नई दिल्ली- कमजोर मानसून से भले ही कृषि उपज को झटका लगने की आशंका जताई जा रही हो, लेकिन कृषि क्षेत्र से जुड़े शेयरों में निवेश करने वालों के लिए तो यह वरदान साबित हुआ है। ईटी की पड़ताल से पता चलता है कि एग्रीकल्चर कंपनियों के शेयरों में निवेश रखने वाले निवेशक जमकर माल काट रहे हैं। बारिश की अनिश्चितता के कारण एक जून के बाद से इन निवेशकों की झोली में अब तक 10,000 करोड़ रुपए आ चुके हैं। दरअसल इसकी वजह यह है कि वस्तुओं की वैश्विक मांग और आपूर्ति में भारी असंतुलन के बीच एक जून से एग्री कमोडिटी की कीमतों में तेजी की संभावना जताई जा रही है जिससे इनसे जुड़ी कंपनियों के मुनाफे में उछाल आने की उम्मीद है। प्राइववाटरहाउसकपूर्स (पीडब्ल्यूसी) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संजय हेगड़े ने बताया, 'कई सालों से खेती के लिए अपेक्षाकृत कम जमीन उपलब्ध रहती आई है। भारत में सूखे की स्थिति और ब्राजील में उम्मीद से अधिक बारिश से चीनी समेत तमाम एग्री कमोडिटी के दामों में भारी उछाल आई है।' ईटी की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि एक जून के बाद से चीनी कंपनियों के शेयरों में औसतन 43 फीसदी ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली है जिससे निवेशकों की झोली में 7,500 करोड़ रुपए गए हैं। श्री रेणुका शुगर्स, बजाज हिंदुस्थान और बन्नारी अम्मान शुगर्स जैसे शेयरों में 60 फीसदी से ज्यादा उछाल आई है। एग्री कमोडिटी की कीमतों में तेजी का फायदा सिर्फ शुगर स्टॉक में ही देखने को नहीं मिला। टाटा टी, मैरिको, रुचि सोया इंडस्ट्रीज, रुचि इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रो टेक फूड्स और टाटा कॉफी जैसी कंपनियों के निवेशकों को भी तगड़ा रिटर्न हासिल हुआ है। टाटा टी और मैरिको के निवेशकों की पूंजी में संयुक्त रूप से करीब 2,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
एक जून के बाद से एग्री कमोडिटी की कीमतों में भारी तेजी आई है। चीनी की कीमतें करीब 30 फीसदी की ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। चना, मक्का और गेहूं की कीमतों में भी 10 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। चीनी कंपनियों के शेयरों में उछाल के पीछे ब्राजील में अधिक बारिश का होना एक प्रमुख कारण रहा। अत्यधिक बारिश से वहां गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर चीनी का निर्यात करने वाले भारत में सूखे की स्थिति के कारण चीनी के आयात की नौबत दिख रही है। इससे मांग और आपूतिर् में गहरी खाई बन गई। नतीजतन चीनी की कीमतों में तेजी आ गई। चाय की भी कहानी चीनी जैसी ही है। दुनिया के दो सबसे बड़े उत्पादकों केन्या और भारत में उत्पादन गिरने से चाय कंपनियों के स्टॉक में तेजी आ गई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनूप बागची ने बताया कि कुछ खास एग्री कमोडिटी की कीमतों में तेजी और इसका स्तर इनसे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में झलकती है। इनमें से कई शेयरों के भाव तो बेहतर मुनाफे की उम्मीद में चढ़े हैं। इस दौरान 23 से अधिक एग्री कंपनियों के स्टॉक में 50 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। 20 कंपनियों में से हरेक की पूंजी में 100 करोड़ रुपए जुड़े। 43 कंपनियों ने 25-25 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई। सीएनआई रिसर्च के सीएमडी किशोर पी ओसवाल ने कहा, 'एग्री कमोडिटी की कीमतों में यह तेजी लंबे समय तक नहीं रह पाएगी। बारिश की स्थिति बनने और ऊंची कीमतों को काबू में करने के सरकारी प्रयासों के चलते एग्री कमोडिटी जल्द ही नीचे आ सकती है।' पीडब्लूसी के हेगड़े का मानना है कि लचर मानसून के कारण कमोडिटी के दामों में और बढ़ोतरी की संभावना विशुद्ध रूप से संवेदनशील मामला है और इसके पीछे कुछ खास फंडामेंटल कारण नहीं दिख रहे हैं। (ET Hindi)
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