मुंबई August 08, 2009
चीनी की कीमतों के पिछले 28 सालों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के साथ ही भारतीय कमोडिटी बाजार में सक्रिय बहुराष्ट्रीय कारोबारी कंपनियां बड़े स्तर पर चीनी आयात की योजना बना रही हैं।
कम से कम दो कंपनियों ने तो इस बात की पुष्टि भी कर दी है और कहा है कि उन्होंने चीनी आयात के सौदे किए हैं। इस साल जनवरी में कृषि उत्पादों में चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा यानी 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
मौजूदा हालत को देखते हुए अभी इसकी कीमतों में और तेजी आने की संभावना बनी हुई है। कीमतों में आई भारी उछाल को देखते हुए भारत में सक्रिय बहुराष्ट्रीय कारोबारी कंपनियां भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती हैं और चीनी का आयात कर इसे भारतीय बाजारों में बेच मुनाफा कमाने की ताक में हैं।
भारतीय बंदरगाहों पर आयात की हुई चीनी की कीमतें 25-25.5 रुपये प्रति किलो है जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार जैसे थाईलैंड में चीनी की कीमत 540 डॉलर सीआईएफ है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां आगामी त्योहारी मौसम में आयातित चीनी 28-30 रुपये प्रति किलो की दर से बेचना चाहती हैं। नजदीक होने के कारण इन कंपनियों के लिए थाईलैंड से चीनी का आयात करना काफी सुविधाजनक है।
उल्लेखनीय है कि मानूसन के कमजोर रहने से भारत में चीनी का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, वहीं चीनी के सबसे बड़े उत्पादक देश ब्राजील में भारी वर्षा का उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक चीनी का आयात होने की संभावनाओं के बीच ये कंपनियां चीनी का आयात कर और इसे भारतीय बाजार में बेच मुनाफा कमाने के अवसर को गंवाना नहीं चाहती है।
मालूम हो कि वर्ष 2006-07 में गेहूं का उत्पादन कम हुआ था और इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर इसकी खरीदारी कर खासा मुनाफा कमाया था। इस वजह से सरकार ने इन कंपनियों पर अगले साल गेहूं की खरीदारी करने पर रोक लगा दी थी। इस बार भी इन कारोबारियों की चीनी आयात करने की योजना इस बात का संकेत दे रही है कि चीनी की कीमतें कुछ और समय तक ऊंची रह सकती है।
भारतीय चीनी मिल एसोसिएशन ने पहले ही कह दिया है कि साल-दर-साल के हिसाब से चीनी का भंडार जुलाई के अंत में घटकर 40 लाख टन रह गया है। गन्ने का उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश में मानूसन के पहुंचने में देरी होने से गन्ने की पैदावार पर और अधिक प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उधर चीनी का पहले निर्यात करने वाले मैक्सिको ने इस साल 40 लाख टन चीनी आयात करने की घोषणा की है जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर और बुरा असर पडा है। पिछले साल मैक्सिको के चीनी निर्यात से अमेरिका को घरेलू खपत से निपटने में काफी मदद मिली थी। चीनी के सबसे बड़े उत्पादक ब्राजील में भारी वर्षा की वजह से चीनी का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इन सब कारणों से चीनी की कीमतें मौजूदा समय में आसमान छू रही हैं।
बार्क लेज कैपिटल कमोडिटी रिसर्च के अनुसार 'अगस्त में भी मानसून के कमजोर रहने और एल नीनो प्रभाव के चलते फसल की कटाई पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अनुसार ब्राजील में पहले 37.5 मिलियन टन चीनी के उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया था लेकिन अब मौजूदा हालत को देखते हुए यह बहुत ज्यादा लग रहा है।'
ब्राजील की कारोबार इकाई यूएनआईसीए ने वित्त वर्ष 2009-10 में चीनी उत्पादन के 31.2 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है। (BS Hindi)
08 अगस्त 2009
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