुली तो किसान गेहूं कहां बेचेंगे?
गेहूं का रिकार्ड उत्पादन अनुमान
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान है जोकि पिछले सीजन के 10.05 करोड़ टन से ज्यादा है। रबी विपणन सीजन 2019-20 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 341.32 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी, जबकि उत्पादन में बढ़ोतरी को देखते हुए चालू रबी में खरीद ज्यादा ही होने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए गेहूं का एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी में गेहूं की खरीद 1,840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की थी।
केंद्रीय पुल में खाद्यान्न का बंपर स्टॉक
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार पहली मार्च को केंद्रीय पूल में 584.97 लाख टन खाद्यान्न का स्टॉक है, जबकि तय मानकों बफर स्टॉक के अनुसार पहली अप्रैल 2020 को केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का 160.40 लाख टन स्टॉक होना चाहिए, इसमें रिजर्व 50 लाख टन को भी मिला दें तो कुल खाद्यान्न का स्टॉक 210.40 लाख टन का होना चाहिए। पहली अप्रैल को केंद्रीय पूल में गेहूं का 44.60 लाख टन का बफर स्टॉक और 20 लाख टन के रिजर्व को मिलाकर कुल 64.60 लाख टन का ही स्टॉक होना चाहिए, पहली पहली मार्च 2020 को केंद्रीय पूल में गेहूं का ही 275.21 लाख टन का स्टॉक है।..........  आर एस राणा