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08 अक्टूबर 2009

बांग्लादेश और श्रीलंका की आयात मांग बढ़ने से लालमिर्च में तेजी

बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ-साथ घरेलू मांग बढ़ने से लाल मिर्च की कीमतों में पिछले तीन-चार दिनों में 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। प्रमुख उत्पादक मंडी गुंटूर में करीब 40 हजार बोरी (एक बोरी 45 किलो) की आवक हो रही है लेकिन दैनिक मांग करीब 50 से 60 हजार बोरी की रही। हाल ही में हुई बारिश से मध्य प्रदेश में नई फसल की आवक 15-20 दिन लेट हो जाएगी। इसलिए लाल मिर्च की मौजूदा कीमतों में और भी 200-300 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने की संभावना है।मुंबई स्थित मैसर्स अशोक एंड कंपनी के डायरेक्टर अशोक दत्तानी ने बताया कि रमजान समाप्त होने के बाद बांग्लादेश और खाड़ी देशों की आयात मांग बढ़ी है। श्रीलंका की आयात मांग भी पहले की तुलना में बढ़ी है। त्योहारी सीजन होने के कारण लाल मिर्च की घरेलू मांग भी बराबर बनी हुई है। इसीलिए इसकी तेजी को बल मिल रहा है। मध्य प्रदेश की नई फसल की आवक में देरी होने से इसकी मौजूदा कीमतों में अभी तेजी की ही संभावना है।गुंटूर मंडी स्थित स्पाइस ट्रेडिंग कंपनी के प्रोप्राइटर विनय बूबना ने बताया कि गुंटूर में इस समय लाल मिर्च का करीब 25 लाख बोरी का स्टॉक बचा है। मंडी में दैनिक आवक करीब 40 हजार बोरियों की हो रही है तथा घरेलू और निर्यातकों को मिलाकर कुल सौदे 50 से 60 हजार बोरी के हो रहे हैं। मांग में बढ़ोतरी होने से पिछले तीन-चार दिनों में इसकी कीमतों में करीब 300-400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। बुधवार को मंडी में 334 क्वालिटी की लाल मिर्च के भाव बढ़कर 5600- 5700 रुपये, ब्याड़गी क्वालिटी के 5800- 6300 रुपये, सनम के 5600- 5800 रुपये, तेजा क्वालिटी के भाव 6500-6900 रुपये और फटकी क्वालिटी के 2000-4000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। निर्यातकों के साथ-साथ घरेलू मांग जारी रही तो मौजूदा कीमतों में और भी 200-300 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने की संभावना है।लाल मिर्च व्यापारी मांगीलाल मुंदड़ा ने बताया कि नई फसल की आवक फरवरी- मार्च महीने में बनेगी। बुवाई का कार्य करीब 70-75 फीसदी पूरा हो चुका है। हालांकि हाल ही में आई बाढ़ से कुछ क्षेत्रों में फसल को आंशिक नुकसान होने की आशंका है। इंदौर के लालमिर्च व्यापारी खजोर मल प्रजापति ने बताया कि हाल ही में हुई बारिश से मध्य प्रदेश में लाल मिर्च की नई फसल की आवक 15-20 दिन लेट होने की आशंका बन गई है। अभी मौसम बारिश का बना हुआ है तथा आगामी दिनों में अगर बारिश होती है तो पहली तुड़ाई की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अगस्त के दौरान लाल मिर्च निर्यात में 30 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 67,500 टन का ही हुआ है। जबकि पिछले साल की समान अवधि में निर्यात 96,250 टन का हुआ था।rana@businessbhaskar।net (बिज़नस भास्कर)

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