08 अक्टूबर 2009
गेहूं का एमएसपी 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा सकती है सरकार
केंद्र सरकार अगले सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा सकती है। उधर कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन ने संकेत दिया है कि सरकार रॉ जून का एमएसपी 300 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ाने के पक्ष में है। कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने अपनी पहचान बताने से इंकार करते हुए कहा कि सरकार किसानों को गेहूं की पैदावार ज्यादा एरिया में करने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से एमएसपी बढ़ा सकती है। श्सरकार की कोशिश है कि सूखे के कारण धान की फसल को होने वाले नुकसान की भरपाई गेहूं की ज्यादा पैदावार से हो जाए। गेहूं मुख्य रूप से सर्दियों में उगाया जाता है जबकि धान मुख्य रूप से गर्मियों में उगाई जाने वाली फसल है। सरकार ने गेहूं का पिछले साल एमएसपी 1,080 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। गेहूं की बुवाई अक्टूबर से शुरू हो जाती है। भारतीय जूट उद्योग के भविष्य पर आयोजित एक कार्यक्रम में मारन ने कहा कि देश में किसानों को रॉ जूट उगाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इसलिए सरकार एमएसपी 300 रुपये बढ़ाने के पक्ष में है। इस समय रॉ जूट का एमएसपी 1,375 रुपये प्रति क्विटंल है। जूट मिलों का आधुनिकीकरण न करने के लिए उद्योग को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि उद्योग को सरकार से सुनिश्चित व्यवसाय मिल रहा है। ऐसे में जूट मिलें आधुनीकरण के लिए चलताऊ रवैया अपना रही है। उद्योग को अपने रवैये में बदलाव लाना चाहिए। कपास तकनीकी कार्यक्रम के विपरीत जूट तकनीकी कार्यक्रम बहुत धीमा है। जूट उद्योग को अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए विविधीकरण की ओर ध्यान देना चाहिए। खाद्यान्नों के लिए जूट बोरों में अनिवार्य पैकेजिंग जैसे सरकारी संरक्षण ज्यादा दिन चलने वाले नहीं है। (बिज़नस भास्कर)
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