08 अगस्त 2009
महंगाई पर चौतरफा हमले की तैयारी
देश का आम आदमी भले ही लंबे समय से कमरतोड़ महंगाई से जूझ रहा हो, लेकिन इस गंभीर समस्या से निपटने की दिशा में सरकार की सक्रियता अब जाकर बढ़ी है। मानसून की बेरुखी से देश के कई हिस्सों में सूखा पड़ने की खबरों ने भी सरकार को अपनी नींद तोड़ने के लिए विवश किया है। लोकसभा में कृषि मंत्री शरद पवार के ताजा वक्तव्य से भी इसकी पुष्टि होती है कि सरकार अब सूखे और महंगाई की समस्याओं से निपटने को लेकर काफी गंभीर हो गई है। इसके लिए देश में उच्चस्तरीय बैठकों का दौर अब जल्द शुरू होने वाला है। सबसे पहली बैठक तो शनिवार को ही होनी है जिसमें राज्यों के मुख्य सचिव शिरकत करेंगे। इस बैठक में सूखे से निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पवार ने बताया कि इस बैठक में महंगाई के मुद्दे पर भी चर्चा होगी।इस दिशा में अगली बैठक 12 अगस्त को होगी जिसमें सरकार की ओर से खाद्य पदार्थे की आसमान छूती कीमतों का जायजा लिए जाने की संभावना है। पिछले आठ हफ्तों से महंगाई दर के शून्य से नीचे रहने के बावजूद चीनी और दालों की कीमतों में बढ़त का रुख लगातार जारी रहने से ही सरकार का ध्यान इस ओर गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट सचिव के.एम.चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति इस बैठक में चढ़ती कीमतों को काबू में करने के उपायों पर चर्चा करेगी। यह बैठक खास मायने रखती है। कारण यह है कि इसी सप्ताह संसद में महंगाई के मुद्दे पर लंबी-चौड़ी चर्चाएं होने के बाद खाद्य, कृषि, वाणिज्य और वित्त से जुड़े शीर्ष अधिकारियों की यह बैठक होने जा रही है। यही नहीं, दशहरा और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों में अब ज्यादा देरी न होने की बात को ध्यान में रखते हुए ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि चीनी के दाम अभी और चढ़ेंगे। महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए इससे भी महत्वपूर्ण बैठक 17 अगस्त को होनी है। इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस मसले पर चर्चा करेंगे कि आसमान छूती कीमतों से आखिरकार कैसे निजात पाई जा सकती है। इस बैठक में सप्लाई की किल्लत के कारण कालाबाजारी होने की खबरों के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के उपायों पर फोकस किया जाएगा। यह जानकारी कृषि मंत्री शरद पवार ने दी। वह लोकसभा में मूल्यवृद्धि के मुद्दे पर जारी बहस का जवाब दे रहे थे। गौरतलब है कि मानसून की बेरुखी से देश के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। ऐसे हालात में कृषि जिंसों की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार को नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं। गहराते संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी किए जाने वाले खरीफ फसलों के बुवाई आंकड़े जारी ही नहीं किए। भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पहली जून से लेकर अभी तक देश के कुल 36 सब डिवीजनों में से 25 में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है।बीते सप्ताह बारिश सामान्य से 64 फीसदी कम रही है। कमजोर मानसून का असर धान, तिलहन, दलहन और गन्ने की पैदावार पर पड़ना तय है। ऐसे में आगे चलकर उपभोक्ताओं को खाद्यान्न के और अधिक दाम चुकाने पड़ सकते हैं। घरेलू बाजार में दलहन और चीनी के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं। यहीं नहीं, सूखे जैसे हालात बनने से अन्य जिंसों की कीमतें भी बढ़नी शुरू हो गई हैं। पिछले एक सप्ताह में खाद्य तेलों की कीमतों में 10-15 फीसदी, मोटे अनाजों की कीमतों में 4-5 फीसदी और चावल की कीमतों में 10-13 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। (Business Bhaskar..)
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