देश में इस बार चावल उत्पादन में लगभग 200 लाख टन और मूंगफली तेल के उत्पादन में डेढ़ से दो लाख टन की कमी आना लगभग तय है। चालू मानसून सीजन में देश के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात बनने से चावल का उत्पादन पिछले साल के 845 लाख टन से घटकर 650 लाख टन और मूंगफली तेल का उत्पादन 10.5 लाख टन से घटकर 8.5 से 9 लाख टन रह सकता है। चावल उत्पादन में गिरावट का प्रमुख कारण धान के बुवाई क्षेत्रफल में 57.75 लाख हेक्टेयर की कमी और मूंगफली तेल के उत्पादन में गिरावट का कारण मूंगफली के बुवाई क्षेत्रफल में 9.82 लाख हेक्टेयर की कमी होना है। जिन क्षेत्रों में बुवाई हो भी चुकी है वहां बारिश की कमी से खरीफ फसलों धान, तिलहन, मोटे अनाज और दलहन के प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी भारी गिरावट की आशंका है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के डीडीजी डॉ. ए. के. सिंह का कहना है कि धान की बुवाई करीब 20 फीसदी कम क्षेत्र में हुई है और अब इससे अधिक बुवाई की उम्मीद नहीं है। कुल मिलाकर धान का उत्पादन करीब 25 फीसदी कम हो सकता है, क्योंकि पानी की कमी के कारण खड़ी फसल भी खराब हो रही है।
कृषि मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी बुवाई आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक धान की बुवाई 228.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 57.75 लाख हेक्टेयर कम है। इसी तरह तिलहनों में मूंगफली की बुवाई 35.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जो पिछले साल की समान अवधि के 45.54 लाख हेक्टेयर से कम है। तिलहनों की कुल बुवाई 156.09 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 150.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई है। सुल्तानिया एंड संस के प्रोपराइटर राजेश सुल्तानिया ने बताया कि धान का बुवाई क्षेत्रफल तो घटा ही है, साथ ही बारिश न होने से कई क्षेत्रों में फसल सूखने के कगार पर है। ऐसे में दलहन और चीनी में भारी तेजी से बेहाल उपभोक्ताओं को आगामी दिनों में चावल के दाम भी ज्यादा चुकाने पड़ेंगे। श्री राजमोती इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर समीर भाई शाह ने बताया कि मूंगफली का बुवाई क्षेत्रफल घट गया है। साथ ही, गुजरात के सुरेंद्रनगर और भावनगर में बारिश कम हुई है। वहीं जूनागढ़, पोरबंदर और जामनगर में अत्याधिक बारिश होने से फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में खरीफ में मूंगफली तेल के उत्पादन में 18 से 20 फीसदी तक की कमी आने की संभावना है।
मोटे अनाज बाजरा, मक्का और ज्वार का बुवाई क्षेत्रफल तो बढ़ा है, लेकिन मानसून कमजोर रहने से इनके प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। मोटे अनाजों की बुवाई 166.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जो पिछले साल के 157.30 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। श्री गोपाल जी ट्रेडिंग कंपनी के प्रोपराइटर राजेश अग्रवाल ने बताया कि मोटे अनाज की करीब 80 फीसदी बुवाई असिंचित क्षेत्रफल में होती है। पूरे देश में मानसून काफी कम रहा है इसलिए मोटे अनाजों के उत्पादन में 25 से 30 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है।
दलहन की बुवाई 78.91 लाख हेक्टेयर में हुई है जो पिछले साल की समान अवधि के 69.74 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। दलहन व्यापारी बिजेंद्र गोयल ने बताया कि बुवाई के बाद से ही प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी के कारण दालों की पैदावार करीब 15 फीसदी घटकर 40 लाख टन रह सकती है। गन्ने के बुवाई क्षेत्रफल में भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.29 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। ऐसे में पहले से ही चीनी की चढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को नए सीजन में भी राहत मिलना मुश्किल दिख रहा है। (Business Bhaskar....R S Rana)
11 अगस्त 2009
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