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17 अगस्त 2009

कीमत और आपूर्ति के आंकड़े जुटा रहा है एफएमसी

मुंबई- मानसून की लचर स्थिति से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भांपते हुए कमोडिटी वायदा बाजार नियामक फॉरवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) सक्रिय हो गया है। कीमतों में बढ़ोतरी की पड़ताल करने के लिए एफएमसी ने कमोडिटी एक्सचेंज से जुड़ी उन कृषि वस्तुओं के मूल्यों और आपूर्ति के आंकड़े जुटाने का काम शुरू कर दिया है जिनके कारोबार में हलचल दिख रही है। एफएमसी के एक आला अधिकारी ने बताया कि नियामक के इस कदम से नीतिगत स्तर पर सरकार को कीमतों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। एग्री कमोडिटी के जुटाए गए आंकड़ों को 10 दिनों के भीतर सरकार को भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया, 'हम हाजिर और वायदा बाजार समेत एग्री कमोडिटी के आपूर्ति के आंकड़े भी एकत्र कर रहे हैं।' अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसी आंकड़े के सहारे सरकार आगे कार्रवाई कोई कारवाई करेगी, लेकिन सरकार आने वाले दिनों में मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका को को लेकर गंभीर है। लिहाजा अपनी ओर से कदम उठाते हुए एफएमसी डाटा एकत्र करने में जुटा गया है जिससे सरकार को इस दिशा में रणनीति बनाने में मदद मिले।
एफएमसी के अधिकारी ने बताया, 'सरकार हाजिर और वायदा बाजार से एकत्र आंकड़ों के सहारे वस्तुओं के आयात और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की जांच-पड़ताल करेगी।' भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 12 अगस्त को खत्म सप्ताह के दौरान भारत का सालाना मानसून सामान्य से 56 फीसदी नीचे गिरा है। इससे पिछले हफ्ते यह आंकड़ा 64 फीसदी पर था। मौसम विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, इस साल देश में 27.4 मिलीमीटर मानसूनी बारिश हुई है जबकि इस सीजन में सामान्य बारिश 62.7 मिलीमीटर होती है। भारतीय कृषि बहुत हद तक बारिश पर ही निर्भर है और देश में 60 फीसदी कृषि क्षेत्र वर्षा जल के सहारे है। बारिश की कमी के चलते पैदावार घटने की आशंका के कारण धान, दाल, तिलहन और चीनी की कीमतों में तेजी आई है। (BS Hindi)

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