नई दिल्ली- वित्त मंत्रालय कमोडिटी एक्सचेंजों में सूचीबद्ध खरीफ सीजन की तीन फसलों- मक्का, सोयाबीन और अरंडी की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव पर काफी दिनों से नजर रखे हुए है। मंत्रालय मक्का के वायदा कारोबार में आई हालिया उछाल के कारणों की पड़ताल के लिए विस्तृत जांच करने की तैयारी में है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न लिखे जाने की शर्त पर बताया, 'हाल के दिनों में मक्के की कीमतों में काफी उथल-पुथल का रुख देखने को मिला है। पिछले कुछ दिनों में इसकी कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की उछाल आई है। हैरत की बात यह है कि देश में मक्के का बुआई क्षेत्र बढ़कर 1.8 लाख हेक्टेयर हो गया है। दूसरी फसलों की तुलना में इस फसल पर कम बारिश का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। इसलिए हम मक्का के वायदा कारोबार में आई उछाल के कारण जानने की कोशिश कर रहे हैं।
कमोडिटी मामलों के जानकारों का कहना है कि मक्का के वायदा कारोबार में जारी अस्थिरता की पड़ताल के लिए की जा रही जांच कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि केंद्र सरकार ने कई कृषि वस्तुओं के दामों में इजाफा होने के कारण उनके वायदा कारोबार पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार कई मौकों पर चावल, अरहर, उड़द और गेहूं के वायदा कारोबार पर रोक लगा चुकी है। इसके अलावा सरकार ने जून 2008 में चना, सोया ऑयल, रबड़ और आलू के वायदा कारोबार पर भी छह महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। कमोडिटी जानकारों का कहना है कि मानसून के प्रभाव के आंकड़े आने के बाद एग्री कमोडिटीज के वायदा की मात्रा में तेजी से उछाल आने का अनुमान है। कमोडिटी ब्रोकरेज हाउस शेयरखान के जानकार मेहुल अग्रवाल ने बताया, 'मानसून के प्रभाव के कारण निश्चित रूप से पिछले कुछ दिनों में एग्री कमोडिटीज की मात्रा में 80 फीसदी तक की उछाल देखने को मिली है। पिछले दिनों महज मानसून की खबरों के आने से ही काफी सट्टेबाजी देखने को मिली है।' (ET Hindi)
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें