बैंकॉक/नई दिल्ली : भारत और 10 सदस्यीय दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के बीच गुरुवार को मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत के बाद देश में इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर गुड्स, दवाएं, मशीनरी, मेटल्स और रेडीमेड गारमेंट के सस्ता होने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत 4,000 सामानों के आयात पर तीन से छह साल में ड्यूटी खत्म हो जाएगी। इस समझौते को भारत की बड़ी जीत माना जा रहा है। वह पिछले कुछ सालों से आसियान देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। भारत के इस कदम को अमेरिका और यूरोपीय देशों के क्षेत्रीय संगठन बनाने के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, भारत और आसियान देशों के बीच सेवा और निवेश के क्षेत्र में उदारीकरण को लेकर औपचारिक बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है। भारत के सामने इसे जल्द शुरू करने की चुनौती है। इससे उसे काफी फायदा हो सकता है। गुरुवार को समझौते पर दस्तखत करने के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि आसियान के साथ मुक्त व्यापार करार दोनों के हक में है। यह भारत की 'लुक ईस्ट पॉलिसी' के मुताबिक है। अभी भारत और आसियान देशों के बीच 40 अरब डॉलर का कारोबार होता है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसके 2010 तक बढ़कर 50 अरब डॉलर होने का अनुमान है। यह करार 1 जनवरी 2010 से लागू होगा। इसके तहत 2013 तक करीब 3,200 वस्तुओं से ड्यूटी खत्म होगी। बाकी के 880 उत्पादों पर आयात ड्यूटी दिसंबर 2016 तक जीरो या करीब-करीब जीरो के स्तर तक लाई जाएगी। भारत और आसियान देशों के बीच हुए इस एग्रीमेंट के दायरे से 489 उत्पादों को बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि इन पर आयात ड्यूटी नहीं घटाई जाएगी। इनमें 300 कृषि उत्पाद, कुछ ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, केमिकल और टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स शामिल हैं। संवेदनशील माने जाने वाले कृषि उत्पादों- पाम ऑयल, चाय, कॉफी और काली मिर्च पर दस साल में ड्यूटी 45-50 फीसदी के बीच लाई जाएगी। आसियान इनकी ड्यूटी में ज्यादा कमी की मांग कर रहा था। (ET Hindi)
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