कुल पेज दृश्य

07 सितंबर 2026

देश में कपास वायदा मार्केट को मजबूत करने के लिए सीएआई और एनसीडीईएक्स में समझौता

नई दिल्ली। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) और नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) ने गुरुवार को मुंबई में एनसीडीईएक्स ऑफिस में  समझौता किया, जो देश में कपास वायदा मार्केट को डेवलप करने और मजबूत करने की दिशा में एक कदम उठायेगा।

इस पत्र पर एनसीडीईएक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ विकास गोयल और सीएआई के प्रेसिडेंट, विनय एन. कोटक ने कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीएमडी, एनसीडीईएक्स बोर्ड के सदस्यों और सीएआई बोर्ड और कमेटियों के सदस्यों की मौजूदगी में साइन किए।

इस मौके पर बोलते हुए विनय एन. कोटक ने कहा कि सीएआई के लिए एनसीडीईएक्स के साथ यह जुड़ाव हमारी पुरानी जड़ों की ओर वापसी दिखाता है, साथ ही हम भविष्य की ओर मजबूती से देख रहे हैं। सीएआई कॉटन वायदा एक समृद्ध विरासत और गहरी डोमेन जानकारी लेकर आया है, जबकि एनसीडीईएक्स टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूशनल ताकत और कमोडिटी डेरिवेटिव्स की एक्सपर्टाइज्ड लेकर आया है। अत: हमें पूरा भरोसा है कि हम साथ मिलकर एक लिक्विड, ट्रांसपेरेंट और यूजर-फ्रेंडली कॉटन वायदा मार्केट बना पाएंगे जो पूरी कॉटन और टेक्सटाइल वैल्यू चेन को सर्विस देगा।

सीएआई की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए, कोटक ने कहा कि सीएआई को फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1952 के तहत परमानेंट पहचान मिली थी, और 1966 में सरकार के बैन के बाद, 1998 में जब वायदा फिर से शुरू हुआ, तो यह पहला एक्सचेंज था जिसे कॉटन फ्यूचर्स ट्रेडिंग फिर से शुरू करने की अनुमति मिली थी। सीएआई ने बाद में मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज के आने से पहले कॉटन वायदा में काफी वॉल्यूम जेनरेट किया था। उन्होंने कहा कि वायदा तीन जरूरी काम करते हैं, पहला है प्राइस डिस्कवरी, हेजिंग और रिस्क मैनेजमेंट के साथ ही लिक्विडिटी देना है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कॉटन उत्पादन और उपभोक्ता में से एक है, फिर भी इंडियन मार्केट पार्टिसिपेट अक्सर हेजिंग के लिए इंटरनेशनल मार्केट की ओर देखते हैं। हमें वायदा में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉटन वायदा कॉन्ट्रैक्ट की सफलता पूरी वैल्यू चेन पर निर्भर करेगी, क्योंकि एक्सचेंज प्लेटफॉर्म देता है, लेकिन लिक्विडिटी मार्केट पार्टिसिपेट की मिली-जुली जिम्मेदारी है। हमें पहला कदम उठाना चाहिए और मार्केट में एक्टिव रूप से भाग लेना होगा।

उन्होंने कहा कि आज की साइनिंग भारत के कॉटन वायदा मार्केट में एक नए चैप्टर की शुरुआत हुई है, जिसमें सरकार, एक्सचेंज और मार्केट की भागीदारी मिलकर देश को कॉटन वायदा में सच में आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। हमारा मुख्य मकसद कपास के लिए आत्मनिर्भर वायदा भाव डिस्कवरी और हेजिंग सुविधाओं के सरकार के विजन को सपोर्ट करना है, जिससे किसानों के लिए बेहतर प्राइस डिस्कवरी और ज्यादा आमदनी हो सके, साथ ही टेक्सटाइल प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स को उनके कॉटन के रॉ मटेरियल की जरूरतों को हेज करने के लिए एक असरदार रिस्क कम करने वाला टूल दिया जा सके और 2030 तक टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 100 डॉलर बिलियन हासिल करने के सरकार के लक्ष्य में योगदान दिया जा सके।

इस अवसर पर एनसीडीईएक्स के एमडी और सीईओ विकास गोयल ने कहा कि कॉटन भारत की खेती-बाड़ी की इकॉनमी का केंद्र है, फिर भी हमारा डेरिवेटिव्स मार्केट कभी भी देश के उत्पादन के स्केल को पूरी तरह से नहीं दिखा पाया है। सीएआई के साथ यह पार्टनरशिप इसे बदलने के लिए एक सोचा-समझा कदम है। सीएआई का गहरा मेंबरशिप बेस और ऑन-ग्राउंड एक्सपर्टीज बहुत कीमती होगी क्योंकि हम मार्केट डेवलपमेंट पर मिलकर काम करेंगे और देश के कॉटन वैल्यू चेन पार्टिसिपेंट्स के लिए नई संभावनाएं खोलेंगे। यह न सिर्फ एनसीडीईएक्स को हमारी कॉटन कॉम्प्लेक्स ऑफरिंग को मजबूत करने और ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से ट्रेड प्रैक्टिस बनाने में मदद करेगा, बल्कि यह कपास उगाने वालों से लेकर निर्यातकों तक पूरी वैल्यू चेन को प्राइस रिस्क को मैनेज करने का एक ट्रांसपेरेंट और भरोसेमंद तरीका भी देगा।

कोई टिप्पणी नहीं: