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08 अक्टूबर 2009

दक्षिण में बाढ़ से हजारों करोड़ की फसल का सत्यानाश

नई दिल्ली : देश के दक्षिणी हिस्सों में हुई बेमौसम बरसात के बाद आई बाढ़ ने कृषि उत्पादों के मोर्चे पर दिक्कत पैदा कर दी है। इस बाढ़ ने आर्थिक रूप से समृद्ध माने जाने वाले आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की कमर तो तोड़ी ही है, साथ ही आने वाले हफ्तों में इसका असर देशभर के घरों और कंपनियों में भी देखने को मिलेगा। चिलचिलाती गर्मियों के बाद लचर मानसून की मार झेलने वाले दोनों राज्यों के किसानों ने खरीफ सीजन में तीन लाख से हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन पर चावल, मसालों, दाल, कपास, गन्ने और सूरजमुखी की बुआई की थी, लेकिन विनाशकारी बाढ़ में उनकी फसल का अधिकतर हिस्सा नष्ट हो गया है। अनुमान है कि बाढ़ के कारण अकेले आंध्र प्रदेश को ही 1,000 करोड़ रुपए की क्षति उठानी पड़ी है। विनाशलीला का सबसे पहला कहर सब्जियों पर टूटा।
राज्य की राजधानी हैदराबाद की मंडियों में सब्जियों की आवक पहले की मुकाबले आधी से भी कम हो गई। बंगलुरु में प्याज की कीमतें 50 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई हैं। महाराष्ट्र और उत्तर भारत के राज्यों में भी कृषि उत्पादों के दाम बढ़ने शुरू हो गए हैं। सूरजमुखी के तेल, मसालों और मूंगफली की कीमतें भी बढ़नी शुरू हो गई हैं। कारोबारियों ने उत्पादों के दाम में तेजी और भाड़े में बढ़ोतरी से बढ़े लागत का बोझ खुदरा विक्रेताओं पर डालना शुरू कर दिया है। धान की फसल नष्ट होने के कारण भारतीय खाद्य निगम को चावल की खरीद के लक्ष्य हासिल करने में पसीने बहाने पड़ेंगे। दिवाली से पहले ही अरहर की कीमतों में 15 फीसदी की तेजी की आशंका जताई जा रही है। कर्नाटक में आई बाढ़ की वजह से तैयार फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। देश में सबसे अधिक चीनी का उत्पादन महाराष्ट्र में होता है जहां बारिश से गन्ने की फसल को भी क्षति पहुंची है। इस वजह से स्थानीय चीनी मिलों ने मध्य नवंबर तक अपनी गतिविधियों को स्थगित कर दिया है। सतारा स्थितयशवंत राव मोहिते कृष्ण सहकारी सकहर कारखाना के चेयरमैन इंद्रजीत मोहिते ने बताया, 'यदि बारिश का मौजूदा दौर पांच से छह दिनों तक और जारी रहता है तो गन्ने की पैदावार में सुधार होगा, लेकिन पेराई की दृष्टि से यह मुश्किलों भरा हो सकता है। इस माह के अंत मेंे पेराई शुरू होने के बाद भी चीनी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी।' भारी बारिश के कारण समुद्र, सड़क और रेल परिवहन प्रभावित होने से कंपनियों के सामने दोहरे संकट की स्थिति पैदा हो गई है। लौह अयस्क, कोयला, खाद और पाम ऑयल लाने और ले जाने में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, काकीनाडा, कृष्णापत्तनम और गंगावरम जैसे बंदरहगाहों की अहम भूमिका है। भारी बारिश के कारण ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से आने वाले कोयले से लदे जहाज से माल नहीं उतारा जा सका। इससे जिंदल स्टील र्वक्स प्लांट, विजयवाड़ा थर्मल पावर स्टेशन और गंगावरम के विजाग स्टील प्लांट में कोयले की सप्लाई में बाधा आई है। (ई टी हिन्दी)

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