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03 सितंबर 2026

देश से 1.5 अरब डॉलर से अधिक के गेहूं निर्यात का अवसर - एसोचैम

नई दिल्ली। देश 1.5 अरब डॉलर से अधिक के गेहूं निर्यात के अवसर का लाभ उठा सकता है। निर्यात पर लगी पाबंदियों में धीरे-धीरे ढील, मजबूत घरेलू उत्पादन, पर्याप्त भंडार और प्रमुख वैश्विक खरीदारों द्वारा गेहूं की खरीद के स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास भारत के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। यह बात एसोचैम (एसोचैम) की एक रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त अधिशेष स्टॉक मौजूद है। इससे घरेलू खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ गेहूं के निर्यात को बढ़ाने की गुंजाइश बनी है।

एसोचैम ने कहा कि, भारत हाल के वर्षों में वैश्विक गेहूं व्यापार के सबसे संभावनाशील दौर में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2026 में करीब चार वर्षों तक लागू निर्यात प्रतिबंधों के बाद गेहूं निर्यात को धीरे-धीरे फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई है।रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने गेहूं की कुछ निर्धारित किस्मों, गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों की निर्यात नीति में भी बदलाव किया है। गेहूं, ड्यूरम गेहूं, आटा, मैदा और सूजी/रवा सहित इन उत्पादों की श्रेणी को ‘प्रतिबंधित’ से ‘मुक्त’ निर्यात नीति के तहत लाया गया है।

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 120.7 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन किया। इसके साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश बना हुआ है। 28 मई 2026 तक केंद्रीय पूल में गेहूं का भंडार 51.3 मिलियन टन था, जबकि 1 जुलाई के लिए निर्धारित बफर स्टॉक मानक 27.58 मिलियन टन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, भारत का मौजूदा गेहूं निर्यात उसकी उत्पादन क्षमता और उपलब्ध अधिशेष की तुलना में अभी काफी कम है। ऐसे में आने वाले वर्षों में गेहूं निर्यात बढ़ाने की काफी गुंजाइश मौजूद है।

वैश्विक बाजार में भारत को कीमत के स्तर पर भी फायदा मिल सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लगभग 268 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के बराबर था, जबकि मई 2026 में अंतरराष्ट्रीय गेहूं की कीमत करीब 303 अमेरिकी डॉलर प्रति टन थी। इस तरह दोनों कीमतों में लगभग 35 डॉलर प्रति टन का अंतर था।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश भारतीय गेहूं के लिए सबसे मजबूत बाजार अवसर पेश करता है। इसके अलावा मिस्र, इंडोनेशिया, अल्जीरिया, मोरक्को और फिलीपींस जैसे देशों में भी धीरे-धीरे निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं हैं। बांग्लादेश ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 6.7 मिलियन टन गेहूं का आयात किया था और भारत पहले से ही उसके प्रमुख गेहूं आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि, वैश्विक गेहूं उत्पादन 2026-27 में घटकर लगभग 819 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह रिकॉर्ड 843.8 मिलियन टन था। प्रमुख गेहूं निर्यातक देशों में मौसम संबंधी चुनौतियों को उत्पादन में संभावित गिरावट की एक वजह बताया गया है।इसी बीच, प्रमुख गेहूं आयातक देश अधिक विविधतापूर्ण और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं। इससे भारत को वैश्विक गेहूं बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, रिपोर्ट ने आगाह किया कि लंबे समय में सफलता के लिए भारत को लगातार बेहतर गुणवत्ता, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बेहतर भंडारण एवं परीक्षण सुविधाओं और निर्यात नीतियों में अधिक स्पष्टता सुनिश्चित करनी होगी।एसोचैम के अनुसार, निर्यात के लिए क्रमिक और पूर्वानुमान योग्य नीति अपनाने के साथ-साथ भंडारण, परिवहन और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे में निवेश किया जाए तो भारत एक अधिक भरोसेमंद वैश्विक गेहूं आपूर्तिकर्ता बन सकता है।

चीनी की खुदरा कीमतों में 5 फीसदी की आई गिरावट - डीएफपीडी

नई दिल्ली। देश में चीनी की खुदरा कीमतों में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है और आने वाले दिनों में इनमें और नरमी आने की उम्मीद है। यह गिरावट मिल स्तर (एक्स-मिल) पर चीनी की कीमतों में करीब 20 फीसदी की कमी के बाद देखने को मिली है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने यह जानकारी दी। डीएफपीडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि, एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। विभाग को उम्मीद है कि, एक्स-मिल दरों में गिरावट का रुझान जारी रहने पर खुदरा कीमतों में भी आगे और कमी आएगी।

सरकार ने कहा कि वह घरेलू चीनी बाजार पर करीबी नजर रख रही है और पर्याप्त उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति तथा कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। विभाग ने कहा, सरकार सभी हितधारकों को आश्वस्त करती है कि घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। साथ ही, सरकार ने स्पष्ट किया कि वास्तविक व्यापार और वितरण गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहेंगी।

यह बयान अगस्त में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद सरकार द्वारा बाजार में बढ़ाए गए हस्तक्षेप के बीच आया है। अधिकारियों ने जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार कीमतों की निगरानी बढ़ा दी है। एक्स-मिल कीमतों में गिरावट से थोक और खुदरा बाजारों पर कीमतों का दबाव कम होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि देशभर में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है

केंद्र ने मिलों से 20 से 25 अगस्त के दौरान चीनी की खरीद एवं बिक्री का ब्योरा मांगा

नई दिल्ली। चीनी की कीमतों में हाल ही में आई तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार आए दिन नए, नए निर्देश जारी कर रही है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय ने सभी चीनी मिलों द्वारा 20 से 25 अगस्त 2026 के दौरान बेची गई चीनी का मिल-वार और खरीदार का पूरा विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


केंद्र सरकार ने यह निर्देश 2 सितंबर 2026 को चीनी मिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और प्रबंध निदेशकों (एमडी) को जारी किए गए पत्र के माध्यम से दिया गया। विभाग ने यह निर्देश 20 अगस्त 2026 को जारी किए गए अपने पूर्व पत्र के क्रम में जारी किया है। इसके तहत चीनी मिलों को पत्र के साथ संलग्न निर्धारित प्रारूप में बिक्री संबंधी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। यह जानकारी मात्रा-वार, दर-वार और तारीख के आधार पर देनी होगी तथा प्रत्येक बिक्री के साथ ही लेनदेन का अलग-अलग विवरण दर्ज करना अनिवार्य किया है।

विभाग के अनुसार 20 से 25 अगस्त 2026 की प्रत्येक तारीख का विवरण अलग से प्रस्तुत किया जाना है। यदि किसी एक दिन अलग-अलग दरों पर या अलग-अलग खरीदारों को कई बार बिक्री की गई हैं, तो प्रत्येक लेनदेन को अलग-अलग ब्यौरा दर्ज करना होगा। प्रत्येक लेनदेन के लिए खरीदार का नाम, पूरा पता, टेलीफोन या मोबाइल नंबर तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण संख्या भी उपलब्ध करानी होगी। बेची गई चीनी की मात्रा केवल क्विंटल में दर्ज करनी होगी, जबकि बिक्री दर रुपये प्रति क्विंटल के रूप में बतानी होगी।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी पूर्ण, सटीक और संबंधित चीनी मिल द्वारा विधिवत सत्यापित होनी चाहिए। सभी चीनी मिलों के लिए यह विवरण 3 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक निर्धारित आधिकारिक ईमेल sugarcontrol-fpd@gov.in पर एक्सेल प्रारूप में भेजना अनिवार्य किया गया है। विभाग ने इस मामले को अत्यंत जरूरी बताया है और कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की देरी या विफलता को गंभीरता से लिया जाएगा।

व्यापारियों के अनुसार घरेलू बाजार में 22 अगस्त से अभी तक चीनी की थोक कीमतों में करीब 900 से 1,400 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है। दिल्ली में चीनी के थोक भाव 2 सितंबर, यानी बुधवार को 5,700 रुपये, कानपुर में 5,650 रुपये और मुंबई में 5,200 रुपये तथा कोलकाता में 5,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। 20 अगस्त 2026 को दिल्ली में चीनी के थोक भाव 6,600 रुपये, कानपुर में 6,650 रुपये और मुंबई में 6,750 रुपये तथा कोलकाता में 6,800 रुपये प्रति क्विंटल थे।

चीनी की खुदरा कीमतों में इस दौरान 7 से 9 रुपये प्रति किलो का मंदा आया है। दिल्ली में चीनी के खुदरा भाव 2 सितंबर, यानी बुधवार को 61 रुपये, कानपुर में 62 रुपये और मुंबई में 61 रुपये तथा कोलकाता में 61 रुपये प्रति किलो रह गए। 20 अगस्त 2026 को दिल्ली में चीनी के खुदरा भाव 68 रुपये, कानपुर में 69 रुपये और मुंबई में 68 रुपये तथा कोलकाता में 70 रुपये प्रति किलो थे।