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08 अक्टूबर 2009

बढ़ सकता है कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य : मारन

कोलकाता October 07, 2009
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 22 प्रतिशत बढ़ोतरी पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जूट की खेती का क्षेत्रफल बढ़े और इसके उत्पादन की ओर किसान आकर्षित हों।
कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन ने कहा, 'हालांकि सरकार ने पिछले पांच साल के दौरान जूट के समर्थन मूल्य में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की है, लेकिन कपड़ा मंत्रालय कीमतों में 300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का समर्थन कर रहा है।' हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि यह बढ़ोतरी कब से प्रभाव में आएगी।
वर्तमान में कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1375 रुपये प्रति क्विंटल है। अपनी फैक्टरियों का आधुनिकीकरण न करने के लिए जूट उद्योग की आलोचना करने के लिए मारन ने कहा, 'सरकार की ओर से निश्चित कारोबार मिलने के कारण उद्योग आलसी हो गया है। ब्रिटिश शासन काल में जो उपकरण प्रयोग किए जाते थे, वे अब तक चल रहे हैं। उद्योग जगत को निश्चित रूप से सोच बदलनी होगी और नई तकनीकों को बढ़ावा देना होगा।'
उन्होंने कहा कि एमएसपी में बढ़ोतरी किए जाने से किसान जूट की खेती की ओर आकर्षित होंगे और इससे बुआई के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी होगी। सरकार जूट की खेती करने वाले 40 लाख किसानों के परिवार को लेकर बहुत संवेदनशील है।
सरकार ने जूट टेक्नोलॉजी मिशन के तहत 20 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे मशीनों का आधुनिकीकरण हो सके वहीं 80 करोड़ रुपये मिलों को सब्सिडी के रूप में दिए गए हैं, जिससे नई मशीनरी खरीदी जा सके ।
मारन ने यहां भारतीय जूट उद्योग के भविष्य पर आयोजित बातचीत में कहा, 'देश में कच्ची पटसन का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि सोच में बदलाव लाने की जरूरत है और उद्योग को अब जागरूक होना चाहिए।
मंत्री ने कहा, 'पटसन उद्योग के भविष्य के लिए विविधीकरण जरूरी है। अनाजों की अनिवार्य जूट पैकेजिंग जैसी सरकारी ढाल लंबे समय तक नहीं मिल सकती, ये सहारे किसी दिन खत्म हो जाएंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय धागा नीति इस साल के अंत से लगू होगी जिसका लक्ष्य होगा वैश्विक बाजार में मानव निर्मित धागों को प्राकृतिक धागों के साथ प्रतिस्पर्धा का समान मौका देना।
बंगाल सरकार काम में लाए तेजी
दयानिधि मारन ने आज बंगाल सरकार पर दबाव डालते हुए कहा कि राज्य में जूट पार्क बनाने के लिए जमीन प्रयोग की अनुमति देने में तेजी दिखानी चाहिए। तीन पार्कों में से दो को पश्चिम बंगाल स्माल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन (डब्ल्यूबीएसआईडीसी) मुर्शिदाबाद और कूचबिहार में बना रही है, वहीं अन्य एक वर्दमान में एक निजी कंपनी द्वारा बनाई जानी है।
मारन ने कहा, 'यहां पर जूट पार्क इसलिए नहीं बन पा रहा है, क्योंकि भूमि अधिग्रहण में दिक्कतें आ रही हैं। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि इस प्रक्रिया में तेजी दिखाए।' कपड़ा मंत्रालय ने देश भर में जूट पार्क विकसित करकने के लिए 60 करोड़ रुपये जारी किया है, जिसमें से 5 का निर्माण पश्चिम बंगाल में होना है। प्रत्येक पार्क में 25-30 एकड़ जमीन की जरूरत होगी।(बीएस हिन्दी)

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