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10 अक्टूबर 2009

नमी का असर पंजाब में धान खरीद पर

नई दिल्ली October 08, 2009
पटियाला जिले के पातरा इलाके की मंडी में परमजीत सिंह का 100 क्विंटल धान पिछले चार दिनों से पड़ा है। कोई उसे खरीदने वाला नहीं है।
परमजीत की तरह वहां दो दर्जन से अधिक किसान हैं। यहीं हाल अमृतसर एवं फिरोजपुर की विभिन्न मंडियों की है। खरीदारी नहीं होने की मुख्य वजह धान में व्याप्त नमी के साथ पंजाब राइस मिलर्स की धान नहीं उठाने की जिद है।
मिलर्स सरकार से पहले पड़े 7.5 लाख चावल उठाने की मांग कर रहे हैं। उन्हें धान के 201 किस्म को चावल बनाने से भी ऐतराज है। उनका कहना है कि इस किस्म से चावल का लाल दाना निकलता है, जिसे दो बार साफ करना पड़ता है। इस साल पंजाब में 201 किस्म के धान की बुआई में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
नमी की पंगा
धान में 17 फीसदी तक नमी हो तो उसे सरकारी एजेंसी खरीद लेती है। लेकिन उससे अधिक नमी होने पर एजेंसी उसे नहीं खरीदती है। फिलहाल पंजाब में मंडियों में आने वाले 50 फीसदी धान में नमी की मात्रा काफी अधिक बतायी जा रही है।
अमृतसर जिले के मंडी अधिकारी हरमीत सिंह कहते हैं, नए धान में 22-27 फीसदी की नमी पायी जा रही है। और उसे 17 फीसदी के स्तर तक आने में समय लगेगा ही। धान की खरीदारी मे देरी की सबसे बड़ी वजह यही है। राइस मिलर्स द्वारा धान नहीं लेने से भी खरीदारी प्रभावित हो रही है।
मंडी अधिकारियों के मुताबिक किसानों ने आलू की बुआई करने के लिए धान की अग्रिम कटाई कर दी है। इसलिए उनमें नमी की मात्रा ज्यादा पायी जा रही है। फिलहाल अमृतसर, फिरोजपुर, लुधियाना एवं दोआब के अन्य इलाकों में मुख्य रूप से धान की आवक हो रही है।
15 दिनों के बाद पंजाब में धान की आवक पूर्ण गति से होने लगेगी। अमृतसर जिले में 16 सितंबर से लेकर अब तक 87,000 टन धान की खरीदारी की जा चुकी है।
राइस मिलर्स की मांग
राइस मिलर्स का कहना है कि पहले सरकार 1000 चावल मिलों में रखे गए 7.5 लाख टन चावल को उठाए, तभी वे नए धान को रखने की इजाजत देंगे। उन्होने बताया कि 100 किलो धान की कुटाई पर 65 किलो चावल की प्राप्ति होती है। सरकार 3 फीसदी चावल को कुटाई के दौरान बर्बाद मान लेती है। जबकि चावल मिल इस 3 फीसदी को बढ़ाकर 5 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं।
201 किस्म पर बवाल
चावल मिलर्स का कहना है कि 201 किस्म के धान से छिलका उतारने के बाद लाल रंग के दाना निकलते हैं। लाल दाने को सफेद बनाने में उन्हें दो बार पोलिश करना पड़ता है। जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है। इसलिए वे इस धान को लेने से साफ मना कर रहे हैं।
इस साल बारिश कम होने की वजह से 201 किस्म के धान की अधिक बुआई की गयी। इस धान की खासयित है कि इसकी खेती के लिए पानी की कम जरूरत होती है और उपज भी धान की अन्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है।
बढ़ सकती है समस्या
पंजाब के विभिन्न जिलों के मंडी अधिकारी स्वीकार करते हैं कि धान खरीदारी सुचारु रूप से शुरू नहीं हुई तो आने वाले चार-पांच दिनों में धान रखने की जगह कम पड़ सकती है, क्योंकि धीरे-धीरे धान की रोजाना की आवक में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। (बीएस हिन्दी)

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