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13 अगस्त 2009

हल्के मानसून और सट्टेबाजी से ऊपर जा रही मसालों की कीमतें

नई दिल्ली- इस साल बारिश में आई कमी का असर मसालों के कारोबार पर सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है। हल्की फसल और वायदा बाजार में जारी सट्टेबाजी की वजह से हल्दी, काली मिर्च, धनिया, जीरा, जायफल, लाल मिर्च, जावित्री जैसे मसालों की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में 50 फीसदी तक की तेजी आई है। खारी बावली सर्व व्यापार संघ के चेयरमैन विश्वकुमार मंगला के मुताबिक, 'बारिश की कमी का असर सभी जरूरी कमोडिटी की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में मसालों पर इसका असर दिखाई देना स्वाभाविक है। पिछले कुछ वक्त में मसालों की कीमतें ऊपर ही चढ़ी हैं और आने वाले वक्त में इनके नीचे आने की उम्मीद कम ही है।' दिल्ली की अगर बात करें तो यहां पूरे देश से मसाले आते हैं। इसके बाद इनकी पैकेजिंग वगैरह होकर दूसरे राज्यों को आपूर्ति हो जाती है। मोटे अनुमान के मुताबिक दिल्ली में हर महीने करीब 25,000 टन मसाले आते हैं। कारोबारियों के मुताबिक दिल्ली में हर महीने करीब 4,000 टन मसालों खपत हो जाती है।
मसालों की घरेलू बाजार में सप्लाई और निर्यात के कारोबार से जुड़ी कंपनी इंटरनेशनल ट्रेडर्स के शोभित अग्रवाल के मुताबिक, 'मसालों की कीमतों में इजाफा होने की सबसे बड़ी वजह कमोडिटी एक्सचेंजों पर इनके हो रहे वायदा कारोबार हैं। बाजार में मानसून की कमी से अनिश्चितता का ऐसा सेंटीमेंट बन गया है जिससे मसालों की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। पिछले एक साल में हल्दी की कीमत 3 गुनी बढ़ चुकी है। मसालों का निर्यात ठीक-ठाक बना हुआ है, लेकिन अगर घरेलू बाजार में कीमतों में ज्यादा तेजी आएगी तो इसके निर्यात पर फर्क पड़ेगा।' दिल्ली में हल्दी की आवक आंध्र प्रदेश से होती है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश से धनिया की भी आती है। केरल से काली मिर्च, जावित्री, जायफल आती है। साथ ही कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से लाल मिर्च आती है। पिछले कुछ वक्त में हल्दी की कीमत 45 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 92 से 95 रुपए प्रति किलो हो गई है। काली मिर्च की कीमत 120 रुपए से बढ़कर 155 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है जबकि धनिया की कीमत 65 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 90 रुपए प्रति किलो हो गई है। जावित्री और जायफल की कीमतों में भी 40 रुपए प्रति किलो की तेजी आई है। खारी बावली के भारत ट्रेडिंग कंपनी के सुमित गुप्ता के मुताबिक, 'बारिश की कमी की वजह से इरोड में हल्दी की फसल प्रभावित हुई है। हल्दी की मांग और इसके स्टॉक में करीब 1 लाख बोरी का अंतर बना हुआ है।' मसालों की मांग में तेजी अक्टूबर से शुरू होती है। शादियों और दीपावली वगैरह त्योहारों की वजह से मसालों की मांग में तेज इजाफा होता है। ऐसे में मसालों की कीमतें इस दौरान बढ़ सकती हैं। (ET Hindi)

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