17 अगस्त 2009
सरकारी कदमों को मात दे रहे हैं खाद्यान्न व्यापारी
खाद्य वस्तुओं की हर दिन बढ़ती कीमत पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने दलहन और चीनी पर स्टॉक लिमिट लगा दी है, लेकिन सरकार का यह कदम अभी तक बेकार गया है। स्टॉक लिमिट लगने के बावजूद अगर कीमतें काबू में नहीं आ रही हैं तो इसके पीछे कई वजहें हैं। एक बड़ी वजह तो यह है कि सभी राज्य एक साथ स्टॉक लिमिट लागू नहीं करते हैं। इस वजह से जो राज्य स्टॉक लिमिट लगाते हैं, स्टॉकिस्ट वहां से अपना माल हटा कर दूसरे राज्यों में रख देते हैं। बता दें कि केंद्र सरकार स्टॉक लिमिट लगाती जरूर है, लेकिन उसे लागू करने का जिम्मा राज्यों पर होता है।इसके अलावा व्यापारियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरह-तरह के तरीके भी सरकारी उपायों में बाधक बनते हैं। कई बार व्यापारी एक से अधिक फर्में बनाकर ज्यादा लाइसेंस ले लेते हैं। कई राज्यों में तो व्यापारी किसानों से नई फसल के समय जिंस की खरीद कर किसान के घर में ही स्टॉक कर देते हैं। जब भाव बढ़ता है तो व्यापारी माल उठाकर बाजार में बेच देते हैं। स्टॉक लिमिट के खेल को इस तरह समझा जा सकता है। दिल्ली में इस समय चीनी पर स्टॉक लिमिट लगी हुई है लेकिन पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में यह लागू नहीं है। इसलिए व्यापारी उत्तर प्रदेश की मिलों से खरीद कर दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर स्थित गोदाम में माल रखवा देते हैं। बाहर के व्यापारियों से सौदे कर वे सीधे गोदाम से माल उठवा देते हैं। इसलिए लिमिट लगने के बावजूद चीनी की कीमतों में गिरावट नहीं आ रही है। इसी तरह से महाराष्ट्र में राज्य सरकार ने दलहन पर स्टॉक लिमिट लगा रखी है, लेकिन पड़ोसी राज्य गुजरात में इसपर कोई लिमिट लागू नहीं है।केंद्र सरकार ने दलहन और चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्टॉक लिमिट लगा रखी है। स्टॉक लिमिट लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है, और कई राज्यों ने अपने यहां लिमिट लगाई ही नहीं है। ऐसे में स्टॉक लिमिट लगने के बावजूद चीनी और दलहन की कीमतों में गिरावट नहीं आ रही है। हालांकि चीनी और दलहन की कीमतों में आई तेजी का एक बड़ा कारण मांग और सप्लाई का अंतर है। चालू सीजन में चीनी उत्पादन में करीब 114 लाख टन और दलहन उत्पादन में करीब एक लाख टन की कमी आनी है। वैसे भी देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होने से चालू खरीफ सीजन में दलहन और गन्ने के उत्पादन में गिरावट की ही आशंका है। घरेलू उत्पादन में कमी के कारण दलहन आयात में बढ़ोतरी हुई है। इसलिए विदेशी बाजारों में दलहन के भाव काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गये हैं। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। (Business Bhaskar....R S Rana)
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