कुल पेज दृश्य

29 अगस्त 2026

सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी से गुजरात में कॉटन तेज, उत्तर भारत स्थिर से सुधार

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी से गुरुवार को गुजरात में कॉटन के दाम तेज हुए, जबकि इस दौरान उत्तर भारत में इसकी कीमतों स्थिर से सुधार आया।


सीसीआई ने 27 अगस्त, गुरुवार को कॉटन के बिक्री भाव 100 रुपये प्रति कैंडी तेज किए, हालांकि उत्तर भारत के राज्यों में इसके बिक्री भाव स्थिर रखे। सीसीआई ने फसल सीजन 2025-26 में खरीदी हुई 93,53,300 गांठ कॉटन की बिक्री 26 अगस्त 2026 तक की है, जिसमें से स्पिनिंग मिलों ने 39,63,700 गांठ एवं ट्रेडर्स ने 53,89,600 गांठ कॉटन ट्रेडर्स ने खरीदी है। मालूम हो कि निगम ने फसल सीजन 2025-26 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर 105 लाख गांठ कॉटन की खरीद की थी।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 150 रुपये तेज होकर 68,900 से 69,100 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 6,800 से 6,950 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 6,700 से 6,750 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 6,650 से 6,950 रुपये प्रति मन बोले गए।
लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 64,000 से 65,000 रुपये कैंडी बोले गए।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमत तेज हुई। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 27 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 5 रुपये तेज होकर 1,730 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। हालांकि इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में गिरावट आई।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में कपास की कीमत स्थिर हो गई। जानकारों के अनुसार उत्पादक मंडियों में कपास की आवक सीमित मात्रा में ही हो रही है।

घरेलू बाजार में स्पिनिंग मिलों की खरीद से गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसकी कीमत स्थिर से सुधार आया। हालांकि नई फसल को देखते हुए स्पिनिंग मिल जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रहे हैं। उत्तर भारत के राज्यों में नई कपास की आवक सितंबर में तथा अन्य राज्यों में अक्टूबर में बढ़ेगी। हरियाणा में नई कपास की आवक मंडियों में शुरू हो गई है।

अधिकांश राज्यों में प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास अच्छी क्वालिटी की कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: अच्छी क्वालिटी कपास की खरीद के लिए मिलों को सीसीआई एवं एमएनसी कंपनियों से करनी पड़ रही है।

केंद्र सरकार ने घरेलू टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता के लिए 1 जून, 2026 से आगामी पांच महीनों के लिए कॉटन आयात पर से सभी कस्टम ड्यूटी समाप्त की हुई है। अत: चालू फसल सीजन में कॉटन का रिकॉर्ड आयात होने का अनुमान है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास कॉटन का बकाया स्टॉक 11 लाख गांठ से ज्यादा का बचा हुआ है। इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

कोई टिप्पणी नहीं: