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12 सितंबर 2026

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में तिलहन का आयात, निर्यात की तुलना में बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। देश में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान मूल्य और मात्रा दोनों के हिसाब से तिलहन का आयात, निर्यात की तुलना में बढ़ा है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के द्वारा जारी किए गए, डीजीएफटी के डेटा से पता चलता है कि देश में अप्रैल से जून 2026 के दौरान 2,618 करोड़ रुपये कीमत की 209,197 टन तिलहन का निर्यात किया। मात्रा और मूल्य दोनों के हिसाब से, मूंगफली और तिल का निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा रहा। वहीं, देश ने इसी अवधि के दौरान 5,80,119 टन तिलहन का आयात भी किया, जिनमें मुख्य रूप से सोयाबीन और तिल के बीज शामिल हैं, जिनकी कीमत 3,146 करोड़ रुपये है।

देश से निर्यात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी मूंगफली की रही। अप्रैल से जून 2026 के दौरान, छिलके वाली मूंगफली का निर्यात 133,861 टन हुआ, जिसकी कीमत 1,550 करोड़ रुपये है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने लगभग 663,809 टन मूंगफली निर्यात की थी, जिसकी कीमत 6,092 करोड़ रुपये थी। इसके निर्यात में इंडोनेशिया, वियतनाम, मलेशिया, चीन और फिलीपींस मुख्य रहे।

इसका निर्यात केवल कच्चे दानों तक ही सीमित नहीं है। ग्रेडेड, कैलिब्रेटेड, ब्लैंच्ड, रोस्टेड और प्रोसेस्ड मूंगफली उत्पादों के निर्यात पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है, जिससे भारतीय निर्यातक ज्यादा मूल्य वाले सेगमेंट की ओर बढ़ सकें और फूड मैन्युफैक्चरर्स और रिटेल मार्केट्स के साथ लंबे समय के रिश्ते बना सकें।

एसईए के अनुसार अप्रैल-जून 2026 के दौरान 61,248 टन तिल का निर्यात हुआ, जिसने 945 करोड़ रुपये का योगदान दिया। इसकी तुलना में ज्यादा मात्रा इसके निर्यात से होने वाली कमाई के लिए एक जरूरी चीज बनाती है। साफ किए हुए, मशीन से छांटे गए, प्रोसेस किए हुए और वैल्यू-एडेड तिल के लिए बाजार बढ़ाने की गुंजाइश है, खासकर जहाँ खरीदार एक जैसी क्वालिटी, ट्रेसेब्लिटी और फूड-सेफ्टी का पालन चाहते हैं।

सरसों, अलसी, कुसुम और दूसरे तिलहन की हिस्सेदारी अभी देश के निर्यात बास्केट में कम हैं जबकि इन के लिए खास विदेशी मार्केट बनाने से निर्यात के और मौके बन सकते हैं।

एसईए के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान देश ने 3,146.98 करोड़ रुपये की कीमत के 580,119 टन तिलहन का आयात किया। अत: आयात बास्केट में सोयाबीन और तिल के बीज की हिस्सेदारी ज्यादा है, जो कुल आयात मात्रा का लगभग 99.25 फीसदी और कुल आयात मूल्य का 99.15 फीसदी थे। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में देश  ने 3,130 करोड़ रुपये की कीमत के 481,000 टन अलग-अलग तिलहन आयात किए थे।

पहली तिमाही में सोयाबीन का आयात 5,50,000 टन तक पहुंच गया, जिसकी कीमत 2,931 करोड़ रुपये है, जो कुल आयात की गई मात्रा का 96 फीसदी और कुल आयात मूल्य का 93 फीसदी है। इस इस दौरान देश के ऑयल सीड आयात बास्केट में सोयाबीन सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। यह मुख्य रूप से इंडिया अफ्रीका ट्रेड एग्रीमेंट के तहत ‘लीस्ट डेवलप कंट्रीज़’ (एलडीसी) से बिना किसी ड्यूटी पर आयात किया जाता है।

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