कुल पेज दृश्य

29 अगस्त 2026

चीनी की एक्स-मिल कीमतों में लगभग 20 फीसदी का मंदा, खुदरा भाव में भी गिरावट शुरू

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में कई अहम कदम उठाए हैं। इन उपायों के असर से पिछले कुछ दिनों में एक्स-मिल चीनी की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, खुदरा बाजार में इसके दाम नीचे आने लगे हैं।


केंद्र सरकार के अनुसार चीनी की एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट का असर जल्द ही इसकी खुदरा कीमतों पर दिखोगा। सरकार देशभर में चीनी की कीमतों, स्टॉक और उसकी आवाजाही पर लगातार नजर रख रही है। एक्स-मिल और खुदरा कीमतों में गिरावट से संकेत मिलता है कि हाल में चीनी के दाम में आई तेजी जमाखोरी और सट्टेबाजी के कारण आई थी, जबकि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

देशभर की चीनी मिलों में स्टॉक के सत्यापन के लिए चलाए गए अभियान से भी पर्याप्त उपलब्धता की पुष्टि हुई है। कई मामलों में चीनी मिलों के पास सरकार को अपनी मासिक रिपोर्ट में घोषित मात्रा से अधिक चीनी का स्टॉक पाया गया। सत्यापन से स्पष्ट हुआ है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। इसलिए घबराकर खरीदारी करने या जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने का कोई आधार नहीं है। कुछ मामलों में चीनी मिलों द्वारा शॉर्ट सेलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। यानी मिलों ने दिए गए मासिक कोटे के मुकाबले कम मात्रा में चीनी की बिक्री की है। पर्याप्त भौतिक स्टॉक होने के बावजूद इस तरह की गतिविधियां बाजार में चीनी की उपलब्धता को अनावश्यक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

केंद्र सरकार के अनुसार कुछ मामलों में महीने की शुरुआत में मिलों द्वारा बेची गई चीनी को खरीदार महीने के अंत में उठाते थे। इससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनती थी। इस समस्या को दूर करने और बाजार में समय पर चीनी पहुंचाने के लिए सरकार ने सितंबर से पखवाड़े के आधार पर चीनी आवंटन व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। यह मौजूदा मासिक कोटा व्यवस्था की जगह लेगी। नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित मात्रा में से कम से कम 40 फीसदी चीनी पहले सप्ताह में बेचनी होगी, जबकि बाकी मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी।

चीनी मिलों को पहले ही निर्देश दिया जा चुका है कि उनके द्वारा बेची गई चीनी को बिक्री के सात दिनों के भीतर मिल से डिस्पैच किया जाए। पखवाड़े के आधार पर कोटा आवंटन और सात दिनों के भीतर अनिवार्य डिस्पैच से चीनी की सप्लाई चेन में आवाजाही तेज होने की उम्मीद है। इससे मिलों से डीलरों और फिर उपभोक्ताओं तक चीनी जल्द पहुंच सकेगी। साथ ही अनावश्यक रूप से चीनी जमा करने और सट्टेबाजी के लिए स्टॉक रखने पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार ने थोक चीनी उपभोक्ताओं को भी अपनी वास्तविक जरूरत से अधिक स्टॉक जमा नहीं करने की सलाह दी है।

नए चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर के दौरान 10 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन होगा। सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बिना किसी प्रतिबंध के बेचने की अनुमति भी दी है। इसका उद्देश्य नए सीजन की चीनी को जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध कराना है। नवंबर में करीब 45 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे घरेलू खपत के लिए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध होगी।

केंद्र सरकार ने एक बार फिर उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। आगामी त्योहारी सीजन के दौरान भी देशभर में उचित कीमतों पर चीनी की पर्याप्त और लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

कोई टिप्पणी नहीं: