कोच्चि August 09, 2009
स्थानीय रबर बाजार में रबर की कीमतों में अचानक से तेजी देखने को मिली और आरएसएस-4 बेंचमार्क ग्रेड की कीमत 101 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई।
स्थानीय बाजार में रबर की कीमतों में तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार की तर्ज पर ही हो रही है और विश्व स्तर पर आरएसएस-3 ग्रेड की कीमतें 95.50 रुपये के स्तर को छू लिया है।
विश्व में रबर के सबसे बड़े उपभोक्ता देश चीन की ओर भारी मांग की वजह से बाजार में रबर की कीमतों में काफी तेजी आई है। पिछले आठ सप्ताहों के बाद स्थानीय बाजार में रबर की कीमतों ने एक बार फिर से 100 रुपये के स्तर को छू लिया है।
घरेल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रबर की कीमतों का अंतर कम होता जा रहा है और भारत कीमतों के मामले में इस समय प्रति किलो 5.50 रुपये आगे चल रहा है। करीब एक महीने पहले ही भारत में इसकी कीमतें प्रति किलो 17 रुपये ज्यादा थी, जिससे देश में रबर का ज्यादा आयात हुआ था।
इस साल जून के मध्य तक अप्रैल के 21,259 टन की तुलना में 51,000 टन का रबर का आयात हुआ। विश्व में प्राकृतिक रबर के उत्पादन में मौजूदा साल में 2.3 फीसदी की गिरावट के अनुमान का भी कीमतों मनोवैज्ञानिक असर हुआ।
हालांकि, उत्पादन में किसी बड़ी गिरावट की बात अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन मानसून की वजह से भारत, वियतनाम और थाइलैंड सहित रबर के उत्पादन करने वाले देशों में रबर प्रसंस्करण पर काफी प्रभावित हुआ है।
केरल में श्रमिकों की कमी से रबर के प्रसंस्करण पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इस समय रबर की मौजूदा कीमतें वित्त वर्ष 2008-09 की सालाना औसत कीमतों यानी 101.12 रुपये के लगभग बराबर है। लेकिन अगस्त 2008 में स्थानीय बाजार में इसकी कीमतें 142 रुपये के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जबकि मासिक औसत कीमत 137 रुपये रही।
इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। डीलरों के अनुसार बाजार में यह माहौल कुछ ही समय तक के लिए रहेगा क्योंकि रबर उत्पादन के मुख्य सत्र की शुरुआत होने वाली है।
इसकी शुरुआत सितंबर के मध्य से शुरू होगी और कुल सालाना उत्पादन का 45 फीसदी हिस्सा अक्टूबर और दिसंबर के बीच आत है। अगर चीन, अमेरिका, इंडिया, जापान, और कोरिया में मांग की स्थिति बेहतर नहीं बनी रही तो रबर की कीमतों में आई उछाल अगले महीने तक समाप्त हो सकती है। (BS Hindi)
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