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03 सितंबर 2026

केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों की स्टॉक सीमा को घटाकर आधा किया

नई दिल्ली। कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए केंद्र सरकार ने अब चीनी डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल तक कर दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि बदली हुई लिमिट 15 सितंबर 2026 से लागू होगी और 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी।


मंत्रालय के मुताबिक, स्टॉक होल्डिंग लिमिट में कमी का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी तथा सट्टेबाजी पर रोक लगाना है। मंत्रालय ने एक प्रेस नोट में कहा कि इससे सप्लाई चेन के जरिए चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी तथा उपभोक्ता को सही दामों पर इसकी लगातार सप्ताह होगी।

बदले हुए नियमों के मुताबिक, डीलर चीनी मिलने की तारीख से 30 दिनों से ज्यादा कोई स्टॉक नहीं रख सकते। हालांकि, कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय इलाकों में, चीनी डीलर 4,000 क्विंटल तक स्टॉक रख सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से चीनी खरीदता है और देश के पूर्वी हिस्से, जिसमें नॉर्थ-ईस्ट इलाका भी शामिल है, को सप्लाई करता है। इसलिए, कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय इलाकों के लिए 4,000 क्विंटल की मौजूदा लिमिट को बनाए रखा गया है।

सूत्रों के अनुसार सरकारी हस्तक्षेप के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। कुछ समय पहले कीमतें करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जो अब घटकर लगभग 45 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं। सरकार का कहना है कि स्टॉक सीमा सख्त करने से अत्यधिक भंडारण और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने में मदद मिली है। इससे बाजार पर दबाव कम होगा और मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में भी गिरावट आई है।

नई व्यवस्था के तहत डीलर किसी भी समय या किसी भी स्थान पर 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी नहीं रख सकेंगे। इसके अलावा, उन्हें चीनी प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक उसका स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार के अनुसार, नई सीमा का उद्देश्य चीनी की अत्यधिक जमाखोरी रोकना, सट्टा कारोबार को हतोत्साहित करना और आपूर्ति श्रृंखला में चीनी की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करना है। इससे उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चीनी की लगातार उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

संशोधित सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने चीनी के स्टॉक की गहन निगरानी और भौतिक सत्यापन का प्रावधान किया है। अधिकारियों द्वारा डीलरों के पास उपलब्ध चीनी के वास्तविक स्टॉक की जांच की जाएगी। इससे पहले केंद्र सरकार ने चीनी मिलों और डीलरों के लिए स्टॉक सीमा से जुड़े नियमों में बदलाव के साथ-साथ मासिक चीनी बिक्री कोटा व्यवस्था में भी बदलाव किया है। 

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