नई दिल्ली। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से नया गन्ना पेराई सीजन आरंभ करने का फैसला किया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र के साथ ही राज्य सरकार की ओर से विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं तथा त्योहारी सीजन में चीनी की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने 15 अक्टूबर से गन्ने का पेराई सीजन शुरू करने का फैसला लिया है। मुंबई के सह्याद्री अतिथि गृह में हुई इस बैठक में सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, पूर्व मंत्री दिलीप वलसे-पाटील के साथ ही विभिन्न चीनी मिल संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक के बाद महाराष्ट्र के गन्ना आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने गन्ने की पेराई का सीजन 15 अक्टूबर 2026 से शुरू करने की जानकारी दी।
पिछले सीजन में विभिन्न कारणों से देशभर में चीनी के पहले के उत्पादन अनुमान में कमी आई थी, जिस कारण बाजार में चीनी की उपलब्धता में कमी आई तथा पिछले दिनों इसके दाम काफी तेज हो गए थे। अगस्त में कुछ स्थानों पर चीनी की खुदरा कीमत बढ़कर 70 से 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
केंद्र सरकार की ओर से किए गए विभिन्न उपायों के कारण हाल ही में इसकी कीमतों में गिरावट आई है, तथा बुधवार को चीनी के एक्स-मिल भाव 4,800 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे। केंद्र सरकार की सख्ती के बाद चीनी की थोक कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि उसकी तुलना में खुदरा भाव में गिरावट सीमित मात्रा में देखी गई।
आगामी त्योहार सीजन को देखते हुए चीनी की मांग और बढ़ने की संभावना है। गणेशोत्सव के बाद नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में बाजार में चीनी की मांग बढ़ सकती है। इसी संभावित मांग और चीनी की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने गन्ना पेराई सीजन समय से पहले शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध हो, जिससे की इसकी कीमतों को नियंत्रण में रखा जा सके।
जानकारों के अनुसार महाराष्ट्र में आमतौर पर चीनी मिलों में गन्ने का पेराई सीजन नवंबर महीने में आरंभ होता है। हालांकि, इस बार राज्य सरकार ने 15 अक्टूबर से चीनी मिलों का पेराई सीजन शुरू करने का फैसला किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अक्टूबर महीने में ही पेराई शुरू करने से किसानों और चीनी मिलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए चीनी मिल संगठनों ने पेराई सीजन जल्द शुरू करने के फैसले का विरोध किया है।
राज्य सरकार ने आगामी त्योहारों के दौरान चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, संभावित चीनी की कमी को रोकने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें