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18 सितंबर 2026

अगस्त तक इथेनॉल की आपूर्ति 895 करोड़ लीटर, करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी अनाज की-एआईडीए

नई दिल्ली। एथेनॉल सप्लाई फसल सीजन 2025-26 के अगस्त 2026 अंत तक देश में कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई है। इसमें करीब 70 फीसदी हिस्सा अनाज आधारित उत्पादों से बनाया गया है।


ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल आपूर्ति तय किए गए 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंध का करीब 85 फीसदी है। अत: अगस्त के अंत तक कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति में से 624 करोड़ लीटर अनाज आधारित स्रोतों से प्राप्त हुआ है, जबकि 271 करोड़ लीटर एथेनॉल चीनी आधारित उत्पादों से बनाया गया है।

अनाज आधारित स्रोतों में मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा तथा इससे 345 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के द्वारा दिए अतिरिक्त चावल से 214 करोड़ लीटर और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। वहीं, चीनी आधारित उत्पादों से अगस्त के अंत तक कुल 271 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसमें गन्ने के रस से 149 करोड़ लीटर, बी-हेवी मोलासेस से 107 करोड़ लीटर और सी-हेवी मोलासेस से 15 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन शामिल है।

एआईडीए के अनुसार देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगली बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि उत्पादन में वृद्धि के अनुरूप एथेनॉल के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त और स्थिर अवसर भी उपलब्ध हों। भारत मौजूदा एथेनॉल-ब्लेंडिंग व्यवस्था से आगे बढ़कर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (एफएफवी), कंप्रेस्ड बायोगैस (केबीजी), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएफ) और अन्य क्षेत्रों में एथेनॉल के व्यापक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में एथेनॉल की बढ़ती उपलब्धता के लिए नए उपयोग क्षेत्रों का विकास महत्वपूर्ण होगा।

एआईडीए के अनुसार अगस्त के अंत के आंकड़े के हिसाब से देश का एथेनॉल सप्लाई तंत्र काफी विकसित हुआ है तथा अब तक आपूर्ति किए गए 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में करीब 70 फीसदी हिस्सा अनाज आधारित उत्पादों से तैयार किया गया है। इसमें मक्का का योगदान 345 करोड़ लीटर और अतिरिक्त एफसीआई चावल का योगदान 214 करोड़ लीटर रहा है।

चीनी आधारित फीडस्टॉक भी एथेनॉल आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अत: इथेनॉल उत्पादन में विभिन्न घरेलू कृषि संसाधनों की भागीदारी देश के एथेनॉल कार्यक्रम की महत्वपूर्ण ताकत है। इससे उद्योग को अलग-अलग फीडस्टॉक स्रोतों पर निर्भर रहने का विकल्प मिलता है और किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता भी कम होती है।

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