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13 अगस्त 2009

स्क्रैप के आयात पर से प्रतिबंध समाप्त करने की मांग

मुंबई August 12, 2009
आयात पर अचानक प्रतिबंध लगने से प्रमुख धातुओं के अवशेष यानी (मेटल स्क्रैप) की जबरदस्त कमी का सामना कर रहे बंबई मेटल एक्सचेंज (बीएमई) और बंबई नॉन-फेरस मेटल्स ऐंड स्क्रैप मर्चेंट एसोसिएशन (बीएनएफएमएसएमए) ने सरकार से स्क्रैप के आयात पर से प्रतिबंध समाप्त करने की मांग की है।
कारोबारियो का तर्क है कि जिन कारणों का हवाला देते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने मेटल स्क्रैप के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, वे तर्कसंगत नहीं हैं क्योंकि मेटल स्क्रैप का इस्तेमाल द्वितीयक धातु उत्पादन में कच्चे माल के तौर पर होता है। बीएमई के निदेशक रोहित शाह ने कहा कि मेटल स्क्रैप को सीधे संयंत्र में पिघलाया जाता है और इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।
प्रतिबंध समाप्त किए जाने की अपनी मांग के साथ इन दोनों इकाइयों के अधिकारियों ने सीमा शुल्क के मुख्य आयुक्त केआर भार्गव और आयात आयुक्त ए के दास से मंगलवार को मुलाकात की है। शाह के अनुसार बातचीत काफी सकारात्मक रही और दोनों आधिकारियों का रवैया सहयोग भरा रहा है और उन्होंने 31 अगस्त तक भारत के विभिन्न बंदरगाहों को 500-700 आयातित कंटेनर से मुक्त करने का आश्वासन दिया है।
मालूम हो कि सीमा शुल्क विभाग ने पर्यावरण को होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए 21 जुलाई को प्रमुख मेटल स्क्रैप आयात को कारोबारियों और इसका उपयोग करने वालों की जगह वास्तविक उपयोगकर्ता तक ही सीमित कर दिया है। पुरानी और स्क्रैप के रूप में बची हुई धातुओं का आयात कई विकसित और विकासशील देशों से होता रहा है।
इन धातुओं में तांबा, जस्ता, निकल आदि शामिल हैं। प्रतिबंध समाप्त किए जाने की मांग इस मायने में महत्वपूर्ण है कि देश में खपत होने वाली, खासकर तांबे और कांसा जैसी धातुओं के 40 फीसदी हिस्से को मोटल स्क्रैप को पिघलाकर हासिल किया जाता है।
इससे प्राप्त द्वितीयक धातु (सेकंडरी) का इस्तेमाल धातु के हस्तशिल्प उत्पाद बनाने और कुटीर उद्योग में किया जाता है जो विकसित देशों में काफी लोकप्रिय हैं। आयात पर प्रतिबंध लगने से इन उद्योगों पर काफी असर पड़ सकता है क्योंकि स्थानीय स्रोतों से धातुओं के अवशेषों की खरीद नहीं के बराबर होती है।
भारत अपने छोटे उद्योगों की कांसे और सेकंडरी मांग पूरी करने के लिए 15 लाख टन धातुओं के अवशेष यानी स्क्रैप का आयात करता रहा है। (BS Hindi)

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