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08 अगस्त 2009

उप्र में बढ़ेंगे गन्ने के दाम

नई दिल्ली August 08, 2009
उत्तर प्रदेश में गन्ने के सरकारी मूल्य (एसएपी) में पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होने जा रही है।
हालांकि किसानों का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के मुकाबले यह बढ़ोतरी कम है। दूसरी तरफ चीनी कारोबारियों को सितंबर के दौरान चीनी की आपूर्ति में कमी से कारोबार में 50 फीसदी तक की गिरावट की आशंका है।
उधर विश्व स्तर पर चीनी के उत्पादन में कमी के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं नेपाल जैसे देशों में चीनी की कीमत 50 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गयी है।
किसानों को लाभ
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के मुताबिक अगले दस दिनों के भीतर गन्ने के राज्य मूल्य के ऐलान की संभावना है। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में सरकारी नुमाइंदों से मुलाकात की थी। किसानों ने बताया कि इस साल राज्य मूल्य 160-165 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा।
पिछले साल यह कीमत 140-145 रुपये प्रति क्विंटल थी। उत्तर प्रदेश के चीनी मिल मालिक भी इस बढ़ोतरी की संभावना से सहमति जताते हैं। दया शुगर के सलाहकार कहते हैं कि गन्ने के राज्य मूल्य में कम से कम 20 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा होने जा रहा है। ऐसे में वर्ष 2009-10 के लिए चीनी की लागत 2300 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच जाएगी।
कारोबारी उदास
चीनी के थोक कारोबारियों के बीच दशहरा-दीपावली को लेकर कोई उत्साह नहीं है। अगस्त माह के आरंभ में ही चीनी की आपूर्ति बाधित होने लगी है। सरकार इस बात को सरेआम स्वीकार चुकी है कि चीनी का स्टॉक काफी कम रह गया है।
सरकार अक्टूबर, 2008 से लेकर अगस्त तक के लिए 200 लाख टन चीनी जारी कर चुकी है। उत्पादन सिर्फ 150 लाख टन का है। पिछले साल का बफर स्टॉक 80-90 लाख टन बताया जा रहा था। लेकिन चीनी मिल मालिकों के मुताबिक इनमें से 40-50 लाख टन चीनी ही इस्तेमाल के लायक थी।
कारोबारी कहते हैं कि अब तक अधिकतम 15 लाख टन कच्ची चीनी का आयात किया गया है। ऐसे में सरकार के पास अब 10-15 लाख टन से अधिक चीनी की उपलब्धता नहीं है। गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर के बाद ही शुरू होने की उम्मीद है। 225 लाख टन सालाना खपत के हिसाब से देश की मासिक खपत 18.5 लाख टन से अधिक की है।
ऐसे में अगले डेढ़ महीनों के लिए 27 लाख टन चीनी की आवश्यकता होगी। हालांकि महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के कुछ भाग में सितंबर माह से गन्ने की पेराई शुरू होने की संभावना है। कारोबारियों के मुताबिक जब चीनी उपलब्ध ही नहीं होगी तो कारोबार कहां से चलेगा। विश्व स्तर पर उत्पादन में कमी
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक इस साल विश्व भर में चीनी के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 90 लाख टन (5.4फीसदी) की कमी है। ब्राजील से आयात होने वाले चीनी की कीमत भारतीय बंदरगाह तक पहुंचते-पहुंचते 3000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू रही है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल जैसे देशों में चीनी की कीमत 50 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गयी है। लिहाजा भारत में चीनी की कीमत में कमी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है। (BS Hindi)

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