मुंबई August 09, 2009
एशिया का सबसे बड़ा रत्न एवं आभूषण कारोबार का मेला इंडियन इंटरनैशनल ज्वैलरी शो (आईआईजेएस) में पांच हजार रुपये प्रवेश शुल्क लिये जाने को लेकर लोगों के बीच काफी नाराजगी है।
प्रवेश शुल्क की भारी भरकंप राशि के कारण आम आभूषण प्रेमी मेले में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ग्राहकों की कमी के चलते कारोबारी निराश है। इसीलिए आयोजकों द्वारा वसूली जा रही इस रकम को कारोबारी गलत मान रहे हैं जबकि आयोजक भीड़ को काबू करने और सुरक्षा के लिहाज से इसे सही बता रहे हैं।
गोरेगांव के एनएसई मैदान में 6 अगस्त से 10 अगस्त तक चलने वाले इस मेले में प्रवेश पाने के लिए भारतीय लोगों को पांच हजार रुपये जबकि विदेशी मेहमानों को 100 अमेरिकी डॉलर बतौर प्रवेश शुल्क के रुप में देने पड़ रहे हैं। जिसके कारण इस मेले में जाने वाले लोगों की संख्या उम्मीद से काफी कम है।
ग्राहकों की कम संख्या के कारण यह स्टाल लगाने वाले कारोबारियों के बीच निराशा है। जिसके वजह से बहुत से कारोबारियों ने अपने स्टाल ही इस बार नहीं बुक कराएं है। जिनीराज इपेक्स के प्रदीप शाह कहते हैं कि इतनी ज्यादा राशी होने के कारण घरेलू ग्राहक मेले में जा ही नहीं पाते है जिससे रिटेलर्स को इसका कोई फायदा नहीं होता है तो ऐसे प्रदर्शनी में जाने का क्या फायदा है।
यहां स्टाल लगाने के लिए एक लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक पहले ही देने होते हैं। हीरा बाजार के जानकार हार्दिक हुंडिया कहते हैं कि दुनिया के किसी भी जेम्स एंड ज्वैलरी शो में प्रवेश शुल्क नहीं लगता है तो यहां क्यों लगाया जाता है यह बात समझ के परे है।
हुंडिया के अनुसार जेम्स ऐंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन कांउसिल इस मेला का आयोजन इस उद्योग को प्रमोट करने के लिए करती है लेकिन उसके इस तरह के कदम से कारोबारियों का तो भला नहीं होता है लेकिन कांउसिल को मोटा फायदा जरूर हो जाता है।
इस मेले में शामिल होने वाले कारोबारियों का कहना है कि कांउसिल इसके आयोजन में 300-400 करोड़ रुपये का खर्च दिखाती है जबकि इतने पैसों में तो खुद का कांवेशन हाल बनाया जा सकता है लेकिन कोई कारोबारी खुलकर मीडिया में यह बात नहीं बोल सकता है क्योंकि ऐसा करने पर दोबारा उसको मेले में शामिल नहीं होने दिया जाएंगा।
कारोबारियों के इस आरोप को निराधार बताते हुए जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन कांउसिल के अध्यक्ष वसंत मेहत कहते हैं कि यह मेला बिजनेस टू बिजनेस कारोबार पर आधारित है यहां कोई रिटेल कारोबार नहीं किया जाता है इसीलिए भीड़ को रोकने के लिए प्रवेश शुल्क लगाया जाता है। दूसरी बात मेले में अरबों रुपये के आभूषण रहते हैं जिसके चलते ज्यादा भीड़ होने पर सुरक्षा भी एक चुनौती बन जाती है।
आईआईजेएस-2009 शुरू से ही विवादों में घिर गया था। पहले मेले में विदेशी मेहमानों को नॉनवेज परोसे जाने को लेकर जैन कारोबारियों ने इसका खुलकर विरोध किया था जिसको बाद में वापस ले लिया गया और अब प्रवेश शुल्क को लेकर कारोबारियों और आयोजक के बीच विवाद पनपने लगा है।
आयोजकों का मानना था कि इस चार दिवसीय मेले में कम से कम 18,500 घरेलू और 1030 विदेशी लोग आएंगे लेकिन शुरूआत दो दिनों में लगभग दस हजार लोग ही आ पाएं हैं।
मेले में शामिल एक कारोबारी के अनुसार पहले दिन तो लग रहा था कि यह मेला अच्छा होने वाला है लेकिन दूसरे दिन से ही ग्राहक नदारत नजर आने लगे है अब चार दिनों में 10 हजार लोग भी आ जाए तो बड़ी बात है। इसकी मुख्य वजह प्रवेश शुल्क ही है।
देश का सबसे बड़ा हीरा बाजार पंचरत्ना के एक बड़े कारोबारी की मानी जाए तो काउंसिल के कुछ गलत कदम की वजह से इस उद्योग ने मंदी से ऊभरने का एक अच्छा मौका गवां दिया है। आज तीन हजार रुपये में हीरे की अंगूठी बेची जा रही है ऐसे में कोई पांच हजार रुपये देकर अंगूठी देखने क्यों आएंगा।
इस मेले में 704 कंपनियों के 1553 स्टालों में इस उद्योग के कारोबार और कारीगरी को प्रदर्शित किया जा रहा है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों के कारोबारियों के अलावा यूएसए, यूएई, यूके, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, फिजी, जर्मनी, इजरायल, इटली, जापान, लेबनान, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और ताईवान के कारोबारी भाग ले रहे हैं। (BS Hindi)
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