नई दिल्ली : इस खरीफ सीजन में मानसून की बेरुखी के कारण देश के मूंगफली उत्पादन में 15 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। कमोडिटी जानकारों का कहना है कि इस साल मूंगफली का उत्पादन 48 लाख टन रहने का अनुमान है। मूंगफली का उत्पादन कम होने से घरेलू खपत को पूरा करने के लिए इस साल 5 लाख टन अतिरिक्त खाद्य तेल का आयात करना होगा। कमोडिटी मामलों के विशेषज्ञ जी सी पटेल ने बताया, 'मूंगफली का बुआई अब खत्म हो चुकी है और आंकड़ों के लिहाज से इसके पैदावार क्षेत्र में गिरावट आई है। इस खरीफ सीजन में इसके उत्पादन में 15 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। अगर आने वाले दो हफ्तों में मानसून की स्थिति सामान्य हो भी जाती है, तो इसका मूंगफली की पैदावार पर ज्यादा सकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।'
6 अगस्त तक के अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मूंगफली के पैदावार क्षेत्र में इस सीजन में 10 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और यह घटकर 35.72 लाख हेक्टेयर रह गया है। पटेल ने बताया कि जहां देश के बाकी हिस्सों में मानसून में हुई देरी के कारण फसल पर असर पड़ रहा है। वहीं मूंगफली के प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में ज्यादा बारिश होने के कारण दो लाख हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई है। भारत में पिछले खरीफ सीजन में 56.37 लाख टन मूंगफली का उत्पादन हुआ। मूंगफली का उत्पादन घटने के कारण नवंबर से शुरू होने वाले ऑयल सीजन 2009-10 में अतिरिक्त पांच लाख टन खाद्य तेल का आयात करना होगा। पटेल ने कहा कि पैदावार क्षेत्र घटने और उत्पादन में कमी आने का साफ मतलब है कि खाद्य तेल का अतिरिक्त आयात करना होगा। उन्होंने कहा कि इस साल खाद्य तेल का आयात बढ़कर 85 लाख टन पहुंच सकता है, जो कि पिछले साल 80 लाख टन था। जानकारों का कहना है कि भारत को अपने यहां खाद्य तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। (ET Hindi)
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