हैदराबाद August 08, 2009
भारत का कीटनाशकों का उद्योग 15 अगस्त की ओर बड़ी उत्सुकता से देख रहा है।
स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए नहीं बल्कि इसका कारण कुछ और है। दरअसल उद्योग को उम्मीद है कि 15 अगस्त तक मानसून का असर नजर आने लगेगा। अगर ऐसा नहीं होता तो कीटनाशकों के कारोबार में 10-15 प्रतिशत की गिरावट इस साल आ सकती है।
आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में इस साल सामान्य से कम बारिश हुई है। नागार्जुन एग्रीकेमिकल्स लिमिटेड के निदेशक सीएम अशोक मुंशी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'अगर 15 अगस्त के बाद भी वही स्थिति बनी रहती है, जो आज है- तो हमारे मुनाफे में कम से कम 10-15 प्रतिशत की कमी आएगी।'
बारिश की कमी से चालू कृषि सत्र में आंध्र प्रदेश में कीटनाशकों की बिक्री में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारत के 7500 करोड़ रुपये के कीटनाशकों के कारोबार में करीब 20 प्रतिशत कारोबार आंध्र प्रदेश में होता है। कीटनाशकों के बड़े उत्पादक, हैदराबाद केमिकल्स के प्रबंध निदेशक एन सुकुमार ने कहा, 'आज आंध्र प्रदेश में स्थिति कुछ वैसी ही खराब नजर आ रही है, जैसा कि 2002 में थी। बहुत बुरा हाल है।'
मूल्यवर्धित कपास की खेती का क्षेत्रफल बढ़ने से भी राज्य में कीटनाशक बनाने वाले कारोबारियों के कारोबार में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। बीटी कपास के बीज बॉलवर्म नामक कीटों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिनका प्रभाव कपास की फसल पर सबसे ज्यादा होता है।
सुकुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'कपास आज कीटनाशकों का बड़ा उपभोक्ता नहीं रहा। अभी हाल तक कुल कीटनाशकों के प्रयोग में कपास की खेती में 50 प्रतिशत कीटनाशकों का प्रयोग होता था। अब इसकी हिस्सेदारी गिरकर 20 प्रतिशत रह गई है।'
इस समय कीटनाशकों का सबसे ज्यादा प्रयोग धान की फसल में हो रहा है। इस फसल में कीटनाशकों के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत प्रयोग होता है। इस साल कीटनाशकों की बिक्री में बढ़ोतरी की एक ही उम्मीद थी कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में अच्छी बारिश हो, जहां धान के खेतों में इसका प्रयोग होता है।
बहरहाल, इस उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार आएगी? सुकुमार ने कहा कि निश्चित रूप से उम्मीद है कि हमारा कारोबार आने वाले दिनों में बढ़ेगा। मुनी ने कहा, '15 जुलाई के बाद मानसून ने तेजी पकड़ी है। हमें उम्मीद है कि अब सूखे जैसी स्थिति नहीं रहेगी। हमें यह उम्मीद है कि इस महीने के मध्य तक स्थिति में सुधार आएगी।'
मानसून बेहतर रहने के चलते पिछले 5 साल से कीटनाशकों के कारोबार में हर साल 6-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। बहरहाल भारतीय कृ षि ज्यादातर मानसून पर निर्भर है। इसे देखते हुए इस साल मांग में कमी आने की उम्मीद है।
भारतीय कीटनाशक उद्योग में करीब 15 बड़े कारोबारी हैं, जिसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी शामिल हैं। भारत में कीटनाशकों के कारोबार में इनकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। (BS Hindi)
08 अगस्त 2009
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